होम्योपैथी एक पारंपरिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें साइड इफेक्ट आम तौर पर नगण्य माने जाते हैं। होम्योपैथी भारत में 19वीं शताब्दी से लोकप्रिय हुई और आज यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली का अहम हिस्सा बन गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, होम्योपैथी का उपयोग 100 से अधिक देशों में किया जाता है और लगभग 42 देशों में इसे कानूनी औषधि प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त है। होम्योपैथिक डॉक्टर सामान्य बीमारियों के साथ-साथ कुछ क्रॉनिक और ऑटोइम्यून स्थितियों में भी रोगियों को प्राकृतिक उपचार प्रदान करते हैं। यदि आप चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, लेकिन दवाओं के प्राकृतिक और न्यूनतम दुष्प्रभाव वाले दृष्टिकोण में विश्वास रखते हैं, तो होम्योपैथी डॉक्टर (BHMS) बनना आपके लिए एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है। इस लेख में हम होम्योपैथी डॉक्टर बनने की प्रक्रिया सरल रूप में समझाएंगे।
This Blog Includes:
- होम्योपैथी डॉक्टर के कार्य
- होम्योपैथी डॉक्टर बनने की मार्गदर्शिका
- स्टेप 1: होम्योपैथी डॉक्टर बनने के लिए योग्यता
- स्टेप 2: BHMS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET (UG) परीक्षा
- स्टेप 3: BHMS कोर्स की संरचना
- स्टेप 4: होम्योपैथी चिकित्सा प्रमुख संस्थान और कॉलेज
- स्टेप 5: BHMS कोर्स के बाद होम्योपैथिक मेडिकल काउंसिल और रजिस्ट्रेशन
- स्टेप 6: होम्योपैथी डॉक्टर बनने के बाद के करियर विकल्प
- स्टेप 7: BHMS के बाद हायर स्टडी और स्पेशलाइजेशन
- भारत में होम्योपैथी की वैधता और भविष्य
- FAQs
होम्योपैथी डॉक्टर के कार्य
होम्योपैथी डॉक्टर सामान्य बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी, फ्लू, बुखार, कान का दर्द, चोटें और छोटे-मोटे संक्रमणों का इलाज करते हैं। इसके साथ ही वे तनाव-संबंधी विकार, चिंता, अवसाद, नींद न आने जैसी समस्याओं का भी होम्योपैथिक दवाओं द्वारा उपचार करते हैं। यदि आप मेडिसिन में रुचि रखते हैं, तो यह करियर आपके उज्जवल भविष्य का आधार बन सकता है। होम्योपैथी डॉक्टर बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण है- मरीजों के प्रति सहानुभूति और धैर्य रखना, साथ ही प्राकृतिक इलाज में विश्वास रखना।
होम्योपैथी डॉक्टर बनने की मार्गदर्शिका
होम्योपैथी डॉक्टर बनने के लिए जरूरी स्टेप्स यहां दिए गए हैं:
स्टेप 1: होम्योपैथी डॉक्टर बनने के लिए योग्यता
छात्रों के लिए होम्योपैथी डॉक्टर बनने की अनिवार्य योग्यताएं नीचे दी गई हैं:-
- शैक्षणिक योग्यता: होम्योपैथी डॉक्टर बनने के लिए 12वीं साइंस (PCB) और अंग्रेज़ी विषय से पास होना आवश्यक है।
- न्यूनतम अंक और आयु सीमा: सामान्य वर्ग के लिए 12वीं (PCB) में न्यूनतम 50% अंक आवश्यक हैं, जबकि SC/ST/OBC के लिए 40% और PwD के लिए 45% अंक निर्धारित हैं। साथ ही, प्रवेश के समय आवेदक की आयु कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए।
स्टेप 2: BHMS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET (UG) परीक्षा
भारत में BHMS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET (UG) परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। सरकारी और निजी दोनों प्रकार के कॉलेज अलग से कोई मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं करते हैं। BHMS में दाखिला NEET में प्राप्त अंकों, मेरिट सूची और राष्ट्रीय या राज्य स्तर की AYUSH काउंसलिंग के आधार पर दिया जाता है। NEET परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों का अध्ययन करना आवश्यक होता है।
स्टेप 3: BHMS कोर्स की संरचना
बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) कोर्स होम्योपैथी डॉक्टर बनने की दिशा में एक अनिवार्य डिग्री है। यह कोर्स कुल 5.5 वर्षों का होता है, जिसमें 4.5 वर्ष की शैक्षणिक पढ़ाई और 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है। BHMS एक अंडरग्रेजुएट डिग्री है, जो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति पर आधारित होती है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र पंजीकृत होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं।
इस कोर्स के अंतर्गत छात्रों को होम्योपैथी और चिकित्सा विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों का अध्ययन कराया जाता है। इनमें शरीर रचना (एनाटॉमी), फिजियोलॉजी, बॉटनी, बायोकेमिस्ट्री (उपापचय), होम्योपैथी का इतिहास एवं दर्शन, पेशेंट कम्युनिकेशन, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फोरेंसिक मेडिसिन और कम्युनिटी मेडिसिन जैसे विषय शामिल हैं।
इसके साथ ही केस एनालिसिस, रिपर्टरी और होम्योपैथिक फार्मेसी का भी गहन अध्ययन कराया जाता है। कोर्स के दौरान छात्रों को क्लिनिकल ट्रेनिंग, प्रैक्टिकल अनुभव और इंटर्नशिप प्रदान की जाती है, जिससे वे रोगियों की बेहतर समझ विकसित कर सकें और भविष्य में स्वतंत्र रूप से चिकित्सा सेवा दे सकें। BHMS पूरा करने के बाद छात्र उच्च शिक्षा के लिए MD (Homeopathy) या PhD भी कर सकते हैं। इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।
स्टेप 4: होम्योपैथी चिकित्सा प्रमुख संस्थान और कॉलेज
होम्योपैथी चिकित्सा की पढ़ाई के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थान और कॉलेज हैं जो BHMS, MD (होम्योपैथी) जैसे पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। नीचे प्रमुख होम्योपैथी कॉलेजों और संस्थानों की सूची दी गई है:-
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी (NIH), कोलकाता, पश्चिम बंगाल
- शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, भोपाल
- श्रीमती चंदाबेन मोहनभाई पटेल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, मुंबई
- सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम, केरल
- बीवीवीएस होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज बागलकोट, कर्नाटक
- वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी, सूरत- होम्योपैथिक विभाग
- NEIAH, शिलांग, मेघालय
- नेहरू होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, दिल्ली
- महात्मा गांधी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, जबलपुर
- डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर होम्योपैथिक कॉलेज, नागपुर, महाराष्ट्र
- भारती विद्यापीठ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, पुणे
- सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु
- असम होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, असम
- भगवान बुद्ध होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मल्लाथल्ली, बैंगलोर, कर्नाटक
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स्टेप 5: BHMS कोर्स के बाद होम्योपैथिक मेडिकल काउंसिल और रजिस्ट्रेशन
BHMS कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद किसी भी छात्र के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अनिवार्य होती है। इसके तहत आपको अपने राज्य की होम्योपैथिक मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। यह रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के बाद ही आप रजिस्टर्ड होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में मान्य होते हैं और मरीजों का इलाज करने के लिए अधिकृत हो जाते हैं।
हर राज्य की होम्योपैथिक मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन के आप कानूनी रूप से प्रैक्टिस नहीं कर सकते। यह प्रक्रिया आपको चिकित्सा क्षेत्र में विधिक मान्यता प्रदान करती है और स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का अधिकार देती है।
स्टेप 6: होम्योपैथी डॉक्टर बनने के बाद के करियर विकल्प
BHMS कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों के पास चिकित्सा क्षेत्र में कई करियर विकल्प उपलब्ध होते हैं। एक रजिस्टर्ड होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में वे निजी क्लिनिक खोल सकते हैं या फिर सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य कर सकते हैं। करियर के रूप में वे होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में सामान्य ओपीडी चला सकते हैं और बच्चों, त्वचा संबंधी समस्याओं, श्वसन रोगों या क्रॉनिक बीमारियों जैसी विभिन्न बीमारियों पर विशेष फोकस कर सकते हैं।
इसके अलावा वे चिकित्सा सलाहकार, चिकित्सा सहायक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, रिसर्चर, पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल या फार्मासिस्ट जैसे पदों पर भी काम कर सकते हैं। रिसर्च और शिक्षण क्षेत्र में जाने के इच्छुक उम्मीदवार होम्योपैथिक प्रोफेसर या वैज्ञानिक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।
फार्मास्युटिकल कंपनियों में भी होम्योपैथिक विशेषज्ञों की मांग बनी रहती है। इस प्रकार BHMS कोर्स के बाद चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासन और शोध जैसे विविध क्षेत्रों में करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
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स्टेप 7: BHMS के बाद हायर स्टडी और स्पेशलाइजेशन
BHMS कोर्स पूरा करने के बाद छात्र उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता के लिए भी कई ऑप्शन चुन सकते हैं। MD इन होम्योपैथी जैसे पोस्टग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेकर किसी विशेष क्षेत्र में गहराई से अध्ययन कर सकते हैं, जैसे कि मेडिसिन, पीडियाट्रिक, साइकाइट्री या मटेरिया मेडिका।
इसके अतिरिक्त रिसर्च क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र विभिन्न रिसर्च कोर्स या फेलोशिप प्रोग्राम के माध्यम से चिकित्सा अनुसंधान में करियर बना सकते हैं। BHMS के बाद विदेश में अध्ययन की संभावनाएं भी उपलब्ध हैं, जहां छात्र आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ होम्योपैथी का समन्वय कर वैश्विक स्तर पर काम कर सकते हैं और विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं।
भारत में होम्योपैथी की वैधता और भविष्य
भारत में होम्योपैथी को वैध और मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसे सरकार ने आयुष मंत्रालय (AYUSH) के अंतर्गत शामिल किया है। आज सरकार की विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से होम्योपैथी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत शिक्षा, शोध और चिकित्सकीय सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
आर्थिक रूप से कमजोर होम्योपैथी छात्रों के लिए केंद्र और राज्य सरकारें स्कॉलरशिप योजनाएं भी चलाती हैं, जिससे फीस में राहत मिलती है और पढ़ाई आसान हो जाती है। भविष्य में होम्योपैथी के क्षेत्र में करियर के अच्छे अवसर हैं, हालांकि गुणवत्ता, रिसर्च और तकनीकी विकास की दिशा में चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
FAQs
BHMS करने के बाद सरकारी नौकरी पाना पूरी तरह संभव है। आप AYUSH विभाग, सरकारी अस्पताल, PHC/CHC, और NHM जैसी योजनाओं में होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा UPSC और राज्य PSC भी BHMS डॉक्टरों की भर्ती करते हैं।
BHMS के बाद सीधे डर्मेटोलॉजिस्ट या एलोपैथिक स्किन स्पेशलिस्ट नहीं बना जा सकता, क्योंकि यह MD डर्मेटोलॉजी (MBBS के बाद) की कैटेगरी में आता है। लेकिन BHMS के बाद आप MD (होमियोपैथी) – डर्मेटोलॉजी / स्किन स्पेशलिटी जैसे विषयों में विशेषज्ञता लेकर होम्योपैथिक स्किन स्पेशलिस्ट बन सकते हैं। होम्योपैथिक स्किन रोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर के रूप में आप प्रैक्टिस कर सकते हैं, पर आपकी विशेषज्ञता होम्योपैथी तक सीमित रहती है।
होम्योपैथी डॉक्टर बनने में लगभग 5.5 साल लगते हैं, जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की इंटर्नशिप शामिल होती है।
होम्योपैथी में सबसे अच्छी डिग्री MD in Homeopathy मानी जाती है, जो BHMS के बाद उच्च विशेषज्ञता प्रदान करती है।
आशा है कि आपको इस लेख में होम्योपैथी डॉक्टर कैसे बनें, इसकी सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही करियर से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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