कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ लिए कहता है क्यों?

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उत्तर- कवि बादल से फुहार या रिमझिम बरसने के लिए नहीं, बल्कि ‘गरजने’ के लिए इसलिए कहता है क्योंकि यहाँ बादल सिर्फ़ प्रकृति नहीं है, बल्कि जनता की आवाज़ का प्रतीक है। फुहार और रिमझिम कोमल होती हैं, वे थोड़ी राहत तो देती हैं, लेकिन समाज में कोई हलचल नहीं मचातीं। इसके उलट, गरजना शक्ति, उत्साह और जागृति का संकेत है, ऐसी आवाज़ जो सोए हुए लोगों को जगा दे।

निराला क्रांतिकारी चेतना के कवि थे। वे समाज की पीड़ा और अन्याय को देखकर शांत रह जाने के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि बदलाव के लिए सिर्फ़ सुंदर शब्द नहीं, बल्कि जोरदार चेतना चाहिए। इसलिए वे बादल से कहते हैं कि वह गरजे, ताकि पीड़ित और दबे हुए लोगों को आशा और साहस मिले और समाज की जड़ता टूटे।इस तरह ‘गरजना’ शब्द अपने भीतर क्रांति, विरोध और परिवर्तन का भाव समेटे हुए है। 

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