भारत में लोको पायलट बनना एक प्रतिष्ठित सरकारी करियर विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें स्थिर नौकरी, नियमित वेतन वृद्धि और जिम्मेदारी भरा तकनीकी पद मिलता है। हर भर्ती चक्र में लाखों उम्मीदवार RRB ALP परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन चयन सीमित सीटों पर होता है, इसलिए सही जानकारी और तैयारी दोनों जरूरी हैं।
लोको पायलट बनने का एक स्पष्ट और तय रास्ता होता है। आमतौर पर छात्र 10वीं के बाद संबंधित ट्रेड में ITI या इंजीनियरिंग डिप्लोमा करते हैं, फिर रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा आयोजित असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) भर्ती प्रक्रिया पास करते हैं। चयन के बाद ट्रेनिंग पूरी करने और कुछ वर्षों के अनुभव के आधार पर प्रमोशन के माध्यम से लोको पायलट पद तक पहुँचा जाता है।
भारतीय रेलवे में लोको पायलट एक जिम्मेदार तकनीकी पद है, जिसका मुख्य काम ट्रेन को सुरक्षित, समय पर और निर्धारित नियमों के अनुसार चलाना होता है। इस पद पर चयन सीधे नहीं होता, बल्कि लिखित परीक्षा, साइकोलॉजिकल एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT), दस्तावेज सत्यापन और सख्त मेडिकल फिटनेस जैसे चरणों से गुजरना पड़ता है।
इस लेख में लोको पायलट बनने की पूरी प्रक्रिया को आसान और स्पष्ट तरीके से समझाया गया है, ताकि छात्र शुरुआत से लेकर चयन, ट्रेनिंग, सैलरी और आगे के करियर विकल्पों तक हर चरण को ठीक से समझ सकें।
This Blog Includes:
- लोको पायलट कौन होता है और उसका काम क्या होता है?
- क्या 12वीं के बाद लोको पायलट बन सकते हैं?
- RRB ALP परीक्षा के लिए आवश्यक योग्यता
- लोको पायलट बनने के लिए आवश्यक स्किल्स
- लोको पायलट कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप पूरी प्रक्रिया)
- स्टेप 1: 10वीं के बाद सही तकनीकी योग्यता चुनें
- स्टेप 2: RRB ALP भर्ती नोटिफिकेशन पर नजर रखें और आवेदन करें
- स्टेप 3: CBT-1 (पहला कंप्यूटर आधारित टेस्ट) की तैयारी करें
- स्टेप 4: CBT-2 (टेक्निकल + एप्टीट्यूड बेस) में प्रदर्शन तय करता है मेरिट
- स्टेप 5: CBAT (कंप्यूटर बेस्ड एप्टीटुड टेस्ट) पास करना अनिवार्य
- स्टेप 6: दस्तावेज सत्यापन और सख्त मेडिकल फिटनेस
- स्टेप 7: चयन के बाद रेलवे ट्रेनिंग और वास्तविक जॉब की शुरुआत
- स्टेप 8: अनुभव और प्रमोशन के माध्यम से लोको पायलट पद तक पहुँचना
- लोको पायलट को मिलने वाली अनुमानित सैलरी
- लोको पायलट के रूप में करियर स्कोप
- FAQs
लोको पायलट कौन होता है और उसका काम क्या होता है?
लोको पायलट भारतीय रेलवे का वह कर्मचारी होता है जो इंजन चलाने की जिम्मेदारी संभालता है। उसका मुख्य काम ट्रेन को सुरक्षित तरीके से, तय समय और नियमों के अनुसार चलाना होता है। वह अकेले काम नहीं करता, बल्कि असिस्टेंट लोको पायलट के साथ मिलकर इंजन की जाँच करता है और सफर के दौरान जरूरी तकनीकी बातों पर नजर रखता है।
रेलवे में अनुभव बढ़ने के साथ लोको पायलट अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। शुरुआत में आमतौर पर मालगाड़ी चलाने की जिम्मेदारी मिलती है, जिसे गुड्स लोको पायलट कहा जाता है। आगे अनुभव के आधार पर पैसेंजर लोको पायलट और फिर मेल या एक्सप्रेस लोको पायलट बनने का अवसर मिलता है, जहाँ तेज और लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन करना होता है।
लोको पायलट की कुछ मुख्य जिम्मेदारियाँ इस प्रकार होती हैं –
- सिग्नल और स्पीड नियमों का पालन करते हुए ट्रेन को सुरक्षित चलाना
- रास्ते में आने वाले संकेतों और कंट्रोल रूम के निर्देशों पर लगातार ध्यान रखना
- इंजन के ब्रेक, प्रेशर और अन्य तकनीकी सिस्टम की निगरानी करना
- किसी आपात स्थिति में तुरंत सही निर्णय लेना
- यात्रा शुरू होने से पहले इंजन की बेसिक जाँच करना
- लंबी ड्यूटी या रात की शिफ्ट में भी सतर्क बने रहना
क्या 12वीं के बाद लोको पायलट बन सकते हैं?
नहीं, केवल 12वीं पास करने के बाद सीधे लोको पायलट नहीं बना जा सकता। रेलवे में लोको पायलट बनने के लिए पहले असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में भर्ती होना पड़ता है, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं के साथ मान्यता प्राप्त आईटीआई (जैसे इलेक्ट्रिशियन, फिटर, मैकेनिक आदि ट्रेड) या संबंधित इंजीनियरिंग डिप्लोमा जरूरी होता है। इसलिए यदि किसी छात्र ने 12वीं कर ली है लेकिन उसके पास आईटीआई या डिप्लोमा नहीं है, तो उसे पहले इनमें से कोई तकनीकी योग्यता पूरी करनी होगी। इसके बाद RRB की ALP भर्ती प्रक्रिया पास करने पर ही आगे चलकर अनुभव और प्रमोशन के आधार पर लोको पायलट बनाया जाता है।
RRB ALP परीक्षा के लिए आवश्यक योग्यता
असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) रेलवे में प्रवेश का शुरुआती तकनीकी पद है, इसलिए आवेदन से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप सभी पात्रता शर्तें पूरी करते हों। भर्ती नोटिफिकेशन के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और मेडिकल फिटनेस तीनों अनिवार्य होती हैं।
शैक्षणिक योग्यता
- उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना आवश्यक है।
- 10वीं के साथ NCVT/SCVT से मान्यता प्राप्त ITI होना चाहिए, जैसे-
- इलेक्ट्रिशियन
- फिटर
- टर्नर
- वायरमैन
- मैकेनिक डीज़ल
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक
- रेफ्रिजरेशन एवं एसी मैकेनिक
- ITI के स्थान पर मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या संबंधित इंजीनियरिंग डिग्री भी मान्य होती है।
- सही ट्रेड चुनना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि CBT-2 के तकनीकी भाग में उसी से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
आयु सीमा
- न्यूनतम आयु सामान्यतः 18 वर्ष होती है।
- अधिकतम आयु सामान्य वर्ग के लिए आमतौर पर 30 वर्ष निर्धारित रहती है।
- SC/ST, OBC (NCL) और अन्य श्रेणियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाती है।
- आयु की गणना भर्ती नोटिफिकेशन में दी गई निर्धारित तिथि के अनुसार की जाती है।
मेडिकल फिटनेस (A-1 कैटेगरी)
- उम्मीदवार को रेलवे द्वारा निर्धारित A-1 मेडिकल स्टैंडर्ड पूरा करना अनिवार्य है।
- दूर की दृष्टि सामान्यतः 6/6, 6/6 बिना चश्मे होनी चाहिए।
- रंग पहचानने की क्षमता (Color Vision), Binocular Vision और Field of Vision की जांच की जाती है।
- LASIK या किसी भी प्रकार की रिफ्रैक्टिव सर्जरी करवाने वाले उम्मीदवार सामान्यतः A-1 मेडिकल कैटेगरी के लिए अयोग्य माने जाते हैं।
- शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना जरूरी है, क्योंकि मेडिकल फिटनेस पूरी न होने पर नियुक्ति आगे नहीं बढ़ती।
अन्य आवश्यक शर्तें
- उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आवेदन में दर्ज आयु और शैक्षणिक विवरण मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र से मेल खाना चाहिए।
- दस्तावेज सत्यापन के समय सभी मूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
लोको पायलट बनने के लिए आवश्यक स्किल्स
लोको पायलट का काम केवल ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि सुरक्षित संचालन, सिग्नल की सही समझ और लगातार सतर्क रहने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भर्ती प्रक्रिया (खासकर CBAT) और आगे की नौकरी दोनों में कुछ प्रैक्टिकल और टेक्निकल स्किल्स उम्मीदवार के प्रदर्शन को सीधे प्रभावित करती हैं।
इस क्षेत्र में उपयोगी प्रमुख स्किल्स –
- उच्च सतर्कता (Alertness): लंबे समय तक सिग्नल, ट्रैक और कंट्रोल निर्देशों पर ध्यान बनाए रखना जरूरी होता है, क्योंकि छोटी चूक भी जोखिम बढ़ा सकती है।
- तेज़ और सटीक निर्णय क्षमता: सिग्नल परिवर्तन, मौसम या तकनीकी स्थिति बदलने पर तुरंत सही प्रतिक्रिया देना पड़ता है।
- मजबूत तकनीकी समझ: इंजन के ब्रेक सिस्टम, कंट्रोल पैनल, बेसिक इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल घटकों की जानकारी होने से गड़बड़ी को समय पर पहचानना आसान होता है।
- ध्यान-एकाग्रता और मल्टी-टास्किंग: एक साथ स्पीड, सिग्नल, निर्देश और उपकरणों की निगरानी करनी होती है, इसलिए फोकस बनाए रखना जरूरी है।
- मनोवैज्ञानिक संतुलन (Stress Handling): रात की ड्यूटी, लंबी दूरी और दबाव वाली स्थितियों में शांत रहकर काम करना इस भूमिका का हिस्सा है।
- समस्या समाधान कौशल: अचानक आने वाली तकनीकी या संचालन से जुड़ी दिक्कतों को समझकर तुरंत प्रैक्टिकल सोल्युशन निकालना पड़ता है।
- अनुशासन और समय पालन: रेलवे संचालन तय समय-सारिणी पर चलता है, इसलिए नियमों का पालन और समय की पाबंदी अनिवार्य है।
- अच्छी शारीरिक फिटनेस और दृष्टि: स्पष्ट दृष्टि, सही रंग पहचान और पर्याप्त सहनशक्ति इस पद के लिए बुनियादी आवश्यकताएँ हैं।
लोको पायलट कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप पूरी प्रक्रिया)
लोको पायलट बनने के लिए एक तय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। आम तौर पर पहले संबंधित तकनीकी योग्यता (जैसे आईटीआई या डिप्लोमा) पूरी की जाती है, फिर रेलवे भर्ती बोर्ड की असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) भर्ती के लिए आवेदन किया जाता है। चयन के बाद ट्रेनिंग मिलती है और नौकरी ALP से शुरू होती है, जहाँ अनुभव के साथ आगे लोको पायलट तक प्रमोशन मिलता है। नीचे दिए गए स्टेप्स में इस पूरे रास्ते को आसान और क्रमवार तरीके से समझाया गया है।
स्टेप 1: 10वीं के बाद सही तकनीकी योग्यता चुनें
लोको पायलट बनने की तैयारी की शुरुआत 10वीं के बाद सही तकनीकी कोर्स चुनने से होती है। असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) पद के लिए सामान्यतः 10वीं के साथ किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई (जैसे इलेक्ट्रिशियन, फिटर, टर्नर, वायरमैन, मैकेनिक डीज़ल आदि ट्रेड) या संबंधित इंजीनियरिंग डिप्लोमा होना जरूरी माना जाता है।
आईटीआई करने से बुनियादी तकनीकी समझ विकसित होती है, जो आगे की भर्ती परीक्षाओं और ट्रेनिंग में काम आती है। यदि संभव हो, तो वही ट्रेड चुनें जो मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़े हों, क्योंकि इंजन संचालन से संबंधित प्रश्न और कार्य इन्हीं आधारों पर होते हैं। इस चरण में सही कोर्स और मान्यता प्राप्त संस्थान का चयन आगे की पात्रता और चयन की संभावनाओं को मजबूत करता है।
स्टेप 2: RRB ALP भर्ती नोटिफिकेशन पर नजर रखें और आवेदन करें
तकनीकी योग्यता पूरी होने के बाद अगला कदम रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा जारी असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की भर्ती पर नज़र रखना और समय पर आवेदन करना होता है। RRB अलग-अलग ज़ोन के लिए नोटिफिकेशन जारी करता है, जिसमें पात्रता, आयु सीमा, ट्रेड और परीक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी दी होती है।
नोटिफिकेशन देखने और आवेदन करने के लिए आधिकारिक RRB वेबसाइट्स पर नियमित रूप से विज़िट करना चाहिए। नोटिफिकेशन जारी होने पर वहीं से ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है।
आवेदन करते समय अपनी शैक्षणिक योग्यता, आईटीआई/डिप्लोमा का सही ट्रेड, फोटो-सिग्नेचर और अन्य दस्तावेज़ सही तरीके से अपलोड करना जरूरी है, क्योंकि छोटी गलती भी आगे चलकर आवेदन रद्द होने का कारण बन सकती है। फॉर्म सबमिट करने के बाद आवेदन संख्या और प्रिंट सुरक्षित रखना भी व्यावहारिक रूप से जरूरी होता है, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी तरह की दिक्कत न आए।
स्टेप 3: CBT-1 (पहला कंप्यूटर आधारित टेस्ट) की तैयारी करें
RRB ALP भर्ती का पहला चरण CBT-1 (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) होता है। यह आम तौर पर 75 प्रश्न और 60 मिनट का पेपर होता है, जिसमें मैथ्स, जनरल साइंस, रीजनिंग और जनरल अवेयरनेस से सवाल पूछे जाते हैं। यह चरण स्क्रीनिंग के लिए होता है, यानी यहीं से अगले चरण (CBT-2) के लिए उम्मीदवार चुने जाते हैं। गलत उत्तर पर सामान्यतः 1/3 अंक की आमतौर पर नेगेटिव मार्किंग लागू रहती है, इसलिए जल्दी करने के साथ सही उत्तर देना भी उतना ही जरूरी है।
तैयारी के लिए 10वीं स्तर के बेसिक्स मज़बूत रखें जैसे परसेंटेज (प्रतिशत), रेशियो (अनुपात), टाइम-डिस्टेंस (समय-दूरी) और साइंस के बुनियादी कॉन्सेप्ट। रोज़ थोड़ा अभ्यास करें और हफ्ते में 2–3 बार समय बाँधकर मॉक टेस्ट दें, ताकि पेपर हल करने की स्पीड और एक्यूरेसी दोनों बेहतर हों। साथ ही, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र देखने से पेपर का पैटर्न समझ आता है और तैयारी ज्यादा फोकस्ड रहती है।
स्टेप 4: CBT-2 (टेक्निकल + एप्टीट्यूड बेस) में प्रदर्शन तय करता है मेरिट
CBT-1 के बाद आपको CBT-2 देना होता है और यही चरण आगे की शॉर्टलिस्टिंग में सबसे ज्यादा महत्व रखता है। इस परीक्षा में देखा जाता है कि आपने अपने तकनीकी विषय को कितनी समझ के साथ पढ़ा है, इसलिए यहाँ तैयारी थोड़ी ज्यादा व्यवस्थित रखनी पड़ती है।
CBT-2 दो हिस्सों में होता है। Part-A में गणित, तर्क क्षमता, सामान्य विज्ञान और इंजीनियरिंग से जुड़े बुनियादी सवाल पूछे जाते हैं, जिनका स्तर ऐसा होता है कि आपकी कॉन्सेप्ट क्लियरिटी और प्रश्न हल करने की गति दोनों जाँची जा सके। Part-B पूरी तरह उस ट्रेड पर आधारित होता है जो आपने आईटीआई या डिप्लोमा में लिया है, जैसे इलेक्ट्रिशियन, फिटर या मैकेनिकल। यहाँ आमतौर पर वही टॉपिक्स पूछे जाते हैं जो ट्रेनिंग और काम में सीधे उपयोगी होते हैं, जैसे बेसिक सर्किट, मशीन पार्ट्स, टूल्स और सेफ्टी से जुड़े सिद्धांत।
अंतिम मेरिट लिस्ट CBT-2 Part-A और CBAT के संयुक्त अंकों के आधार पर तैयार की जाती है। सामान्यतः मेरिट निर्धारण में CBT-2 Part-A को लगभग 70% और CBAT को 30% वेटेज दिया जाता है, इसलिए केवल तकनीकी भाग पास करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि एप्टीट्यूड टेस्ट में भी संतुलित प्रदर्शन जरूरी होता है। Part-B क्वालिफाइंग प्रकृति का होता है, लेकिन इसे पास करना अनिवार्य है।
तैयारी करते समय सबसे पहले अपने ट्रेड की मूल किताबों और नोट्स को फिर से पढ़ना उपयोगी रहता है, क्योंकि प्रश्न अक्सर बुनियादी सिद्धांतों से ही बनते हैं। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र देखने से यह समझ आता है कि किन टॉपिक्स से बार-बार सवाल आते हैं। साथ ही Part-A के लिए गणित और विज्ञान के छोटे-छोटे टॉपिक्स का नियमित अभ्यास बनाए रखने से पेपर के दौरान समय संभालना आसान रहता है और गलतियों की संभावना कम होती है।
स्टेप 5: CBAT (कंप्यूटर बेस्ड एप्टीटुड टेस्ट) पास करना अनिवार्य
CBT-2 के बाद जिन उम्मीदवारों का चयन होता है, उन्हें CBAT (Computer Based Aptitude Test) देना पड़ता है। यह पारंपरिक लिखित परीक्षा नहीं होती, बल्कि ऐसे टेस्टों का सेट होता है जिनसे आपकी ध्यान-क्षमता, प्रतिक्रिया की गति, हाथ-आँख समन्वय और सिग्नल जैसी जानकारी को सही तरीके से पहचानने की क्षमता जाँची जाती है। यही कौशल ट्रेन चलाते समय सबसे ज्यादा काम आते हैं, इसलिए इस चरण को गंभीरता से लेना जरूरी है।
CBAT में आम तौर पर अलग-अलग छोटे टेस्ट होते हैं, जैसे पैटर्न पहचानना, एक साथ कई संकेतों पर ध्यान बनाए रखना, और दिए गए निर्देशों के अनुसार तेज़ व सटीक प्रतिक्रिया देना। यहाँ सामान्य विषयों के प्रश्न नहीं होते और आमतौर पर नेगेटिव मार्किंग भी नहीं रहती, लेकिन न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल करना अनिवार्य होता है, तभी आगे की प्रक्रिया में नाम जाता है।
तैयारी के लिए किसी विशेष सिलेबस की बजाय नियमित मॉक एप्टीट्यूड टेस्ट देना, कंप्यूटर पर अभ्यास करना, और समयबद्ध अभ्यास से फोकस व प्रतिक्रिया समय बेहतर बनाना अधिक उपयोगी रहता है।
स्टेप 6: दस्तावेज सत्यापन और सख्त मेडिकल फिटनेस
CBAT पास करने के बाद अगला चरण दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल जांच का होता है। इस चरण में आपकी शैक्षणिक योग्यता, आईटीआई या डिप्लोमा के प्रमाणपत्र, पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात मूल रूप में जांचे जाते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवेदन में दी गई जानकारी सही है।
दस्तावेज सत्यापन के बाद रेलवे का मेडिकल टेस्ट होता है, जो लोको पायलट से जुड़े पदों के लिए काफी सख्त माना जाता है। इसमें खास तौर पर आँखों की रोशनी, रंग पहचानने की क्षमता, सुनने की क्षमता और सामान्य शारीरिक फिटनेस की जांच की जाती है। क्योंकि ट्रेन संचालन पूरी तरह सिग्नल और सतर्कता पर निर्भर करता है, इसलिए मेडिकल मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है। कई बार उम्मीदवार लिखित परीक्षा पास कर लेते हैं, लेकिन मेडिकल फिटनेस पूरी न होने पर चयन आगे नहीं बढ़ पाता, इसलिए इस चरण को भी उतनी ही गंभीरता से लेना जरूरी है।
स्टेप 7: चयन के बाद रेलवे ट्रेनिंग और वास्तविक जॉब की शुरुआत
दस्तावेज़ और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित उम्मीदवारों को रेलवे के प्रशिक्षण केंद्र में भेजा जाता है। यहाँ कुछ समय तक तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें इंजन के मुख्य सिस्टम, सिग्नल नियम, ब्रेकिंग सिस्टम और आपात स्थिति में क्या करना है – इन सब बातों का अभ्यास कराया जाता है। ट्रेनिंग में क्लासरूम पढ़ाई के साथ-साथ सिम्युलेटर और प्रैक्टिकल सेशन भी शामिल होते हैं, ताकि वास्तविक ड्यूटी शुरू करने से पहले काम की स्पष्ट समझ बन जाए।
ट्रेनिंग पूरी होने पर नियुक्ति असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में होती है। शुरुआती समय में आपको अनुभवी लोको पायलट के साथ ड्यूटी करनी पड़ती है, जहाँ इंजन की निगरानी, सिग्नल पर ध्यान रखना और संचालन से जुड़े जरूरी काम सीखते हुए अनुभव जुटाया जाता है। यही चरण आगे के प्रमोशन और जिम्मेदारियों के लिए आधार तैयार करता है।
स्टेप 8: अनुभव और प्रमोशन के माध्यम से लोको पायलट पद तक पहुँचना
नौकरी की शुरुआत असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में होती है। कुछ समय तक नियमित ड्यूटी, ट्रेनिंग और काम के अनुभव के आधार पर आगे प्रमोशन के अवसर मिलते हैं। आम तौर पर पहले सीनियर ALP बनाया जाता है, जहाँ इंजन संचालन से जुड़े कामों में जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
इसके बाद अनुभव, विभागीय नियमों और उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार लोको पायलट (गुड्स) पद पर पदोन्नति मिल सकती है। आगे चलकर अच्छा कार्य-प्रदर्शन और सेवा अवधि के आधार पर पैसेंजर और फिर मेल/एक्सप्रेस लोको पायलट बनने के अवसर मिलते हैं, जो ज्यादा जिम्मेदारी वाले पद माने जाते हैं।
करियर में आगे बढ़ते हुए अनुभवी लोको पायलट लोको इंस्पेक्टर जैसे वरिष्ठ पदों तक भी पहुँच सकते हैं, जहाँ ट्रेन संचालन की निगरानी और जूनियर स्टाफ का मार्गदर्शन करना होता है।
लोको पायलट को मिलने वाली अनुमानित सैलरी
असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) का वेतन 7वें वेतन आयोग के पे लेवल-2 के अंतर्गत आता है, जहाँ प्रारंभिक बेसिक पे लगभग INR 19,900 प्रति माह होता है। इसके साथ महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, ट्रांसपोर्ट और रनिंग अलाउंस जैसे भत्ते जुड़ते हैं, जिससे कुल ग्रॉस सैलरी सामान्यतः INR 26,000 से INR 35,000 (कुछ परिस्थितियों में ₹35-45 हजार) तक हो सकती है।
कटौतियों के बाद इन-हैंड सैलरी आम तौर पर INR 24,000 से INR 34,000 के बीच रहती है, जो शहर और भत्तों पर निर्भर करती है। अनुभव और प्रमोशन के साथ सीनियर ALP तथा आगे लोको पायलट (गुड्स, पैसेंजर, मेल/एक्सप्रेस) बनने पर वेतन पे लेवल-5 या लेवल-6 तक बढ़ सकता है, जहाँ मासिक आय लगभग INR 40,000 से INR 70,000 या उससे अधिक तक पहुँच सकती है।
लोको पायलट के रूप में करियर स्कोप
भारतीय रेलवे में लोको पायलट एक जिम्मेदारी और तकनीकी कौशल से जुड़ा पद है, जहाँ करियर ग्रोथ धीरे-धीरे लेकिन स्थिर तरीके से होती है। इस क्षेत्र में प्रवेश आमतौर पर असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में होता है, जिसके बाद अनुभव, सेवा अवधि और प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति मिलती रहती है। रेलवे विभाग में यह करियर लंबे समय तक स्थिर रोजगार और नियमित आय के लिए जाना जाता है।
नीचे लोको पायलट के करियर से जुड़े प्रमुख पहलुओं को संक्षेप में समझा जा सकता है –
| श्रेणी | विवरण |
| प्रारंभिक पद | असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में शुरुआत होती है, जहाँ इंजन संचालन में सहायता, सिग्नल पर निगरानी और सुरक्षा नियमों का पालन करना मुख्य कार्य होता है। |
| अनुमानित सैलरी | शुरुआत में ALP की कुल सैलरी भत्तों सहित लगभग INR 26,000 – INR 35,000 के आसपास हो सकती है, जो अनुभव और स्थान के अनुसार बदलती है। |
| प्रमोशन के अवसर | ALP → सीनियर ALP → लोको पायलट (गुड्स) → लोको पायलट (पैसेंजर/मेल) → लोको इंस्पेक्टर तक आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं। |
| फिटनेस मानक | A-1 विज़न, सही रंग पहचान और नियमित मेडिकल फिटनेस इस भूमिका में अनिवार्य होती है। |
| भविष्य के अवसर | अनुभव के साथ सीनियर टेक्निकल रोल, ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर या सिम्युलेटर ऑपरेटर जैसे पदों पर काम करने के अवसर मिल सकते हैं। |
| रोजगार स्थिरता | रेलवे की सरकारी नौकरी होने के कारण जॉब सिक्योरिटी और नियमित वेतन वृद्धि अपेक्षाकृत स्थिर रहती है। |
| कार्य की प्रकृति | नाइट शिफ्ट, लंबी दूरी की ड्यूटी और लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता इस पद का सामान्य हिस्सा है। |
| अन्य लाभ | पेंशन/एनपीएस, भत्ते, रेलवे कॉलोनी में आवास और विभागीय ट्रेनिंग सुविधाएँ मिल सकती हैं। |
FAQs
हाँ, कॉमर्स स्ट्रीम का छात्र भी लोको पायलट बन सकता है, लेकिन केवल 12वीं (कॉमर्स) पास होना पर्याप्त नहीं है। रेलवे में लोको पायलट बनने के लिए पहले असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में चयन होना जरूरी होता है, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं के साथ मान्यता प्राप्त ITI (जैसे इलेक्ट्रिशियन, फिटर, मैकेनिक आदि) या संबंधित इंजीनियरिंग डिप्लोमा होती है। इसलिए यदि किसी छात्र ने 12वीं कॉमर्स से की है, तो उसे पहले किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से तकनीकी ITI या डिप्लोमा कोर्स पूरा करना होगा। इसके बाद ही वह RRB ALP भर्ती के लिए आवेदन कर सकता है।
RRB ALP की CBT-1 और CBT-2 परीक्षाओं में प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है। यानी अगर किसी प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है और वह गलत हो जाता है, तो 0.33 अंक काट लिए जाते हैं। इस कारण केवल ज्यादा प्रश्न हल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सटीक उत्तर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। हालांकि CBAT (Aptitude Test) में सामान्यतः नेगेटिव मार्किंग नहीं होती, लेकिन न्यूनतम निर्धारित अंक प्राप्त करना अनिवार्य रहता है।
ALP के लिए मेडिकल जांच काफ़ी सख्त होती है। सबसे आम कारण आँखों की दृष्टि मानक पूरा न होना होता है जैसे – दूर की नज़र 6/6, 6/6 न होना या रंग पहचान (कलर विज़न) में कमी। इसके अलावा सुनने की क्षमता में कमी या ऐसी स्वास्थ्य समस्या जो लंबे समय तक सतर्क रहने में बाधा डालती हो, चयन रोक सकती है। कुछ स्थितियों में LASIK जैसी रिफ्रैक्टिव सर्जरी करवाने वाले उम्मीदवार A-1 मेडिकल मानक के लिए अयोग्य माने जा सकते हैं, इसलिए पहले से आँखों और सामान्य फिटनेस की जाँच करवा लेना बेहतर रहता है।
अगर आपका लक्ष्य लोको पायलट बनना है, तो ऐसा ITI ट्रेड लेना ठीक रहता है जिसमें मशीनों और बिजली से जुड़े काम की बुनियादी समझ मिलती हो। ज़्यादातर उम्मीदवार इलेक्ट्रिशियन या फिटर चुनते हैं, क्योंकि इनसे इंजन के सिस्टम और उपकरणों की बेसिक जानकारी मिलती है। टर्नर या मैकेनिक डीज़ल भी अच्छे विकल्प हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि ITI किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से हो, ताकि भर्ती के समय पात्रता में कोई दिक्कत न आए।
लोको पायलट की सीधी भर्ती नहीं होती। पहले रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा निकाली गई असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की भर्ती में शामिल होना पड़ता है। इस प्रक्रिया में पहले कंप्यूटर आधारित परीक्षाएँ (CBT-1 और CBT-2) होती हैं, फिर एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT), उसके बाद दस्तावेजों की जांच और मेडिकल परीक्षण किया जाता है। सभी चरण सफलतापूर्वक पास करने पर उम्मीदवार को ट्रेनिंग दी जाती है और नियुक्ति ALP के रूप में होती है, जहाँ से आगे प्रमोशन के माध्यम से लोको पायलट बना जाता है।
लोको पायलट से जुड़े पदों के लिए मेडिकल जांच काफी सख्त होती है। इसमें खास तौर पर आँखों की दूर की दृष्टि स्पष्ट होना, रंगों की सही पहचान, सुनने की क्षमता और सामान्य शारीरिक फिटनेस की जांच की जाती है। निर्धारित दृष्टि मानक पूरे न होने पर चयन आगे नहीं बढ़ पाता, इसलिए पहले से अपनी आँखों और स्वास्थ्य की जांच करवा लेना बेहतर रहता है।
लोको पायलट बनने के लिए लिखित परीक्षाओं में गणित, तर्क क्षमता, सामान्य विज्ञान और सामान्य ज्ञान से प्रश्न आते हैं। CBT-2 में आपके ITI/डिप्लोमा ट्रेड से जुड़े तकनीकी प्रश्न भी पूछे जाते हैं, इसलिए बेसिक कॉन्सेप्ट और नियमित अभ्यास दोनों जरूरी हैं।
हाँ, महिलाएं भी लोको पायलट बन सकती हैं। चयन प्रक्रिया, पात्रता और परीक्षा सभी के लिए समान होती है। निर्धारित मेडिकल और फिटनेस मानक पूरे करने पर लिंग के आधार पर कोई भेद नहीं किया जाता।
आम तौर पर करियर की शुरुआत असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में होती है। कुछ समय का अनुभव और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद सीनियर ALP बनाया जाता है। इसके बाद पदोन्नति के क्रम में पहले लोको पायलट (गुड्स), फिर अनुभव के आधार पर पैसेंजर या मेल/एक्सप्रेस लोको पायलट बनने के अवसर मिलते हैं। आगे चलकर अनुभवी कर्मचारियों को लोको इंस्पेक्टर जैसे वरिष्ठ पद भी मिल सकते हैं, जहाँ ट्रेन संचालन की निगरानी और जूनियर स्टाफ का मार्गदर्शन करना होता है।
अगर आप लोको पायलट के रूप में करियर की शुरुआत करने का विचार कर रहे हैं, तो उम्मीद है यह गाइड आपको सही दिशा समझने में मददगार रही होगी। ऐसे ही करियर से जुड़े और विषयों पर जानकारी के लिए आप Leverage Edu के दूसरे लेख भी देख सकते हैं।

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