भारतीय संविधान के वास्तुकार डॉ. भीमराव अंबेडकर एक प्रसिद्ध विधिवेत्ता, शिक्षाविद, राजनीतिज्ञ, मानवविज्ञानी, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक थे। उन्हें उनके प्रशंसक और अनुयायी स्नेहपूर्वक ‘बाबासाहेब’ के नाम से पुकारते हैं। भारत सरकार ने देश की स्वतंत्रता और प्रगति में उनके द्वारा दिए गए अतुलनीय योगदान और बहुमूल्य सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 1900 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था। वहीं, 14 अप्रैल, 2026 को उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई जाएगी। इस लेख में आप डॉ भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय, कार्य, विरासत और उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में जानें।
| मूल नाम | डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर |
| जन्म | 14 अप्रैल, 1891 |
| जन्म स्थान | महू, मध्य प्रदेश |
| पिता का नाम | सूबेदार रामजी मालोजी सकपाल |
| माता का नाम | भीमाबाई सकपाल |
| पत्नी का नाम | रमाबाई अंबेडकर (विवाह: 1906; निधन: 1935) सविता अंबेडकर (विवाह: 1948; निधन: 2003) |
| संतान | यशवंत अंबेडकर |
| शिक्षा | मुंबई विश्वविद्यालय (B.A., M.A.) कोलंबिया विश्वविद्यालय (M.A., PhD) लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स (M.Sc., D.Sc.) ग्रेज़ इन लंदन (बैरिस्टर-एट-लॉ) |
| पेशा | विधिवेत्ता, शिक्षाविद, राजनीतिज्ञ, मानवविज्ञानी, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक |
| संगठन | बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1923) इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी (1936) अनुसूचित जाति संघ (1942) |
| प्रमुख पुस्तकें | बुद्ध और कार्ल मार्क्स बुद्ध एंड हिज़ धम्म द राइज़ एंड फॉल ऑफ हिंदू वुमेन |
| सम्मान | मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ 1990 |
| निधन | 6 दिसंबर, 1956 |
| जीवनकाल | 65 वर्ष |
| समाधि स्थल | चैत्य भूमि, मुंबई |
| 135वीं जयंती | 14 अप्रैल, 2026 |
This Blog Includes:
- मध्य प्रदेश के महू में हुआ था जन्म
- विदेश में प्राप्त की उच्च शिक्षा
- वैवाहिक जीवन
- स्वदेश लौटने के बाद संगठन और समाचार पत्र की शुरुआत
- डॉ. भीमराव आंबेडकर के राजनीतिक जीवन की शुरुआत
- कैसे बने भारतीय संविधान के वास्तुकार
- भारतीय बुद्ध महासभा की स्थापना
- डॉ. आंबेडकर द्वारा लिखित प्रमुख पुस्तकें
- डॉ. आंबेडकर का निधन
- ‘भारत रत्न’ से किया गया सम्मानित
- डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत
- डॉ. भीमराव आंबेडकर की जीवनी PDF
- FAQs
मध्य प्रदेश के महू में हुआ था जन्म
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित महू (अब आधिकारिक तौर पर डॉ. अंबेडकर नगर) में हुआ था। उनके पिता ‘सूबेदार रामजी मालोजी सकपाल’ ब्रिटिश सेना में एक सूबेदार थे और महू कैंट, इंदौर एमपी में तैनात थे।। उनकी माता ‘भीमाबाई सकपाल’ एक गृहणी थीं। वे अपने माता-पिता की 14वीं संतान थे।
बताया जाता है कि जब वे दो वर्ष के थे, तब उनके पिता ब्रिटिश सेवा से सेवानिवृत हो गए थे। इसलिए परिवार की प्रतिकूल आर्थिक स्थिति होने के कारण उनका बचन संघर्षमय रहा। वहीं छह वर्ष की अल्पायु में उनकी माता का देहांत हो गया। इसके बाद उनकी बुआ ने उनकी देखभाल की।
विदेश में प्राप्त की उच्च शिक्षा
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा सतारा, महाराष्ट्र में पूरी की और अपनी माध्यमिक शिक्षा 1908 में बॉम्बे के एलफिंस्टन हाई स्कूल से पूरी की। इस दौरान उन्हें बड़ौदा के गायकवाड़ शासक महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय से प्रति माह 25 रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त हुई।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 1912 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक किया। कॉलेज में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण, 1913 में उन्हें बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ द्वारा अमेरिका के न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय में एमए और पीएचडी करने के लिए छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया। फिर वे उच्च अध्ययन के लिए अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए।
यहां उनके शोध विषय ‘नेशनल डिविडेंड फॉर इंडिया: ए हिस्टॉरिक एंड एनालिटिकल स्टडी’ के लिए उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। फिर उन्होंने 1916 में लॉ का अध्ययन करने के लिए ‘ग्रेज इन’ और इकोनॉमिक्स का अध्ययन करने के लिए लंदन विश्वविद्यालय (स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स) में एडमिशन लिया। हालांकि छात्रवृत्ति की अवधि समाप्त होने और धन की कमी के कारण उन्हें 1917 में भारत लौटना पड़ा। 1918 में वे मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के सिडेनहैम कॉलेज में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर बन गए।
फिर 1920 में डॉ. अंबेडकर छत्रपति शाहूजी महाराज की आर्थिक मदद, एक मित्र से लिए गए ऋण और अपनी बचत के सहारे पढ़ाई पूरी करने के लिए लंदन लौट गए। वर्ष 1923 में उनके शोध विषय ‘द प्रॉब्लम ऑफ़ द रूपी: इट्स ओरिजन एंड सॉल्यूशन’ के लिए डॉक्टर ऑफ साइंस की डिग्री प्रदान की गई। इस बीच उन्होंने 1922-23 के दौरान जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय में भी पढ़ाई की थी।
वैवाहिक जीवन
डॉ. भीमराव अंबेडकर का पहला विवाह 1906 में 15 साल की उम्र में रमाबाई से हुआ था। उनके बेटे का नाम यशवंत अंबेडकर था। बाद में लंबी बीमारी के कारण 1935 में रमाबाई का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने 15 अप्रैल 1948 को डॉ. सविता कबीर से दूसरी शादी की, जो एक ब्राह्मण परिवार से थीं और पेशे से डॉक्टर थीं।
स्वदेश लौटने के बाद संगठन और समाचार पत्र की शुरुआत
वर्ष 1923 में भारत लौटने के बाद डॉ. भीमराव ने दलित वर्गों के कल्याण के लिए एक संस्था शुरू की, जिसमें सर चिमनलाल सीतलवाड़ अध्यक्ष और डॉ. अंबेडकर चेयरमैन थे। फिर उन्होंने वर्ष 1924 में ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की।
वर्ष 1927 में डॉ. अंबेडकर ने ‘बहिष्कृत भारत’ नामक एक अन्य मराठी पाक्षिक आरंभ किया और शोषित वर्ग के लोगों एवं सवर्ण हिंदुओं के बीच सामाजिक समानता का पाठ पढ़ाने के लिए ‘समाज समता संघ’ नामक एक संगठन की भी स्थापना की। इस संगठन के अंग के रूप में 1929 में एक अन्य समाचार ‘समता’ भी प्रारंभ किया गया।
वर्ष 1942 में डॉ. अंबेडकर ने दलित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए अखिल भारतीय राजनीतिक दल के रूप में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ का गठन किया। फिर वर्ष 1945 में उन्होंने ‘द पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की जिसने बाद में मुंबई में अनुसूचित जातियों के छात्र-छात्राओं के लिए कई कॉलेज शुरू किए।
डॉ. भीमराव आंबेडकर के राजनीतिक जीवन की शुरुआत
डॉ. भीमराव आंबेडकर के राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1926 में बंबई विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किए जाने से शुरू हुई। 1934 तक वह इस परिषद के सदस्य रहे। इसके बाद उन्हें भारत के तत्कालीन वायसराय ने 1941 में रक्षा सलाहकार समिति का सदस्य नियुक्त कर दिया। कुछ समय के उपरांत उन्हें श्रम विभाग का कार्यभार सौंपा गया जिसमें वह 1946 तक कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल के दौरान सबसे महत्वपूर्ण श्रम विधेयक ‘न्यूनतम मजदूरी विधेयक’ पेश किया गया था।
वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद जब भारत का नया मंत्रिमंडल बना तो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विधि मंत्री के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर का चयन किया। कुछ वर्षों की सेवा के बाद 1952 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपनी विद्वता द्वारा सभा की कार्यवाही में अहम योगदान जारी रखा।
कैसे बने भारतीय संविधान के वास्तुकार
भारतीय स्वतंत्रता के कुछ माह पश्चात डॉ. भीमराव आंबेडकर को 29 अगस्त, 1947 में प्रारूप समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया। फिर डॉ. आंबेडकर और उनकी टीम ने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए कुल 167 दिनों तक बैठक की। वहीं अधिकांश अवसरों पर उन्होंने अकेले ही कार्य किया तब जाकर देश को अपना लिखित संविधान मिला।
क्या आप जानते हैं कि संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा सजाया गया, जिनमें बेहर राममनोहर सिन्हा और नंदला बोस शामिल थे। फिर इसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया और यह 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।
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भारतीय बुद्ध महासभा की स्थापना
डॉ. भीमराव आंबेडकर बौद्ध धर्म से बहुत प्रभावित थे इसलिए उन्होंने भारत में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का अधिक प्रचार-प्रसार करने हेतु वर्ष 1955 में ‘भारतीय बुद्ध महासभा’ की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में एक विशाल समारोह में बौद्ध धर्म को अपना लिया।
डॉ. आंबेडकर द्वारा लिखित प्रमुख पुस्तकें
डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवनकाल में कुछ प्रमुख पुस्तकों और पत्रिकाओं की रचना की, जो इस प्रकार हैं:
पुस्तकें
- द कास्ट्स इन इंडिया-देयर मेकैनिज्म जेनेसिस एंड डेवलपमेंट
- व्हाट कांग्रेस एण्ड गांधी हैव डन टु द अनटचेबल्स?
- हू वर द शूद्रास एण्ड हाउ दे केम टु बी द फोर्थ वर्णा इन द इंडो-आर्यन सोसाइटी?
- थॉट्स ऑन लिंग्विस्टिक स्टेट्स
- थॉट्स ऑन पाकिस्तान
- रानाडे, गांधी एंड जिन्ना
- एन्निहिलेशन ऑफ कास्ट्स
- बुद्ध और कार्ल मार्क्स
पत्रिकाएं
- मूकनायक (1920)
- बहिष्कृत भारत (1927)
- समता (1929)
डॉ. आंबेडकर का निधन
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 6 दिसंबर 1956 को 65 वर्ष की आयु में महानिर्वाण प्राप्त किया। इसके अगले दिन 7 दिसंबर को मुंबई स्थित चैत्यभूमि में उनका अंतिम संस्कार बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। आज भी यहां हर वर्ष 6 दिसंबर को लाखों अनुयायी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए चैत्यभूमि पहुँचते हैं।
‘भारत रत्न’ से किया गया सम्मानित
भारत की स्वतंत्रता, विकास और उत्थान में डॉ. भीमराव अंबेडकर के महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1990 में मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। भारत में उनकी स्मृति में 1990-1991 की अवधि को ‘सामाजिक न्याय वर्ष’ के रूप में मनाया गया था। बताना चाहेंगे प्रख्यात निर्देशक जब्बार पटेल ने डॉ. अंबेडकर के जीवन एवं शिक्षाओं पर आधारित ‘डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर’ फिल्म का निर्देशन किया है।
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत
डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत भारत के सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक ढांचे में गहराई से समाहित है। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे, जिन्होंने समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों को संस्थागत रूप दिया। उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। शिक्षा, श्रम सुधार और महिला अधिकारों के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। 1956 में बौद्ध धर्म अपनाकर उन्होंने सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। उनकी विरासत आज भी सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के रूप में जीवित है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर की जीवनी PDF
आप इस लेख में दी डॉ. भीमराव आंबेडकर की जीवनी की PDF भी यहां से डाउनलोड कर सकते हैं-
डॉ. भीमराव आंबेडकर की जीवनी की PDF
FAQs
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की देश को सबसे बड़ी देन भारतीय संविधान का निर्माण है, जिसमें उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को स्थापित कर लोकतांत्रिक भारत की नींव रखी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के पुत्र का नाम यशवंत भीमराव अंबेडकर था।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का निधन 6 दिसंबर, 1956 को दिल्ली में उनके आवास 26 अलीपुर रोड पर हुआ था।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संविधान के प्रारूप निर्माण की प्रक्रिया में 1947 से 1949 तक संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसके बाद संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया था।
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