DPSE कोर्स का पूरा नाम डिप्लोमा इन प्री-स्कूल एजुकेशन है, यह एक प्रोफेशनल टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम है जो 3-6 वर्ष के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, बाल विकास, कक्षा प्रबंधन और क्रिएटिव लर्निंग तकनीकों पर केंद्रित होता है। वर्तमान समय में माता-पिता और स्कूल दोनों ही प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे प्ले-स्कूल और प्री-स्कूल टीचिंग की मांग बढ़ी है।
हालांकि DPSE हर राज्य में सरकारी शिक्षण भर्ती के लिए मान्य नहीं है, यह निजी नर्सरी और प्ले-स्कूल सेक्टर में रोजगार के लिए वास्तविक कौशल प्रदान करता है। इस लेख में आपके लिए DPSE कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता, एडमिशन प्रोसेस और करियर स्कोप की जानकारी दी गई है।
| मापदंड | विवरण |
| कोर्स की फुल फॉर्म | डिप्लोमा इन प्री-स्कूल एजुकेशन (DPSE) |
| कोर्स लेवल | डिप्लोमा |
| कोर्स अवधि | सामान्यतः 1 से 2 वर्ष (संस्थान के अनुसार)। कुछ संस्थान वार्षिक, कुछ सेमेस्टर प्रणाली अपनाते हैं। |
| एडमिशन प्रक्रिया | मेरिट आधारित या प्रवेश परीक्षा (जैसे SCERT CET) |
| योग्यता | मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। |
| करिकुलम संरचना | सेमेस्टर वाइज थ्योरी, प्रोजेक्ट्स व स्कूल इंटर्नशिप शामिल |
| प्रमुख कॉलेज | राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और निजी संस्थान |
| प्रमुख जॉब प्रोफाइल | नर्सरी टीचर, किंडरगार्टन टीचर, प्री-स्कूल कोऑर्डिनेटर, चाइल्ड केयर असिस्टेंट |
| रोजगार के क्षेत्र | प्ले-स्कूल, किंडरगार्टन, निजी प्री-प्राइमरी स्कूल, डे-केयर सेंटर, प्रारंभिक शिक्षा संस्थान |
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DPSE कोर्स क्यों करें?
अगर आप छोटे बच्चों को पढ़ाने में रुचि रखते हैं और टीचिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो DPSE कोर्स आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। नीचे आसान भाषा में इसके प्रमुख कारण समझाए गए हैं –
- यह कोर्स 3-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के विकास (बाल मनोविज्ञान, सीखने की प्रारंभिक आदतें, व्यवहारिक कौशल) पर केंद्रित होता है, जिससे ये कोर्स आपके करियर के लिए उपयोगी हो सकता है।
- इस कोर्स में आप खुद में चाइल्ड साइकोलॉजी, प्री-स्कूल टीचिंग मेथड्स, स्वास्थ्य व पोषण, एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग, क्लास मैनेजमेंट जैसी स्किल्स डेवलप कर सकते हैं।
- इस कोर्स में आपको माइक्रो-टीचिंग, एक्टिविटी प्लानिंग और स्कूल इंटर्नशिप के माध्यम से वास्तविक अनुभव मिलता है, जो आपकी करियर ग्रोथ के लिए उपयोगी होता है।
- ये कोर्स आपको बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को समझने और आप में उन्हें संभालने की क्षमता को विकसित करता है।
- इस कोर्स को करके आप नर्सरी टीचर, किंडरगार्टन शिक्षक, प्री-स्कूल कोऑर्डिनेटर, डे-केयर असिस्टेंट या स्वयं का प्ले-स्कूल खोलकर अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।
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DPSE कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
DPSE कोर्स में एडमिशन लेने से पहले आपको संबंधित कॉलेज या संस्थान की एलिजिबिलिटी जरूर जांच लेनी चाहिए, क्योंकि नियम संस्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकते हैं। सामान्य तौर पर आवश्यक योग्यता इस प्रकार होती है –
- शैक्षिक योग्यता: उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना चाहिए।
- न्यूनतम अंक: अधिकतर संस्थानों में कम से कम 50% अंक मांगे जाते हैं, हालांकि यह प्रतिशत कॉलेज के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
- आयु सीमा: कुछ कॉलेज एडमिशन के लिए न्यूनतम या अधिकतम आयु सीमा तय करते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक एलिजिबिलिटी जरूर देख लें।
- NCTE के अनुसार, आपको मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए, जिसके लिए एक रजिस्टर्ड एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है।
- इस कोर्स के लिए कई प्राइवेट संस्थान मेरिट (12वीं के अंकों) के आधार पर प्रवेश देते हैं। कुछ संस्थान इंटरव्यू या काउंसलिंग भी आयोजित कर सकते हैं। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर DPSE के लिए कोई अनिवार्य केंद्रीय प्रवेश परीक्षा निर्धारित नहीं है।
DPSE कोर्स में एडमिशन कैसे होता है?
DPSE कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया आमतौर पर काफी सरल होती है। अधिकतर संस्थानों में मेरिट के आधार पर एडमिशन दिया जाता है, जबकि कुछ जगहों पर इंटरव्यू बेस्ड एडमिशन भी लिए जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में नीचे समझाया गया है –
- सबसे पहले आपको संबंधित राज्य की SCERT की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर अपनी प्रोफाइल बनाएं।
- रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपनी पसंद के सरकारी (DIETs) और प्राइवेट कॉलेजों का रिफ्रेंस देना होता है। इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि एक बार कॉलेज लॉक करने के बाद इसमें बदलाव करना आपके लिए कठिन हो सकता है।
- यदि आपके द्वारा चुना गया संस्थान उस राज्य में है जहाँ मेरिट बेस्ड एडमिशन होता है, तो ऐसे में आपकी 12वीं के ‘बेस्ट 5’ विषयों के अंकों के आधार पर रैंक लिस्ट जारी की जाती है। इसके अलावा दिल्ली जैसे राज्यों में आपको SCERT एंट्रेंस एग्जाम देना होता है, जिसमें सामान्य ज्ञान, टीचिंग एप्टीट्यूड और बेसिक गणित के प्रश्न पूछे जाते हैं।
- इसके बाद आपकी रैंक के आधार पर ही कॉलेज में सीटों अलॉटमेंट प्रोसेस को पूरा किया जाता है। इसके लिए आप काउंसलिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनें।
- आवंटित सीट पसंद आने पर आपको ‘सीट फ्रीजिंग’ शुल्क जमा करना होता है, जो बाद में आपकी कुल फीस में एडजस्ट हो जाता है।
- अंत में आपको आवंटित कॉलेज में जाकर अपने मूल दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराना होता है, जो कि आपके लिए अनिवार्य होता है।
डीपीएसई कोर्स कोर्स में एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज
यहां उन प्रमुख दस्तावेजों की सूची दी गई है, जो एडमिशन के समय आमतौर पर वेरिफिकेशन के लिए कॉलेज/संस्थान द्वारा मांगे जाते हैं। अलग-अलग विश्वविद्यालयों के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है:
- 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा पासिंग सर्टिफिकेट
- फोटो आईडी प्रूफ (जैसे आधार कार्ड/पैन कार्ड)
- पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ्स
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
- निवास/डोमिसाइल प्रमाण पत्र (जहाँ आवश्यक हो)
- माइग्रेशन सर्टिफिकेट (दूसरे बोर्ड/विश्वविद्यालय से आने पर)
- ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) – कई कॉलेजों में अनिवार्य होता है
- अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र (यदि कोई अतिरिक्त योग्यता हो)
DPSE कोर्स का सिलेबस
डीपीएसई कोर्स का सिलेबस अलग-अलग संस्थानों और यूनिवर्सिटी के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, लेकिन ज्यादातर जगह पढ़ाए जाने वाले मुख्य विषय लगभग समान होते हैं। इस कोर्स में बच्चों की शुरुआती शिक्षा से जुड़े थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है। नीचे दिया गया सिलेबस SCERT दिल्ली के DPSE सिलेबस से लिया गया है, जो प्री-प्राइमरी स्तर पर बच्चों को प्रभावी और रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए आपको तैयार करता है। प्रमुख विषय इस प्रकार हैं :
| वर्ष | पेपर/विषय | महत्वपूर्ण टॉपिक्स |
| पहला वर्ष | भारत में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसी) – Early Childhood Care & Education (ECCE) in India | बाल्यावस्था का परिचय, ECCE का इतिहास और विकास, ECCE के उद्देश्य |
| बच्चे और बचपन को समझना (Understanding Child and Childhood) | बाल मनोविज्ञान, विकासात्मक चरण, व्यवहार विश्लेषण | |
| पूर्व-विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम: सिद्धांत और प्राथमिकताएँ (Pre-School Education Curriculum: Principles & Priorities) | पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत, प्राथमिकताएँ और शिक्षण लक्ष्य | |
| बच्चों में गणितीय अवधारणाओं का विकास (Development of Mathematical Concepts in Children) | गणितीय सोच के विकास, अवधारणात्मक समझ | |
| बच्चों में भाषा एवं साक्षरता का विकास (Development of Language & Literacy in Children) | भाषा विकास चरण, पढ़ने-लिखने की रणनीतियाँ | |
| बच्चों का स्वास्थ्य, देखभाल एवं पोषण (Health, Care & Nutrition of Children) | स्वास्थ्य मूल बातें, पोषण और सुरक्षित वातावरण | |
| ईसीसी में विधियाँ एवं सामग्री (Methods & Materials in ECCE) | शिक्षण विधियाँ, सीखने-सिखाने की सामग्री | |
| स्कूल अनुभव कार्यक्रम (एसईपी) – School Experience Programme (SEP) | प्रायोगिक स्कूल अनुभव, गतिविधियों का अभ्यास | |
| दूसरा वर्ष | बच्चों में पर्यावरण की समझ विकसित करना (Developing Understanding of Environment in Children) | पर्यावरण शिक्षा की अवधारणा, पर्यावरण के तत्व |
| भाषाओं में दक्षता: हिंदी और अंग्रेजी (Proficiency in Languages: Hindi & English) | हिंदी भाषा कौशल, अंग्रेजी भाषा कौशल | |
| लिंग, विविधता एवं भेदभाव (Gender, Diversity & Discrimination) | लिंग और विविधता, भेदभाव समझ | |
| विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ कार्य करना (Working with Children with Special Needs) | विशेष जरूरतें, सहायता तकनीक | |
| पूर्व-विद्यालय कार्यक्रम की योजना एवं संगठन (Planning & Organisation of Pre-School Programme) | योजना निर्माण, संसाधन संगठित करना | |
| परिवारों एवं समुदाय के साथ कार्य करना (Working with Families & Community) | पारिवारिक भागीदारी, समुदाय समन्वय | |
| स्व-विकास (Self-Development) | स्वयं-प्रबंधन कौशल, शैक्षणिक व्यवहार | |
| स्कूल अनुभव कार्यक्रम (एसईपी) – School Experience Programme (SEP) | ऐसा सिद्धांत जो अनुभवात्मक हो, शिक्षक व्यवहार |
DPSE कोर्स के लिए कॉलेज और उनकी फीस
भारत में कई सरकारी, प्राइवेट और ट्रेनिंग संस्थान DPSE (Nursery Primary Teacher Training) कोर्स करवाते हैं। अलग-अलग संस्थानों में कोर्स की अवधि, सुविधाओं और मोड (रेगुलर/ऑनलाइन/डिस्टेंस) के अनुसार फीस में अंतर हो सकता है। नीचे कुछ प्रमुख संस्थानों और उनकी अनुमानित फीस की जानकारी दी गई है –
DPSE कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| संस्थान का नाम | स्थान | अनुमानित फीस (पूरा कोर्स) |
| राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) दिल्ली | दिल्ली | INR 20,000 – INR 60,000 |
| SCERT दिल्ली प्रवेश पोर्टल (DPSE संबद्ध कॉलेज) | दिल्ली | INR 20,000 – INR 60,000 |
| सत्यं इंटरनेशनल पॉलिटेक्निक | नई दिल्ली | INR 60,000 – INR 70,000 |
| प्रदीप मेमोरियल कॉम्प्रिहेंसिव कॉलेज ऑफ एजुकेशन | दिल्ली | INR 60,000 – INR 70,000 |
| एलएलडीआईएमएस (LLDIMS) | दिल्ली | INR 1,00,000 – INR 1,20,000 |
| SCERT चंडीगढ़ (प्री-स्कूल शिक्षा कार्यक्रम) | चंडीगढ़ | INR 15,000 – INR 40,000 |
| विद्या ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (SCERT मान्यता प्राप्त) | दिल्ली | INR 60,000 – INR 70,000 |
| SCERT से संबद्ध जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) – राज्य अनुसार | विभिन्न राज्य | INR 20,000 – INR 50,000 |
| सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (राज्य सरकार द्वारा संचालित) | राज्य अनुसार | INR 25,000 – INR 60,000 |
| SCERT मान्यता प्राप्त अन्य DPSE कॉलेज (दिल्ली/राज्य स्तर) | विभिन्न | INR 20,000 – INR 60,000 |
DPSE कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| संस्थान का नाम | स्थान | अनुमानित फीस (पूरा कोर्स) |
| एमिटी यूनिवर्सिटी (DPSE कार्यक्रम) | नोएडा | INR 1,00,000 या इससे अधिक |
| विद्या ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट | दिल्ली | INR 60,000 – INR 70,000 |
| सेवा कॉलेज (DPSE) | दिल्ली | INR 20,000 – INR 30,000 |
| लेटर अकादमी | विभिन्न | INR 40,000 – INR 80,000 |
| प्राइवेट टीचर ट्रेनिंग कॉलेज (दिल्ली NCR) | दिल्ली NCR | INR 50,000 – INR 1,20,000 |
| स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (DPSE) | विभिन्न | INR 30,000 – INR 80,000 |
| रीजनल प्राइवेट एजुकेशन कॉलेज (UP/राजस्थान) | राज्य अनुसार | INR 40,000 – INR 90,000 |
| प्राइवेट अर्ली चाइल्डहुड ट्रेनिंग सेंटर | विभिन्न | INR 30,000 – INR 70,000 |
| एजुकेशन ग्रुप कॉलेज (DPSE स्ट्रीम) | विभिन्न | INR 50,000 – INR 1,00,000 |
| प्राइवेट वोकेशनल टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट | विभिन्न | INR 35,000 – INR 85,000 |
नोट: यह फीस केवल अनुमानित है। एडमिशन लेने से पहले हमेशा अपने चुने हुए कॉलेज या संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट फीस, मान्यता और कोर्स डिटेल्स जरूर जांच लें, क्योंकि समय-समय पर इनमें बदलाव हो सकता है।
DPSE कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
DPSE कोर्स पूरा करने के बाद आप प्री-प्राइमरी और शुरुआती शिक्षा से जुड़े कई क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। नर्सरी स्कूल, प्री-स्कूल, डे-केयर सेंटर, किंडरगार्टन, पब्लिक स्कूल, ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म, आर्ट एंड क्राफ्ट ट्रेनिंग सेंटर तथा चाइल्ड डेवलपमेंट संस्थानों में विभिन्न जॉब प्रोफाइल पर काम करने के अवसर मिलते हैं। नीचे कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल और उनकी अनुमानित सैलरी दी गई है –
| जॉब प्रोफाइल | अनुमानित सालाना सैलरी (INR) |
| प्री स्कूल टीचर | INR 1.8 लाख – INR 1.9 लाख |
| डे केयर टीचर | INR 1.9 लाख – INR 2.3 लाख |
| प्री प्राइमरी टीचर | INR 3.5 लाख – INR 4.4 लाख |
| प्री स्कूल टीचर | INR 1.8 लाख – INR 1.9 लाख |
नोट – यहां अनुमानित सैलरी की जानकारी Ambitionbox.com के आधार पर दी गई है, यह संस्थान, शहर, अनुभव और स्किल्स के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
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DPSE कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प
DPSE कोर्स पूरा करने के बाद आप अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार आगे की पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं। इससे आपकी योग्यता बढ़ती है और भविष्य में बेहतर जॉब अवसर मिल सकते हैं। नीचे कुछ प्रमुख कोर्स विकल्प, उनकी न्यूनतम योग्यता और अवधि की जानकारी दी गई है –
| कोर्स का नाम | कोर्स का लेवल | पात्रता |
| B.A. B.Ed (ITEP) | 4-वर्षीय इंटीग्रेटेड डिग्री | 12वीं और NCET एंट्रेंस |
| B.El.Ed. | ग्रेजुएशन (एलीमेंट्री एजुकेशन) | 12वीं (50% अंक) |
| B.A. (सायकोलॉजी) | ग्रेजुएशन (मनोविज्ञान) | 12वीं पास |
| B.Sc. (होम साइंस) | ग्रेजुएशन (चाइल्ड डेवलपमेंट) | 12वीं (साइंस/आर्ट्स) |
| PG Diploma (ECCE) | पोस्ट-डिप्लोमा स्पेशलाइजेशन | DPSE और अनुभव |
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D.El.Ed बनाम DPSE कोर्स में अंतर
D.El.Ed और DPSE दोनों ही टीचिंग से जुड़े कोर्स हैं, लेकिन इनका उद्देश्य, मान्यता और करियर स्कोप अलग-अलग होता है। नीचे दी गई टेबल में दोनों कोर्स के बीच मुख्य अंतर आसान भाषा में समझाया गया है –
| विशेषता | D.El.Ed | DPSE |
| कोर्स का पूरा नाम | डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजुकेशन | डिप्लोमा इन प्री‑स्कूल एजुकेशन |
| कोर्स की अवधि | आम तौर पर 2 वर्ष | आम तौर पर 1–2 वर्ष |
| शिक्षण स्तर | प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 8) | प्री-स्कूल/नर्सरी (3 से 6 वर्ष के बच्चे) |
| कोर्स की प्रकृति | सामान्य प्राथमिक शिक्षा | प्रारंभिक बाल देखभाल (ECCE) विशेषज्ञता |
| प्रवेश का आधार | 12वीं मेरिट या SCERT एंट्रेंस | 12वीं मेरिट या SCERT एंट्रेंस |
| CTET पात्रता | CTET पेपर-1 के लिए पात्र | CTET अनिवार्य नहीं (राज्य पात्रता संभव) |
| जॉब प्रोफाइल | PRT (प्राइमरी टीचर) | NTT/प्री-प्राइमरी टीचर |
| प्रमुख भर्ती बोर्ड | DSSSB, KVS, REET | KVS बालवाटिका, निजी प्ले-स्कूल |
| करिकुलम फोकस | शिक्षाशास्त्र, गणित, पर्यावरण अध्ययन | बाल मनोविज्ञान, खेल-कूद, पोषण एवं स्वास्थ्य |
अगर आपका लक्ष्य सरकारी स्कूल में शिक्षक बनना है, तो D.El.Ed बेहतर विकल्प माना जाता है। वहीं छोटे बच्चों (प्री-प्राइमरी स्तर) को पढ़ाने और जल्दी करियर शुरू करने के लिए DPSE उपयोगी कोर्स है।
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FAQs
DPSE और नर्सरी शिक्षक प्रशिक्षण दोनों प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े हैं। अंतर मुख्य रूप से पाठ्यक्रम और मान्यता का होता है। DPSE अधिक संरचित शिक्षक प्रशिक्षण डिप्लोमा माना जाता है, जबकि NTT कई निजी संस्थान भी चलाते हैं।
DPSE (डिप्लोमा इन प्री-स्कूल एजुकेशन) कोर्स की फीस संस्थान के अनुसार अलग-अलग होती है, लेकिन आमतौर पर पूरे कोर्स की कुल फीस लगभग INR 60,000 से INR 1.5 लाख के बीच होती है। सरकारी संस्थानों में फीस कम जबकि प्राइवेट कॉलेजों में अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
DPSE कोर्स पूरा करने के बाद निजी प्ले स्कूल, नर्सरी स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और प्री-स्कूल में शिक्षक या सहायक शिक्षक के रूप में काम मिल सकता है। सरकारी नियुक्ति के लिए संबंधित राज्य की भर्ती प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
मान्यता प्राप्त संस्थान से किया गया DPSE कोर्स कई राज्यों में प्रारंभिक शिक्षक पदों के लिए स्वीकार किया जाता है। हालांकि अंतिम चयन राज्य की भर्ती परीक्षा और नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए आप सबसे पहले हमेशा संबंधित शिक्षा विभाग की अधिसूचना को ध्यानपूर्वक देखें।
हाँ, यह कोर्स केवल किताबों तक सीमित नहीं है। इसमें बच्चों के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, क्लासरूम प्रैक्टिस एंड लेसन प्लानिंग बनाना शामिल होता है, जिससे आप में एक्चुअल लर्निंग स्किल्स विकसित होती हैं।
हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको DPSE कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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