अगर आप कानून के क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे हैं, तो कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) एक अहम प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। यह एक राष्ट्रीय स्तर की एंट्रेंस परीक्षा है, जिसके ज़रिए भारत की प्रमुख नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) में दाखिला मिलता है। CLAT का आयोजन नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम द्वारा किया जाता है और इसके माध्यम से छात्र 5-वर्षीय इंटीग्रेटेड LLB (UG) और LLM (PG) जैसे लॉ कोर्सेज़ में प्रवेश लेते हैं।
यह परीक्षा उम्मीदवारों की पढ़ने-समझने की क्षमता, तार्किक सोच, सामान्य ज्ञान और कानूनी समझ को परखती है, जो लॉ की पढ़ाई के लिए ज़रूरी मानी जाती हैं। इसी वजह से CLAT को भारत की टॉप लॉ यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई करने का मुख्य रास्ता माना जाता है।
इस लेख में CLAT परीक्षा से जुड़ी तैयारी, कोर्स, फीस और आगे मिलने वाले करियर विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है। यहां आपको CLAT से जुड़े ज़रूरी पहलुओं को एक जगह, आसान भाषा में समझने का मौका मिलेगा।
This Blog Includes:
- CLAT क्या है और क्यों ज़रूरी है?
- CLAT देने के फायदे
- CLAT परीक्षा के लिए योग्यताएं
- CLAT परीक्षा का पैटर्न (UG & PG)
- CLAT परीक्षा का सिलेबस
- CLAT vs AILET vs SLAT: क्या अंतर है?
- CLAT के ज़रिए मिलने वाले NLU कोर्सेज
- CLAT परीक्षा की फीस
- CLAT काउंसलिंग प्रक्रिया
- CLAT के बाद करियर और प्लेसमेंट
- CLAT की तैयारी के लिए टिप्स
- CLAT की तैयारी के लिए किताबें (UG + PG)
- FAQs
CLAT क्या है और क्यों ज़रूरी है?
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) एक नेशनल लेवल की प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम द्वारा किया जाता है। यह परीक्षा भारत की 25 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) में अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) लॉ कोर्सेज़ में दाखिले के लिए आयोजित की जाती है।
CLAT का उद्देश्य यह परखना होता है कि उम्मीदवारों में कानून की पढ़ाई के लिए जरूरी क्षमताएं मौजूद हैं या नहीं। इस परीक्षा में उनकी भाषा समझ, तार्किक सोच, सामान्य ज्ञान और कानूनी तर्कशक्ति को जांचा जाता है, जो आगे चलकर लॉ की पढ़ाई और प्रैक्टिस में काम आती हैं।
CLAT को इसलिए भी ज़रूरी माना जाता है क्योंकि इसके ज़रिए छात्रों को देश की टॉप लॉ यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने का मौका मिलता है। जहां निजी लॉ कॉलेजों या स्टेट लेवल लॉ एंट्रेंस परीक्षाओं के माध्यम से भी दाखिला लिया जा सकता है, वहीं CLAT के ज़रिए मिलने वाले NLUs अकादमिक माहौल, फैकल्टी और करियर एक्सपोज़र के लिए अलग पहचान रखते हैं। इसी कारण CLAT को लॉ के क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में एक अहम प्रवेश परीक्षा माना जाता है।
CLAT देने के फायदे
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के ज़रिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) में पढ़ाई करना केवल एक डिग्री हासिल करना भर नहीं होता, बल्कि यह छात्रों को कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी समझ और कौशल देता है। CLAT के माध्यम से मिलने वाले कोर्सेज़ इस तरह तैयार किए गए हैं कि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कानून की व्यावहारिक समझ भी विकसित कर सकें।
CLAT के ज़रिए मिलने वाले प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- मूट कोर्ट्स: मूट कोर्ट्स के माध्यम से छात्रों को वास्तविक अदालत जैसी परिस्थितियों में केस की बहस करने का अभ्यास मिलता है। इससे कानूनी भाषा, तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता और आत्मविश्वास धीरे-धीरे मजबूत होता है।
- इंटर्नशिप के अवसर: NLUs में पढ़ाई के दौरान छात्रों को हर सेमेस्टर के बाद इंटर्नशिप करने का मौका मिलता है। इससे उन्हें वकीलों, लॉ फर्म्स, कोर्ट्स या सामाजिक संगठनों के साथ काम करने का अनुभव मिलता है, जो आगे चलकर करियर की दिशा तय करने में मदद करता है।
- रिसर्च-ओरिएंटेड पढ़ाई: प्रोजेक्ट वर्क और रिसर्च पेपर्स के ज़रिए छात्रों में कानूनी मुद्दों को गहराई से समझने और उनका विश्लेषण करने की आदत विकसित होती है, जो लिटिगेशन, पॉलिसी या अकादमिक करियर में उपयोगी होती है।
- 5-वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स स्ट्रक्चर: BA LLB, BBA LLB जैसे इंटीग्रेटेड कोर्सेज़ में ग्रेजुएशन और लॉ की पढ़ाई एक साथ होती है, जिससे समय की बचत होती है और छात्रों को विषयों की बेहतर समझ मिलती है।
- मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच: इतिहास, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों की पढ़ाई कानून को व्यापक संदर्भ में समझने में मदद करती है, जो खासतौर पर पब्लिक पॉलिसी और संवैधानिक मामलों में काम आती है।
- ऑनर्स और स्पेशलाइजेशन विकल्प: कोर्स के आगे के वर्षों में छात्र कॉर्पोरेट लॉ, क्रिमिनल लॉ, संवैधानिक कानून या IPR जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता चुन सकते हैं, जिससे करियर के विकल्प और स्पष्ट होते हैं।
CLAT परीक्षा के लिए योग्यताएं
यदि आप CLAT परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानना ज़रूरी है कि अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) स्तर पर इसकी योग्यताएं अलग-अलग तय की गई हैं। नीचे 12वीं के बाद LLB और ग्रेजुएशन के बाद LLM के लिए CLAT की पात्रता शर्तें दी गई हैं।
12वीं के बाद LLB के लिए (CLAT UG)
जो छात्र स्कूल के बाद सीधे लॉ की पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए CLAT UG परीक्षा आयोजित की जाती है। इसकी मुख्य योग्यताएं इस प्रकार हैं:
- शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का 12वीं पास होना अनिवार्य है।
- न्यूनतम अंक: सामान्य, OBC और NRI वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 12वीं में कम से कम 45% अंक होने चाहिए। वहीं SC/ST वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 40% अंक निर्धारित हैं।
- उम्र सीमा: CLAT UG परीक्षा के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है।
- अपियरिंग उम्मीदवार: जो छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल होने वाले हैं, वे भी CLAT परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ग्रेजुएशन के बाद LLM के लिए (CLAT PG)
जो उम्मीदवार पहले ही LLB कर चुके हैं और लॉ में उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं, वे CLAT PG परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसकी पात्रता इस प्रकार है:
- शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से LLB की डिग्री होनी चाहिए।
- न्यूनतम अंक: सामान्य और OBC वर्ग के लिए ग्रेजुएशन में 50% अंक, जबकि SC/ST वर्ग के लिए 45% अंक आवश्यक हैं।
- उम्र सीमा: CLAT PG परीक्षा के लिए भी कोई आयु सीमा नहीं है।
आरक्षण और अन्य श्रेणियां
CLAT परीक्षा में विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का प्रावधान होता है। इसमें SC, ST, OBC, PwD और NRI जैसे वर्ग शामिल होते हैं। इसके अलावा, कुछ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ अपने स्तर पर डोमिसाइल या स्टेट कोटा भी लागू करती हैं। आरक्षण और सीट आवंटन से जुड़ी विस्तृत जानकारी हर साल जारी होने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन में दी जाती है।
CLAT परीक्षा का पैटर्न (UG & PG)
CLAT परीक्षा स्नातक स्तर (UG) और स्नातकोत्तर स्तर (PG) पर आयोजित की जाती है। दोनों परीक्षाएं ऑफलाइन (पेन–पेपर मोड) में होती हैं और इनमें ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न पूछे जाते हैं। हालांकि UG और PG परीक्षा का फोकस अलग होता है, लेकिन बेसिक स्ट्रक्चर लगभग समान रहता है।
| सेक्शन | UG CLAT | PG CLAT |
| परीक्षा का मोड | ऑफलाइन (Pen & Paper) | ऑफलाइन (Pen & Paper) |
| प्रश्नों की संख्या | 120 | 120 |
| परीक्षा अवधि | 2 घंटे | 2 घंटे |
| प्रश्न का प्रकार | MCQ (पैसेज आधारित) | MCQ (पैसेज आधारित) |
| नेगेटिव मार्किंग | हर गलत उत्तर पर 0.25 अंक | हर गलत उत्तर पर 0.25 अंक |
UG CLAT में सेक्शन-वाइज वेटेज (लगभग)
UG CLAT परीक्षा में सभी प्रश्न पैसेज आधारित होते हैं और अलग-अलग सेक्शनों से पूछे जाते हैं। प्रत्येक सेक्शन का वेटेज लगभग इस प्रकार रहता है:
- अंग्रेज़ी भाषा: 20–25%
- करंट अफेयर्स और सामान्य ज्ञान: 25–30%
- कानूनी तर्कशक्ति (Legal Reasoning): 25–30%
- तार्किक तर्कशक्ति (Logical Reasoning): 20–25%
- क्वांटिटेटिव टेक्निक्स (Maths): 10–15%
ध्यान दें: वेटेज हर साल थोड़ा बदल सकता है, इसलिए उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन भी ज़रूर देखना चाहिए।
PG CLAT का पैटर्न (संक्षेप में)
PG CLAT परीक्षा में मुख्य रूप से संवैधानिक कानून और अन्य विधि विषयों पर आधारित पैसेज दिए जाते हैं, जिनके आधार पर MCQs पूछे जाते हैं। इसमें उम्मीदवार की कानूनी समझ, विश्लेषण क्षमता और केस लॉ की जानकारी को परखा जाता है।
CLAT परीक्षा का सिलेबस
CLAT परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि यह परीक्षा पैसेज आधारित (passage-based) होती है। यानी अधिकतर सवाल लंबे या छोटे पैसेज पर आधारित होते हैं और उम्मीदवार से उस पैसेज को समझकर उत्तर देने की अपेक्षा की जाती है। UG और PG दोनों स्तरों पर सिलेबस अलग-अलग तय किया गया है।
UG CLAT का सिलेबस
UG CLAT परीक्षा में कुल 5 मुख्य सेक्शन होते हैं। सभी सेक्शन में प्रश्न पैसेज के माध्यम से पूछे जाते हैं।
अंग्रेज़ी भाषा (English Language)
- Reading Comprehension
- Vocabulary (शब्दावली)
- Grammar (व्याकरण)
- Synonyms और Antonyms
- Passage-based questions
करंट अफेयर्स और सामान्य ज्ञान
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार
- राजनीति और सरकारी योजनाएं
- अर्थव्यवस्था
- पुरस्कार, खेल, पुस्तकें और लेखक
- विज्ञान और तकनीक
- करंट अफेयर्स आधारित पैसेज
कानूनी तर्कशक्ति (Legal Reasoning)
- कानूनी सिद्धांत और प्रस्ताव
- तथ्यात्मक परिस्थितियों पर कानून का प्रयोग
- संविधान से जुड़े विषय
- महत्वपूर्ण न्यायालयीन निर्णय
- मौलिक अधिकार
तार्किक तर्कशक्ति (Logical Reasoning)
- एनालिटिकल और लॉजिकल प्रश्न
- कथन और निष्कर्ष
- श्रेणी और सीरीज़
- रक्त संबंध
- पैसेज आधारित लॉजिकल प्रश्न
क्वांटिटेटिव टेक्निक्स (Quantitative Techniques)
- मूल अंकगणित
- प्रतिशत
- अनुपात और समानुपात
- औसत
- डेटा इंटरप्रिटेशन
- बेसिक अल्जेब्रा और ज्यामिति
ध्यान दें: CLAT में गणित का स्तर बेसिक होता है, लेकिन सभी सवाल आंकड़ों वाले पैसेज पर आधारित होते हैं।
PG CLAT (LLM) का सिलेबस
PG CLAT परीक्षा में उम्मीदवारों की कानूनी समझ, विश्लेषण क्षमता और केस लॉ की जानकारी को परखा जाता है। इसमें मुख्य रूप से लॉ से जुड़े पैसेज दिए जाते हैं, जिन पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
संवैधानिक कानून (Constitutional Law)
- भारतीय संविधान के प्रावधान
- मौलिक अधिकार और कर्तव्य
- नीति निर्देशक तत्व
- महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्णय
अन्य विधि विषय (Other Law Subjects)
- न्यायशास्त्र (Jurisprudence)
- प्रशासनिक कानून (Administrative Law)
- अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law)
- कॉन्ट्रैक्ट लॉ, टॉर्ट्स और क्रिमिनल लॉ से जुड़े बुनियादी सिद्धांत
- समकालीन कानूनी मुद्दे (Contemporary Legal Issues)
CLAT vs AILET vs SLAT: क्या अंतर है?
लॉ की पढ़ाई के लिए सही एंट्रेंस परीक्षा चुनना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के कॉलेज और करियर विकल्प देख रहे हैं। अगर लक्ष्य देश की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई करना है, तो CLAT सबसे अहम परीक्षा मानी जाती है, क्योंकि इसके ज़रिए ही अधिकांश NLUs में दाखिला मिलता है। वहीं अगर किसी छात्र का फोकस खास तौर पर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली पर है, तो उसके लिए AILET देना ज़रूरी होता है, क्योंकि यह परीक्षा केवल उसी विश्वविद्यालय के लिए आयोजित की जाती है।
दूसरी ओर, जो छात्र निजी लेकिन स्थापित लॉ संस्थानों में पढ़ाई के विकल्प तलाश रहे हैं, उनके लिए SLAT एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सिम्बायोसिस लॉ स्कूल्स में दाखिले के लिए यह परीक्षा ली जाती है और इसका पैटर्न CLAT और AILET से थोड़ा अलग होता है। कई छात्र अपने विकल्प खुले रखने के लिए एक से ज़्यादा परीक्षाएं भी देते हैं, ताकि रैंक और स्कोर के आधार पर बेहतर कॉलेज चुनने की गुंजाइश बनी रहे।
| बिंदु | CLAT | AILET | SLAT |
| पूरा नाम | कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट | ऑल इंडिया लॉ एंट्रेंस टेस्ट | सिम्बायोसिस लॉ एडमिशन टेस्ट |
| किसके लिए | नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) | केवल NLU दिल्ली | सिम्बायोसिस लॉ स्कूल्स |
| कॉलेजों की संख्या | 25 NLUs | 1 (NLU दिल्ली) | कई सिम्बायोसिस लॉ कॉलेज |
| परीक्षा स्तर | राष्ट्रीय स्तर | राष्ट्रीय स्तर | निजी विश्वविद्यालय स्तर |
| कोर्स | UG (LLB) और PG (LLM) | UG और PG | मुख्य रूप से UG |
| परीक्षा मोड | ऑफलाइन (पेन–पेपर) | ऑफलाइन (पेन–पेपर) | ऑनलाइन |
| प्रश्नों का प्रकार | पैसेज आधारित MCQs | कॉन्सेप्ट + पैसेज आधारित | MCQs |
| प्रतिस्पर्धा स्तर | बहुत अधिक | अत्यधिक | मध्यम |
| फोकस एरिया | रीडिंग, रीजनिंग, करंट अफेयर्स | लॉ, अंग्रेज़ी, करंट अफेयर्स | लॉजिकल और एनालिटिकल एप्रोच |
CLAT के ज़रिए मिलने वाले NLU कोर्सेज
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के माध्यम से छात्रों को भारत की प्रमुख नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) में अंडरग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट लॉ कोर्सेज़ में प्रवेश मिलता है। ये कोर्स इस तरह डिज़ाइन किए गए हैं कि छात्र कानून के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक समझ और प्रोफेशनल स्किल्स भी विकसित कर सकें।
अंडरग्रेजुएट (UG) लॉ कोर्सेज़
12वीं के बाद CLAT पास करने वाले छात्र NLUs में 5-वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स कर सकते हैं। इन कोर्सेज़ में ग्रेजुएशन और लॉ की पढ़ाई एक साथ कराई जाती है।
| कोर्स | विवरण |
| BA LLB | यह सबसे लोकप्रिय लॉ कोर्स माना जाता है। इसमें इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के साथ कॉन्ट्रैक्ट लॉ, क्रिमिनल लॉ और संवैधानिक कानून पढ़ाया जाता है। यह कोर्स लिटिगेशन, न्यायिक सेवा और पब्लिक पॉलिसी में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए उपयुक्त होता है। |
| BBA LLB | यह कोर्स कॉर्पोरेट सेक्टर की ओर रुझान रखने वाले छात्रों के लिए तैयार किया गया है। इसमें मैनेजमेंट और बिज़नेस स्टडीज़ के साथ कॉर्पोरेट और कमर्शियल लॉ पर फोकस किया जाता है। |
| BCom LLB | इस कोर्स में अकाउंटिंग, फाइनेंस और टैक्सेशन के साथ लॉ की पढ़ाई कराई जाती है। यह कोर्स कॉर्पोरेट लॉ, टैक्स लॉ और फाइनेंशियल लीगल एडवाइजरी के लिए उपयोगी माना जाता है। |
| BSc LLB | यह कोर्स साइंस बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए होता है और सीमित NLUs में ही उपलब्ध है। इसमें साइंटिफिक विषयों के साथ लॉ की पढ़ाई कराई जाती है। |
पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) लॉ कोर्स – LLM
CLAT PG के माध्यम से छात्र मास्टर ऑफ लॉ (LLM) कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। यह कोर्स उन छात्रों के लिए होता है जो पहले से LLB कर चुके हैं और अब किसी विशेष कानूनी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। LLM कोर्स आमतौर पर 1-वर्षीय या 2-वर्षीय होता है और इसमें एडवांस लीगल स्टडीज़ और रिसर्च पर ज़ोर दिया जाता है।
LLM में प्रमुख स्पेशलाइजेशन शामिल हैं:
- संवैधानिक कानून
- कॉर्पोरेट और कमर्शियल लॉ
- क्रिमिनल लॉ
- इंटरनेशनल लॉ
- इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ (IPR)
- ह्यूमन राइट्स लॉ
इन कोर्सेज़ के माध्यम से छात्र अकादमिक करियर, लीगल रिसर्च, टीचिंग, पॉलिसी-मेकिंग और सीनियर लीगल प्रैक्टिस के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।
भारत की प्रमुख नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (टॉप NLUs)
CLAT के ज़रिए देश की कई प्रतिष्ठित NLUs में दाखिला मिलता है। नीचे कुछ प्रमुख और अधिक मांग वाली नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के नाम दिए गए हैं:
- नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी – एनएलएसआईयू, बेंगलुरु
- नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद
- वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडिशियल साइंसेज़ – डब्ल्यूबीएनयूजेएस, कोलकाता
- नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर
- गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी – जीएनएलयू, गांधीनगर
इन विश्वविद्यालयों को उनकी अकादमिक गुणवत्ता, फैकल्टी, मूट कोर्ट कल्चर और करियर एक्सपोज़र के लिए जाना जाता है। हालांकि सभी NLUs का पाठ्यक्रम CLAT के माध्यम से तय होता है, लेकिन सुविधाओं और अवसरों में संस्थान के अनुसार अंतर देखने को मिलता है।
CLAT परीक्षा की फीस
CLAT परीक्षा से जुड़ी फीस को समझते समय यह जानना ज़रूरी है कि इसमें सिर्फ परीक्षा शुल्क ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग और कॉलेज की फीस भी शामिल होती है। नीचे तालिका में CLAT से जुड़ी अलग-अलग फीस को संक्षेप में समझाया गया है।
| फीस का प्रकार | विवरण |
| परीक्षा आवेदन शुल्क | सामान्य, ओबीसी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के लिए लगभग ₹4,000। एससी, एसटी और बीपीएल वर्ग के उम्मीदवारों को इसमें रियायत मिलती है। |
| काउंसलिंग शुल्क | CLAT पास करने के बाद काउंसलिंग में शामिल होने के लिए लगभग ₹30,000 (सीट मिलने पर कॉलेज फीस में समायोजित हो सकता है)। |
| कॉलेज (NLU) की फीस | 5-वर्षीय UG लॉ कोर्स की सालाना फीस आमतौर पर ₹1.5 लाख से ₹4 लाख के बीच होती है। |
ध्यान दें: CLAT परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को विभिन्न राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) में लॉ कोर्स में प्रवेश मिलता है, जिनकी फीस संस्थान के अनुसार अलग-अलग होती है।
CLAT काउंसलिंग प्रक्रिया
CLAT परीक्षा का रिज़ल्ट आने के बाद एडमिशन की पूरी प्रक्रिया केंद्रीकृत ऑनलाइन काउंसलिंग के ज़रिए होती है। इस प्रक्रिया में उम्मीदवार को अपनी रैंक के आधार पर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) में सीट अलॉट की जाती है। काउंसलिंग की तारीखें और राउंड की संख्या हर साल बदल सकती हैं, इसलिए उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन ज़रूर देखना चाहिए। CLAT काउंसलिंग प्रक्रिया को स्टेप-बाय-स्टेप नीचे बताया गया है:
- स्टेप 1: काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन: CLAT रिज़ल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों को कंसोर्टियम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके लिए निर्धारित काउंसलिंग शुल्क जमा करना ज़रूरी होता है।
- स्टेप 2: कॉलेज प्रेफरेंस भरना: रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवार अपनी रैंक और पसंद के अनुसार NLUs की लिस्ट भरते हैं। यहां कॉलेज को सही क्रम में भरना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि सीट अलॉटमेंट इसी प्रेफरेंस के आधार पर किया जाता है।
- स्टेप 3: सीट अलॉटमेंट (पहला राउंड): काउंसलिंग के पहले राउंड में उम्मीदवार की रैंक, कैटेगरी और उपलब्ध सीटों के आधार पर NLU अलॉट की जाती है। अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई जाती है।
- स्टेप 4: सीट को स्वीकार करना या अपग्रेड का विकल्प चुनना: सीट मिलने के बाद उम्मीदवार के पास कुछ विकल्प होते हैं:
- अलॉट की गई सीट स्वीकार करना
- अगले राउंड के लिए अपग्रेड का विकल्प चुनना
- सीट छोड़ देना (अगर एडमिशन नहीं लेना चाहते)
- स्टेप 5: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: सीट स्वीकार करने के बाद उम्मीदवारों को ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करने होते हैं, जैसे 12वीं/ग्रेजुएशन मार्कशीट, कैटेगरी सर्टिफिकेट, पहचान पत्र आदि। इन दस्तावेज़ों का ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है।
- स्टेप 6: फाइनल एडमिशन और रिपोर्टिंग: सभी राउंड पूरे होने के बाद फाइनल अलॉटमेंट किया जाता है। इसके बाद उम्मीदवार को अलॉट की गई NLU में तय समय के भीतर रिपोर्ट करना होता है और कॉलेज की बाकी फीस जमा करनी होती है।
CLAT के बाद करियर और प्लेसमेंट
CLAT के ज़रिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई करने के बाद छात्रों के सामने करियर के कई रास्ते खुलते हैं। हर छात्र का करियर एक-सा नहीं होता, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसने पढ़ाई के दौरान किस दिशा में मेहनत की है। कुछ छात्र कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए कॉर्पोरेट सेक्टर में जाते हैं, जबकि कई छात्र लिटिगेशन, न्यायिक सेवा या आगे की पढ़ाई को चुनते हैं।
नीचे तालिका में CLAT के बाद मिलने वाले मुख्य करियर विकल्पों को आसान तरीके से समझाया गया है, ताकि यह साफ हो सके कि किस रास्ते में किस तरह का काम होता है।
| करियर का विकल्प | इसमें क्या किया जाता है | यह रास्ता किसके लिए सही है |
| कैंपस प्लेसमेंट (कॉर्पोरेट लॉ) | लॉ फर्म्स, बैंक और कंपनियों में लीगल और कंप्लायंस से जुड़ा काम | जो कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करना चाहते हैं |
| लिटिगेशन | जिला अदालत, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में वकालत | जिन्हें कोर्ट प्रैक्टिस में रुचि है |
| न्यायिक सेवा | राज्य स्तरीय ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा देकर जज बनना | जो न्यायपालिका में करियर बनाना चाहते हैं |
| UPSC और सरकारी सेवाएं | लीगल ऑफिसर, पॉलिसी और प्रशासनिक भूमिकाएं | जो सरकारी सेवा में जाना चाहते हैं |
| उच्च शिक्षा (LLM / रिसर्च) | LLM, पीएचडी, टीचिंग या लीगल रिसर्च | जिन्हें अकादमिक फील्ड में रुचि है |
| स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट सेक्टर | लीगल काउंसल, कॉन्ट्रैक्ट और कंप्लायंस से जुड़ा काम | जो इंडस्ट्री-फोकस्ड रोल चाहते हैं |
प्लेसमेंट और सैलरी की बात करें तो टॉप NLUs में प्लेसमेंट सेल सक्रिय रहता है, लेकिन हर छात्र को एक-जैसा पैकेज नहीं मिलता। शुरुआती सैलरी काफी हद तक पढ़ाई, इंटर्नशिप अनुभव और स्किल्स पर निर्भर करती है। कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्म्स से जुड़े अवसर भी मिलते हैं, लेकिन ऐसे मौके सीमित होते हैं और आमतौर पर सीधे कैंपस प्लेसमेंट के बजाय इंटर्नशिप और रेफरल के ज़रिए बनते हैं।
यह समझना ज़रूरी है कि CLAT सिर्फ एक प्रवेश परीक्षा है। असली करियर की दिशा कॉलेज के दौरान चुनी गई इंटर्नशिप, प्रैक्टिस और तैयारी से तय होती है। इसी वजह से CLAT पास करने के बाद हर छात्र का करियर अनुभव अलग-अलग हो सकता है।
CLAT की तैयारी के लिए टिप्स
सीएलएटी की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि छात्र शुरुआत कहां से करें और किन बातों पर ज़्यादा ध्यान दें। किसी के पास पूरा एक साल होता है, तो किसी के पास सीमित समय। ऐसे में ज़रूरी है कि तैयारी को सही क्रम और सही फोकस के साथ आगे बढ़ाया जाए। नीचे दिए गए बिंदु वही अहम पहलू बताते हैं, जिन पर ध्यान देने से समय की बचत होती है और तैयारी ज़्यादा असरदार बनती है।
- सिलेबस और पेपर पैटर्न को पहले समझें: सबसे पहले सीएलएटी का सिलेबस और पेपर पैटर्न ध्यान से देखें। इससे यह साफ होता है कि परीक्षा में विषयों से ज़्यादा पैसेज और उनकी समझ को महत्व दिया जाता है। बिना यह समझे तैयारी शुरू करने पर मेहनत अक्सर गलत दिशा में चली जाती है।
- अपनी तैयारी की टाइमलाइन तय करें: अगर आपके पास करीब एक साल का समय है, तो शुरुआती महीनों में रीडिंग हैबिट बनाना ज़रूरी होता है। इस दौरान अंग्रेज़ी, करंट अफेयर्स और लॉजिकल रीजनिंग पर धीरे-धीरे पकड़ बनाएं। वहीं अगर छह महीने या उससे कम समय बचा है, तो नई किताबें शुरू करने के बजाय मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नों से तैयारी करना ज़्यादा व्यावहारिक रहता है।
- अंग्रेज़ी और करंट अफेयर्स को नियमित पढ़ें: सीएलएटी में ये दोनों सेक्शन लगभग हर साल निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन्हें आख़िरी समय के भरोसे छोड़ना नुकसानदेह हो सकता है। रोज़ अख़बार या भरोसेमंद न्यूज़ सोर्स पढ़ने से करंट अफेयर्स के साथ रीडिंग स्पीड और समझ भी बेहतर होती है।
- भाषा सुधार में सही तरीका अपनाएं: भारी ग्रामर किताबों में उलझने की ज़रूरत नहीं होती। सीएलएटी के सवाल यह नहीं पूछते कि नियम क्या है, बल्कि यह देखते हैं कि आप पैसेज को सही तरीके से समझ पा रहे हैं या नहीं। इसी वजह से एडिटोरियल और लंबे आर्टिकल पढ़ना ज़्यादा उपयोगी साबित होता है।
- करंट अफेयर्स का कॉन्टेक्स्ट समझें: तैयारी करते समय सिर्फ़ घटनाएं याद करने के बजाय यह समझना ज़रूरी है कि कोई कानून क्यों लाया गया या किसी फैसले का समाज और नीति पर क्या असर पड़ा। सीएलएटी में इसी तरह की समझ पर सवाल पूछे जाते हैं।
- लीगल रीजनिंग में रटने से बचें: यूजी सीएलएटी में कानूनी तर्कशक्ति सेक्शन के लिए कानून याद करने की ज़रूरत नहीं होती। सवाल इस बात पर आधारित होते हैं कि दिए गए कानूनी सिद्धांत को किसी स्थिति पर तार्किक रूप से कैसे लागू किया जाए। इसलिए अभ्यास के दौरान रीजनिंग पर ध्यान देना ज़्यादा फायदेमंद रहता है।
- क्वांटिटेटिव टेक्निक्स को हल्के में न लें: यह सीएलएटी का सबसे कम वेटेज वाला सेक्शन होता है, लेकिन समय के अभाव में यही परेशानी पैदा करता है। प्रतिशत, अनुपात, औसत और डेटा इंटरप्रिटेशन जैसे टॉपिक्स पर नियमित अभ्यास करने से इस सेक्शन को कम समय में संभाला जा सकता है।
- मॉक टेस्ट का सही विश्लेषण करें: मॉक टेस्ट सीएलएटी की तैयारी का अहम हिस्सा हैं, लेकिन सिर्फ़ मॉक देना काफ़ी नहीं होता। हर मॉक के बाद यह समझना ज़रूरी है कि गलती क्यों हुई – समझ की कमी थी या टाइम मैनेजमेंट की।
- टाइम-बाउंड प्रैक्टिस को आदत बनाएं: सीएलएटी में समय हमेशा कम पड़ता है। शुरुआत से टाइम-बाउंड प्रैक्टिस करने से यह समझ बनती है कि कौन-सा सवाल छोड़ना बेहतर है और कहां ज़्यादा समय नहीं देना चाहिए।
- सीमित और भरोसेमंद रिसोर्स चुनें: बहुत ज़्यादा किताबें और नोट्स इकट्ठा करने से तैयारी आसान नहीं होती। कम लेकिन भरोसेमंद रिसोर्स चुनकर उन्हें बार-बार रिवाइज़ करना ज़्यादा असरदार रणनीति मानी जाती है।
- मानसिक संतुलन बनाए रखें: तैयारी के दौरान तनाव होना सामान्य है, खासकर जब मॉक टेस्ट के स्कोर स्थिर न रहें। ऐसे समय में दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी प्रोग्रेस और कमजोर हिस्सों पर ध्यान देना ज़्यादा उपयोगी होता है।
CLAT की तैयारी के लिए किताबें (UG + PG)
CLAT की परीक्षा की तैयारी के लिए नीचे कुछ किताबों के नाम हैं जिनसे आप अपनी CLAT परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं:
| किताब का नाम | लेखक / प्रकाशक | यहां से खरीदें |
| यूनिवर्सल्स गाइड टू CLAT & एलएल.बी. प्रवेश परीक्षा | मनीष अरोरा | यहां से खरीदें |
| कानूनी जागरूकता और कानूनी तर्कशक्ति | ए.पी. भारद्वाज | यहां से खरीदें |
| CLAT (UG) और AILET साल‑वार सॉल्वड पेपर्स | ओसवाल बुक्स | यहां से खरीदें |
| वर्ड पावर मेड ईज़ी | नॉर्मन लुईस | यहां से खरीदें |
| ऑब्जेक्टिव जनरल इंग्लिश | आर.एस. अग्रवाल / एस.पी. बक्शी | यहां से खरीदें |
| आधुनिक तरीका (Logical Reasoning) | आर.एस. अग्रवाल | यहां से खरीदें |
| क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड फॉर कॉम्पीटीटिव एग्ज़ामिनेशंस | आर.एस. अग्रवाल | यहां से खरीदें |
| फास्ट ट्रैक ऑब्जेक्टिव एरिथमेटिक | राजेश वर्मा (Arihant) | यहां से खरीदें |
| लूसेंट का जनरल नॉलेज | लूसेंट पब्लिकेशन्स | यहां से खरीदें |
| पीयरसन कॉन्साइस GK मैनुअल | पीयरसन | यहां से खरीदें |
FAQs
CLAT स्कोर के ज़रिए अलग-अलग कॉलेजों में अलग से आवेदन नहीं करना होता। एक ही CLAT स्कोर के आधार पर उम्मीदवार 25 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। काउंसलिंग के दौरान छात्र अपनी रैंक और पसंद के अनुसार कई NLUs को प्रेफरेंस लिस्ट में भरते हैं। इसके बाद रैंक, कैटेगरी और सीट उपलब्धता के आधार पर कॉलेज अलॉट किया जाता है।
नहीं, हर NLU में प्लेसमेंट अनिवार्य नहीं होता। ज़्यादातर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ में प्लेसमेंट सेल ज़रूर होता है, लेकिन कैंपस प्लेसमेंट लेना या न लेना पूरी तरह छात्र की पसंद पर निर्भर करता है। कई छात्र लिटिगेशन, ज्यूडिशियल सर्विस या आगे की पढ़ाई (LLM/PhD) के लिए प्लेसमेंट में हिस्सा नहीं लेते। साथ ही, अलग-अलग NLUs में प्लेसमेंट का स्तर और मौके भी अलग हो सकते हैं।
अगर आपने 12वीं पास कर ली है या 12वीं में पढ़ रहे हैं, तो आप UG CLAT के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 45% और SC/ST वर्ग के लिए 40% अंक जरूरी होते हैं। LLB करने के बाद PG (LLM) के लिए CLAT PG दिया जा सकता है।
CLAT एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसके ज़रिए भारत की 25 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ में अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) लॉ कोर्सेज़ में दाखिला मिलता है।
CLAT का रिज़ल्ट आने के बाद कंसोर्टियम द्वारा ऑनलाइन काउंसलिंग कराई जाती है। इसमें उम्मीदवारों को अपनी रैंक के आधार पर पसंदीदा NLUs चुननी होती हैं। रैंक, कैटेगरी और सीट उपलब्धता के आधार पर कॉलेज अलॉट किया जाता है।
NLU का अलॉटमेंट हर साल रैंक, कैटेगरी और सीटों की संख्या पर निर्भर करता है। आमतौर पर टॉप NLUs के लिए कम रैंक की ज़रूरत होती है, जबकि नई NLUs में अपेक्षाकृत ऊंची रैंक पर भी दाखिला मिल सकता है।
CLAT स्कोर केवल उसी शैक्षणिक वर्ष के एडमिशन के लिए मान्य होता है। अगले साल के एडमिशन के लिए दोबारा CLAT परीक्षा देनी होती है।
अगर 11वीं से तैयारी शुरू की जाए, तो सिलेबस को आराम से समझने और प्रैक्टिस करने का समय मिल जाता है। हालांकि यह ज़रूरी नहीं है। सही योजना और नियमित अभ्यास के साथ 12वीं के बाद भी CLAT पास किया जा सकता है।
हां, बिना कोचिंग के CLAT पास करना संभव है। सही किताबें, नियमित पढ़ाई, मॉक टेस्ट और आत्म-विश्लेषण से कई छात्रों ने अच्छे अंक हासिल किए हैं।
टॉप NLUs में पढ़ाई का अनुभव, फैकल्टी और प्लेसमेंट एक्सपोज़र आमतौर पर बेहतर होता है। नई NLUs में फीस अपेक्षाकृत कम हो सकती है और दाखिला आसान होता है, लेकिन करियर एक्सपोज़र धीरे-धीरे विकसित हो रहा होता है।
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आशा है कि इस लेख में दी गई CLAT परीक्षा संबंधित सभी जानकारी मिल गई होगी। भारतीय परीक्षाओं से जुड़े अन्य लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।
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