यूके बनाम भारत: यूके और भारत की शिक्षा में मुख्य अंतर

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यूके और भारत की शिक्षा में मुख्य अंतर

हायर स्टडी की प्लानिंग करते समय भारतीय छात्रों को यह समझना चाहिए कि भारत और यूके की शिक्षा प्रणालियाँ किस तरह काम करती हैं और पढ़ाई का अनुभव दोनों देशों में कैसे अलग होता है। कई बार शिक्षा प्रणाली को समझे बिना केवल बाहरी जानकारी के आधार पर तुलना कर ली जाती है, जिससे सही निर्णय लेना मुश्किल हो सकता है।

यह ब्लॉग आपको यूके और भारत की पढ़ाई के बीच वास्तविक अंतर समझाने के लिए लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी एक सिस्टम को बेहतर साबित करना नहीं, बल्कि आपको यह समझने में मदद करना है कि कौन-सा सिस्टम आपके लिए सही है।

भारत और यूके में शिक्षा व्यवस्था की फिलॉसफी

भारत और यूके की शिक्षा व्यवस्था को समझने के लिए आपको दोनों देशों में शिक्षा के मूल दर्शन यानी उनकी फिलॉसफी के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। यहाँ दोनों देशों में शिक्षा व्यवस्था का दृष्टिकोण दिया गया है, जो आपका मार्गदर्शन कर सकता है:-

भारत की शिक्षा व्यवस्था का दृष्टिकोण

भारत की शिक्षा प्रणाली पारंपरिक रूप से एक स्ट्रक्चर्ड और एग्जाम-सेंट्रिक मॉडल पर आधारित रही है। यहाँ पढ़ाई में तय पाठ्यक्रम, शिक्षक-केंद्रित कक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के माध्यम से मूल्यांकन पर अधिक ज़ोर दिया जाता है। सरकारी संस्थाएँ पाठ्यक्रम और मान्यता से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं, जिससे सिस्टम में एकरूपता बनी रहती है। यह सिस्टम उन छात्रों के लिए उपयोगी होता है जिन्हें स्पष्ट मार्गदर्शन चाहिए, नियमित पढ़ाई की आदत है और सेल्फ-स्टडी में कठिनाई होती है।

यूके की शिक्षा व्यवस्था का दृष्टिकोण

यूके की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह स्टूडेंट-सेंट्रिक और रिसर्च-ओरिएंटेड मानी जाती है। यहाँ पढ़ाई का मतलब सिर्फ जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि सोचना, तर्क करना और अपने विचार बनाना होता है। इसकी मुख्य विशेषता इंडिपेंडेंट लर्निंग पर ज़ोर, क्रिटिकल थिंकिंग और एनालिसिस को प्राथमिकता, कम लेक्चर आवर्स, ज़्यादा सेल्फ-स्टडी, करिकुलम डिज़ाइन में यूनिवर्सिटीज़ की ऑटोनोमी है। यह मॉडल उन छात्रों के लिए बेहतर होता है जो खुद से सीखने में सहज हों, सवाल पूछने और रिसर्च करने में रुचि रखते हों, तय ढांचे के बजाय फ्लेक्सिबिलिटी चाहते हों।

भारत बनाम यूके की शिक्षा संरचना तुलना

भारत में हायर एजुकेशन एक सेंट्रलाइज्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत संचालित होती है। UGC, AICTE, NMC जैसी संस्थाएँ पाठ्यक्रम की मंज़ूरी, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ की मान्यता एवं गुणवत्ता नियंत्रण का कार्य करती हैं। जबकि यूके में शिक्षा की गुणवत्ता पर मुख्य फोकस होता है, लेकिन यूनिवर्सिटीज़ को कोर्स डिज़ाइन, असेसमेंट पैटर्न, टीचिंग मेथोडोलॉजी में काफी स्वतंत्रता दी जाती है। नीचे दी गई तालिका भारत और यूके की शिक्षा संरचना के प्रमुख अंतर को एक साथ समझने में मदद करती है:-

विशेषताएँभारत (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार)यूके (यूनाइटेड किंगडम – इंग्लैंड मॉडल)
मूल संरचना5+3+3+4 अकादमिक मॉडलKS1, KS2, KS3, KS4 (की स्टेज) मॉडल
आयु सीमा3 से 18 वर्ष (अनिवार्य शिक्षा)4/5 से 16 वर्ष (अनिवार्य शिक्षा)
प्रारंभिक चरण (फाउंडेशन स्टेज)3-8 वर्ष (प्री-स्कूल से ग्रेड 2)4-5 वर्ष (रिसेप्शन, की स्टेज 1)
माध्यमिक शिक्षाग्रेड 9-12 (2 चरणों में, विषयों में लचीलापन)14-16 वर्ष (की स्टेज 4 – GCSEs की तैयारी)
बोर्ड परीक्षाएँबहु-विषयक, वर्ष में दो बार हो सकती हैंGCSEs (16 वर्ष की आयु में), A-Levels (18 वर्ष की आयु में)
उच्च शिक्षा (यूनिवर्सिटीज़)3 या 4 वर्षीय स्नातक डिग्री (फ्लेक्सिबल एंट्री/एग्जिट)3 वर्षीय स्नातक डिग्री (स्कॉटलैंड में 4 वर्ष)
शिक्षण शैलीधीरे-धीरे व्यावहारिक की ओर बढ़ रही हैआलोचनात्मक सोच और स्वतंत्र शोध पर केंद्रित
राष्ट्रीय पाठ्यक्रमएकरूपता लाने का प्रयास जारी (NCF)नेशनल करिकुलम अत्यधिक संरचित

भारत बनाम यूके: कोर्स अवधि और अकादमिक वर्क की तुलना

यूके में कोर्स की कम अवधि का अर्थ यह नहीं होता कि पढ़ाई आसान है, बल्कि वहां कम समय में अपेक्षाकृत अधिक अकादमिक वर्क करना पड़ता है। जबकि भारत में कई संस्थानों में पढ़ाई का फोकस थ्योरी और तय पाठ्यक्रम पर अधिक देखा जाता है, जबकि यूके में शिक्षण पद्धति में स्वतंत्र अध्ययन और विश्लेषणात्मक सोच को प्राथमिकता दी जाती है। भारत और यूके की शिक्षा प्रणाली में सबसे बड़ा अंतर कोर्स की अवधि और अकादमिक दबाव को लेकर है, इसकी तुलना को आप दी गई तालिका में समझ सकते हैं:-

मापदंडभारत में पढ़ाई (India)यूके में पढ़ाई (UK)
स्नातक (UG) कोर्स अवधिअधिकतर 3 से 4 वर्ष (जैसे: B.A/B.Sc/B.Com की अवधि 3 वर्ष, B.Tech की अवधि 4 वर्ष)अधिकांश UG डिग्री 3 वर्ष में पूरी होती हैं
स्नातकोत्तर (PG) कोर्स अवधिसामान्यतः 2 वर्ष (M.A, M.Sc, MBA आदि)ज़्यादातर मास्टर डिग्री केवल 1 वर्ष की होती हैं
पीएचडी / शोध आधारित कोर्सलगभग 3 से 5 वर्ष, शोध की प्रकृति पर निर्भरआमतौर पर 3 से 4 वर्ष
कोर्स संरचनासेमेस्टर / वार्षिक प्रणाली, लेक्चर आधारित पढ़ाईमॉड्यूलर और क्रेडिट आधारित सिस्टम
अकादमिक दबाव (वर्कलोड)परीक्षा-केंद्रित दबाव, सेमेस्टर के अंत में ज़्यादा दबावपूरे साल लगातार दबाव, नियमित असाइनमेंट और डेडलाइन
सेल्फ-स्टडी की आवश्यकताकम से मध्यम, ज़्यादातर पढ़ाई कक्षा में समझाई जाती हैबहुत अधिक, क्लास से बाहर पढ़ाई अनिवार्य
मूल्यांकन का तरीकालिखित परीक्षाएँ, आंतरिक टेस्टअसाइनमेंट, प्रोजेक्ट, निबंध, प्रेज़ेंटेशन
पढ़ाई की गति (अकादमिक पेस)अपेक्षाकृत धीमी, समय लेकर पढ़ाया जाता हैतेज़ गति, कम समय में ज़्यादा सिलेबस

भारत बनाम यूके में शिक्षण पद्धति का अंतर

भारत में पढ़ाई अधिक थ्योरी ओरिएंटेड है, जहां सिलेबस को समझने और याद करने पर जोर दिया जाता है। जबकि यूके में पढ़ाई इंडिपेंडेंट और रिसर्च-बेस्ड होती है, जिससे छात्र कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझते हैं, जैसे:-

पहलू / पैरामीटरभारत की शिक्षण पद्धतियूके की शिक्षण पद्धति
मुख्य दृष्टिकोणशिक्षक-केंद्रित; शिक्षकों से मुख्य ज्ञान प्राप्ति, लेक्चर पर आधारितछात्र-केंद्रित; शिक्षक फैसिलिटेटर, इंटरैक्टिव लर्निंग पर जोर 
अध्ययन का फोकसयाद करना और सिलेबस पूरा करनाक्रिटिकल थिंकिंग, रीजनिंग और कॉंसेप्ट समझने पर ज़ोर
पाठ्यक्रम की लचीलापनसीमित; प्रिडिफाइंड सिलेबस का अनुसरणअधिक; विषयों में फ्लेक्सिबिलिटी, इलेक्टिव्स का विकल्प
मूल्यांकन प्रणालीउच्च स्तरीय परीक्षाएं, सत्र के अंत पर विशेष ध्यानकंटीन्यूअस असेसमेंट, एसेज, रिसर्च, प्रेजेंटेशंस
कक्षा में सहभागितापैसिव लर्निंग; छात्र सुनते और नोट्स लेते हैंचर्चा आधारित, समूह कार्य, आलोचनात्मक संवाद
प्रौद्योगिकी का उपयोगइंफ्रास्ट्रक्चर चैलेंज; इंफ्रास्ट्रक्चर का स्तर संस्थान पर निर्भर करता है; तकनीकी इंटीग्रेशन अलग-अलग हो सकता है।टेक-इंटीग्रेटेड क्लासरूम्स, ऑनलाइन रिसोर्सेज, रिसर्च टूल्स
स्वतंत्र अध्ययन और शोधकम; फाइनल ईयर प्रोजेक्ट्स में सीमित अवसरहाई एम्फेसिस; इंडिपेंडेंट स्टडी और रिसर्च अपेक्षित
प्रायोगिक और अनुभव आधारित सीखनासीमित प्रयोग और हैंड्स-ऑन अनुभवकेस स्टडीज़, लैब्स, रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशन पर फोकस
प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत मूल्यांकनकेवल एग्जाम स्कोर्स; लिमिटेड पर्सनलाइज्ड फीडबैककंटीन्यूअस फीडबैक, पर्सनलाइज्ड असेसमेंट

FAQs

क्या यूके और भारत की शिक्षा प्रणाली एक-दूसरे से अलग हैं?

यूके और भारत की पढ़ाई में सबसे बड़ा अंतर टीचिंग स्टाइल और असेसमेंट में है। यूके में इंडिपेंडेंट लर्निंग और रिसर्च पर ज़ोर दिया जाता है, जबकि भारत में स्ट्रक्चर्ड सिलेबस और एग्जाम पर ज़ोर दिया जाता है।

क्या यूके में पढ़ाई भारत से बेहतर है?

यूके में पढ़ाई भारत से बेहतर हो ऐसा जरूरी नहीं है। किसी भी देश में पढ़ाई करना आपके इंट्रेस्ट, बजट और करियर स्कोप पर निर्भर करता है। यूके की पढ़ाई अलग होती है, बेहतर तभी है जब स्टूडेंट का लर्निंग स्टाइल और करियर गोल उससे मैच करे।

क्या यूके की डिग्री भारत में मान्य होती है?

हाँ, लेकिन कुछ रेगुलेटेड प्रोफेशंस में इक्विवेलेंट या एडिशनल एग्जाम की जरूरत होती है। इसके लिए ये निर्भर करता है कि आपके पास किस कोर्स की डिग्री है।

आशा है कि इस लेख में आप यूके और भारत की पढ़ाई में मुख्य अंतर को समझ पाए होंगे। ऐसे ही स्टडी अब्रॉड से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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