पटवारी एक सरकारी अधिकारी होता है जो देश के गांवों में जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड रखता है। फसल रिकॉर्ड और राजस्व वसूली से जुड़े कार्य भी पटवारी देखता है। यह पद ग्रामीण स्तर पर प्रशासन की रीढ़ माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों युवा इस पद के लिए आवेदन करते हैं और राज्य सरकार में नौकरी पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। आपको बता दें कि पटवारी बनने के लिए अब आपका ग्रेजुएट होना जरूरी है। हालांकि पहले इस भर्ती परीक्षा के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं थी। इस लेख में आप पटवारी बनने की प्रक्रिया के बारे में जानेंगे।
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पटवारी की प्रमुख जिम्मेदारियां
पटवारी का पद राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है, जो केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन में होता है। एक पटवारी के रूप में आपकी प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं:
- भूमि अभिलेखों का रख-रखाव: पटवारी गांव की जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड (जैसे खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) को अपडेट और सुरक्षित रखता है।
- फसल का रिकॉर्ड तैयार करना: पटवारी हर सीजन में खेतों में जाकर यह दर्ज करता है कि कौनसी फसल बोई गई है।
- म्यूटेशन दर्ज करना: पटवारी जमीन की खरीद-फरोख्त, विरासत या अन्य बदलाव होने पर रिकॉर्ड में संशोधन करता है।
- भूमि मापन व सीमांकन करना: वह खेतों की नाप-जोख, नक्शा बनाना और सीमा विवाद सुलझाने में सहायता करता है।
- प्राकृतिक आपदाओं की सूचना देना: पटवारी सूखा, बाढ़, बीमारी या फसल नुकसान जैसी घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट अधिकारियों को देता है।
- सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार करना: वह फसल, भूमि और राजस्व से संबंधित आंकड़े तैयार करके सरकार को भेजता है।
- रिकॉर्ड, नक्शे और उपकरणों की सुरक्षा करना: अपने क्षेत्र के सभी दस्तावेज, नक्शे और उपकरणों को सुरक्षित रखना उसकी जिम्मेदारी होती है।
पटवारी बनने के लिए योग्यता
पटवारी बनने के लिए आपको कुछ आवश्यक पात्रताओं को पूरा करना जरुरी होता है, जैसे:
- शैक्षणिक योग्यता: आपके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।
- आयु सीमा: आपकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग के लिए आयु सीमा में छूट भी दी जाती है।
- कंप्यूटर कोर्स: आपको ‘राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान’ (NIELIT) द्वारा प्रमाणित CCC या समकक्ष कोर्स करना अनिवार्य होता है।
- डोमिसाइल: आप संबंधित राज्य के मूल निवासी होने चाहिए।
पटवारी परीक्षा के लिए राज्यवार भर्ती बोर्ड
भारत में पटवारी भर्ती के लिए विभिन्न राज्यवार भर्ती बोर्ड स्वयं की परीक्षा आयोजित करते हैं। आप संबंधित राज्य भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अधिसूचना के माध्यम से पटवारी भर्ती परीक्षा से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। भारत के कुछ प्रमुख भर्ती बोर्ड निम्नलिखित हैं:
- राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB)
- मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB)
- हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC)
- दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली
- उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC)
- बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC)
पटवारी कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
भारत में पटवारी बनने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसे सफलतापूर्वक पूरा करने पर यह पद प्राप्त किया जा सकता है। यहां आपके लिए पटवारी बनने के कुछ सामान्य चरण दिए गए हैं:
स्टेप 1: स्नातक की डिग्री प्राप्त करें
12वीं कक्षा पास करने के बाद आपको भारत के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55% अंकों के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त करनी होगी। यह पटवारी परीक्षा के लिए आवेदन करने की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता है।
स्टेप 2: पटवारी परीक्षा के लिए आवेदन करें
पटवारी का पद केंद्र, राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेशों के राजस्व विभाग में होता है। इसके अलावा ‘दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी’ (DDA) जैसे विकास प्राधिकरण भी पटवारी की भर्ती करते हैं। आप अपनी योग्यता और प्राथमिकता के अनुसार पटवारी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
स्टेप 3: पटवारी परीक्षा पास करें
पटवारी परीक्षा में आपसे हिंदी, अंग्रेजी, गणित, कंप्यूटर, सामान्य ज्ञान, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, करंट अफेयर्स, ग्राम अर्थव्यवस्था और पंचायती राज से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इन सभी विषयों पर आधारित 100 MCQ प्रश्नों को हल करने के लिए आपको 90 मिनट का समय दिया जाता है। ध्यान दें कि कुछ राज्यों में लिखित परीक्षा पास करने के बाद आपको ‘कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट’ (CPCT) पास करना आवश्यक होता है।
स्टेप 4: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा करें
पटवारी परीक्षा पास करने के बाद चयनित कैंडिडेट्स की एक फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की जाती है। इसके बाद आपको संबंधित भर्ती आयोग द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाता है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आयोग द्वारा आपको एक अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाता हैं।
स्टेप 5: पटवारी पद पर नियुक्ति पाएं
इसके बाद संबंधित राजस्व विभाग द्वारा आपकी नियुक्ति की जाती है। अब आप पटवारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।
पटवारी की सैलरी और सुविधाएं
एक पटवारी की सैलरी केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में पटवारी का वेतन सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे-लेवल 3 के अंतर्गत आता है, जिसमें शुरुआती कुल मासिक वेतन लगभग INR 28,000 से INR 35,000 रुपये तक होता है।
इसके अलावा उन्हें विभाग द्वारा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA), चिकित्सा सुविधा, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। वहीं, कई वर्षों की सर्विस के बाद प्रमोशन पाकर आपको राजस्व निरीक्षक बनने का अवसर भी मिलता है।
FAQs
पटवारी बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा NIELIT द्वारा प्रमाणित कंप्यूटर कोर्स का सर्टिफिकेट भी आवश्यक होता है।
पटवारी भर्ती के लिए आमतौर पर आपको फोटो पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक योग्यता सर्टिफिकेट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और स्कैन फोटोग्राफ जैसे आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होते हैं।
पटवारी बनने के लिए संबंधित राज्य में आयोजित ‘पटवारी भर्ती परीक्षा’ देनी होती है, जो राज्य कर्मचारी चयन आयोग या भर्ती बोर्ड द्वारा लिखित परीक्षा के रूप में आयोजित की जाती है।
आप 12वीं के बाद पटवारी परीक्षा नहीं दे सकते, क्योंकि इसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक की डिग्री है।
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हमें आशा है कि इस लेख के माध्यम से आपको पटवारी बनने की प्रक्रिया की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य करियर से जुड़े लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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