इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कैसे बनें: योग्यता, परीक्षा, सैलरी और स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

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इलेक्ट्रिकल इंजीनियर वह प्रोफेशन है जो बिजली उत्पादन, पावर ट्रांसमिशन, मशीनों, इंडस्ट्रियल सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर से सीधे जुड़ा होता है। पावर प्लांट, फैक्ट्री, सोलर प्रोजेक्ट, इलेक्ट्रिक वाहन और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि इन सभी सिस्टम का संचालन और सुरक्षा तकनीकी विशेषज्ञता पर निर्भर करता है।

रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और ऊर्जा दक्षता से जुड़े प्रोजेक्ट्स के तेजी से बढ़ने के कारण इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की मांग आज भी स्थिर बनी हुई है। निजी कंपनियों से लेकर सरकारी उपक्रमों (PSU) तक इस फील्ड में शुरुआती स्तर पर ही सम्मानजनक सैलरी और आगे बढ़ने के स्पष्ट अवसर मिलते हैं।

12वीं के बाद कई छात्रों के मन में यह सवाल रहता है कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कैसे बनें, इसके लिए कौन-सी पढ़ाई जरूरी होती है, प्रवेश परीक्षाएँ कौन-सी होती हैं और यह करियर सरकारी व निजी क्षेत्र में कितने अवसर देता है। यह फील्ड उन छात्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है जिन्हें गणित और भौतिकी की समझ हो, प्रैक्टिकल काम में रुचि हो और जिम्मेदारी के साथ तकनीकी सिस्टम संभालने की क्षमता हो।

इस लेख में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने की पूरी प्रक्रिया, जरूरी योग्यता, प्रवेश परीक्षाएँ, करियर विकल्प और सैलरी से जुड़ी जानकारी दी गई है, ताकि आप इस फील्ड को केवल डिग्री के नजरिए से नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक करियर विकल्प के रूप में समझ सकें।

This Blog Includes:
  1. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कौन होता है और क्या काम करता है?
  2. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अंतर
  3. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कैसे बनें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
    1. स्टेप 1: 10+2 में सही विषय चुनें
    2. स्टेप 2: सही कोर्स और कॉलेज का चुनाव करें
    3. स्टेप 3: इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करें
    4. स्टेप 4: पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल समझ बनाएं
    5. स्टेप 5: इंटर्नशिप और ट्रेनिंग को हल्के में न लें
    6. स्टेप 6: जरूरी स्किल्स पर काम करें
    7. स्टेप 7: आगे की दिशा पहले से तय करें
  4. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक योग्यता
  5. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं
  6. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए डिग्री के प्रकार
    1. बीई / बीटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)
    2. बीई / बीटेक (इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग)
    3. डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
    4. बीएससी (इलेक्ट्रिकल या भौतिकी आधारित विषय)
    5. एमई / एमटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)
  7. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रमुख स्पेशलाइजेशन
  8. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को रिक्रूट करने वाली प्रमुख कंपनियाँ
  9. सरकारी क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की नौकरियाँ
  10. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की अनुमानित सैलरी
  11. FAQs 

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कौन होता है और क्या काम करता है?

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर वह तकनीकी पेशेवर होता है जो बिजली से जुड़े सिस्टम, मशीनों और नेटवर्क की योजना, डिजाइन, इंस्टॉलेशन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है। उसका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होता है कि बिजली का उत्पादन, ट्रांसमिशन और उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और सभी सिस्टम तय तकनीकी व सुरक्षा मानकों के अनुसार काम करें।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का काम केवल बिजली सप्लाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें पावर प्लांट, सब-स्टेशन, फैक्ट्री, सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट, इलेक्ट्रिक वाहन सिस्टम और इंडस्ट्रियल मशीनरी से जुड़े तकनीकी निर्णय भी शामिल होते हैं। अनुभव और भूमिका के अनुसार उसकी जिम्मेदारियाँ बदलती रहती हैं।

नीचे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारियाँ बताई गई हैं, जिनसे यह समझा जा सकता है कि इस प्रोफेशन में रोज़मर्रा के काम किस तरह के होते हैं और जिम्मेदारी का स्तर अनुभव के साथ कैसे बढ़ता है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की मुख्य जिम्मेदारियाँ:

  • बिजली से जुड़े सिस्टम, सर्किट और पावर नेटवर्क की योजना और कार्यान्वयन करना
  • सर्किट डायग्राम, वायरिंग लेआउट और सिंगल-लाइन ड्रॉइंग को समझकर उनके अनुसार काम करना
  • मोटर, ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर, पैनल और अन्य विद्युत उपकरणों की इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और मेंटेनेंस
  • पावर सप्लाई से जुड़े फॉल्ट, ब्रेकडाउन या ट्रिपिंग की पहचान कर उनका समाधान करना
  • ग्राउंडिंग, अर्थिंग, ओवरलोड प्रोटेक्शन और अन्य सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित करना
  • पावर सिस्टम से संबंधित लोड कैलकुलेशन, वोल्टेज ड्रॉप और बेसिक तकनीकी विश्लेषण करना
  • साइट निरीक्षण, सिस्टम कमीशनिंग और तकनीकी रिपोर्ट या रिकॉर्ड तैयार करना
  • प्रोजेक्ट टीम, तकनीशियन और सीनियर इंजीनियर के साथ समन्वय बनाकर काम करना
  • ऊर्जा की बचत और सिस्टम एफिशिएंसी बढ़ाने से जुड़े सुझाव देना

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की भूमिका केवल तकनीकी काम तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें सुरक्षा, विश्वसनीयता और सिस्टम के सुचारु संचालन की जिम्मेदारी भी शामिल होती है। अनुभव बढ़ने के साथ उसकी भूमिका ऑपरेशनल से प्लानिंग और निर्णय-निर्माण की ओर बढ़ती जाती है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अंतर

कई छात्रों को यह समझने में कन्फ्यूजन रहती है कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एक जैसी हैं या अलग-अलग। दोनों ही शाखाएँ बिजली से जुड़ी हुई हैं, लेकिन काम का स्तर, बिजली की मात्रा और करियर की दिशा में इनमें स्पष्ट अंतर होता है। आसान शब्दों में कहें तो एक में बड़ी मात्रा की बिजली (हाई पावर) का काम होता है, जबकि दूसरी में छोटे सिग्नल और डिवाइस (लो पावर) पर फोकस किया जाता है।

नीचे दी गई तुलना तालिका और उसके बाद की व्याख्या से यह अंतर आसानी से समझा जा सकता है।

तुलना का आधारइलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंगइलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
मुख्य कार्यबिजली का उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरणइलेक्ट्रॉनिक सर्किट और डिवाइस का डिजाइन
बिजली का स्तरहाई वोल्टेज / हाई पावर (ज्यादा बिजली)लो वोल्टेज / लो पावर (कम बिजली)
आसान समझशहर, फैक्ट्री या प्लांट तक बिजली पहुँचानामोबाइल, टीवी, सेंसर जैसे डिवाइस चलाना
मुख्य विषयपावर सिस्टम, इलेक्ट्रिकल मशीन, हाई वोल्टेजइलेक्ट्रॉनिक सर्किट, डिजिटल लॉजिक, एम्बेडेड सिस्टम
प्रमुख उपकरणमोटर, ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर, सब-स्टेशनआईसी, माइक्रोकंट्रोलर, पीसीबी, सेंसर
वर्क नेचरसाइट वर्क + प्लानिंग + मेंटेनेंसलैब वर्क + डिजाइन + टेस्टिंग
फील्ड वर्कअपेक्षाकृत अधिकअपेक्षाकृत कम
मुख्य सेक्टरपावर प्लांट, पावर ग्रिड, ईवी चार्जिंग, इंफ्रास्ट्रक्चरटेलीकॉम, कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन
सरकारी नौकरी के अवसरअधिक (पीएसयू, बिजली विभाग)सीमित लेकिन उपलब्ध
किसके लिए बेहतरजिन्हें बड़े सिस्टम और पावर नेटवर्क पसंद होंजिन्हें सर्किट और स्मार्ट डिवाइस पसंद हों

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कैसे बनें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग उन फील्ड्स में से एक है जो मशीनों, बिजली, इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग से सीधे जुड़ी होती है। अगर आप इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं, तो सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि सही सब्जेक्ट्स, सही दिशा और प्रैक्टिकल स्किल्स भी जरूरी होते हैं। नीचे पूरे प्रोसेस को आसान भाषा में स्टेप-बाय-स्टेप समझाया गया है, ताकि आपको साफ समझ आ सके कि शुरुआत कहाँ से करनी है और आगे कैसे बढ़ना है।

स्टेप 1: 10+2 में सही विषय चुनें

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए 10+2 में गणित और भौतिकी होना सबसे जरूरी है। लगभग सभी इंजीनियरिंग कॉलेज इन दोनों सब्जेक्ट्स को अनिवार्य मानते हैं। अगर आपकी फिजिक्स और मैथ्स की बेस ठीक है, तो आगे की इंजीनियरिंग पढ़ाई समझना काफी आसान हो जाता है, क्योंकि ज़्यादातर कॉन्सेप्ट्स इन्हीं पर आधारित होते हैं।

स्टेप 2: सही कोर्स और कॉलेज का चुनाव करें

12वीं के बाद आमतौर पर छात्र बीई या बीटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) का कोर्स चुनते हैं। यहाँ सिर्फ कॉलेज का नाम या कम फीस देखकर फैसला करना सही नहीं रहता। यह देखना ज्यादा जरूरी होता है कि वहाँ लैब्स कैसी हैं, टीचर्स का एक्सपीरियंस कितना है, और इंटर्नशिप या प्लेसमेंट के मौके मिलते हैं या नहीं। गलत कॉलेज चुनने पर बाद में प्रैक्टिकल एक्सपोज़र और जॉब अपॉर्च्युनिटीज़ दोनों में दिक्कत आ सकती है।

स्टेप 3: इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करें

ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन एंट्रेंस एग्ज़ाम्स के ज़रिए होता है। इस स्टेज पर आपको अपनी तैयारी पर फोकस करना होता है और यह तय करना होता है कि किस तरह के कॉलेज या इंस्टीट्यूट को टारगेट करना है। अलग-अलग एग्ज़ाम्स से अलग-अलग कॉलेजों में एंट्री मिलती है, जिसकी डिटेल ऊपर दिए गए प्रवेश परीक्षा वाले सेक्शन में समझाई गई है।

स्टेप 4: पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल समझ बनाएं

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सिर्फ किताबें पढ़ने से नहीं सीखी जाती। सर्किट्स, मशीनें, ट्रांसफॉर्मर और पावर सिस्टम को सही से समझने के लिए लैब वर्क और प्रैक्टिकल एक्सपोज़र बहुत जरूरी होता है। कॉलेज में प्रोजेक्ट्स करना, साइट विज़िट्स में जाना या इंडस्ट्री से जुड़ी चीज़ें देखना आपकी समझ को काफी मजबूत करता है।

स्टेप 5: इंटर्नशिप और ट्रेनिंग को हल्के में न लें

इंटर्नशिप इस फील्ड में बहुत बड़ा फर्क पैदा करती है। इंटर्नशिप के दौरान आपको यह समझ आता है कि असली काम कैसे होता है और इंडस्ट्री में इंजीनियर्स किस तरह की प्रॉब्लम्स हैंडल करते हैं। पावर प्लांट, बिजली वितरण कंपनी, सोलर प्रोजेक्ट या फैक्ट्री में की गई ट्रेनिंग आपके रिज़्यूमे को स्ट्रॉन्ग बनाती है और जॉब मिलने के चांस भी बढ़ाती है।

स्टेप 6: जरूरी स्किल्स पर काम करें

सिर्फ डिग्री होना काफी नहीं होता। एक अच्छे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के लिए प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल, सेफ्टी रूल्स की समझ, मशीनों के साथ काम करने की आदत और टीम में काम करने की एबिलिटी बहुत मायने रखती है। जो स्टूडेंट्स टेक्निकल नॉलेज के साथ प्रैक्टिकल सोच विकसित कर लेते हैं, वही लंबे समय में आगे निकलते हैं।

स्टेप 7: आगे की दिशा पहले से तय करें

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के बाद विकल्प कई होते हैं सरकारी नौकरी, प्राइवेट कंपनियाँ, पावर सेक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी या आगे की पढ़ाई जैसे एमई या एमटेक। इसलिए इंजीनियरिंग के आख़िरी साल तक यह तय कर लेना बेहतर रहता है कि आप किस डायरेक्शन में जाना चाहते हैं, ताकि उसी हिसाब से तैयारी कर सकें।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक योग्यता

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इस कोर्स में प्रवेश के लिए कौन-सी शैक्षणिक योग्यता, कौशल और पात्रता मानदंड तय किए जाते हैं। अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज अपने प्रवेश नियम निर्धारित करते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक सूचना अवश्य देखनी चाहिए।

  • शैक्षणिक योग्यता: 
    • पात्रता मानदंड संबंधित विश्वविद्यालयों और नियामक संस्थाओं के दिशानिर्देशों पर आधारित होते हैं।
    • इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए सबसे पहली और आवश्यक योग्यता 10वीं के बाद 12वीं (विज्ञान वर्ग) में उत्तीर्ण होना है। इसमें गणित और भौतिकी अनिवार्य माने जाते हैं, जबकि अधिकांश संस्थानों में रसायन विज्ञान (PCM) भी आवश्यक होता है, क्योंकि इंजीनियरिंग की पढ़ाई इन्हीं विषयों की बुनियाद पर आधारित होती है।
    • 12वीं के बाद बीई / बीटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) या इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए आमतौर पर 45% से 60% अंकों की आवश्यकता होती है। न्यूनतम अंक संस्थान और आरक्षण श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
  • उम्र सीमा:
    • अधिकांश इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीई / बीटेक कोर्स के लिए कोई सख्त अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं होती। हालांकि कुछ प्रवेश परीक्षाओं या विशेष संस्थानों में न्यूनतम आयु या ऊपरी आयु सीमा निर्धारित हो सकती है, जिसमें आरक्षित वर्ग के छात्रों को नियमानुसार छूट दी जाती है।
  • आरक्षण और पात्रता में छूट:
    • सरकारी और राज्य स्तरीय कॉलेजों में एससी, एसटी, ओबीसी (NCL) और दिव्यांग श्रेणी के छात्रों को अंकों तथा प्रवेश नियमों में नियमानुसार छूट दी जाती है। निजी कॉलेजों में आरक्षण नीति अलग हो सकती है, इसलिए वहाँ की पात्रता शर्तें अलग से देखना आवश्यक होता है।
  • डिप्लोमा (वैकल्पिक लेकिन व्यावहारिक रास्ता):
    • यदि कोई छात्र 12वीं के बाद सीधे बीई/बीटेक में प्रवेश नहीं ले पाता, तो डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एक व्यावहारिक विकल्प माना जाता है। डिप्लोमा के बाद छात्र लेटरल एंट्री के माध्यम से बीई/बीटेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश ले सकता है।
  • कौशल योग्यता: केवल डिग्री होना ही पर्याप्त नहीं है। एक अच्छे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के लिए निम्न कौशल भी जरूरी होते हैं, ये कौशल कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप के दौरान विकसित होते हैं।
    • सर्किट डिजाइन और एनालिसिस की समझ
    • इलेक्ट्रिकल मशीनों और पावर सिस्टम का ज्ञान
    • सुरक्षा मानकों (आईएस / आईईसी) की जानकारी
    • समस्या समाधान की क्षमता
    • टीम के साथ काम करने की योग्यता 
  • भाषा और मानसिक योग्यता:
    • इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को गणितीय सोच, धैर्य और व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, क्योंकि कई बार छोटी-सी तकनीकी गलती से बड़ा नुकसान हो सकता है।
    • इसके साथ ही तकनीकी रिपोर्ट लिखने और टीम के साथ संवाद करने के लिए साधारण हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी जरूरी होता है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं

भारत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए प्रवेश परीक्षाएँ अलग-अलग स्तर पर होती हैं, जैसे राष्ट्रीय, राज्य और विश्वविद्यालय स्तर। यह ध्यान रखना जरूरी है कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए हर जगह प्रवेश परीक्षा अनिवार्य नहीं होती। कई कॉलेज 12वीं के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट से भी एडमिशन देते हैं। इसके अलावा, कुछ संस्थानों में विश्वविद्यालय-स्तरीय चयन प्रक्रिया या लेटरल एंट्री के माध्यम से भी प्रवेश मिलता है।

डिप्लोमा और बीई/बीटेक दोनों करने वाले छात्र इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बन सकते हैं, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया अलग होती है। 12वीं के बाद सीधे बीई/बीटेक करने वाले छात्रों को आमतौर पर नीचे दी गई प्रवेश परीक्षाएँ देनी होती हैं, जबकि डिप्लोमा के बाद लेटरल एंट्री से बीटेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्रों को ये परीक्षाएँ देना जरूरी नहीं होता।

नीचे दी गई तालिका में कुछ प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की जानकारी दी गई है। इनके अलावा भी राज्य और विश्वविद्यालय स्तर पर अन्य परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं।

परीक्षा का नामस्तरआयोजित करने वाली संस्थापरीक्षा का समय (संभावित)किसके लिए उपयोगी
JEE Mainराष्ट्रीयNTA (National Testing Agency)जनवरी – अप्रैलNITs, IIITs, सरकारी व निजी इंजीनियरिंग कॉलेज
JEE Advancedराष्ट्रीयIITs (Joint Admission Board)मई – जूनIITs में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
MHT-CETराज्य (महाराष्ट्र)State CET Cellअप्रैल – मईमहाराष्ट्र के सरकारी व निजी कॉलेज
WBJEEराज्य (पश्चिम बंगाल)WBJEE Boardअप्रैलपश्चिम बंगाल के इंजीनियरिंग कॉलेज
KCETराज्य (कर्नाटक)KEAअप्रैल – मईकर्नाटक के सरकारी कॉलेज
REAPराज्य (राजस्थान)Rajasthan Technical Universityजून – जुलाईराजस्थान के इंजीनियरिंग कॉलेज
VITEEEविश्वविद्यालय स्तरVIT Universityअप्रैलVIT के इंजीनियरिंग कोर्स
SRMJEEEविश्वविद्यालय स्तरSRM Instituteअप्रैल – मईSRM विश्वविद्यालय
CUET-UGराष्ट्रीयNTAमई – जूनकुछ केंद्रीय/निजी विश्वविद्यालय
लेट्रल एंट्री परीक्षाराज्य स्तरराज्य तकनीकी बोर्डजून – जुलाईडिप्लोमा के बाद सीधे 2nd year BTech

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए डिग्री के प्रकार

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए सही डिग्री का चुनाव सबसे अहम होता है, क्योंकि हर डिग्री की मान्यता, करियर स्कोप और आगे के अवसर अलग-अलग होते हैं। भारत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से जुड़ी कई तरह की डिग्रियाँ उपलब्ध हैं, लेकिन छात्र को अपनी योग्यता और करियर लक्ष्य के अनुसार सही विकल्प चुनना चाहिए।

बीई / बीटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)

बीई या बीटेक इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सबसे प्रमुख और मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री है। यह चार साल का कोर्स होता है, जिसे 12वीं (भौतिकी और गणित) के बाद किया जाता है। इस डिग्री में पावर सिस्टम, इलेक्ट्रिकल मशीन, ट्रांसमिशन, वितरण और कंट्रोल सिस्टम जैसे मुख्य विषय पढ़ाए जाते हैं।
सरकारी नौकरियों, पीएसयू, निजी कंपनियों और आगे की पढ़ाई (एमई/एमटेक, GATE) के लिए यही डिग्री सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

बीई / बीटेक (इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग)

यह डिग्री इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का विस्तारित रूप है, जिसमें इलेक्ट्रिकल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स के बेसिक विषय भी शामिल होते हैं। इसका लाभ यह होता है कि छात्र के पास पावर सेक्टर के अलावा ऑटोमेशन, कंट्रोल सिस्टम और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भी करियर के विकल्प खुलते हैं।

डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग आमतौर पर तीन साल का व्यावहारिक कोर्स होता है, जिसे 10वीं या 12वीं के बाद किया जा सकता है। यह कोर्स छात्रों को सीधे तकनीकी और साइट-लेवल काम के लिए तैयार करता है।
डिप्लोमा करने के बाद छात्र तकनीशियन, जूनियर इंजीनियर या सुपरवाइज़र जैसे पदों पर काम कर सकते हैं, और चाहें तो लेटरल एंट्री के माध्यम से बीई/बीटेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश भी ले सकते हैं।

बीएससी (इलेक्ट्रिकल या भौतिकी आधारित विषय)

कुछ विश्वविद्यालय बीएससी स्तर पर विद्युत या भौतिकी आधारित कोर्स कराते हैं। यह पारंपरिक इंजीनियरिंग डिग्री नहीं मानी जाती, इसलिए बीएससी करने के बाद छात्र सीधे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर नहीं कहलाते। हालांकि, आगे बीटेक, एमटेक या शोध से जुड़े तकनीकी कोर्स करके इस क्षेत्र में प्रवेश संभव होता है। यह रास्ता मुख्य रूप से शोध और शिक्षा क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए उपयुक्त होता है।

एमई / एमटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)

एमई या एमटेक स्नातकोत्तर स्तर की डिग्री है, जो बीई या बीटेक के बाद की जाती है। इसमें पावर सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम, हाई वोल्टेज इंजीनियरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे विषयों में विशेषज्ञता मिलती है। यह डिग्री उच्च पदों, रिसर्च, डिजाइन-लेवल रोल और कॉलेज अध्यापन के लिए उपयोगी मानी जाती है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रमुख स्पेशलाइजेशन

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एक व्यापक फील्ड है, जिसमें आगे चलकर छात्र अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री के दौरान या एमटेक स्तर पर सही स्पेशलाइजेशन चुनना करियर दिशा तय करने में मदद करता है। जिस क्षेत्र में आपकी रुचि और इंडस्ट्री डिमांड दोनों हों, उसी दिशा में विशेषज्ञता लेना लंबे समय में बेहतर अवसर दे सकता है। अलग-अलग स्पेशलाइजेशन का फोकस, जॉब प्रोफाइल और इंडस्ट्री डिमांड अलग होती है। नीचे प्रमुख स्पेशलाइजेशन की जानकारी दी गई है:

  • पावर सिस्टम: यह स्पेशलाइजेशन बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़ा होता है। इसमें पावर ग्रिड, सबस्टेशन, लोड फ्लो एनालिसिस और सिस्टम स्टेबिलिटी जैसे विषय शामिल होते हैं। यह क्षेत्र सरकारी बिजली विभाग, पीएसयू और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में करियर के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • कंट्रोल सिस्टम: कंट्रोल सिस्टम का संबंध ऑटोमेशन और मशीन कंट्रोल से होता है। इसमें सिस्टम मॉडलिंग, फीडबैक सिस्टम और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन पढ़ाया जाता है। यह स्पेशलाइजेशन मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन इंडस्ट्री में उपयोगी है।
  • रिन्यूएबल एनर्जी: सोलर, विंड और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से जुड़ा यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। इसमें सोलर पावर प्लांट डिजाइन, एनर्जी स्टोरेज और ग्रिड इंटीग्रेशन जैसे विषय शामिल होते हैं। भारत में ग्रीन एनर्जी मिशन के कारण इस स्पेशलाइजेशन की मांग लगातार बढ़ रही है।
  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स: इसमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से बिजली को नियंत्रित और कन्वर्ट करने की तकनीक पढ़ाई जाती है। इन्वर्टर, कन्वर्टर, ड्राइव सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन टेक्नोलॉजी में इसका उपयोग होता है। EV सेक्टर और इंडस्ट्रियल ड्राइव सिस्टम में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।
  • हाई वोल्टेज इंजीनियरिंग: यह स्पेशलाइजेशन हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन, इंसुलेशन, सर्ज प्रोटेक्शन और सुरक्षा परीक्षण से जुड़ा होता है। बड़े पावर प्लांट और ग्रिड सिस्टम में काम करने के इच्छुक छात्रों के लिए यह उपयोगी माना जाता है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को रिक्रूट करने वाली प्रमुख कंपनियाँ

यहाँ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को रिक्रूट करने वाली प्रमुख कंपनियाँ और उनमें मौजूद जॉब प्रोफाइल की जानकारी दी गई है –

कंपनी का नामसेक्टर / क्षेत्रइलेक्ट्रिकल इंजीनियर की भूमिकामहत्वपूर्ण जानकारी
NTPC (एनटीपीसी)बिजली उत्पादनसंचालन, रखरखाव, पावर सिस्टमभारत की सबसे बड़ी पावर कंपनी
PGCIL (पावर ग्रिड)ट्रांसमिशनग्रिड ऑपरेशन, सबस्टेशनहाई वोल्टेज सिस्टम में कार्य
NHPCजल विद्युतहाइड्रो पावर डिजाइनपहाड़ी प्रोजेक्ट्स में काम
BHELभारी विद्युत उपकरणमशीन डिजाइन, टेस्टिंगट्रांसफॉर्मर, टरबाइन निर्माण
L&T (एल एंड टी)निर्माण व इंफ्रास्ट्रक्चरप्रोजेक्ट इंजीनियरबड़े पावर प्रोजेक्ट्स
Siemens Indiaऑटोमेशनकंट्रोल सिस्टम, PLCइंडस्ट्रियल ऑटोमेशन
ABB Indiaपावर और ऑटोमेशनपावर इलेक्ट्रॉनिक्ससबस्टेशन और ड्राइव सिस्टम
Tata Powerबिजली वितरणडिस्ट्रीब्यूशन इंजीनियरशहरी और ग्रामीण क्षेत्र
Adani Powerथर्मल पावरऑपरेशन, मेंटेनेंसबड़े पावर प्लांट
Reliance Energyपावर सेक्टरनेटवर्क मैनेजमेंटनिजी बिजली वितरण
Suzlon Energyपवन ऊर्जाविंड एनर्जी सिस्टमनवीकरणीय ऊर्जा में अवसर
Tata Motors (EV)इलेक्ट्रिक वाहनमोटर, बैटरी सिस्टमई-वाहन तकनीक
Ashok Leylandऑटोमोबाइलइलेक्ट्रिकल सिस्टमEV और पारंपरिक वाहन
Bosch Indiaऑटोमोटिवइलेक्ट्रिकल डिजाइनऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स
Schneider Electricऊर्जा प्रबंधनस्मार्ट ग्रिडऊर्जा दक्षता समाधान

सरकारी क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की नौकरियाँ

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग उन चुनिंदा इंजीनियरिंग शाखाओं में से एक है जहाँ सरकारी क्षेत्र में स्थिर और लंबे समय तक करियर विकल्प उपलब्ध होते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए नीचे प्रमुख रास्ते दिए गए हैं –

  • पीएसयू (PSU) के माध्यम से भर्ती: एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एनएचपीसी, बीएचईएल जैसी सरकारी कंपनियाँ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की भर्ती GATE स्कोर के आधार पर करती हैं। इन पदों पर चयन होने पर शुरुआती स्तर से ही अच्छी सैलरी, जॉब सिक्योरिटी और प्रमोशन का स्पष्ट सिस्टम मिलता है।
  • राज्य बिजली बोर्ड और वितरण कंपनियाँ: लगभग हर राज्य में बिजली विभाग (State Electricity Board / DISCOM) के तहत जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के पदों पर भर्तियाँ निकलती हैं। ये भर्तियाँ अलग-अलग राज्य स्तरीय परीक्षाओं के माध्यम से होती हैं।
  • जूनियर इंजीनियर (JE) परीक्षाएं: SSC, राज्य लोक सेवा आयोग और अन्य विभागों के माध्यम से JE लेवल की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र आवेदन कर सकते हैं।

सरकारी क्षेत्र उन छात्रों के लिए अधिक उपयुक्त होता है जो स्थिरता, निश्चित कार्य समय और दीर्घकालीन करियर को प्राथमिकता देते हैं।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की अनुमानित सैलरी

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की सैलरी केवल अनुभव पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि इंडस्ट्री, कंपनी के प्रकार और कार्यस्थल (लोकेशन) के आधार पर भी बदलती है। उपलब्ध वेतन डेटा (डेटा स्रोत: AmbitionBox, 2025 अनुमान) के अनुसार अलग-अलग सेक्टर में औसत सैलरी इस प्रकार देखी जाती है:

  • इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर: लगभग INR 5.4 लाख – INR 6 लाख प्रति वर्ष
  • मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल मशीनरी: लगभग INR 4.3 लाख – INR 4.8 लाख प्रति वर्ष
  • पावर सेक्टर: लगभग INR 4.8 लाख – INR 5.3 लाख प्रति वर्ष

लोकेशन के आधार पर भी वेतन में अंतर देखा जाता है। बेंगलुरु, चेन्नई और नई दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में औसत सैलरी लगभग INR 5 लाख – INR 5.6 लाख प्रति वर्ष तक दर्ज की गई है, जबकि पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में यह आमतौर पर INR 4.6 लाख – INR 5 लाख प्रति वर्ष के बीच रहती है। यह आंकड़े औसत अनुमान को दर्शाते हैं। वास्तविक सैलरी कंपनी, भूमिका, प्रोजेक्ट प्रकार और अनुभव के अनुसार अलग हो सकती है। नीचे अनुभव-आधारित वेतन वृद्धि का अनुमान दिया गया है, जिससे समझ आता है कि समय के साथ ग्रोथ किस प्रकार होती है:

अनुभवऔसत सैलरी (INR /वर्ष)सैलरी रेंज (INR /वर्ष)
1–3 वर्षINR 3.3 लाखINR 3.1 लाख – INR 3.4 लाख
3–6 वर्षINR 4.1 लाखINR 3.9 लाख – INR 4.3 लाख
6–9 वर्षINR 5.2 लाखINR 4.9 लाख – INR 5.4 लाख
9–12 वर्षINR 6.4 लाखINR 6.1 लाख – INR 6.7 लाख

FAQs 

क्या ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करना संभव है?

नहीं, कोर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में मान्य नहीं मानी जाती। इस फील्ड में लैब वर्क, मशीनों के साथ काम, पावर सिस्टम, हाई वोल्टेज और ऑन-ग्राउंड ट्रेनिंग जरूरी होती है, जो केवल ऑनलाइन क्लास के जरिए संभव नहीं है।

हालाँकि, जो छात्र पहले से बीई या बीटेक कर चुके हैं, वे आगे चलकर ऑटोमेशन, सोलर एनर्जी या इंडस्ट्रियल सेफ्टी जैसे शॉर्ट-टर्म ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कर सकते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए मूल डिग्री हमेशा रेगुलर मोड से ही करनी चाहिए।

क्या डिप्लोमा करके इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बन सकते हैं?

हाँ, 10वीं या 12वीं के बाद डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग किया जा सकता है। इसके बाद लैटरल एंट्री के माध्यम से बीई या बीटेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश लेकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बना जा सकता है। यह रास्ता उन छात्रों के लिए अच्छा रहता है जो प्रैक्टिकल काम से सीखना चाहते हैं।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में कौन-कौन से मुख्य विषय पढ़ाए जाते हैं?

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में आमतौर पर विद्युत सर्किट, विद्युत मशीन, पावर सिस्टम, नियंत्रण प्रणाली, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। ये विषय आगे चलकर इंडस्ट्री और सरकारी दोनों तरह की नौकरियों की नींव बनते हैं।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के लिए कौन-सी स्किल जरूरी होती है?

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के लिए सर्किट की समझ, समस्या सुलझाने की क्षमता, सुरक्षा नियमों का ज्ञान और प्रैक्टिकल अनुभव सबसे जरूरी माने जाते हैं। इसके साथ-साथ टीम में काम करने की आदत और जिम्मेदारी के साथ काम करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।

अगर गणित कमजोर हो तो क्या इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बन सकते हैं?

अगर गणित बहुत ज्यादा कमजोर है, तो शुरुआत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग थोड़ी कठिन लग सकती है, क्योंकि इस फील्ड में गणनाओं की भूमिका होती है। लेकिन अगर बेसिक गणित समझ में आती है और आप अभ्यास करने के लिए तैयार हैं, तो समय के साथ चीज़ें बेहतर हो सकती हैं। बहुत से छात्र मेहनत और प्रैक्टिस से इस कमी को पूरा कर लेते हैं।

क्या इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को फील्ड वर्क करना पड़ता है?

यह पूरी तरह आपकी जॉब प्रोफाइल पर निर्भर करता है। कई इलेक्ट्रिकल इंजीनियर साइट या फील्ड पर काम करते हैं, खासकर पावर प्लांट, फैक्ट्री या बिजली वितरण से जुड़े रोल में। वहीं कुछ इंजीनियर डिज़ाइन, प्लानिंग या ऑफिस-बेस्ड रोल में भी काम करते हैं। इसलिए फील्ड वर्क जरूरी है या नहीं, यह आपके चुने हुए करियर रास्ते पर निर्भर करता है।

क्या GATE परीक्षा पास करना जरूरी है?

GATE परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं है। अगर आप सरकारी कंपनियों (PSU) या एमई / एमटेक करना चाहते हैं, तो GATE बहुत जरूरी हो जाती है। लेकिन निजी कंपनियों में नौकरी के लिए GATE अनिवार्य नहीं होती, वहाँ स्किल, अनुभव और इंटरव्यू ज्यादा मायने रखते हैं।

क्या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का फ्यूचर स्कोप अच्छा है या यह फील्ड सैचुरेटेड हो चुकी है?

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को सैचुरेटेड कहना सही नहीं होगा। पावर सेक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है। जिन छात्रों के पास अच्छी तकनीकी समझ और प्रैक्टिकल स्किल्स होती हैं, उनके लिए इस फील्ड में आज भी अच्छे अवसर मौजूद हैं।

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उम्मीद है इस लेख में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने से जुड़ी मुख्य जानकारी मिल गई होंगी। ऐसे ही करियर से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के Leverage Edu के साथ जुड़े रहें।

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