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जब कवि बच्चे की दंतुरित मुस्कान देखता है, तो उसका मन भीतर तक छू जाता है। उस मासूम मुस्कान में कोई बनावट नहीं होती, बस एक सच्ची और निश्छल खुशी होती है। कवि के मन में अचानक एक अपनापन-सा भर जाता है और उसके चेहरे पर भी हल्की मुस्कान आ जाती है। उस पल उसे जीवन की सारी थकान और चिंताएँ जैसे भूल जाती हैं। बच्चे की यह मुस्कान कवि के मन को शांत कर देती है और उसे सरल, स्वच्छ भावनाओं से जोड़ देती है। यह मुस्कान कवि के भीतर छिपी कोमलता को जगा देती है और उसे जीवन की सच्ची सुंदरता का एहसास कराती है।
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