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उत्तर: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता “उत्साह” में नाद-सौंदर्य का अत्यंत प्रभावशाली प्रयोग देखने को मिलता है। नाद-सौंदर्य उन शब्दों को कहा जाता है, जिनके उच्चारण से ही पाठक के मन में एक विशेष ध्वनि, गति और ऊर्जा का अनुभव होने लगता है। कविता में बादलों की गर्जना, गति और शक्ति को उभारने के लिए कवि ने ध्वन्यात्मक शब्दों का सुंदर चयन किया है। इस कविता में नाद-सौंदर्य के प्रमुख उदाहरणों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है –
- “घेर-घेर घोर गगन” में ‘घ’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति से बादलों की गहरी गर्जना और आकाश में फैलाव का सशक्त चित्र उभरता है।
- “ललित-ललित काले घुंघराले” में ‘ल’ वर्ण की पुनरावृत्ति बादलों की कोमलता, सुंदरता और उनकी लहराती गति को मधुर ध्वनि के साथ प्रस्तुत करती है।
- “बाल कल्पना के से पाले” पंक्ति में शब्दों का प्रवाह इतना सहज है कि कल्पनाएँ मानो हवा में तैरती हुई प्रतीत होती हैं।
- “विद्युत छवि उर में” और “वज्र छिपा” जैसे शब्दों में कठोर ध्वनियों का प्रयोग बिजली की चमक, शक्ति और क्रांतिकारी ऊर्जा को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है।
इस प्रकार कविता में प्रयुक्त ये शब्द और वाक्यांश न केवल दृश्य को सजीव बनाते हैं, बल्कि ध्वनि के माध्यम से कविता में उत्साह और ओज का संचार भी करते हैं। यही इस कविता का नाद-सौंदर्य है।

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