डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी (DPT) एक दो साल का प्रोफेशनल पैरामेडिकल कोर्स है जो शारीरिक चिकित्सा और रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करता है। इस कोर्स में फिजियोलॉजी, एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री और रिहैबिलिटेशन साइंस जैसे विषय शामिल होते हैं। इससे आपको मरीजों की शारीरिक समस्याओं का निदान और उपचार करने का प्रशिक्षण मिलता है।
DPT प्रोग्राम में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस और रियल-वर्ल्ड केस स्टडीज पर फोकस किया जाता है, जिससे आप तकनीकी, कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स विकसित कर सकते हैं। इसके बाद आप हॉस्पिटल, मिलिट्री हेल्थ डिपार्टमेंट या स्पोर्ट्स और ऑक्यूपेशनल फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में प्रोफेशनल रूप से कार्य कर सकते हैं। इस लेख में आपके लिए डीपीटी कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी दी गई है।
| विवरण | जानकारी |
| कोर्स का नाम | डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी (DPT) |
| कोर्स लेवल | डिप्लोमा |
| कोर्स की अवधि | 2 वर्ष |
| एग्जामिनेशन | सेमेस्टर सिस्टम |
| योग्यता | 12वीं कक्षा (साइंस स्ट्रीम) |
| एडमिशन | मेरिट बेस्ड |
| आयु सीमा | कोई बाध्यता नहीं |
| प्रमुख जॉब प्रोफाइल | फिजियोथेरेपी असिस्टेंट, रिहैबिलिटेशन स्पेशलिस्ट, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी कंसल्टेंट, होम केयर फिजियोथेरेपिस्ट, वेलनेस और फिटनेस ट्रेनर आदि। |
| रोजगार के क्षेत्र | सरकारी और प्राइवेट अस्पताल, फिजियोथेरेपी क्लीनिक्स, रिहैबिलिटेशन सेंटर, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर, जिम, प्राइवेट प्रैक्टिस, NGOs आदि। |
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DPT कोर्स क्यों करें?
नीचे दिए गए बिंदुओं में डीपीटी कोर्स करने के प्रमुख कारण बताए गए हैं:
- बढ़ती डिमांड और इंडस्ट्री ग्रोथ: भारत में हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और फिजियोथेरेपिस्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर बढ़ती उम्र की आबादी और हेल्थ अवेयरनेस के कारण। फिजियोथेरेपिस्ट मरीजों को चोट, बीमारी और विकलांगता से उबरने में मदद करते हैं, जिससे उन्हें चलने-फिरने और सामान्य जीवन जीने की आजादी मिलती है।
- विविध करियर अवसर: DPT ग्रेजुएट हॉस्पिटल, रिहैबिलिटेशन सेंटर, स्पोर्ट्स क्लिनिक, नर्सिंग होम, स्कूल या अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।
- अच्छी सैलरी और जॉब स्टेबिलिटी: फिजियोथेरेपी में अच्छी सैलरी मिलती है और हेल्थकेयर सेक्टर में स्थिर नौकरी के अवसर उपलब्ध रहते हैं।
- प्रैक्टिकल और क्लिनिकल एक्सपीरियंस: कोर्स के दौरान आपको क्लिनिकल ट्रेनिंग और मरीजों के साथ काम करने का एक्सपीरियंस मिलता है, जिससे वे प्रोफेशनली ट्रेन होते हैं।
- स्किल डेवलपमेंट: यह कोर्स साइंटिफिक नॉलेज, टेक्निकल स्किल्स, प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटी और कम्युनिकेशन स्किल्स डेवलप करता है, जो एक सफल फिजियोथेरेपिस्ट के लिए जरूरी हैं।
- करियर ग्रोथ और स्पेशलाइजेशन: डीपीटी कोर्स के बाद आगे चलकर स्पोर्ट्स मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, जेरियाट्रिक्स जैसे क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन की जा सकती है या स्वयं का क्लिनिक शुरू किया जा सकता है।
- निरंतर सीखने के अवसर: फिजियोथेरेपी एक विकसित होता हुआ क्षेत्र है जिसमें नई टेक्नोलॉजी और रिसर्च के साथ लगातार सीखने के अवसर मिलते हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम करने की संभावना रहती है।
DPT कोर्स स्ट्रक्चर और मोड
डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी (DPT) एक 2 वर्ष का प्रोफेशनल पैरामेडिकल कोर्स है जो फुल टाइम मोड में पढ़ाया जाता है। इसमें आप थ्योरी क्लासेस, लैब सेशन्स और प्रैक्टिकल व क्लिनिकल ट्रेनिंग दोनों सीखते हैं। ताकि आप मरीजों का मूल्यांकन, ट्रीटमेंट प्लान, एक्सरसाइज, इलेक्ट्रोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन तकनीकों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू कर सकें।
इस कोर्स के मुख्य विषयों में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोमैकेनिक्स, एक्सरसाइज थेरेपी, इलेक्ट्रोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन साइंस शामिल होते हैं। साथ ही कम्युनिकेशन और प्रोफेशनल बिहेवियर पर भी ध्यान दिया जाता है। यह स्ट्रक्चर आपको थियोरेटिकल नॉलेज के साथ साथ हैंड्स-ऑन स्किल भी डेवलप करने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वे विभिन्न हेल्थकेयर सेटिंग्स में काम कर सकें।
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DPT कोर्स के लिए योग्यता
डीपीटी कोर्स में एडमिशन के लिए पात्रता मानदंड कॉलेज और संस्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकते हैं। इसलिए अप्लाई करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक प्रवेश शर्तें जरूर देखनी चाहिए। सामान्य तौर पर पात्रता इस प्रकार होती है:
- शैक्षणिक योग्यता: आपने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 (या समकक्ष) परीक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) के अनिवार्य विषयों के साथ उत्तीर्ण की हो। कुछ संस्थानों में मैथेमेटिक्स भी स्वीकार्य होता है।
- न्यूनतम अंक: अधिकतर संस्थानों में एडमिशन के लिए न्यूनतम 50% अंक आवश्यक होते हैं; हालांकि कुछ संस्थानों में यह अधिक हो सकता है या आरक्षित वर्ग को न्यूनतम अंकों में छूट मिल सकती है।
- आयु सीमा: सामान्यतः इस कोर्स के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती, लेकिन कुछ संस्थानों में अधिकतम आयु की शर्त लागू हो सकती है।
- प्रवेश प्रक्रिया: कुछ संस्थान एंट्रेंस परीक्षा तथा चयन के लिए ग्रुप डिस्कशन या इंटरव्यू भी आयोजित कर सकते हैं।
DPT कोर्स का एप्लीकेशन प्रोसेस
डीपीटी कोर्स की पात्रता पूरी करने के बाद प्रवेश प्रक्रिया कुछ तय चरणों में होती है। अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। हालांकि सामान्यतः प्रक्रिया इस प्रकार रहती है:
- DPT कोर्स में अप्लाई करने के लिए सबसे पहले अपने चुने हुए कॉलेज या संस्थान की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।
- कॉलेज की ऑफिशियल वेबसाइट में रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक यूजर नेम और पासवर्ड प्राप्त होगा।
- फिर वेबसाइट में साइन इन करने के बाद ‘Diploma in Physiotherapy’ का चयन करें।
- अब शैक्षिक योग्यता, कैटेगिरी और पर्सनल डिटेल्स आदि के साथ एप्लीकेशन फॉर्म भरें।
- इसके बाद एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करें और निर्धारित एप्लीकेशन फीस की पेमेंट करें।
- यदि एडमिशन, एंट्रेंस एग्जाम पर आधारित है तो पहले एंट्रेंस एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन करें और फिर रिजल्ट के बाद काउंसलिंग की प्रतीक्षा करें। एंट्रेंस एग्जाम के मार्क्स के आधार पर आपका सिलेक्शन किया जाएगा और फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी।
- अपनी सीट कंफर्म करने के लिए तय डेडलाइन के भीतर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराएं और निर्धारित एडमिशन फीस सबमिट करने के बाद एडमिशन कंफर्म करें। एडमिशन प्रोसेस पूरा होने के बाद, DPT कोर्स कॉलेज के अकादमिक कैलेंडर के अनुसार शुरू होता है।
DPT कोर्स में एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज
यहां उन प्रमुख दस्तावेजों की सूची दी गई है, जो एडमिशन के समय आमतौर पर वेरिफिकेशन के लिए कॉलेज/संस्थान द्वारा मांगे जाते हैं। अलग-अलग संस्थानों के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है:
- 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा पासिंग सर्टिफिकेट
- फोटो आईडी प्रूफ (जैसे आधार कार्ड/पैन कार्ड)
- पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ्स
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
- निवास/डोमिसाइल प्रमाण पत्र (जहाँ आवश्यक हो)
- अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र (यदि कोई अतिरिक्त योग्यता हो)
भारत में DPT कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान और अनुमानित फीस
भारत में मान्यता प्राप्त सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में डीपीटी कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस संस्थान के प्रकार, राज्य, सीट श्रेणी और प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्यतः सरकारी कॉलेजों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में यह अधिक रहती है। नीचे दी गई तालिका में कुछ प्रमुख कॉलेजों के आधार पर डीपीटी कोर्स की अनुमानित फीस केवल एक सामान्य जानकारी के रूप में दी गई है:
| कॉलेज और संस्थान | अनुमानित कुल ट्यूशन फीस (INR) |
| अखिल भारतीय व्यावसायिक और पैरामेडिकल विज्ञान परिषद | 48,000 (कुल फीस) |
| वीएन विद्यापीठ | 30,000 (कुल फीस) |
| एफएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद | 25,000 (वार्षिक वर्ष) |
| पूर्वांचल इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, गोरखपुर | 45,000 (वार्षिक वर्ष) |
| संस्कृति विश्वविद्यालय | 50,000 (वार्षिक वर्ष) |
| राजश्री इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज, बरेली | 60,000 (कुल फीस) |
| तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU), मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश | 15,000 – 70,000 (वार्षिक फीस रेंज) |
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DPT कोर्स का सिलेबस
भारत के अलग-अलग संस्थानों और कॉलेजों में डीपीटी कोर्स का सिलेबस कुछ हद तक भिन्न हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक संस्थान अपना करिकुलम और पेपर स्ट्रक्चर स्वयं निर्धारित करता है। इसलिए आपको एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज/संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम सिलेबस जरूर चेक कर लेना चाहिए।
नीचे दिया गया सिलेबस वीएन विद्यापीठ की आधिकारिक वेबसाइट के आधार पर एक सामान्य रेफरेंस के रूप में दिया गया है, ताकि आपको पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषयों का स्पष्ट अंदाजा हो सके:
| प्रथम वर्ष | |
| एनाटॉमी | न्यूरो एनाटॉमी |
| ह्यूमन फिजियोलॉजी | एक्सरसाइज थेरेपी एंड मसाज |
| साइकोलॉजी | इलेक्ट्रो थेरेपी एंड एक्शन थेरेपी |
| प्रैक्टिकल एंड वाइवा | |
| द्वितीय वर्ष | |
| मेडिसिन | सर्जरी |
| फिजिकल थेरेपी इन मेडिकल कंडीशंस | फिजिकल थेरेपी इन सर्जिकल कंडीशंस |
| बायो-मैकेनिक्स एंड काइनेसियोलॉजी | डिसएबिलिटी प्रिवेंशन एंड प्रीहैबिलिटेशन |
| प्रैक्टिकल एंड वाइवा | |
DPT कोर्स करने के बाद रोजगार के क्षेत्र
आप डीपीटी कोर्स पूरा करने के बाद इन प्रमुख क्षेत्रों में अपना सुनहरा भविष्य बना सकते हैं:
- अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान
- रिहैबिलिटेशन सेंटर
- खेल और फिटनेस क्षेत्र
- हेल्थ इंस्टीट्यूशन
- ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट
- क्लीनिक और प्राइवेट प्रैक्टिस
- सीनियर सिटिजन होम
- डिफेंस मेडिकल ऑर्गनाइज़ेशन
- कॉलेज और यूनिवर्सिटी
- फार्मा इंडस्ट्री
DPT करने के बाद जॉब प्रोफाइल और सैलरी
डीपीटी कोर्स के बाद सैलरी आपके एक्सपीरियंस, जॉब सेक्टर, कंपनी और शहर के अनुसार भिन्न हो सकती है। यहां कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल के साथ सैलरी रेंज AmbitionBox पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार नीचे दी गई है:
| जॉब प्रोफाइल | अनुमानित वार्षिक सैलरी (INR) |
| फिजियोथेरेपिस्ट | 3.1 – 3.4 |
| सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट | 4.7 – 5.3 |
| फिजियोथेरेपी असिस्टेंट | 2.1 – 2.3 |
| रिहैबिलिटेशन स्पेशलिस्ट | 3.8 – 4.2 |
| स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट | 4.7 – 5.2 |
| सेल्फ प्रैक्टिस फिजियोथेरेपिस्ट | 4.1 – 5.7 |
| कम्युनिटी हेल्थ वर्कर | 1.9 – 2.1 |
| क्लिनिक एडमिनिस्ट्रेटर | 7.5 – 8.3 |
DPT करने के बाद हायर स्टडी के विकल्प
आप डीपीटी कोर्स करने के बाद अपनी रूचि और करियर फील्ड के अनुसार इन विकल्पों को चुन सकते हैं:
| कोर्स | जानकारी |
| बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) | यह फिजियोथेरेपी में स्नातक (UG) डिग्री है जिसे भारत में लाइसेंस प्राप्त फिजियोथेरेपिस्ट बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। |
| मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) | BPT के बाद यह 2-वर्ष का PG डिग्री प्रोग्राम होता है जो आपको फिजियोथेरेपी में स्पेशलाइजेशन हासिल करने में मदद करता है। |
| पीएचडी इन फिजियोथेरेपी | MPT के बाद आप पीएचडी इन फिजियोथेरेपी जैसे डॉ. स्तर के प्रोग्राम कर सकते हैं। यह रिसर्च और अकादमिक करियर के लिए सबसे बेहतर ऑप्शन है। |
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FAQs
भारत में डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी (DPT) कोर्स की अवधि सामान्यतः 2 वर्ष होती है।
DPT भारत में फिजियोथेरेपी में डिप्लोमा स्तर की पैरामेडिकल प्रोफेशनल डिग्री है, जो शारीरिक पुनर्वास और थेरपी प्रशिक्षण प्रदान करती है।
डीपीटी होल्डर मेडिकल डॉक्टर नहीं होता, वह केवल पैरामेडिकल फिजियोथेरेपी प्रोफेशनल होता है।
भारत में 12वीं (साइंस स्ट्रीम: फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) के बाद आप DPT कोर्स में सीधे एडमिशन ले सकते हैं।
आप DPT कोर्स के बाद 3 वर्षीय बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) प्रोग्राम में एडमिशन ले सकते हैं।
आशा है कि इस लेख में आपको डीपीटी कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। इसी तरह अन्य कोर्स गाइड्स Leverage Edu पर उपलब्ध हैं।

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