BUMS कोर्स (बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) भारत में आयुष प्रणाली के अंतर्गत आने वाला एक मान्यता-प्राप्त मेडिकल कोर्स है, जो यूनानी चिकित्सा पद्धति पर आधारित होता है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, जो एलोपैथी के बजाय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक यूनानी चिकित्सा पद्धति में रुचि रखते हैं।
यदि आप भी यूनानी चिकित्सा पद्धति को सीखकर अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं, तो BUMS कोर्स को चुनना आपके लिए किसी महत्वपूर्ण कदम की तरह हो सकता है। इस लेख में आपके लिए BUMS कोर्स की योग्यता, एडमिशन प्रक्रिया, फीस, सिलेबस और करियर विकल्प की विस्तृत जानकारी दी गई है।
| BUMS कोर्स लेवल | अंडरग्रेजुएट |
| BUMS कोर्स की अवधि | 5.5 वर्ष (4.5 साल पढ़ाई + 1 साल अनिवार्य इंटर्नशिप) |
| BUMS एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया | साइंस स्ट्रीम में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के साथ कक्षा 12वीं में न्यूनतम 50% अंक होने चाहिए। |
| BUMS एडमिशन प्रोसेस | एंट्रेंस बेस्ड |
| BUMS एंट्रेंस परीक्षा | NEET, AYUSH |
| आयु सीमा | उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए, जबकि इसके लिए अभी तक कोई अधिकतम आयु निर्धारित नहीं की गई है। |
| जॉब प्रोफाइल | यूनानी डॉक्टर, यूनानी चिकित्सा अधिकारी (हकीम), फार्मा कंपनियों में शोधकर्ता, यूनानी फार्मासिस्ट, हेल्थ कंसल्टेंट, यूनानी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर / लेक्चरर |
| रोजगार के प्रमुख क्षेत्र | आयुष मंत्रालय, पतंजलि, हमदर्द वेलनेस, यूनानी रिसर्च संस्थान, फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर इंडस्ट्री तथा शैक्षणिक और रिसर्च क्षेत्र। |
This Blog Includes:
BUMS कोर्स क्या है?
बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS) एक ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स है, जिसकी अवधि लगभग 5.5 साल होती है, जिसमें 4.5 साल का अकादमिक अध्ययन और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। इसमें आपको फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, सर्जरी, यूनानी मेडिसिन और क्लिनिकल प्रैक्टिस जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। इस कोर्स में प्रत्येक वर्ष का पाठ्यक्रम विशिष्ट कौशल और ज्ञान पर केंद्रित होता है ताकि अंतिम वर्ष में आप क्लिनिकल केस हैंडलिंग और वास्तविक इलाज में सक्षम हो सकें।
यूनानी चिकित्सा एक ऐसी प्राचीन प्रणाली है, जो आधुनिक चिकित्सा में भी रोग निवारण और जीवन शैली सुधार के माध्यम से योगदान देती है। भारत में BUMS कोर्स को आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है और इसका अकादमिक व क्लिनिकल ढांचा नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन (NCISM) द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसके अलावा, हर राज्य में स्टेट यूनानी कॉउंसिल होते हैं, जो स्थानीय कॉलेजों और डिग्रियों के पंजीकरण, लाइसेंसिंग और व्यावसायिक अभ्यास की अनुमति देते हैं।
BUMS कोर्स क्यों करें?
यहाँ BMS कोर्स को चुनने के प्रमुख कारणों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझाया गया है:
- BUMS प्राचीन यूनानी चिकित्सा पद्धति पर आधारित है, जो प्राकृतिक दवाओं और हर्बल ट्रीटमेंट पर फोकस करती है। यदि आप हर्बल ट्रीटमेंट को सीखकर इसमें करियर बनाना चाहते हैं तो BUMS कोर्स आपके लिए उत्तम विकल्प हो सकता है।
- यह कोर्स भारत सरकार और AYUSH मंत्रालय द्वारा यूनानी चिकित्सा को बढ़ावा और मान्यता मिल रही है, जिससे आपके सामने यूनानी डॉक्टर बनने के बाद सरकारी अस्पताल में जॉब करने के अवसर रहते हैं।
- BUMS करने के बाद आपके पास क्लिनिक, हॉस्पिटल, रिसर्च, फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री या निजी प्रैक्टिस का विकल्प होता है, जिससे आपकी करियर ग्रोथ बड़ सकती है।
- BUMS करने के बाद आपको ‘डॉक्टर’ की उपाधि मिलती है। आप अपना खुद का क्लिनिक या हिजामा (कपिंग थेरेपी) सेंटर शुरू कर सकते हैं, जिसकी मांग आजकल शहरों में बहुत ज्यादा है।
- MBBS के मुकाबले BUMS कोर्स की फीस काफी कम होती है। सरकारी यूनानी कॉलेजों में आप बहुत ही किफायती फीस में एक प्रोफेशनल डॉक्टर की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।
- मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) और यूरोप में यूनानी और हर्बल दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे विदेशों में भी काम करने के अवसर मिलते हैं।
BUMS सिलेबस ओवरव्यू
यहाँ BUMS कोर्स का सिलेबस ओवरव्यू दिया गया है, जिसे NCISM की आधिकारिक गाइडलाइन के आधार पर ऑफिशियल वेबसाइट से लिया गया है –
| साल | विषय | मुख्य टॉपिक्स |
| पहला साल | कुल्लियत / Umoor-e-Tabiya | यूनानी चिकित्सा के सिद्धांत (Arkan, Mizaj, Akhlat), शरीर के सामान्य कार्य, प्राकृतिक तत्व और शरीर पर उनका प्रभाव, रोग-प्रतिरोधक क्षमता, स्वास्थ्य अवधारणा |
| तशरीह-उल-बदन (Anatomy) | मानव शरीर की संरचना, अंगों का अध्ययन (हड्डियां, मांसपेशियां, अंग), टिश्यूज़ (ऊतक) और उनके प्रकार, अंगों का कार्य | |
| मुनाफे-उल-आज़ा (Physiology) | अंगों की कार्यप्रणाली, परिसंचरण तंत्र, श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र, नर्वस सिस्टम और हॉर्मोनल फंक्शन, शरीर के सामंजस्य की प्रक्रिया | |
| यूनानी चिकित्सा के मूल सिद्धांत | यूनानी इतिहास, इल्म-ए-तिब्ब और मौलिक विचारधारा, स्वास्थ्य और रोग का परिचय | |
| दूसरा साल | इल्मुल अद्विया (Pharmacology) | दवाओं के प्रकार (Herbal, Mineral, Animal), प्रिपरेशन और डोसेज, दवा का शरीर पर प्रभाव, टॉक्सिसिटी और सेफ्टी |
| महियात-उल-अम्राज़ (Pathology) | रोगों की प्रकृति और क्लासिफिकेशन, कॉमन डिजीज इन यूनानी प्रोस्पेक्टिव, सिम्पटोमाटोलोजी और डायग्नोस्टिक्स, लैब टेस्ट्स और रिपोर्ट्स | |
| तहाफ़ुज़ी वा सामाजिक तिब (Preventive & Community Medicine) | हाइजीन और पर्सनल केयर, एपिडेमिक्स और प्रिवेंशन, न्यूट्रिशन और लाइफस्टाइल, कम्युनिटी हेल्थ प्रोग्राम्स | |
| तीसरा साल | इल्मुल साइडला वा मरक़्क़बत (Pharmacy & Compound Drugs) | कंपाउंड ड्रग्स बनाना, दवाओं द्वारा इलाज, शेल्फ लाइफ और स्टोरेज, डोसेज कैलकुलेशन |
| तिब्बे क़ानूनी वा इल्मुल समूम (Medical Jurisprudence & Toxicology) | यूनानी चिकित्सा में कानूनी सिद्धांत, चिकित्सा-कानूनी मामलों का निपटान, विष की पहचान, मरीज के अधिकार | |
| सरीरियत वा उसूल-ए-इलाज (Principles of Management) | ट्रीटमेंट प्लानिंग, आहार, दिनचर्या और जीवनशैली संबंधी चिकित्सा, पेशेंट मॉनिटरिंग, चिकित्सीय तकनीकें | |
| इलाज-बित-तदबीर (Regimenal Therapy) | मसाज, हाइड्रोथेरेपी, एक्ससरसाइज थेरेपी, कपिंग और अन्य इलाज विधियाँ, प्रिवेंटिव केयर टेक्निक्स | |
| अम्राज़-ए-आतफ़ाल (Pediatrics) | बच्चों की आम बीमारियाँ, डायग्नोसिस एंड ट्रीटमेंट, वक्सीनेशन, ग्रोथ मॉनिटरिंग | |
| चौथा साल | मोआलजात I & II (General Medicine) | इंटर्नल मेडिसिन डिसॉर्डर्स, क्रॉनिक डिसीज़ मैनेजमेंट, क्लिनिकल डायग्नोसिस, केस स्टडीज एंड ट्रीटमेंट प्लानिंग |
| इल्मुल क़बालत वा अम्राज़े निस्वान (Obstetrics & Gynecology) | प्रेग्नेंसी एंड लेबर मैनेजमेंट, गायनक्लोजिकल डिसऑर्डर्स, न्यूबोर्न केयर, प्रिवेंटिव गायनक्लोजी | |
| इल्मुल जराहत (Surgery) | माइनर एंड मेजर सर्जिकल प्रोसीजर, वूंड मैनेजमेंट (घाव प्रबंधन), सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स, पोस्ट-ओप केयर | |
| आइन, उज़्न, अनफ़, हलक वा असन (Eye, ENT, Oral Diseases) | नेत्र रोग एवं उपचार, ईएनटी विकार, मौखिक स्वास्थ्य एवं दंत चिकित्सा, निदान एवं नैदानिक प्रक्रियाएं | |
| इंटर्नशिप (1 Year) | रोटेटरी क्लिनिकल ट्रेनिंग | सभी नैदानिक विभागों में रोटेशन, मरीजों की देखभाल और प्रबंधन, केस हिस्ट्री लेना, सभी विषयों का प्रैक्टिकल एप्लिकेशन |
BUMS कोर्स की योग्यता
बीयूएमएस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया इस प्रकार है:
- आप ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी सब्जेक्ट के साथ न्यूनतम 50% अंकों के साथ 10+2 उत्तीर्ण किया हो।
- आप को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली NEET UG जैसी प्रवेश परीक्षा में भाग लेकर योग्य अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
- एडमिशन के लिए न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि अधिकतम आयु सीमा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार मान्य होगी।
BUMS में एडमिशन प्रोसेस
यहाँ दिए गए बिंदुओं के माध्यम से BUMS में एडमिशन प्रोसेस के बारे में बताया गया है:
- BUMS में एडमिशन केवल NEET-UG के माध्यम से होता है। बिना NEET क्वालिफाई किए किसी भी कॉलेज में प्रवेश संभव नहीं है। इसलिए आप सबसे पहले NEET-UG की परीक्षा को क्वालीफाई करें।
- NEET रिजल्ट के बाद BUMS सीट अलॉटमेंट के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग होती है, जिसे भारत सरकार की AACCC (आयुष एडमिशंस सेंट्रल कॉउंसलिंग कमिटी) संचालित करती है। NEET रिजल्ट आने के बाद ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनें।
- NEET के बाद आपको ऑनलाइन काउंसलिंग में रजिस्टर करना होता है, इसके लिए सीट क्वोटा सिस्टम समझना जरुरी होता है। सीट क्वोटा सिस्टम में AACCC द्वारा ऑल इंडिया क्वोटा और राज्य AYUSH काउंसलिंग स्टेट क्वोटा, प्राइवेट, डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेंट्रल इंस्टीट्यूट्स में सीटों अलॉटमेंट किया जाता है। इसका निर्धारण आपके NEET रिजल्ट, कैटेगरी और सीट अवेलेबिलिटी पर निर्भर करता है।
- काउंसलिंग के बाद कॉलेज में सीट पाने के लिए आपको रिपोर्टिंग करके अपने डॉक्युमेंट्स का वेरिफिकेशन कराना जरूरी होता है।
- सीट कन्फर्म होने के बाद फीस जमा करके ही BUMS कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया को पूरा माना जाता है।
यह भी पढ़ें – बीएएमएस कोर्स: एडमिशन, योग्यता, फीस, सिलेबस, करियर और सैलरी की पूरी जानकारी
BUMS कॉलेज और फीस
यहाँ BUMS कोर्स के लिए भारत के कुछ प्रमुख कॉलेज और उनमें इस कोर्स की अनुमानित फीस की जानकारी दी गई है, इस लिस्ट में सरकारी और प्राइवेट दोनों ही कैटेगरी के कॉलेज के नाम शामिल हैं –
BUMS कोर्स के लिए गवर्नमेंट कॉलेज
| कॉलेज का नाम | कॉलेज प्रकार | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| गवर्नमेंट निजामिया तिब्बिया कॉलेज | गवर्नमेंट | हैदराबाद, तेलंगाना | INR20,000 – INR60,000 |
| गवर्नमेंट तिब्बिया कॉलेज | गवर्नमेंट | पटना, बिहार | INR10,000 – INR40,000 |
| आयुर्वेदिक एंड यूनानी तिब्बिया कॉलेज | गवर्नमेंट | करोल बाग, नई दिल्ली | INR25,000 – INR70,000 |
| अजमल खान तिब्बिया कॉलेज, AMU | गवर्नमेंट | अलीगढ़, उत्तर प्रदेश | INR50,000 – INR80,000 |
| स्टेट तकमील-उत-तिब कॉलेज एंड हॉस्पिटल | गवर्नमेंट | लखनऊ, उत्तर प्रदेश | INR30,000 – INR70,000 |
| गवर्नमेंट यूनानी मेडिकल कॉलेज | गवर्नमेंट | चेन्नई, तमिलनाडु | INR20,000 – INR60,000 |
| गवर्नमेंट यूनानी मेडिकल कॉलेज | गवर्नमेंट | बेंगलुरु, कर्नाटक | INR25,000 – INR60,000 |
| गवर्नमेंट यूनानी मेडिकल कॉलेज | गवर्नमेंट | भोपाल, मध्य प्रदेश | INR20,000 – INR55,000 |
| गवर्नमेंट यूनानी मेडिकल कॉलेज | गवर्नमेंट | गुलबर्गा, कर्नाटक | INR20,000 – INR60,000 |
| मोहम्मदिया तिब्बिया कॉलेज | गवर्नमेंट ऐडेड | मालेगांव, महाराष्ट्र | INR25,000 – INR70,000 |
BUMS कोर्स के लिए प्राइवेट कॉलेज
| कॉलेज का नाम | कॉलेज प्रकार | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| जुल्फेकार हैदर यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल | प्राइवेट | सिवान, बिहार | INR 1.5 लाख – INR 2.5 लाख |
| यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एशियाई चिकित्सा विज्ञान संस्थान) | प्राइवेट | श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर | INR 1.5 लाख – INR 2.5 लाख |
| जामिया हमदर्द फैकल्टी ऑफ मेडिसिन (यूनानी) | डीम्ड / प्राइवेट | नई दिल्ली | INR 2 लाख – INR 3 लाख |
| एरम यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल | प्राइवेट | लखनऊ, उत्तर प्रदेश | INR 2 लाख – INR 3.5 लाख |
| डॉ. अब्दुल अली तिब्बिया कॉलेज एंड हॉस्पिटल | प्राइवेट | लखनऊ, उत्तर प्रदेश | INR 1.5 लाख – INR 3 लाख |
| अल्लामा इक़बाल यूनानी मेडिकल कॉलेज | प्राइवेट | मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश | INR 1.5 लाख – INR 3 लाख |
| जामिया तिब्बिया देवबंद | प्राइवेट | सहारनपुर, उत्तर प्रदेश | INR 1.5 लाख – INR 2.5 लाख |
| हकीम रईस यूनानी मेडिकल कॉलेज | प्राइवेट | मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश | INR 1.5 लाख – INR 2.5 लाख |
| लुक़मान यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल | प्राइवेट | बीजापुर, कर्नाटक | INR 1.5 लाख – INR 3 लाख |
| कलकत्ता यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल | प्राइवेट | कोलकाता, पश्चिम बंगाल | INR 1.5 लाख – INR 2.5 लाख |
नोट – यहाँ दी गई कॉलेज लिस्ट में फीस स्ट्रक्चर आपके आवेदन करते समय परिवर्तित हो सकता है, इसलिए आप आवेदन करने से पहले ऑफिसियल वेबसाइट पर फीस और योग्यता की भी जांच कर सकते हैं।
BUMS के बाद हायर स्टडी के ऑप्शंस
बीयूएमएस कोर्स कंप्लीट करने के बाद स्टूडेंट अपनी नॉलेज और स्किल्स को बढ़ाने के लिए हायर स्टडी से संबंधित डिग्री कोर्सेज कर सकते हैं। नीचे ऐसे कुछ प्रमुख कोर्सेज की सूची दी गई है जिन्हें BUMS के बाद किया जा सकता है:
| हायर स्टडी ऑप्शन | कोर्स अवधि | मुख्य विषय / स्पेशलाइजेशन | जानें क्यों करें? |
| एमडी मोआलाजात (जनरल मेडिसिन) | 3 वर्ष | जनरल यूनानी मेडिसिन, क्लिनिकल डायग्नोसिस, क्रॉनिक रोग | क्लिनिकल स्पेशलिस्ट बनने का मौका, प्राइवेट प्रैक्टिस व हॉस्पिटल जॉब में हाई डिमांड |
| एमडी इल्मुल अम्रज़ (पैथोलॉजी) | 3 वर्ष | पैथोलॉजी, रोगों की प्रकृति, डायग्नोस्टिक साइंस | लैब, रिसर्च, मेडिकल कॉलेज टीचिंग में करियर |
| एमडी इलाज-बिट-तदबीर (रेजिमेंटल थेरेपी) | 3 वर्ष | हिजामा, दलक, बुखार, डिटॉक्स, रेजिमेंटल थेरेपी | पंचकर्म-टाइप थेरेपी क्लिनिक खोलने का अवसर, आयुष वेलनेस सेक्टर में स्कोप |
| एमडी अमराज़-ए-जिल्द वा तज़ीनियत (डर्मेटोलॉजी) | 3 वर्ष | स्किन, कॉस्मेटोलॉजी, वेनेरियल डिजीज | स्किन क्लिनिक, कॉस्मेटिक प्रैक्टिस, हाई इनकम स्पेशलिटी |
| एमडी इल्मुल अत्फाल (बाल रोग) | 3 वर्ष | बच्चों के रोग, पोषण, ग्रोथ, क्लिनिकल केयर | चाइल्ड स्पेशलिस्ट बन सकते हैं, इसके बाद हॉस्पिटल में जॉब और अपना क्लिनिक खोल सकते हैं। |
| एमडी तहफ़ुज़ी-वा-समाजी-तिब (प्रिवेंटिव एवं सोशल मेडिसिन) | 3 वर्ष | पब्लिक हेल्थ, कम्युनिटी मेडिसिन, हेल्थ प्रोग्राम | सरकारी हेल्थ प्रोग्राम, रिसर्च व पब्लिक हेल्थ करियर |
| एमडी मुनाफ़े-उल-अज़ा (फिजियोलॉजी) | 3 वर्ष | बॉडी फंक्शन, फिजियोलॉजी, क्लिनिकल साइंस | मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर / रिसर्चर बनने का रास्ता |
| एमडी इल्मुल सैदला (यूनानी फार्मेसी) | 3 वर्ष | यूनानी ड्रग्स, फार्माकोलॉजी, ड्रग स्टैंडर्डाइजेशन | आयुष फार्मा इंडस्ट्री, दवा निर्माण, रिसर्च |
| एमएस जराहाट (यूनानी सर्जरी) | 3 वर्ष | यूनानी सर्जिकल टेक्निक्स, ENT, ऑपरेशन बेसिक्स | सर्जिकल स्पेशलिस्ट बन सकते हैं, हॉस्पिटल करियर |
| पीजी डिप्लोमा (इल्मुल सईदला / फार्मेसी) | 1–2 वर्ष | यूनानी फार्मेसी, दवा निर्माण | जल्दी स्पेशलाइजेशन, ड्रग मैन्युफैक्चरिंग व क्लिनिक सपोर्ट |
BUMS कोर्स के बाद करियर स्कोप
बीयूएमएस कोर्स के बाद आप इन प्रमुख रोजगार क्षेत्रों में काम कर सकते हैं:-
| करियर सेक्टर | जॉब रोल / पद | कार्य का प्रकार |
| क्लीनिकल प्रैक्टिस | यूनानी डॉक्टर / हकीम | मरीजों का निदान, यूनानी इलाज, डाइट-लाइफस्टाइल गाइडेंस |
| सरकारी AYUSH विभाग | यूनानी मेडिकल ऑफिसर | सरकारी अस्पताल, डिस्पेंसरी, हेल्थ प्रोग्राम |
| प्राइवेट हॉस्पिटल/क्लिनिक | यूनानी फिजिशियन | OPD/IPD मरीज इलाज, हर्बल थेरेपी |
| प्राइवेट प्रैक्टिस | क्लिनिक ओनर | खुद का यूनानी क्लिनिक, कंसल्टेशन |
| रिसर्च सेक्टर | रिसर्चर / क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट | यूनानी दवाओं और इलाज पर रिसर्च |
| एकेडेमिक्स | लेक्चरर / असिस्टेंट प्रोफेसर | यूनानी कॉलेज में पढ़ाना (MD के बाद) |
| फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री | यूनानी ड्रग एक्सपर्ट / R&D | यूनानी दवा निर्माण, क्वालिटी कंट्रोल |
| पब्लिक हेल्थ | कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर | हेल्थ प्रोग्राम, प्रिवेंटिव केयर |
| वेलनेस & हर्बल सेक्टर | वेलनेस कंसल्टेंट | नेचुरल थेरेपी, लाइफस्टाइल डिसऑर्डर मैनेजमेंट |
| इंटरनेशनल अवसर | यूनानी डॉक्टर (गल्फ देशों के लिए) | इंटीग्रेटेड मेडिसिन सेंटर में प्रैक्टिस |
BUMS के बाद सरकारी जॉब के अवसर
BUMS करने के बाद भारत में सरकारी सेक्टर में काफी अच्छे करियर ऑप्शन मिलते हैं क्योंकि यूनानी डॉक्टर AYUSH हेल्थ सिस्टम का हिस्सा होते हैं। केंद्र और राज्य सरकार विशेषतः हेल्थ सेक्टर में नियमित रूप से BUMS ग्रेजुएट्स के लिए भर्ती निकालती हैं।
सबसे प्रमुख सरकारी जॉब आयुष मेडिकल ऑफिसर (यूनानी) की होती है। कई राज्यों में NHM (नेशनल हेल्थ मिशन) और स्टेट हेल्थ सोसाइटी द्वारा BUMS डॉक्टरों की भर्ती की जाती है। उदाहरण के लिए बिहार स्टेट हेल्थ सोसाइटी ने AYUSH मेडिकल ऑफिसर (BAMS/BHMS/BUMS) के पदों पर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया CBT और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से होता है।
एक सरकारी यूनानी मेडिकल ऑफिसर को मिलने वाली अनुमानित सैलरी 7वे वेतन और पद के आधार पर INR 56,100 – INR 1,77,500 मिलता है, जिसमें प्रमुख भत्ते जैसे DA, HRA और मेडिकल भत्ते आदि शामिल होते हैं।
BUMS कोर्स के बाद मिलने वाली अनुमानित सैलरी
यहाँ BUMS कोर्स के बाद मिलने वाली सैलरी की जानकारी को निम्नलिखित टेबल में दिया गया है। ये अनुमानित सैलरी कंपनी और जॉब प्रोफाइल के साथ-साथ कर्मचारी के अनुभवों के आधार पर भी बदलती रहती है। इसके लिए आप किसी कंपनी में आवेदन करने से पहले वहां उस पद के लिए मिलने वाली सैलरी को जरूर ध्यान पूर्वक देखें –
| जॉब रोल | अनुमानित औसत वार्षिक सैलरी (INR) | अनुमानित मासिक सैलरी (INR) |
| यूनानी डॉक्टर / प्रैक्टिशनर | INR 3.4 लाख – 5 लाख | INR 28,000 – INR 35,000 |
| मेडिकल ऑफिसर (AYUSH/यूनानी) | INR 6 लाख – INR 12 लाख | INR 50,000 – INR 1,00,000 |
| जूनियर मेडिकल ऑफिसर | INR 2 लाख – INR 10 लाख | INR 20,000 – INR 80,000 |
| लेक्चरर / टीचिंग | INR 4 लाख – INR 5 लाख | INR 30,000 – INR 45,000 |
| रिसर्चर / क्लिनिकल रिसर्चर | INR 8 लाख – INR 12 लाख | INR 65,000 – INR 1,00,000 |
| प्राइवेट प्रैक्टिस (क्लिनिक) | INR 3 लाख – INR 6 लाख | INR 25,000 – INR 60,000 या उससे अधिक |
यह भी पढ़ें – होम्योपैथी डॉक्टर कैसे बनें: छात्रों के लिए करियर गाइड
BUMS बनाम BAMS में अंतर
BUMS और BAMS दोनों ही आयुष मंत्रालय के तहत प्रतिष्ठित मेडिकल डॉक्टर लेवल ग्रेजुएट लेवल के प्रोग्राम हैं, लेकिन दोनों कोर्स अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों और करियर स्कोप के साथ आपकी ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यहाँ दी गई निम्नलिखित टेबल में आपके लिए BUMS बनाम BAMS में अंतर को समझाया गया है, ताकि आप अपनी रूचि के आधार पर अपने लिए सही कोर्स का चयन कर सकें –
| आधार | BUMS (बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) | BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
| चिकित्सा प्रणाली | यूनानी चिकित्सा पद्धति (यूनानी मेडिसिन) | आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) |
| रेगुलेटिंग बॉडी | NCISM (आयुष मंत्रालय) | NCISM (आयुष मंत्रालय) |
| कुल अवधि | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष पढ़ाई और 1 वर्ष इंटर्नशिप) | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष पढ़ाई और 1 वर्ष इंटर्नशिप) |
| एडमिशन योग्यता | 12वीं PCB और NEET अनिवार्य | 12वीं PCB और NEET अनिवार्य |
| मूल सिद्धांत | चार ह्यूमर थ्योरी (रक्त, कफ, पीला पित्त, काला पित्त) | त्रिदोष सिद्धांत (वात, पित्त, कफ) |
| उपचार पद्धति | इलाज-बिल-तदबीर, हिजामा, आहार चिकित्सा, यूनानी दवाएं | पंचकर्म, हर्बल दवा, योग, आहार (डाइट) |
| प्रमुख विषय | यूनानी मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, सर्जरी, डायग्नोसिस | आयुर्वेद एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी, सर्जरी, पंचकर्म |
| चिकित्सा माध्यम | यूनानी दवाइयाँ, प्राकृतिक पदार्थ | आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, प्राकृतिक उपचार |
| डिग्री के बाद पद | हकीम, यूनानी डॉक्टर, कंसल्टेंट, फार्मासिस्ट | वैद्य, आयुर्वेदिक डॉक्टर, कंसलटेंट, पंचकर्म स्पेशलिस्ट |
| सरकारी जॉब अवसर | AYUSH हॉस्पिटल्स, रिसर्च, डिस्पेंसरी | AYUSH हॉस्पिटल्स, रिसर्च, पंचकर्म सेंटर्स |
| प्रैक्टिस का प्रकार | यूनानी चिकित्सा प्रैक्टिस | आयुर्वेद चिकित्सा प्रैक्टिस |
| पढ़ाई का फोकस | यूनानी फिलॉसफी और मॉडर्न मेडिसिन मिक्स | आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस मिक्स |
| लोकप्रियता (भारत) | सीमित लेकिन स्थिर | ज्यादा लोकप्रिय और व्यापक |
| पोस्ट ग्रेजुएशन | MD यूनानी | MD आयुर्वेद |
FAQs
BUMS का फुल फॉर्म है बैचलर ऑफ़ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी यह भारत में आयुष मंत्रालय के तहत रेगुलेटेड होता है। कोर्स में यूनानी सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन पढ़ाया जाता है, जिसमें Ilaj-bil-Dawa, Ilaj-bil-Ghiza और Ilaj-bit-Tadbeer शामिल हैं। यह MBBS से अलग है और इसमें यूनानी सिद्धांतों और क्लिनिकल प्रैक्टिस पर फोकस किया जाता है।
भारत में अधिकांश राज्यों में BUMS में प्रवेश के लिए NEET-UG क्वालीफाई करना जरूरी है। कुछ प्राइवेट कॉलेज में राज्य काउन्सलिंग के आधार पर सीट मिल सकती है, लेकिन यह रेयर और लिमिटेड है। NEET के बिना एडमिशन पाने वाले स्टूडेंट्स को डिग्री रिकग्निशन और फ्यूचर करियर में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हाँ, 12वीं के बाद आप BUMS कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप 12वीं में साइंस स्ट्रीम फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) के साथ पास हुए हों। इसके अलावा BUMS कोर्स में एडमिशन के लिए NEET-UG क्वालिफाई करना जरूरी है, क्योंकि अब इस कोर्स में प्रवेश AYUSH काउंसलिंग के माध्यम से होता है।
नहीं, BUMS और MBBS दोनों प्रोग्राम्स बराबर नहीं हैं। MBBS मॉडर्न एलोपैथिक मेडिसिन पर आधारित होता है, जबकि BUMS यूनानी सिस्टम पर। दोनों की पढ़ाई, इलाज का तरीका और करियर विकल्प अलग-अलग होते हैं, लेकिन अपने-अपने क्षेत्र में इन दोनों की डिग्री की वैल्यू और स्कोप अच्छा है।
हाँ, विदेश में BUMS जैसा कोर्स सीधे उसी नाम से बहुत कम देशों में उपलब्ध होता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से यूनानी चिकित्सा प्रणाली पर आधारित है। लेकिन कुछ देशों में ट्रेडिशनल मेडिसिन या अल्टरनेटिव मेडिसिन से जुड़े समान प्रोग्राम मिल सकते हैं। लेकिन आपको एडमिशन से पहले कोर्स की मान्यता, सिलेबस और भारत में प्रैक्टिस की वैधता जरूर जांच लेनी चाहिए।
यह भी पढ़ें – बीएचएम कोर्स: योग्यता और एडमिशन प्रक्रिया, प्रमुख विषय, करियर स्कोप
हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको BUMS कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

One app for all your study abroad needs



60,000+ students trusted us with their dreams. Take the first step today!