D.El.Ed कोर्स: योग्यता, अवधि, फीस और करियर ऑप्शंस की जानकारी

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D.El.Ed कोर्स

D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) एक शिक्षक प्रशिक्षण डिप्लोमा कोर्स है, जिसे प्राथमिक शिक्षा के लिए शिक्षकों को तैयार करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। यह कोर्स मुख्य रूप से कक्षा 1 से 5 और कुछ राज्यों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाने के लिए आवश्यक शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।

भारत में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह कोर्स राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा विनियमित किया जाता है। यदि आप शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो D.El.Ed एक बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण शैक्षणिक योग्यता मानी जाती है।

इस लेख में D.El.Ed कोर्स से जुड़ी योग्यता, अवधि, फीस, प्रवेश प्रक्रिया, मान्यता और करियर से जुड़े वास्तविक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाया गया है।

This Blog Includes:
  1. D.El.Ed कोर्स का ओवरव्यू
  2. D.El.Ed कोर्स क्या है?
  3. D.El.Ed कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
  4. D.El.Ed कोर्स में क्या पढ़ाया जाता है?
    1. बाल विकास और अधिगम (Child Development & Learning)
    2. शिक्षण शास्त्र (Pedagogy of School Subjects)
    3. कक्षा प्रबंधन और शिक्षण विधियाँ (Classroom Management & Teaching Methods)
    4. शैक्षिक मनोविज्ञान (Educational Psychology)
    5. मूल्यांकन और छात्र आकलन (Assessment & Evaluation)
    6. स्कूल इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
    7. शैक्षिक तकनीक और ICT का परिचय
  5. D.El.Ed कोर्स के लिए आवश्यक कौशल और स्किल डेवलपमेंट
  6. D.El.Ed कोर्स के लिए कॉलेज
    1. D.El.Ed कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज
    2. D.El.Ed कोर्स के लिए प्राइवेट कॉलेज
    3. प्रवेश परीक्षाएं
  7. D.El.Ed कोर्स की अनुमानित फीस
  8. D.El.Ed कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया
  9. D.El.Ed कोर्स करने के बाद करियर स्कोप और सैलरी
  10. FAQs 

D.El.Ed कोर्स का ओवरव्यू

यहाँ आपके लिए D.El.Ed कोर्स का ओवरव्यू दिया गया है, जिसके जरिए आप इस कोर्स के बारे में संक्षिप्त में जान सकेंगे –

विशेषताएँविवरण
कोर्स का नामडिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (Diploma in Elementary Education)
उद्देश्यप्राथमिक स्तर के शिक्षकों को शिक्षण पद्धतियों और बाल मनोविज्ञान में प्रशिक्षित करना।
कोर्स की अवधि2 वर्ष (पूर्णकालिक नियमित कार्यक्रम)
न्यूनतम योग्यता10+2 (बारहवीं कक्षा) न्यूनतम 50% अंकों के साथ (आरक्षित वर्ग के लिए 45%)।
मान्यताराष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा अनिवार्य रूप से मान्यता प्राप्त होना चाहिए।
मुख्य विषयबाल विकास, शिक्षण के सिद्धांत, शैक्षिक मनोविज्ञान, विभिन्न विषयों की शिक्षा शास्त्र (पेडागोजी)।
करियर स्कोपसरकारी और निजी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक, शिक्षण सहायक, ट्यूटर

D.El.Ed कोर्स क्या है?

D.El.Ed एक दो वर्षीय नियमित (रेगुलर) डिप्लोमा कोर्स है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक स्तर के शिक्षकों को शिक्षण पद्धतियों, बाल विकास और कक्षा प्रबंधन में प्रशिक्षित करना है। इस कोर्स में छात्रों को यह सिखाया जाता है कि छोटे बच्चों को किस प्रकार समझाया जाए, उनकी सीखने की क्षमता को कैसे पहचाना जाए और कक्षा में सकारात्मक शिक्षण वातावरण कैसे बनाया जाए।

D.El.Ed केवल एलीमेंट्री एजुकेशन तक सीमित है। यह माध्यमिक (सेकेंडरी) या उच्च माध्यमिक (सीनियर सेकेंडरी) शिक्षण के लिए पात्रता प्रदान नहीं करता। D.El.Ed कोर्स उन लोगों के लिए है जो बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी रखते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। यह कोर्स आसान और प्रैक्टिकल होता है, जिससे आपको क्लासरूम में पढ़ाने का अनुभव भी मिलता है।

D.El.Ed कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता

D.El.Ed कोर्स में दाखिला लेने के लिए निम्न योग्यताएँ आम तौर पर जरूरी होती हैं:

  • न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 12वीं पास होना आवश्यक है। इसके अलावा, कुछ संस्थान ग्रेजुएट छात्रों के लिए भी यह कोर्स उपलब्ध कराते हैं।
  • अधिकतर राज्यों और कॉलेजों में सामान्य वर्ग के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 45% अंक जरूरी माने जाते हैं।
  • कई जगहों पर प्रवेश परीक्षा के जरिए चयन किया जाता है, जबकि कुछ संस्थान 12वीं के अंक के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाकर छात्रों को प्रवेश देते हैं।
  • आवेदन के समय अभ्यर्थियों की आयु लगभग 17 से 35 साल के बीच होनी चाहिए।

नोट – अंतिम पात्रता की पुष्टि संबंधित राज्य की आधिकारिक अधिसूचना से करनी चाहिए।

D.El.Ed कोर्स में क्या पढ़ाया जाता है?

D.El.Ed पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से निम्न विषय शामिल होते हैं:

बाल विकास और अधिगम (Child Development & Learning)

इस विषय में बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को समझाया जाता है। छात्र यह सीखते हैं कि अलग-अलग उम्र के बच्चों की सीखने की क्षमता कैसे अलग होती है और शिक्षक को पढ़ाने के तरीके कैसे बदलने चाहिए। इसमें सीखने के सिद्धांत, व्यवहारवाद, संज्ञानात्मक विकास और व्यक्तिगत भिन्नताओं पर फोकस किया जाता है। यह विषय शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि हर बच्चा एक जैसी गति से क्यों नहीं सीखता।

शिक्षण शास्त्र (Pedagogy of School Subjects)

पेडागोजी के अंतर्गत हिंदी, अंग्रेज़ी, गणित और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषयों को पढ़ाने की विधियाँ सिखाई जाती हैं। इसमें यह बताया जाता है कि किसी विषय को बच्चों के स्तर के अनुसार सरल और रोचक कैसे बनाया जाए। छात्र पाठ योजना बनाना, उदाहरणों का सही उपयोग और गतिविधि-आधारित शिक्षण सीखते हैं। यह विषय थ्योरी से ज्यादा व्यावहारिक होता है और सीधे कक्षा शिक्षण से जुड़ा रहता है।

कक्षा प्रबंधन और शिक्षण विधियाँ (Classroom Management & Teaching Methods)

इस भाग में छात्रों को कक्षा को अनुशासित और सकारात्मक बनाए रखने के तरीके सिखाए जाते हैं। इसमें समय प्रबंधन, बच्चों के व्यवहार को समझना, समूह कार्य करवाना और समस्या-आधारित शिक्षण शामिल होता है। साथ ही अलग-अलग शिक्षण विधियाँ जैसे कहानी-आधारित शिक्षण, खेल-आधारित सीखना और अनुभवात्मक शिक्षण पर भी चर्चा की जाती है, ताकि पढ़ाई बोझ नहीं बल्कि रुचिकर बन सके।

शैक्षिक मनोविज्ञान (Educational Psychology)

शैक्षिक मनोविज्ञान में यह समझाया जाता है कि बच्चे कैसे सोचते हैं, कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और सीखते समय किन मानसिक प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। इसमें प्रेरणा, ध्यान, स्मृति और भावनात्मक विकास जैसे विषय शामिल होते हैं। यह विषय शिक्षकों को बच्चों की समस्याओं को पहचानने और सही तरीके से मार्गदर्शन देने में मदद करता है, खासकर कमजोर या विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए।

मूल्यांकन और छात्र आकलन (Assessment & Evaluation)

इस विषय में बच्चों के सीखने का आकलन करने के तरीकों को सिखाया जाता है। इसमें केवल परीक्षा ही नहीं, बल्कि सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE), गतिविधि-आधारित आकलन और फीडबैक देना भी शामिल होता है। छात्र यह सीखते हैं कि किसी बच्चे की प्रगति को अंक के बजाय समझ और कौशल के आधार पर कैसे मापा जाए, जिससे सीखने की प्रक्रिया बेहतर हो सके।

स्कूल इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

D.El.Ed का एक अहम हिस्सा स्कूल-आधारित इंटर्नशिप होता है, जहाँ छात्रों को वास्तविक कक्षा में पढ़ाने का अनुभव मिलता है। इसमें पाठ पढ़ाना, बच्चों से संवाद करना, उपस्थिति और गतिविधियों का प्रबंधन शामिल होता है। यह ट्रेनिंग छात्रों को थ्योरी और वास्तविक शिक्षण के बीच का अंतर समझने में मदद करती है और उन्हें शिक्षक की भूमिका के लिए व्यावहारिक रूप से तैयार करती है।

शैक्षिक तकनीक और ICT का परिचय

इस भाग में छात्रों को शिक्षण में तकनीक के सीमित और व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया जाता है। इसमें स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, ऑडियो-विज़ुअल टूल्स और बेसिक ICT स्किल्स शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य यह नहीं होता कि शिक्षक तकनीकी विशेषज्ञ बनें, बल्कि यह कि वे बच्चों की समझ बढ़ाने के लिए तकनीक का सही और संतुलित उपयोग कर सकें।

नोट – यह कोर्स थ्योरी के साथ-साथ कक्षा आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी ज़ोर देता है।

D.El.Ed कोर्स के लिए आवश्यक कौशल और स्किल डेवलपमेंट

यहाँ D.El.Ed कोर्स के लिए आवश्यक कौशल और स्किल डेवलपमेंट की जानकारी दी गई है, जिनके माध्यम से आप इस कोर्स को अच्छे से सीख सकते हैं और इस क्षेत्र में ग्रोथ पा सकते हैं –

आवश्यक कौशलमहत्वस्किल डेवलपमेंट के अवसर
कम्युनिकेशन स्किल्सइस स्किल के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों और सहकर्मियों के साथ स्पष्ट और प्रभावी ढंग से संवाद किया जा सकता है।सार्वजनिक बोलचाल (पब्लिक स्पीकिंग), वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, अभिभावक-शिक्षक बैठकें (PTMs)।
बाल मनोविज्ञान की समझइस स्किल के होने से आप बच्चों के सीखने के तरीके, व्यवहार और भावनात्मक जरूरतों को समझ सकते हैं।बाल विकास कार्यशालाएं, शैक्षिक मनोविज्ञान सेमिनार, केस स्टडीज।
धैर्य और सहानुभूति (पेशेंस एंड एम्पैथी)ये स्किल आपको बच्चों को पढ़ाते समय बहुत धैर्य रखना सिखाती है, जिससे प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों को समझना आसान हो जाता है।कक्षा इंटर्नशिप के दौरान अनुभव, रोल-प्लेइंग गतिविधियाँ, परामर्श सत्र।
क्रिएटिविटी एंड इनोवेटिवइस स्किल के होने से आप शिक्षण को रोचक और आकर्षक बनाने के लिए नई शिक्षण पद्धतियों और सामग्रियों (टीचिंग ऐड) का उपयोग करना सीख पाते हैं।DIY (Do It Yourself) शिक्षण सामग्री बनाना, प्रोजेक्ट-आधारित सीखना, कला और शिल्प कार्यशालाएं।
क्लासरूम मैनेजमेंटइस स्किल के होने से आप कक्षा में एक व्यवस्थित और सुरक्षित सीखने का माहौल बनाए रख सकते हैं।व्यावहारिक प्रशिक्षण, कक्षा प्रबंधन कार्यशालाएं, वरिष्ठ शिक्षकों का अवलोकन।
प्रॉब्लम सॉल्विंग एंड डिसीजन मेकिंगये स्किल शिक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियों (जैसे किसी बच्चे का खराब प्रदर्शन) का आपको समाधान खोजना सिखाती है।क्रिटिकल थिंकिंग अभ्यास, टीम-शिक्षण प्रोजेक्ट्स।
डिजिटल लिटरेसीइस स्किल के होने से आप आधुनिक शिक्षण उपकरणों, कंप्यूटर और शैक्षिक सॉफ्टवेयर का उपयोग करना सीख पाते हैं।कंप्यूटर कोर्स, स्मार्ट क्लासरूम तकनीक पर प्रशिक्षण, ऑनलाइन शिक्षण संसाधन।

D.El.Ed कोर्स के लिए कॉलेज

फार्मेसी कोर्स के लिए निम्नलिखित कॉलेज/संस्थान आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं, इसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों ही प्रकार के कॉलेज के नाम शामिल हैं –

D.El.Ed कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज

D.El.Ed कोर्स के लिए सरकारी कॉलेजों को आमतौर पर जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (District Institute of Education and Training – DIET) के नाम से भी जाना जाता है। इन कॉलेज या संस्थानों को राज्य सरकारों द्वारा संचालित किया जाता हैं, जिनमें इस कोर्स की फीस प्राईवेट कॉलेज की तुलना में कम होती है। यहाँ दी गई निम्नलिखित तालिका में कुछ राज्यों द्वारा संचालित कॉलेज की जानकारी दी गई है –

राज्यकॉलेज का नामस्थान
उत्तर प्रदेशDIET Lucknow, DIET Meerut, DIET Prayagraj (Allahabad)लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज आदि अन्य जिलों में
बिहारDIET Patna, DIET Gaya, DIET Muzaffarpurपटना, गया, मुजफ्फरपुर आदि अन्य जिलों में
दिल्लीDIET Daryaganj, DIET Keshav Puram, DIET Rohiniदरियागंज, रोहिणी, केशवपुरम आदि नई दिल्ली के कई अन्य जिलों में
उत्तराखंडDIET Kashipur, DIET Dehradun, DIET Pauriकाशीपुर, देहरादून, पौड़ी आदि अन्य जिलों में
राजस्थानDIET Jaipur, DIET Jodhpur, DIET Ajmerजयपुर, जोधपुर, अजमेर आदि अन्य जिलों में
मध्य प्रदेशDIET Bhopal, DIET Indore, DIET Gwaliorभोपाल, इंदौर, ग्वालियर आदि अन्य जिलों में
हरियाणाDIET Gurgaon, DIET Sonipat, DIET Bhiwaniगुड़गांव, सोनीपत, भिवानी आदि अन्य जिलों में
महाराष्ट्रDIET Mumbai, DIET Pune, DIET Nagpurमुंबई, पुणे, नागपुर आदि अन्य जिलों में

D.El.Ed कोर्स के लिए प्राइवेट कॉलेज

यहाँ दी गई निम्नलिखित तालिका में D.El.Ed कोर्स के लिए कुछ प्रमुख प्राइवेट कॉलेज के बारे में बताया गया है, जिनमें आवेदन करने के लिए आप इन संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट को विजिट कर सकते हैं –

कॉलेज / यूनिवर्सिटीस्थानD.El.Ed कोर्स के लिए फोकस फील्ड
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू)पंजाबटीचर एजुकेशन, मॉडर्न टीचिंग मेथोडोलोजिज़
एमिटी यूनिवर्सिटीनोएडाटीचर ट्रेनिंग, एजुकेशनल इन्नोवेशंस
मानव रचना यूनिवर्सिटीहरयाणाएलिमेंट्री एजुकेशन, प्रैक्टिकल टीचिंग स्किल्स
सिम्बायोसिस कॉलेज ऑफ एजुकेशनपुणेकॉम्प्रिहेंसिव टीचर ट्रेनिंग
प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटीबैंगलोरएलिमेंट्री-लेवल टीचर प्रिपेरेशन
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू)मुरादाबादहॉलिस्टिक टीचर एजुकेशन

प्रवेश परीक्षाएं

D.El.Ed कोर्स में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार कुछ प्रमुख परीक्षाओं जैसे – RIE CEE, PTET, CUET, APEdCET आदि में से किसी एक का हिस्सा बन सकते हैं। हालाँकि इसमें प्रवेश प्रक्रिया के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा को राज्य अनुसार संचालित किया जाता है, जिसकी जानकारी इस प्रकार है –

राज्यसंचालन निकायपात्रता (न्यूनतम अंक)चयन प्रक्रिया
बिहारएससीईआरटी (SCERT) बिहार50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
उत्तर प्रदेश (बीटीसी)परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उत्तर प्रदेश50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
असमएससीईआरटी (SCERT) असम50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
पश्चिम बंगालपश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
ओडिशाएससीईआरटी (SCERT) ओडिशा50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
हरयाणाएससीईआरटी (SCERT) हरियाणा50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
राजस्थानराजस्थान शिक्षा विभाग50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची
झारखंडझारखंड शैक्षणिक परिषद50%लिखित परीक्षा, मेरिट सूची

D.El.Ed कोर्स की अनुमानित फीस

इस कोर्स की फीस स्ट्रक्चर काफी हद तक कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर निर्भर करता है। सामान्यत: D.El.Ed कोर्स की सालाना फीस सरकारी और प्राईवेट कॉलेज में भिन्न-भिन्न हो सकती है। कुछ प्राइवेट संस्थानों में यह फीस थोड़ी ज्यादा भी हो सकती है जबकि सरकारी संस्थानों में फीस अपेक्षाकृत कम रहती है। इस कोर्स की फीस में ट्यूशन चार्ज, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और कभी-कभी स्टडी मटेरियल की लागत भी शामिल होती है। इस कोर्स की अनुमानित फीस निम्नलिखित तालिका में दी गई है –

कॉलेज का प्रकारफीस का विवरणऔसत वार्षिक शुल्क (INR)कुल पाठ्यक्रम शुल्क (2 वर्षों के लिए)
सरकारी कॉलेज (DIETs)ट्यूशन फीस, एग्जाम फीस, डेवलपमेंट फंड एंड लैब फीस, हॉस्टल एंड मेस फीस आदि।INR 5,700 – 25,000INR 11,400 – 50,000
निजी कॉलेजट्यूशन फीस, एग्जाम फीस, डेवलपमेंट फंड एंड लैब फीस, हॉस्टल एंड मेस फीस आदि।INR 35,000 – 80,000 या इससे अधिकINR 70,000 – 1,60,000 या इससे अधिक
डिस्टेंस एजुकेशन (एनआईओएस/इग्नू)ट्यूशन फीस, एग्जाम फीस, डेवलपमेंट फंड एंड लैब फीस, हॉस्टल एंड मेस फीस आदि।लगभग INR 6,000 प्रति वर्षलगभग INR 12,000 – 14,600 (कोर्स के लिए कुल)

D.El.Ed कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया

इस कोर्स में आवेदन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अप्लाई किया जाता है। इसलिए इस कोर्स के लिए निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की आवेदन प्रक्रिया के बारे में आसानी से समझा जा सकता है।

  • राज्य सरकारें और कुछ मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी हर साल D.El.Ed के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जारी करते हैं।
  • D.El.Ed कोर्स में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के लिए सबसे पहले अपने राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान की ऑफिशियल वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म को देखें।
  • इसके बाद संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर इस कोर्स के लिए दिए गए आवेदन ऑनलाइन फॉर्म को भरें।
  • आवेदन फॉर्म में अपने दस्तावेज जैसे- मार्कशीट 10+2 मार्कशीट, पहचान प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) आदि को अपलोड करें और अपनी जानकारी को सही से अपडेट करें।
  • इसके बाद आवेदन शुल्क का भुगतान भरें और यदि आपके द्वारा चयनित संस्थान में प्रवेश पाने के लिए किसी प्रवेश परीक्षा का आयोजन होता है तो आप इस परीक्षा के लिए खुद को तैयार करें।
  • यदि आपके चुने गए संस्थान में मेरिट लिस्ट के आधार पर एडमिशन होता है तो आप मेरिट लिस्ट की प्रतीक्षा करें, जो कि 12वीं के अंकों के आधार पर बनती है।
  • मेरिट लिस्ट में या परीक्षा के बाद चुने जाने पर कॉउंसलिंग प्रोसेस का पार्ट बनें। 
  • इसके बाद अंत में अपने दस्तावेज़ सत्यापन कराएं, और अपनी प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करें।
  • इस कोर्स के लिए ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया के लिए सबसे पहले अपने लिए मान्यता प्राप्त संस्थान की पहचान करें और फिर इसके लिए पात्रता मानदंड को जांचें।
  • फिर संबंधित संस्थान में जाकर सबसे पहले आप आवेदन फॉर्म को खरीदें और उसे ध्यान पूर्वक पढ़ते हुए ही अपनी जानकारी उस फॉर्म में भरें।
  • इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट्स को वेबसाइट पर अपलोड करें। इसके बाद आप अपने आवेदन शुल्क को समय रहते भरें।
  • यदि इसके लिए संस्थान द्वारा किसी परीक्षा का आयोजन किया जाता है, तो उसमें प्रतिभाग करें।
  • यदि मेरिट के आधार पर आपका एडमिशन होगा तो इसके लिए अपने संसथान में जाकर मेरिट लिस्ट को चेक करें।
  • अंत में मेरिट लिस्ट में नाम आने पर कॉउंसलिंग प्रोसेस का पार्ट बनें और अपनी आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें।

D.El.Ed कोर्स करने के बाद करियर स्कोप और सैलरी

D.El.Ed कोर्स करने के बाद अनुमानित सैलरी Ambitionbox.com के माध्यम से निम्नलिखित तालिका में दिया गया है। इस कोर्स को करने के बाद करियर स्कोप और सैलरी, आपकी जिम्मेदारियों, अनुभव और परफॉरमेंस के आधार पर निर्धारित होती है –

जॉब प्रोफाइलजिम्मेदारियांऔसतन सालाना सैलरी (INR)
प्राइमरी टीचरप्राइमरी स्कूल के बच्चों को नई तकनीक के साथ शिक्षा प्रदान करनाINR 0.9 लाख – INR 5 लाख
कंटेंट रिव्यूरकंटेंट की जाँच करना, बच्चों के लिए जानकारी से भरपूर कंटेंट उपलब्ध कराना और कंटेंट की क्वालिटी को बनाए रखनाINR 2 लाख – INR 4.5 लाख
कंटेंट राइटरबच्चों को ध्यान में रखते हुए एजुकेशनल कंटेंट लिखनाINR 1.3 लाख – INR 7 लाख
करियर कॉउंसलरबच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उनका मार्गदर्शन या कॉउंसलिंग करनाINR 1.2 लाख – INR 7 लाख
इंग्लिश टीचरबच्चों को अंग्रेजी भाषा के साथ ज्ञान प्रदान करना।INR 1 लाख – INR 6 लाख

FAQs 

D el ed कौन सी डिग्री होती है?

D.El.Ed यानी डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन एक दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है, जिसे खास तौर पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की तैयारी के लिए डिजाइन किया गया है।

D.El.Ed कोर्स करने के लिए न्यूनतम योग्यता क्या होनी चाहिए?

इस कोर्स में प्रवेश के लिए उम्मीदवार को बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। कुछ राज्यों में न्यूनतम अंक सीमा पचास प्रतिशत तक रखी जाती है।

D.el.ed की पढ़ाई कितने साल की होती है?

D.el.ed कोर्स कुल दो वर्ष का होता है, जिसमें चार सेमेस्टर शामिल होते हैं।

D.El.Ed कोर्स में क्या पढ़ाया जाता है?

इस कोर्स में शिक्षा शास्त्र, बाल विकास, मनोविज्ञान, शिक्षण विधियाँ, बाल अधिकार और प्राथमिक शिक्षा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियाँ पढ़ाई जाती हैं।

हमें उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको D.El.Ed कोर्स के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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