लेफ्टिनेंट भारतीय सेना में अधिकारी रैंक की शुरुआती कमीशंड पोस्ट है, जो प्रशिक्षण पूरा करने के बाद दी जाती है। यह पद केवल वर्दी और सम्मान तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें आप सैनिकों का नेतृत्व, ऑपरेशन की जिम्मेदारी और अनुशासित जीवन के साथ राष्ट्रसेवा करने योग्य बन पाते है। यदि आप भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनना चाहते हैं तो आप NDA, CDS और अन्य एंट्री स्कीम के जरिए स्पष्ट चयन प्रक्रिया के माध्यम से लेफ्टिनेंट बन सकते हैं। इस गाइड में आपको लेफ्टिनेंट बनने के लिए आवश्यक योग्यता, चयन प्रक्रिया तक के स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस की सरल भाषा में जानकारी मिलेगी, ताकि आप सही दिशा में अपने करियर की शुरुआत कर सकें।
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लेफ्टिनेंट कौन होता है?
भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट एक कमीशन्ड ऑफिसर रैंक है, जो सेना में अधिकारी स्तर का प्रारंभिक पद होता है। कमीशन्ड ऑफिसर वे अधिकारी हैं जिन्हें प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद राष्ट्रपति के द्वारा आधिकारिक रूप से कमीशन दिया जाता है और वे सेना के विभिन्न यूनिट्स में सैनिकों का नेतृत्व करते हैं।
इंडियन आर्मी में कमीशन्ड ऑफिसर रैंक संरचना में लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर आदि शामिल हैं, जिसमें लेफ्टिनेंट सबसे शुरुआती स्तर का अधिकारी होता है। इस रैंक के अधिकारी साधारणतः छोटी-छोटी यूनिट्स और प्लाटून्स की कमान संभालते हैं और अनुभवी अधिकारियों के मार्गदर्शन में रणनीतिक और ऑपरेशनल कार्य करते हैं।
लेफ्टिनेंट बनने के मुख्य रास्ते
भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के कई आधिकारिक रास्ते हैं और आपके लिए सही विकल्प का चुनाव आपकी शैक्षणिक योग्यता, रुचि और करियर योजना पर निर्भर करता है।
NDA का विकल्प: इसमें सबसे पहला विकल्प NDA है यानी अगर आप 12वीं कक्षा PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) से पास कर चुके हैं या इन विषयों के साथ 12वीं कक्षा में हैं, तो नेशनल डिफेंस अकेडमी (NDA) आपके लिए एक प्रमुख विकल्प होता है। इसकी परीक्षा यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) द्वारा वर्ष में दो बार आयोजित की जाती है। चयन के बाद प्रशिक्षण पूरा करने पर आप सेना, नौसेना या वायुसेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त हो सकते हैं।
CDS का विकल्प: यदि आप ग्रेजुएशन पूरा कर चुके हैं, तो इस स्थिति में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जामिनेशन (CDS) आपके लिए उपयुक्त मार्ग हो सकता है। इस परीक्षा का आयोजन भी UPSC द्वारा किया जाता है। इसमें लिखित परीक्षा और SSB इंटरव्यू के बाद चयनित अभ्यर्थियों को संबंधित अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाता है।
TES का विकल्प: साइंस स्ट्रीम (PCM) से 12वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES) एक तकनीकी मार्ग है। इसमें लिखित परीक्षा नहीं होती, बल्कि शैक्षणिक अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग और फिर SSB प्रक्रिया होती है। इसमें चयन के बाद आपको तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है।
TGS का विकल्प: इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए टेक्नीकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC) एक डायरेक्ट ऑफिसियल एंट्री रूट है। इसमें भी SSB और मेडिकल प्रक्रिया के बाद प्रशिक्षण अनिवार्य होता है। इसके अलावा, यदि आपने ग्रेजुएशन के साथ NCC का ‘C’ सर्टिफिकेट प्राप्त किया है, तो आप NCC स्पेशल एंट्री स्कीम के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस स्कीम में लिखित परीक्षा नहीं होती, बल्कि इसमें आपको सीधे SSB के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
लेफ्टिनेंट बनने के लिए आवश्यक स्किल्स
लेफ्टिनेंट बनने के लिए उम्मीदवार में निम्नलिखित आवश्यक स्किल्स होनी चाहिए, जो उन्हें इस पद के योग्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी –
- लीडरशिप स्किल्स
- टाइम मैनेजमेंट स्किल
- कम्युनिकेशन स्किल
- टीमवर्क स्किल
- फिजिकल फिटनेस
- मेन्टल टफनेस
लेफ्टिनेंट बनने के लिए योग्यता
लेफ्टिनेंट बनने के मुख्य रास्तों के आधार पर आवश्यक योग्यता में बदलाव होता रहता है, इसके लिए आप में निम्नलिखित आवश्यक योग्यताएं होनी चाहिए –
नेशनल डिफेंस अकेडमी (NDA) के लिए योग्यता
- इसके लिए आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा पास करनी होती है। किसी भी स्ट्रीम के छात्र NDA के लिए आवेदन कर सकते हैं लेकिन सेना के लिए PCM (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स) के साथ पास होना फायदेमंद होता है।
- इसके लिए आपका अविवाहित होना आवश्यक होता है और इस परीक्षा में बैठने के लिए आपकी आयुसीमा 16½ से 19½ वर्ष के बीच होनी चाहिए, जिसे आप परीक्षा में आवेदन करने से पहले चेक कर सकते हैं।
कॉम्बाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) के लिए योग्यता
- कॉम्बाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) के माध्यम से लेफ्टिनेंट बनने के लिए आपका मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन डिग्री प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
- इस परीक्षा में बैठने के लिए आपकी आयु सीमा सामान्यतः 19 से 24 वर्ष होनी चाहिए, हालाँकि क्रम/कोर्स के हिसाब से इसमें बदलाव संभव है। इसकी पुष्टि के लिए आप UPSC की आधिकारिक वेबसाइट को विजिट कर सकते हैं।
टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC) या SSC एंट्री
- टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC) या SSC एंट्री के माध्यम से लेफ्टिनेंट बनने के लिए आपका इंजीनियरिंग की मान्यता प्राप्त डिग्री होल्डर होना जरूरी है।
- कुछ कोर्स में लिखित परीक्षा नहीं होती है और सीधे इंटरव्यू के आधार पर अधिकारी बनने का मौका मिलता है।
NCC स्पेशल एंट्री स्कीम
- NCC स्पेशल एंट्री स्कीम के तहत आपके पास ग्रेजुएशन की डिग्री और NCC ‘C’ सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
- इसके तहत आपको ऑफिसर बनने के लिए इंटरव्यू और मेडिकल के बाद सिलेक्टेड कैडिट्स ट्रेनिंग दी जाती है।
लेफ्टिनेंट बनने के लिए स्टेप बाय स्टेप गाइड
लेफ्टिनेंट पद के लिए आपका चयन लिखित परीक्षा, SSB इंटरव्यू और मेडिकल जांच के बाद होता है। इसके लिए आधिकारिक अधिसूचनाएं समय-समय पर जारी की जाती हैं, इसलिए आवेदन से पहले आपको नोटिफिकेशन को जरूर देखना चाहिए। यहाँ आपके लिए लेफ्टिनेंट बनने के लिए स्टेप बाय स्टेप गाइड दी गई है, इस गाइड को फॉलो करके आप अपने करियर की अच्छी शुरुआत कर सकते हैं –
स्टेप 1: सही प्रवेश मार्ग चुनें
लेफ्टिनेंट बनने के कई प्रवेश मार्ग जैसे – NDA, CDS, TES और NCC स्पेशल एंट्री होते हैं। लेफ्टिनेंट बनने के लिए समय रहते सही प्रवेश मार्ग को चुनें और इसके लिए रणनीति बनाएं। NDA और CDS की परीक्षा UPSC आयोजित करता है। 12वीं के बाद NDA और ग्रेजुएशन के बाद CDS प्रमुख रास्ते से आप लेफ्टिनेंट बन सकते हैं। टेक्निकल एंट्री स्कीम 12वीं PCM और JEE मेंस के अंकों के आधार पर होती है। हर एंट्री की आयु सीमा और पात्रता अलग होती है, इसलिए आधिकारिक विज्ञापन पढ़ना जरूरी है।
स्टेप 2: शैक्षणिक योग्यता पूरी करें
NDA के लिए 12वीं में गणित और फिजिक्स आवश्यक है। CDS के लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन डिग्री चाहिए होती है। टेक्निकल एंट्री के लिए इंजीनियरिंग बैकग्राउंड जरूरी हो सकती है। न्यूनतम अंक की शर्तें नोटिफिकेशन के अनुसार तय होती हैं। इसमें आवेदन से पहले आप आयु सीमा और शैक्षणिक पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है ताकि आपका फॉर्म किन्हीं कारणों से अस्वीकार न हो।
स्टेप 3: लिखित परीक्षा की तैयारी
लेफ्टिनेंट बनने के लिए NDA और CDS परीक्षाओं में गणित, सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी से प्रश्नों को पूछा जाता है। इनकी तैयारी के लिए NCERT पुस्तकों का अध्ययन, करंट अफेयर्स की नियमित पढ़ाई और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करना उपयोगी होता है। ये परीक्षा ऑब्जेक्टिव टाइप की होती है और इसमें टाइम मैनेजमेंट महत्वपूर्ण होता है। इन परीक्षाओं के आधिकारिक सिलेबस को UPSC की वेबसाइट पर से डाउनलोड किया जा सकता है, इससे आपकी परीक्षा की तैयारियों को सही दिशा मिल सकती है।
स्टेप 4: SSB इंटरव्यू प्रक्रिया समझें
लिखित परीक्षा पास करने के बाद आपको SSB इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। यह प्रक्रिया लगभग पांच दिनों की होती है। इसमें स्क्रीनिंग टेस्ट, साइकोलॉजिकल ट्रेनिंग, ग्रुप टास्क और पर्सनल इंटरव्यू शामिल होते हैं। यहां आपकी नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और टीमवर्क पर विशेष ध्यान दिया जाता है, क्योंकि लेफ्टिनेंट बनने के लिए केवल शारीरिक ताकत पर्याप्त नहीं होती।
स्टेप 5: मेडिकल परीक्षा और फिटनेस
SSB में सफल होने के बाद विस्तृत मेडिकल जांच होती है। इस मेडिकल परीक्षा में आपकी ऊंचाई, वजन, दृष्टि और समग्र स्वास्थ्य की जांच सेना के निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती है। अस्थायी या स्थायी चिकित्सा अस्वीकृति की स्थिति में नियमों के अनुसार अपील का विकल्प उपलब्ध होता है। इसलिए लिखित परीक्षा के साथ-साथ आवेदन से पहले शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
स्टेप 6: प्रशिक्षण प्रक्रिया
परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए सैन्य अकादमी भेजा जाता है। NDA के बाद कैडेट्स आगे की ट्रेनिंग के लिए इंडियन मिलिट्री अकेडमी जाते हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए ये प्रशिक्षण ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकेडमी में होता है। इस प्रशिक्षण अवधि के दौरान आप में शारीरिक, स्ट्रेटेजिक और नेतृत्व कौशल विकसित किए जाते हैं। इस प्रशिक्षण प्रक्रिया के सफल समापन के बाद ही आपकी लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्ति होती है।
स्टेप 7: नियुक्ति और वेतन संरचना
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद अधिकारी को लेफ्टिनेंट रैंक प्रदान किया जाता है। 7वें वेतन आयोग के अनुसार यह पद पे लेवल 10 में आता है, जिसका प्रारंभिक बेसिक वेतन 56,100 रुपये है। इसके अतिरिक्त लेफ्टिनेंट रैंक पर आपकी नियुक्ति के बाद आपको मिलिट्री सर्विस पे और अन्य भत्ते पोस्टिंग के अनुसार मिलते हैं।
यह भी पढ़ें – भारत में पुलिस कैसे बनें: स्टेप बाय स्टेप गाइड
लेफ्टिनेंट को मिलने वाला वेतन
भारत में लेफ्टिनेंट की सैलरी 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के संशोधित वेतन मैट्रिक्स और रक्षा मंत्रालय (MoD) के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित एक विस्तृत विवरण है। यहाँ लेफ्टिनेंट को मिलने वाले वेतन की जानकारी नीचे दी गई टेबल में दी गई है-
| वेतन घटक | अनुमानित मासिक वेतन (INR) | विवरण |
| बेसिक पे | INR 56,100 – INR 1,77,500 | लेफ्टिनेंट का मूल वेतन, पेरोल मैट्रिक्स में पे लेवल 10 के अनुसार। |
| मिलिट्री सर्विस पे (MSP) | INR 15,500 (स्थिर) | सैनिकों को कठिन सेवा और जिम्मेदारियों के लिए दिया जाने वाला स्थिर भत्ता। |
| डियरनेस अलाउंस (DA) | बदलता रहता है | महंगाई के असर के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा दर्शाया जाता है; बेसिक का पर्सेंटेज होता है। |
| हाउस रेंट अलाउंस (HRA) | INR 8,400 – INR 27,000 | यदि सरकारी आवास नहीं मिलता है तो अलग-अलग शहर/क्षेत्र के हिसाब से मिलता है। |
| ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) | INR 3,600 – INR 7,200 | ड्यूटी/डिफ़ॉल्ट ट्रैवल खर्च के लिए। |
| फील्ड एरिया अलाउंस | INR 10,500 – INR 25,000 | कठिन/दूरदराज़ क्षेत्रों में सेवाएँ देने पर विशेष भत्ता। |
| हाई एल्टीट्यूड अलाउंस | INR 1,600 – INR 16,900 | ऊँचाई वाले इलाकों में तैनाती पर अतिरिक्त भत्ता। |
| यूनिफ़ॉर्म/किट अलाउंस | INR 20,000 (वार्षिक) | वर्दी और उपकरणों के रख-रखाव के लिए वार्षिक भत्ता। |
| मोटा अनुमानित ग्रॉस सैलरी | INR 75,000 – INR 1,10,000 या उससे अधिक | बेसिक, MSP, DA, HRA और अन्य भत्ते का सम्मिलित वेतन (स्थान और पोस्टिंग के अनुसार अलग होता है।) |
| अनुमानित इन-हैंड सैलरी | INR 70,000 – INR 85,000 या उससे अधिक | टैक्स और कटौतियों के बाद लगभग हाथ में मिलने वाली अनुमानित सैलरी। |
लेफ्टिनेंट बनने के बाद करियर ग्रोथ एंड प्रोमोशन
लेफ्टिनेंट बनने के बाद आपके पास करियर ग्रोथ एंड प्रोमोशन के ऑप्शन भी रहते हैं। इसके लिए आप भारतीय सेना में नीचे दिए पदों पर प्रोमोशन पाकर एक अच्छी और सम्मानजनक करियर ग्रोथ पा सकते हैं।
| रैंक | न्यूनतम सेवा अवधि (अनुमानित) | प्रमोशन का आधार | मुख्य जिम्मेदारियाँ | वेतन स्तर (7वां वेतन आयोग) |
| लेफ्टिनेंट | नियुक्ति के बाद प्रारंभिक रैंक | प्रशिक्षण पूर्ण होने पर कमीशन | प्लाटून कमांडर (30-35 जवान) | लेवल 10 |
| कैप्टन | लगभग 2 वर्ष सेवा | समय-आधारित और संतोषजनक सेवा रिकॉर्ड | कंपनी 2IC / प्रशासनिक कार्य | लेवल 10B |
| मेजर | लगभग 6 वर्ष कुल सेवा | चयन आधारित (सेलेक्शन बोर्ड) | कंपनी कमांडर (120-150 जवान) | लेवल 11 |
| लेफ्टिनेंट कर्नल | लगभग 13 वर्ष सेवा | टाइम-स्केल या चयन | बटालियन 2IC / विशेष नियुक्तियां | लेवल 12A |
| कर्नल | लगभग 15–18 वर्ष | चयन आधारित | रेजिमेंट कमांडर (800+ जवान) | लेवल 13 |
| ब्रिगेडियर | लगभग 25-28 वर्ष | चयन आधारित | ब्रिगेड कमांडर (3 बटालियन) | लेवल 13A |
| मेजर जनरल | चयन आधारित | मेरिट आधारित | डिवीजन कमांडर (3 ब्रिगेड) | लेवल 14 |
| लेफ्टिनेंट जनरल | चयन आधारित | वरिष्ठता और चयन | कोर कमांडर / आर्मी कमांडर | लेवल 15/16 |
| जनरल | सर्वोच्च पद | नियुक्ति आधारित | थल सेनाध्यक्ष (COAS) | लेवल 18 |
FAQs
12वीं पास छात्र राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की प्रवेश परीक्षा देकर सेना में अधिकारी बनने की शुरुआत कर सकते हैं। चयन के बाद तीन वर्ष का प्रशिक्षण और फिर सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण पूरा करने पर लेफ्टिनेंट पद मिलता है।
लेफ्टिनेंट बनने के लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है। 12वीं के बाद एनडीए के माध्यम से भी सेना में अधिकारी बना जा सकता है, जबकि ग्रेजुएशन के बाद सीडीएस या अन्य सैन्य प्रवेश प्रक्रियाओं से चयन होता है।
हाँ, महिलाएं भी सेना में अधिकारी बन सकती हैं। वे संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा, तकनीकी प्रवेश या अन्य विशेष स्कीम से चयन पा सकती हैं। महिलाओं की चयन प्रक्रिया भी पुरुषों की तरह ही लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और ट्रेनिंग पर आधारित होती है।
12वीं के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी मार्ग से लगभग चार से पाँच वर्ष लगते हैं। जबकि ग्रेजुएशन के बाद कंबाइंड डिफेंस सर्विस मार्ग से चयन होने पर लगभग डेढ़ से दो वर्ष का प्रशिक्षण पूरा करना होता है।
नहीं, बिना चयन प्रक्रिया के अधिकारी नहीं बना जा सकता। हर कैंडिडेट्स को लिखित परीक्षा या निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसके बाद इंटरव्यू, मेडिकल टेस्ट और ट्रेनिंग करना अनिवार्य होता है।
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