ईबुक vs पेपर बुक्स : जानें क्या है बेस्ट ऑप्शन

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ईबुक vs पेपर बुक्स

जब हमारे लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है, तो किताबें हमारा साथ देती हैं। जैसे-जैसे हम किताब के पन्ने पलटते हैं, दुनिया के बारे में और जानने लगते हैं, किताबें अनदेखी दुनिया का एक सीक्रेट दरवाजा है। क्या पन्ने पलट जाते हैं या आसानी से स्वाइप हो जाते हैं? टेक्नोलॉजी आने के साथ, दुनिया भर के रीडर्स के लिए प्रिंटेड किताबें और ई-बुक्स दोनों ऑप्शन मौजूद है। ई-बुक्स ने आते ही दुनिया में एक अलग लहर शुरू की और अपने अलग-अलग फायदों के कारण रीडर्स के मन में एक जगह बना ली है। दोनों में से किसी एक को चुनना उलझन भी पैदा कर सकता है, ईबुक vs पेपर बुक्स , ये मुकाबला खत्म नहीं होने वाला है। यदि आप उन लाखों रीडर्स में से एक हैं जो इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो क्लब में ज्वाइन हों और एक संतुष्ट जवाब चुनने के लिए इस ब्लॉग को ज़रूर पढ़ें।

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ईबुक vs पेपर बुक्स

समीक्षा (Criteria) ई-बुक्स प्रिंटेड बुक्स
पोर्टेबल           ज्यादा पोर्टेबल  होती हैं कम पोर्टेबल होती हैं
स्टोरेज कम स्टोरेज की जरूरत होती है ज्यादा जगह लेती हैं
फीचर्स ज्यादा फीचर्स होते हैं फीचर्स नहीं होते 
किताबों की कीमत कम दाम में खरीद सकते हैं ज्यादा महंगी होती हैं
कनेक्टिविटी जरूरी है जरूरी नहीं है
ध्यान-केंद्रित/ फोकस लिंक्स के कारण ध्यान भटक सकता है  ज्यादा ध्यान से पढ़ सकते हैं
आई-स्ट्रेन ज्यादा आई-स्ट्रेन होता है  कम स्ट्रेन होता है
शुरुआती खर्च ज्यादा महंगा होता है  कम महंगा होता है
चार्जिंग समय-समय पर जरूरी होती है जरूरी नहीं है
उपलब्धता किसी भी समय आसानी से उपलब्ध हो सकती है हर समय उपलब्ध नहीं होती

यह ईबुक vs पेपर बुक्स बुक के बीच के अंतर पर कुछ पॉइंट्स हैं। आइए इनमें से कुछ पॉइंट्स को विस्तार से जानें और एक साफ तस्वीर को समझने की कोशिश करें।

ईबुक vs पेपर बुक्स पोर्टेबिलिटी

आजकल किसी भी चीज़ का पोर्टेबल होना एक ज़रूरी फीचर है। टेक्नोलॉजी की प्रगति बढ़ने के साथ यह भी ज़रूरी है कि लोग अपनी किताबों को अपने साथ कहीं-भी ले जाने में सक्षम रहें। प्रिंटेड किताबें सख्त होती हैं और इसलिए उनमें पोर्टेबिलिटी भी कम होती है। इ-बुक्स काफी पोर्टेबल होती हैं आप इन्हें कहीं-भी ले जा सकते हैं। प्रिंटेड बुक्स को आप एक बार में सीमित मात्रा में ही ले जा सकते हैं, लेकिन ई-बुक्स हज़ार या उससे भी ज़्यादा संख्या में एक-साथ ले जाई जा सकती हैं। इसलिए पोर्टेबिलिटी ई-बुक्स को एक शानदार ऑप्शन बनाती है।    

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ईबुक vs पेपर बुक्स की विशेषताएं

ई-बुक रीडर्स के पास ज्यादा फीचर्स होते हैं, जो टेक्नोलॉजी के साथ बेहतर हो रहे हैं और ऐसा प्रिंटेड बुक्स में होना संभव नहीं है। बुकमार्किंग, हाइलाइटिंग और नोट-मेकिंग से लेकर इन-बिल्ट डिक्शनरी तक- ई-बुक्स में यह सभी फीचर्स उपलब्ध होते हैं। प्रिंटेड बुक्स में यह फीचर्स उपलब्ध नहीं होते। टैक-सैवी और तेज रफ्तार दुनिया के मॉडर्न लोगों के लिए ये बेहतर ऑप्शन है। 

ईबुक vs पेपर बुक्स के बीच कनेक्टिविटी

टेक्नोलॉजी वाली इस दुनिया मे, रीडर्स को ई-बुक्स पढ़ने के लिए हर समय कनेक्टिविटी की ज़रूरत होती है। हालांकि, प्रिंटेड बुक्स वाले रीडर्स को पढ़ने के लिए किसी कनेक्टिविटी की जरूरत नहीं होती। प्रिंटेड किताबें इस लिहाज से भरोसेमंद होती हैं और किसी भी तरह की कनेक्टिविटी के बिना, कभी-भी कहीं-भी ले जाई जा सकती हैं। 

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ईबुक vs पेपर बुक्स : आई-स्ट्रेन

ज्यादा देर तक ई-बुक्स के इस्तेमाल से आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रिंटेड बुक्स इस परेशानी से बचा सकती हैं, क्योंकि इनसे आंखों पर जोर नहीं पड़ता और ज्यादा पढ़ने वाले रीडर्स के लिए यह बेस्ट ऑप्शन है। लो-लाइट(low light) और एंटी-ग्लेयर (anti-glare) का ऑप्शन होने के बावजूद, ई-बुक्स आंखों पर जोर डाल सकती हैं और इन्हें सनलाइट में पढ़ना मुश्किल होता है। लेकिन प्रिंटेड बुक्स में इस तरह की परेशानी कभी नहीं होती। आप प्रिंटेड बुक का पेज खोल सकते हैं और उसकी स्टोरी कहीं-भी किसी-भी लाइट में आसानी से पढ़ सकते हैं।

ई-बुक्स या प्रिंटेड बुक्स : उपलब्धता

क्या आपने कभी कोई किताब ऑर्डर की है और उसका बेसब्री से इंतज़ार किया है? इंतज़ार कभी खत्म नहीं होता, है ना? ई-बुक्स से इस तरह की चिंता को दूर किया जा सकता है, क्योंकि ई-बुक्स कुछ ही पलों में डिजिटल माध्यम से ई-बुक्स का एक्सेस दे देती हैं। ई-बुक्स कभी-भी आउट ऑफ स्टॉक नहीं हो सकती हैं और न ही इनका कोई वेटिंग टाइम होता है। अच्छा, है ना? प्रिंटेड बुक्स के साथ ऑर्डर करने और खरीदने से लेकर आखिर में किताब को पढ़ने तक एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया होती है, जो अक्सर थकान-भरी महसूस हो सकती है।

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