Tribhuvan Mein Kaun Sa Samas Hai – जानिए त्रिभुवन में कौन सा समास है?

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Tribhuvan Mein Kaun Sa Samas Hai

क्या आप सोच रहे हैं Tribhuvan Mein Kaun Sa Samas Hai? तो आपको बता दें कि त्रिभुवन में द्विगु समास है। यह जानने से पहले कि द्विगु समास क्या होता है, यह जानते हैं कि समास किसे कहते हैं? अलग अर्थ रखने वाले दो शब्दों या पदों (पूर्वपद तथा उत्तरपद) के मेल से बना तीसरा नया शब्द या पद समास या समस्त पद कहलाता है तथा वह प्रक्रिया जिसके द्वारा ‘समस्त पद’ बनता है, समास-प्रक्रिया कही जाती है। त्रिभुवन में कौन सा समास है यह तो आप जान गए हैं, आप इस ब्लॉग में आगे जानेंगे त्रिभुवन का समास विग्रह, द्विगु समास क्या होता है और साथ ही द्विगु समास के कुछ अन्य उदाहरण। 

Tribhuvan Mein Kaun Sa Samas Hai?

त्रिभुवन में द्विगु समास होता है और इसमें पहला पद संख्यावाचक है।

द्विगु समास क्या होता है?

यदि किसी सामासिक पद में पहला पद संख्यावाचक शब्द हो और दूसरा पद संज्ञा शब्द हो तथा पूरा पद समूह का बोध करवाए तो उसे द्विगु समास कहते हैं। जब किसी सामासिक पद का समास विग्रह करने पर दोनों पदों के अन्त में ‘का समूह या का समाहार’ आता है, तो वहां द्विगु समास होता है। ‘द्विगु समास’ के उदाहरण इस प्रकार हैं:

समस्तपदसमास-विग्रह
दुराहादो राहों का समाहार
सतसईसात सौ दोहों का समाहार
तिरंगातीन रंगों का समाहार
दशाननदस आननों (मुखों) का समाहार
पंचवटीपाँच वट वृक्षों का समूह
सप्ताहसात दिनों का समूह
पंजाबपाँच आबों का समाहार
अठन्नीआठ आनों का समाहार
नवग्रहनौ ग्रहों का समाहार
नवरत्ननव रत्नों का समाहार
शताब्दीसौ अब्दों (वर्षों) का समाहार
नवरात्रनव (नौ) रातों का समाहार
पंचमुखीपाँच मुखों का समाहार
त्रिफलातीन फलों का समाहार

त्रिभुवन शब्द का समास विग्रह

त्रिभुवन शब्द का समास विग्रह तीन भुवनों का समाहार होगा। त्रिभुवन शब्द में पहला पद यानी त्रि संख्यावाची है और दूसरा पद यानी भुवन संज्ञा है।

द्विगु और कर्मधारय समास में अंतर

द्विगु समास तथा कर्मधारय समास में सबसे बड़ा अंतर यही है कि द्विगु समास का पूर्वपद संख्यावाची विशेषण होता है जबकि कर्मधारय समास का पूर्वपद विशेषण हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि द्विगु समास का उत्तरपद किसी समूह का बोध कराता है। यदि विग्रह करते समय उत्तरपद के साथ समूह या समाहार शब्द का प्रयोग नहीं किया गया हो तो पूर्वपद संख्यावाची होते हुए भी यह कर्मधारय समास कहलाएगा।

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