भारत में डीजीपी कैसे बनें? 

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डीजीपी की फुल फॉर्म ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस’ होती है। पुलिस विभाग में डीजीपी का पद सबसे प्रतिष्ठित और ऊंचा होता है। क्या आप जानते हैं कि पूरे राज्य की पुलिस व्यवस्था की कमान DGP के हाथों में होती है। वह किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पुलिस विभाग का प्रमुख होता है। 

डीजीपी पुलिस विभाग को नेतृत्व, रणनीतिक दिशा और समग्र प्रबंधन प्रदान करता है। यह पद कानून व्यवस्था बनाए रखने, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा न्याय और सुरक्षा के सिद्धांतों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पद शक्तियों के साथ-साथ जिम्मेदारियों से भरा होता है।

यदि आप डीजीपी बनने की प्रक्रिया के बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख में सरल भाषा में समझाया गया है।

डीजीपी की प्रमुख जिम्मेदारियां 

पुलिस विभाग में ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस’ (DGP) की प्रमुख भूमिकाएं और जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं:

  • राज्य की पूरी पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व: डीजीपी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की पूरी पुलिस फोर्स का सर्वोच्च अधिकारी होता है। वह सभी जोन, रेंज, जिलों और पुलिस इकाइयों के कामकाज का नेतृत्व और नियंत्रण करता है।
  • राज्य सरकार को सुरक्षा और पुलिस नीति पर सलाह देना: डीजीपी राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और राज्य सरकार को अपराध की प्रवृत्तियों, सुरक्षा खतरों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी नीतियों पर पेशेवर सलाह देता है।
  • राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का समन्वय: दंगे, बड़े विरोध प्रदर्शन, चुनाव, आपदा या आतंकवादी खतरे जैसी परिस्थितियों में डीजीपी पूरे राज्य की पुलिस कार्रवाई और संसाधनों का समन्वय करता है।
  • राज्य स्तरीय अपराधों की निगरानी: किसी राज्य में हत्या, आतंकवाद, संगठित अपराध या आर्थिक अपराध जैसे बड़े मामलों की जांच की निगरानी डीजीपी करता है। वह आवश्यक होने पर विशेष जांच इकाइयों को भी निर्देश देता है।
  • पुलिस बल के संसाधनों और तैनाती का प्रबंधन: डीजीपी राज्यभर में पुलिस कर्मियों, बजट, उपकरण और विशेष इकाइयों (जैसे साइबर क्राइम, स्पेशल टास्क फोर्स) की तैनाती और उपयोग का निर्णय करता है। 
  • अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय: राष्ट्रीय और राज्य एजेंसियों जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), CBI या अन्य सुरक्षा संगठनों के साथ समन्वय कर बड़े सुरक्षा खतरों और अपराध नेटवर्क से निपटना डीजीपी की जिम्मेदारी होती है।
  • पुलिस प्रशिक्षण, अनुशासन और पेशेवर मानकों की निगरानी: डीजीपी पुलिस बल में प्रशिक्षण, अनुशासन, पेशेवर आचरण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को सुनिश्चित करता है ताकि पुलिस की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहे।
  • जनसंपर्क और संचार: डीजीपी सार्वजनिक कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया संवाद में पुलिस प्रशासन का प्रतिनिधित्व करता है। वह पुलिस की पहल, उपलब्धियों और चुनौतियों के बारे में जनता के साथ पारदर्शी ढंग से जानकारी साझा करता है।

डीजीपी बनने के लिए योग्यता 

भारत में डीजीपी बनने के लिए ‘संघ लोक सेवा आयोग’ (UPSC) द्वारा निर्धारित कुछ अनिवार्य योग्यताओं का होना आवश्यक है। तभी आप इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंच सकते हैं:

  • राष्ट्रीयता: भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: सामान्य वर्ग के लिए आयु सीमा 21-30 वर्ष है, जबकि OBC और SC/ST वर्ग को क्रमशः 3 और 5 वर्ष की छूट दी जाती है।
  • शारीरिक योग्यता: डीजीपी बनने के लिए केवल UPSC परीक्षा पास करना ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी इस जिम्मेदारी के लिए फिट होना जरूरी होता है।

डीजीपी कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

भारत में ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस’ (DGP) बनने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया होती है, जिसे सफलतापूर्वक पूरा करने पर यह पद प्राप्त किया जा सकता है। ध्यान रखें कि यदि आप कम उम्र में ही IPS अधिकारी बन जाते हैं तो रिटायरमेंट तक डीजीपी बन सकते हैं। क्योंकि इस पद पहुंचने के लिए लंबे कार्य अनुभव की आवश्यकता होती है। हालांकि आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। नीचे डीजीपी बनने की प्रक्रिया के कुछ प्रमुख स्टेप्स दिए गए हैं:-

स्टेप 1: ग्रेजुएशन पूरी करें 

सबसे पहले आपको मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से किसी भी स्ट्रीम में न्यूनतम 55% अंकों के साथ 12वीं पास करनी होगी। इसके बाद आप किसी भी विषय में अपनी ग्रेजुएशन पूरी करें। क्योंकि UPSC परीक्षा में आवेदन करने के लिए यह अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता है। 

स्टेप 2: UPSC परीक्षा उच्च रैंक से पास करें 

‘संघ लोक सेवा आयोग’ (UPSC) द्वारा ही सिविल सेवा परीक्षा आयोजित की जाती है। सबसे पहले IPS अधिकारी बनने के लिए आपको UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है। यह परीक्षा तीन चरणों में होती हैं प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू:

  • प्रीलिम्स परीक्षा: यह सिविल सेवा की पहली चरण की परीक्षा होती है। इसमें दो ऑब्जेक्टिव (MCQ) पेपर होते हैं, जिनमें प्रत्येक 200 अंकों का होता है। यह चरण केवल क्वालिफाइंग नेचर का होता है और इसमें कटऑफ अंक प्राप्त करने के बाद ही आप मेंस परीक्षा के लिए योग्य माने जाते हैं। प्रत्येक पेपर की समय सीमा दो घंटे होती है।
  • मेंस परीक्षा: यह सिविल सेवा की दूसरी और मुख्य लिखित परीक्षा होती है। यह डिस्क्रिप्टिव होती है और इसमें कुल 9 प्रश्नपत्र शामिल होते हैं, जिनमें से 2 क्वालिफाइंग और 7 मेरिट के लिए गिने जाते हैं। मेंस परीक्षा के अंक अंतिम चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तय कटऑफ हासिल करने वाले आपको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।
  • इंटरव्यू और पर्सनैलिटी टेस्ट: मेंस परीक्षा के बाद आपको लगभग 45 मिनट के पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इस चरण में आपके व्यक्तित्व, निर्णय-क्षमता, नेतृत्व गुण और प्रशासनिक समझ का मूल्यांकन किया जाता है। इंटरव्यू के अंक भी अंतिम मेरिट में जोड़े जाते हैं।

स्टेप 3: रैंक और सेवा आवंटन

UPSC द्वारा घोषित अंतिम मेरिट सूची के आधार पर आपको सेवा आवंटित की जाती है। इसमें आपकी ऑल इंडिया रैंक, दी गई सेवा-वरीयता और उस वर्ष उपलब्ध रिक्तियाँ निर्णायक होती हैं। IPS सेवा इसी प्रक्रिया के तहत मिलती है; इसके लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती। सेवा आवंटन ‘कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग’ (DoPT) की नीति के अनुसार किया जाता है।

स्टेप 4: IPS अधिकारी की ट्रेनिंग पूरी करें 

UPSC परीक्षा पास करने और IPS सेवा के लिए चयन होने के बाद आपको सबसे पहले मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी’ (LBSNAA) भेजा जाता है। जहां आप अन्य सेवाओं के अधिकारियों के साथ फाउंडेशन कोर्स पूरा करता है। इसके बाद IPS प्रशिक्षुओं को हैदराबाद स्थित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी’ (SVPNPA) में विशेष पुलिस प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। इस प्रशिक्षण की अवधि समय-समय पर UPSC और गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार बदल सकती है।


यह ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आपको रैंक और सेवा-वरीयता के आधार पर राज्य कैडर आवंटित किया जाता है। इसके बाद आप अपने आवंटित कैडर में पहली फील्ड पोस्टिंग के साथ एक IPS अधिकारी के रूप में सेवा शुरू करते हैं।

स्टेप 5: पदोन्नति के माध्यम से डीजीपी पद तक पहुंचे 

‘डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस’ (DGP) का चयन और नियुक्ति राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की नीतियों और अधिकार क्षेत्र के अनुसार की जाती है। सामान्यतः इस पद के लिए ऐसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चुना जाता है, जिनके पास पुलिस सेवा में लगभग 30 वर्ष का अनुभव होता है और जो ‘एडिशनल डायरेक्टर जनरल’ (ADG) या ‘स्पेशल डायरेक्टर जनरल’ (SDG) जैसे उच्च पदों पर कार्य कर चुके होते हैं।


वहीं अधिकांश राज्यों में DGP की नियुक्ति भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर के अधिकारियों में से की जाती है। जिन वरिष्ठ IPS अधिकारियों ने अपने पूरे करियर में उत्कृष्ट कार्य-कुशलता, अनुभव और अच्छा प्रदर्शन दिखाया होता है, उन्हें इस पद के लिए चुना जाता है।

स्टेप 6: डीजीपी पद पर नियुक्ति 

डीजीपी की नियुक्ति आमतौर पर राज्य सरकार द्वारा की जाती है। इसके लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक चयन समिति बनाई जाती है, जिसमें गृह सचिव, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। यह समिति IPS कैडर के योग्य अधिकारियों की सूची की समीक्षा करती है और उनके कार्य प्रदर्शन, वरिष्ठता तथा विभिन्न पुलिस पदों पर अनुभव को ध्यान में रखती है।

इन सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद समिति राज्य सरकार को अपनी सिफारिश भेजती है। अंत में राज्य सरकार चयनित अधिकारी को DGP पद पर नियुक्त करने के लिए आधिकारिक आदेश जारी करती है।

डीजीपी की सैलरी और सुविधाएं

डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) को किसी भी दूसरे पुलिस अधिकारी की तुलना में अधिक सैलरी मिलती है। क्योंकि डीजीपी का पद भारतीय पुलिस सेवा में सबसे सर्वोच्च होता है। वर्तमान में डीजीपी को 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिलता है। इसे एपेक्स स्केल कहा जाता है। इसमें बेसिक सैलरी लगभग INR 2,25,000 प्रति माह होती है।

इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता (DA), ट्रेवल अलाउंस (TA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या सरकारी आवास, ड्राइवर की सुविधा, मेडिकल इंश्योरेंस, फ्री बिजली व फ्री टेलीफोन तथा इंटरनेट की सुविधा जैसी अन्य सुविधाएं मिलती हैं। इस प्रकार सभी भत्तों को मिलाकर एक डीजीपी की कुल मासिक सैलरी लगभग INR 3.5 लाख से INR 4 लाख के बीच होती है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद यह मासिक सैलरी INR 5 से 5.5 लाख के बीच पहुंच सकती है। 

FAQs 

डीजीपी बनने के लिए क्या पढ़ाई करनी पड़ती है?

डीजीपी बनने के लिए सबसे पहले किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करना होता है। उसके बाद UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होना पड़ता है, जहां आपको वरिष्ठता और पदोन्नति के आधार पर आगे चलकर DGP बनाया जाता है।

डीजीपी पद के लिए कौन पात्र है?

भारतीय पुलिस सेवा के वे वरिष्ठ अधिकारी जिन्होंने आमतौर पर लगभग 30 वर्ष की सेवा पूरी की हो। इसके ‘अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक’ (ADG) या समकक्ष उच्च पद पर कार्य किया हो, डीजीपी पद के लिए पात्र माने जाते हैं।

DGP या IAS कौन अधिक शक्तिशाली है?

भारतीय प्रशासनिक ढांचे में ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा’ (IAS) के अधिकारी सामान्यतः अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं, क्योंकि वे जिला और राज्य प्रशासन के सर्वोच्च पदों पर कार्य करते हैं। उनके अधीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी, जिनमें DGP भी शामिल हैं, कानून-व्यवस्था से संबंधित कार्यों का संचालन करते हैं।

डीजीपी बनने में कितने साल लगते हैं?

आमतौर पर डीजीपी बनने में लगभग 30-35 वर्ष की कार्य सेवा लगती है, क्योंकि अधिकारी को पहले भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होकर क्रमशः विभिन्न पदों पर पदोन्नति प्राप्त करनी होती है।

डीजीपी बनने में कितने साल लगते हैं?

सामान्यतः किसी राज्य में एक ही ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस’ (DGP) राज्य पुलिस का प्रमुख होता है। हालांकि विभिन्न विशेष इकाइयों के लिए कुछ अन्य अधिकारियों को भी डीजीपी रैंक दिया जा सकता है।

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