औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) इंजीनियरिंग और नॉन-इंजीनियरिंग दोनों प्रकार के कोर्स ऑफर करता है। इंजीनियरिंग ट्रेड में मैकेनिक ऑटोमोटिव, आर्किटेक्चर असिस्टेंट, मैकेनिक ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिशियन जैसे कोर्स शामिल हैं। वहीं, नॉन-इंजीनियरिंग ट्रेड में कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA), मार्केटिंग एक्यूटिव, फूड प्रोडक्शन, नीडल वर्कर और डाटा एंट्री जैसे कोर्स कराए जाते हैं। चूंकि इंजीनियरिंग और नॉन-इंजीनियरिंग दो अलग-अलग क्षेत्र हैं, इसलिए जॉब की अपॉर्चुनिटी भी संबंधित कोर्स के अनुसार ही मिलती हैं।
यदि आपने आईटीआई पास कर लिया है और अब आप जानना चाहते हैं कि ITI करने के बाद क्या करें, तो यह लेख आपके लिए है। इस ब्लॉग में आईटीआई के बाद अप्रेंटिसशिप, CITS, उच्च शिक्षा, स्वरोजगार और नौकरी से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी दी गई है। इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
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ITI कोर्स के बाद करियर ऑप्शंस
आईटीआई एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसके बाद आपको अपने चुने हुए ट्रेड के अनुसार करियर ऑप्शन चुनना होता है। यहां आपके लिए ITI करने के बाद के कुछ प्रमुख करियर ऑप्शंस की जानकारी दी गई है, जिन्हें आप अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार चुन सकते हैं:
ITI अप्रेंटिसशिप
ITI कोर्स के बाद आपको अप्रेंटिसशिप और ट्रेनिंग के अच्छे अवसर मिलते हैं। कई सरकारी और प्राइवेट कंपनियां ITI पास छात्रों को Apprentice Act, 1961 के तहत 1 से 2 वर्ष की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देती हैं। आप अप्रेंटिसशिप के लिए भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल apprenticeshipindia.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस दौरान आपको संबंधित ट्रेड अनुसार स्टाइपेंड मिलता है तथा अप्रेंटिसशिप पूरी होने पर सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाता है।
यह ट्रेनिंग भविष्य में स्थायी नौकरी पाने में सहायक होती है। इसके साथ ही आपको इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार अपने स्किल्स डेवलप करने का अवसर मिलता है। इसलिए ITI के बाद अप्रेंटिसशिप आपके लिए एक महत्वपूर्ण कदम होता है।
भारत में भारतीय रेल, IOCL, BHEL, NPCIL, NTPC, DRDO, HAL, BARC, ISRO, NEEPCO, NCL, यंत्र इंडिया लिमिटेड, रेल कोच फैक्टरी (RCF), नेवल डॉकयार्ड तथा अन्य प्राइवेट कंपनियां समय-समय पर ITI छात्रों के लिए अप्रेंटिसशिप रिक्रूटमेंट निकालती हैं।
क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम (CITS) कोर्स
अगर आप औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में टीचर यानी इंस्ट्रक्टर बनना चाहते हैं, तो CITS कोर्स कर सकते हैं। CITS की फुल फॉर्म ‘क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम’ है। यह एक एडवांस्ड लेवल का कोर्स है, जिसे विशेष रूप से ITI पास छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है, जो आईटीआई संस्थानों में शिक्षण क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
CITS कोर्स में आवेदन के लिए आपके पास संबंधित ट्रेड में राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT) या राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (SCVT) से ‘नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट’ (NTC) व ‘नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट’ (NAC) होना चाहिए। इसके साथ ही आपके पास 1 वर्ष का वर्क एक्सपीरियंस भी होना चाहिए, जो आपने उसी ट्रेड में किया हो।
अगर आपने ट्रेड से संबंधित क्षेत्र में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है, तब भी आप इस कोर्स के लिए योग्य हैं। CITS कोर्स में एडमिशन के लिए आपको ‘ऑल इंडिया कॉमन एंट्रेंस टेस्ट’ (AICET) पास करना होता है, जो वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है। इस प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद ही आप सीआईटीएस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। यह कोर्स आप ‘राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान’ (NSTI), प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण संस्थान (IToT) या अन्य DGT द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों से कर सकते हैं।
उच्च शिक्षा: पॉलिटेक्निक डिप्लोमा में लेटरल एंट्री से एडमिशन
यदि आपने ITI नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (NTC) व नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट (NAC) कोर्स पूरा कर लिया है, तो कुछ राज्यों में आप पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के दूसरे वर्ष में लेटरल एंट्री के लिए एलिजिबल हो सकते हैं। डिप्लोमा पूरा करने के बाद आप B.Tech या B.E. में लेटरल एंट्री एंट्रेंस टेस्ट (LEET) के माध्यम से सीधे दूसरे वर्ष में एडमिशन ले सकते हैं।
अधिकांश विश्वविद्यालयों में LEET के लिए 3 वर्षीय डिप्लोमा में सामान्य श्रेणी के लिए 50% अंक तथा आरक्षित श्रेणियों के लिए 45% अंकों की आवश्यकता होती है। हालांकि यह मानदंड संस्थान और राज्य के अनुसार बदल सकता है। इस पाथ से आप 4 वर्षीय इंजीनियरिंग डिग्री को 3 वर्षों में पूरा कर सकते हैं। इसके लिए विभिन्न राज्यों द्वारा कई राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाएं जैसे AP ECET, JELET, UKSEE आदि आयोजित की जाती हैं।
ITI के बाद सरकारी नौकरी
ITI के बाद यदि आप जॉब करना चाहते हैं तो आपके पास सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में कई ऑप्शंस होते हैं। आप अपनी ट्रेड और योग्यता के अनुसार भारतीय रेलवे (RRB असिस्टेंट लोको पायलट, टेक्नीशियन), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), DRDO, ISRO, BHEL, NTPC और राज्य विद्युत बोर्ड (SEBs) में संबंधित पदों के लिए अप्लाई कर सकते हैं। ध्यान रखें कि प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग ट्रेड योग्यता और चयन प्रक्रिया होती है, जिसमें ITI क्वालिफिकेशन के साथ-साथ कुछ पदों पर लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षण भी शामिल हो सकते हैं।
ITI के बाद प्राइवेट नौकरी
भारत में स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत हर सेक्टर में होती है। प्राइवेट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की तरफ से भी समय-समय पर ITI पास कैंडिडेट्स के लिए पोस्ट निकाली जाती हैं। इसमें आप अपनी स्किल और योग्यता के मुताबिक जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। प्राइवेट सेक्टर में ITI पास कैंडिडेट्स की मांग मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हुंडई, L&T, बॉश, सीमेंस और होंडा जैसी कंपनियों में होती है। यहां वे फिटर, वेल्डर, पेंटर, मैकेनिक, CNC ऑपरेटर, टेक्नीशियन और मशीन ऑपरेटर जैसे पदों पर कार्य करते हैं। इसके अलावा वे मेंटेनेंस स्टाफ के रूप में भी कार्यरत रहते हैं।
ITI के बाद विदेश में रोजगार की संभावना
आप ITI के बाद विदेशों में उपलब्ध विभिन्न स्तर की जॉब्स के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। आईटीआई करने के बाद कई युवा खाड़ी देशों के अलावा मलेशिया, सिंगापुर, रूस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की निर्माण, तेल-गैस, रिफाइनरी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों या फैक्ट्रियों में नौकरी प्राप्त करते हैं। इसके लिए वैध पासपोर्ट, वर्क परमिट और संबंधित देश के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
ITI के बाद स्वरोजगार
ITI पास कैंडिडेट्स स्वरोजगार के लिए भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। ITI के बाद आप अपना बिजेनस शुरू कर सकते हैं। इसमें आपको ‘मुद्रा योजना’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
ITI कोर्स के बाद आप इलेक्ट्रिशियन, मोटर मैकेनिक, प्लंबर, वेल्डर या मोबाइल रिपेयरिंग जैसी सेवाओं से जुड़ा बिजेनस शुरू कर सकते हैं और स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं। ‘मुद्रा योजना’ के तहत लोन लेकर व्यवसाय शुरू करना आसान हो जाता है। वहीं, DGT दिशानिर्देशों के अनुसार ITI ट्रेड आधारित माइक्रो-एंटरप्राइज कम इन्वेस्टमेंट में शुरू कर नियमित इनकम का स्रोत बनाया जा सकता है।
FAQs
ITI के बाद आपके ट्रेड के अनुसार पॉलिटेक्निक डिप्लोमा (लेटरल एंट्री), CITS (इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग कोर्स) या अप्रेंटिसशिप सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है।
ITI के बाद पॉलिटेक्निक डिप्लोमा सामान्यतः 3 वर्ष का होता है, लेकिन लेटरल एंट्री के माध्यम से सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलने पर इसे लगभग 2 वर्ष में पूरा किया जा सकता है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) एक इंजीनियरिंग डिग्री संस्थान हैं, जबकि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) के अंतर्गत स्किल बेस्ड ट्रेड सर्टिफिकेट प्रदान करने वाले ट्रेनिंग संस्थान हैं।
ITI के बाद आप फिटर, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, टेक्नीशियन जैसे ट्रेड-आधारित पोस्ट पर सरकारी व प्राइवेट इंडस्ट्रीज में जॉब कर सकते हैं।
ITI के बाद लेटरल एंट्री के माध्यम से आप सीधे बीटेक के दूसरे वर्ष में एडमिशन ले सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको चयनित संस्थान द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा को पास करना अनिवार्य होगा।
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आशा है कि इस लेख में आप जान पाए होंगे कि ITI करने के बाद क्या करें। ऐसे ही करियर और अन्य इंडियन एग्जाम से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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