डिप्लोमा इन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (DLIS) एक मान्यता प्राप्त 1 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है। यह कोर्स लाइब्रेरी ऑपरेशन, कैटलॉगिंग, क्लासीफिकेशन और इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट पर केंद्रित होता है।
डिजिटल और शैक्षणिक संस्थानों में इंफॉर्मेशन रिसोर्सेस के व्यवस्थित प्रबंधन की बढ़ती आवश्यकता के कारण इस कोर्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कई ओपन और स्टेट यूनिवर्सिटियाँ इसे डिस्टेंस एजुकेशन मोड में भी उपलब्ध कराती हैं, जिससे इसमें एडमिशन लेना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
इस ब्लॉग में DLIS कोर्स की एलिजिबिलिटी, सिलेबस, फीस, एग्जाम स्ट्रक्चर और भारत सहित वैश्विक स्तर पर इसके करियर स्कोप की पूरी जानकारी दी गई है।
| मापदंड | विवरण |
| कोर्स का नाम | डिप्लोमा इन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (DLIS) |
| कोर्स स्तर | डिप्लोमा |
| अवधि | 1 वर्ष (संस्थान अनुसार सेमेस्टर/वार्षिक) |
| न्यूनतम योग्यता | 12वीं में उत्तीर्ण (कुछ संस्थान ग्रेजुएशन मांगते हैं) |
| प्रवेश प्रक्रिया | मेरिट आधारित / संस्थान नियम अनुसार |
| प्रमुख विषय | लाइब्रेरी संगठन, वर्गीकरण (DDC), कैटलॉगिंग, इंफॉर्मेशन सोर्स, बेसिक ऑटोमेशन |
| औसत फीस | लगभग INR 5,000 से INR 40,000 (संस्थान पर निर्भर) |
| करियर विकल्प | लाइब्रेरी असिस्टेंट, कैटलॉगिंग असिस्टेंट |
| आगे की पढ़ाई | BLIS, MLIS |
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DLIS कोर्स क्यों करें?
यहाँ DLIS कोर्स को चुनने के प्रमुख कारणों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझाया गया है –
- सरकारी नौकरियों के लिए उपयोगी योग्यता: कई सरकारी संस्थानों जैसे KVS, NVS और राज्य स्तरीय सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी अटेंडेंट या लाइब्रेरी असिस्टेंट पदों के लिए लाइब्रेरी साइंस में डिप्लोमा/सर्टिफिकेट को न्यूनतम योग्यता के रूप में स्वीकार किया जाता है। इसलिए इस कोर्स को करने के बाद आपको सरकारी नौकरी में भी मदद मिलती है, आवेदन हालांकि भर्ती की शर्तें संबंधित विज्ञापन पर निर्भर करती हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर देखें।
- डिजिटल लाइब्रेरी स्किल्स सीखने का अवसर: आज अधिकांश लाइब्रेरी डिजिटल सिस्टम पर आधारित हैं। DLIS कोर्स के माध्यम से ई-बुक, ई-जर्नल, डिजिटल कैटलॉगिंग और इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट जैसी आधुनिक स्किल्स सीखने का अवसर मिलता है, जो वर्तमान समय में काफी उपयोगी हैं।
- कम अवधि और कम खर्च वाला कोर्स: यह आमतौर पर 1 वर्ष का डिप्लोमा होता है। कुछ गवर्नमेंट ओपन यूनिवर्सिटी जैसे IGNOU में इसकी फीस अपेक्षाकृत कम रखी गई है (समय-समय पर बदल सकती है)। इसलिए जिन छात्रों के पास सीमित बजट है, उनके लिए यह एक सुलभ विकल्प हो सकता है।
- पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में करियर अवसर: स्कूल, कॉलेज और सरकारी लाइब्रेरी के अलावा रिसर्च सेंटर, म्यूजियम, मीडिया हाउस और रिकॉर्ड मैनेजमेंट से जुड़े संस्थानों में भी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
- आगे की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार: DLIS करने से BLIS या MLIS जैसे एडवांस लाइब्रेरी साइंस कोर्स के लिए बेसिक समझ विकसित होती है, जिससे छात्र आगे उच्च शिक्षा और बेहतर करियर विकल्पों की ओर बढ़ सकते हैं।
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DLIS कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
DLIS कोर्स की एलिजिबिलिटी संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट जरूर देखें। सामान्यतः आवश्यक योग्यताएँ इस प्रकार हैं –
- इस कोर्स में एडमिशन के लिए उम्मीदवार का मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना आवश्यक होता है। कुछ संस्थान न्यूनतम 45%–50% अंक निर्धारित कर सकते हैं, जबकि कई ओपन यूनिवर्सिटियों में केवल उत्तीर्ण होना पर्याप्त होता है।
- कुछ विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएट अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जा सकती है, हालांकि यह सभी संस्थानों पर लागू नहीं होता।
- आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- अधिकांश संस्थानों में प्रवेश मेरिट आधारित होता है और आवेदन के बाद दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
- आवेदन के दौरान सामान्यतः 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।
DLIS कोर्स में एडमिशन कैसे होता है?
DLIS कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया संस्थान के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यम से हो सकती है। आमतौर पर एडमिशन मेरिट या संस्थान द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर दिया जाता है। नीचे आवेदन की सामान्य प्रक्रिया दी गई है –
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया:
- सबसे पहले अपनी एलिजिबिलिटी चेक करें और संबंधित यूनिवर्सिटी/कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
- वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करके आवेदन फॉर्म भरें।
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा करें।
- यदि संस्थान एंट्रेंस एग्जाम आयोजित करता है, तो परीक्षा में शामिल हों।
- मेरिट या एग्जाम स्कोर के आधार पर काउंसलिंग/डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा करें।
- फीस जमा करने के बाद एडमिशन कन्फर्म हो जाता है।
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया:
- संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी के एडमिशन ऑफिस से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- फॉर्म को सही जानकारी के साथ भरकर आवश्यक दस्तावेजों की कॉपी संलग्न करें।
- आवेदन शुल्क जमा करके फॉर्म संस्थान में जमा करें।
- यदि लागू हो, तो एंट्रेंस एग्जाम या मेरिट लिस्ट प्रक्रिया में शामिल हों।
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करने के बाद एडमिशन पूरा हो जाता है।
भारत में DLIS कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान और अनुमानित फीस
भारत में मान्यता प्राप्त सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में DLIS कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस संस्थान के प्रकार, राज्य, सीट श्रेणी और प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्यतः सरकारी कॉलेजों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में यह अधिक रहती है। नीचे दी गई तालिका में कुछ प्रमुख कॉलेजों के आधार पर DLIS कोर्स की अनुमानित फीस केवल एक सामान्य जानकारी के रूप में दी गई है:
सरकारी संस्थान
| संस्थान का नाम | स्थान | अनुमानित कुल फीस |
| IGNOU (ओपन यूनिवर्सिटी) | देशव्यापी | INR 3,500 – INR 5,000 |
| जामिया मिलिया इस्लामिया | नई दिल्ली | INR 7,000 – INR 10,000 |
| बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) | वाराणसी | INR 4,500 – INR 6,500 |
| वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी (VMOU) | कोटा, राजस्थान | INR 3,000 – INR 4,500 |
| पटना यूनिवर्सिटी | पटना, बिहार | INR 8,000 – INR 12,000 |
प्राइवेट संस्थान
| संस्थान का नाम | स्थान | अनुमानित कुल फीस (1 वर्ष) |
| लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) | फगवाड़ा, पंजाब | INR 40,000 – INR 55,000 |
| अमिटी यूनिवर्सिटी | नोएडा / ऑनलाइन | INR 50,000 – INR 70,000 |
| चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी | मोहाली, पंजाब | INR 35,000 – INR 50,000 |
| इंटीग्रल यूनिवर्सिटी | लखनऊ, यूपी | INR 25,000 – INR 35,000 |
| सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी | गंगटोक (डिस्टेंस) | INR 15,000 – INR 22,000 |
नोट: सटीक और नवीनतम फीस की जानकारी के लिए संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें।
DLIS कोर्स का सिलेबस
नीचे दी गई टेबल में DLIS कोर्स का सेमेस्टर-वाइज सिलेबस संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है। यह सिलेबस YBN यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। हालांकि, अलग-अलग संस्थानों में सिलेबस में थोड़ा बदलाव हो सकता है लेकिन कुछ विषय लगभग सभी में समान होते हैं, इसलिए एडमिशन से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट जरूर देखें।
| सेमेस्टर | विषय | मुख्य टॉपिक्स |
| सेमेस्टर – I | लाइब्रेरी एवं समाज | सूचना केंद्र के रूप में लाइब्रेरी – परिभाषा, महत्व, लाइब्रेरीज का सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव, लाइब्रेरी विज्ञान के पाँच नियम, एक्सटेंशन सर्विसेज, लाइब्रेरीज का इतिहास (भारत/वैश्विक) |
| लाइब्रेरी क्लासिफिकेशन एवं कैटलॉगिंग | वर्गीकरण के सिद्धांत, सूचीकरण संहिताएँ और नियम, विषय शीर्षक तकनीकें, व्यावहारिक वर्गीकरण अभ्यास | |
| क्लासिफिकेशन प्रैक्टिकल | वर्गीकरण योजनाओं का अनुप्रयोग, शेल्फ अरैंजमेंट प्रैक्टिस | |
| कैटलॉगिंग प्रैक्टिकल | रिकॉर्ड क्रिएशन प्रैक्टिस, सब्जेक्ट हैडिंग असाइनमेंट्स | |
| सेमेस्टर – II | लाइब्रेरी प्रबंधन एवं सेवाएँ | लाइब्रेरी संगठन और प्रशासन, कर्मचारी प्रबंधन, बजट और संसाधन आवंटन, परिसंचरण सेवाएँ |
| रिफरेन्स सोर्सेज एंड इंफो सर्विसेज | टाइप्स ऑफ रिफरेन्स सोर्सेज (डिक्शनरीज़, इन्साइक्लोपीडिया, इंडेस्क्सेस), आंसरिंग यूजर क्वेरीज़, रेफरल सिस्टम, इंफॉर्मेशन लिटरेसी | |
| आईटी एवं कंप्यूटर मूलभूत सिद्धांत | कंप्यूटर मूल बातें और सॉफ्टवेयर की बुनियादी जानकारी, लाइब्रेरी में आईटी अनुप्रयोग, डिजिटल लाइब्रेरीज की बुनियादी जानकारी, लाइब्रेरी ऑटोमेशन | |
| लाइब्रेरी ऑटोमेशन एवं नेटवर्किंग | ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर का अवलोकन, लाइब्रेरीज के लिए नेटवर्किंग की बुनियादी जानकारी, ई-संसाधन प्रबंधन | |
| प्रोजेक्ट/इंटर्नशिप रिपोर्ट | लाइब्रेरी विजिट पर रिपोर्ट, इंटर्नशिप गतिविधियों का सारांश, मौखिक परीक्षा / प्रस्तुति |
DLIS कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
DLIS (Diploma in Library and Information Science) करने के बाद आप लाइब्रेरी मैनेजमेंट, इंफॉर्मेशन ऑर्गनाइजेशन और डिजिटल रिसोर्स हैंडलिंग से जुड़े क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। आज के समय में स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, रिसर्च संस्थान और डिजिटल लाइब्रेरी सिस्टम में प्रशिक्षित लाइब्रेरी प्रोफेशनल्स की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। इस कोर्स के माध्यम से आप किताबों और डिजिटल संसाधनों को व्यवस्थित करना, कैटलॉगिंग करना और यूज़र्स को सही जानकारी उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालने के लिए तैयार होते हैं।
DLIS के बाद सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर में अवसर मिल सकते हैं। सरकारी स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक पुस्तकालयों, नगर निगम लाइब्रेरी और शैक्षणिक संस्थानों में लाइब्रेरी असिस्टेंट या लाइब्रेरी अटेंडेंट जैसे पदों पर काम करने के अवसर होते हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर में रिसर्च सेंटर, कोचिंग संस्थान, मीडिया हाउस, आर्काइव सेंटर और डॉक्यूमेंटेशन विभागों में भी रोजगार के विकल्प उपलब्ध रहते हैं।
इसके अलावा, डिजिटल लाइब्रेरी और ई-रिसोर्स मैनेजमेंट के बढ़ते उपयोग के कारण सूचना प्रबंधन (Information Management) से जुड़े रोल्स की मांग भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। आगे BLIS या MLIS जैसे एडवांस कोर्स करने के बाद लाइब्रेरियन और सीनियर लाइब्रेरी प्रोफेशनल के रूप में बेहतर करियर अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं।
नीचे कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल और उनकी अनुमानित वार्षिक सैलरी Ambitionbox.com पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार दी गई है, इसमें अनुभव, संस्थान, स्थान और संगठन के प्रकार के अनुसार बदलाव हो सकता है।
| जॉब प्रोफाइल | अनुमानित सालाना सैलरी (INR) |
| लाइब्रेरी असिस्टेंट | INR 2.7 लाख – INR 3 लाख |
| लाइब्रेरियन | INR 3.6 लाख – INR 3.9 लाख |
| इन्फॉर्मेशन एनालिस्ट | INR 3.8 लाख – INR 4.3 लाख |
| लाइब्रेरी अटेंडेंट | INR 1.9 लाख – INR 2.2 लाख |
DLIS कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प
DLIS एक एंट्री-लेवल डिप्लोमा कोर्स है, जिसके बाद आप लाइब्रेरी और इंफॉर्मेशन साइंस क्षेत्र में आगे की पढ़ाई करके अपने करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं। उच्च स्तर के पदों जैसे लाइब्रेरियन, इंफॉर्मेशन स्पेशलिस्ट या अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आगे की डिग्री करना फायदेमंद माना जाता है। नीचे DLIS के बाद किए जा सकने वाले प्रमुख कोर्स और उनके करियर विकल्प दिए गए हैं।
| आगे की पढ़ाई | स्तर / अवधि | पात्रता (सामान्य) | करियर स्कोप |
| बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (BLIS) | ग्रेजुएशन लेवल, सामान्यतः 1 वर्ष | किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन (अधिकांश संस्थानों में DLIS के बाद सीधे प्रवेश नहीं; ग्रेजुएशन आवश्यक) | स्थायी लाइब्रेरियन, असिस्टेंट लाइब्रेरियन, यूनिवर्सिटी/कॉलेज पुस्तकालय पदों के लिए आवश्यक आधार डिग्री |
| मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंसेज (MLIS) | पोस्ट ग्रेजुएशन, 1–2 वर्ष | BLIS/समकक्ष डिग्री | यूनिवर्सिटी/रिसर्च इंस्टीट्यूट में उच्च पद, UGC-NET की पात्रता, शोध एवं अकादमिक करियर |
| पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन लाइब्रेरी ऑटोमेशन एंड नेटवर्किंग (PGDLAN) | पीजी डिप्लोमा, 1 वर्ष | ग्रेजुएट्स (कुछ संस्थानों में BLIS प्रिफर्ड) | डिजिटल लाइब्रेरी, ई-रिसोर्स मैनेजमेंट, Koha/Automation में एक्सपर्टीज |
| पीएचडी (Ph.D.) इन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस | रिसर्च लेवल, 3–5 वर्ष | MLIS और UGC-NET/JRF (अधिकांश यूनिवर्सिटी में) | यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर/रिसर्चर बनने के लिए आवश्यक |
नोट: आवेदन से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की नवीनतम अधिसूचना अवश्य जाँचें, क्योंकि पात्रता और अवधि समय-समय पर बदल सकती है।
DLIS कोर्स बनाम BLIS कोर्स में अंतर
लाइब्रेरी और इंफॉर्मेशन साइंस क्षेत्र में DLIS और BLIS दोनों ही लोकप्रिय कोर्स हैं। कई छात्र इनके स्तर, योग्यता और करियर अवसरों को लेकर अक्सर सोच में पड़ जाते हैं कि दोनों में अंतर क्या है और कौनसा कोर्स चुनें। तो आपको बता दें DLIS एक डिप्लोमा स्तर का कोर्स है, जबकि BLIS ग्रेजुएशन लेवल की डिग्री होती है। नीचे दी गई टेबल में DLIS और BLIS कोर्स की प्रमुख विशेषताओं की तुलना की गई है।
| विशेषता | DLIS | BLIS |
| कोर्स का नाम | डिप्लोमा इन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस | बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस |
| कोर्स का स्तर | डिप्लोमा | ग्रेजुएशन डिग्री |
| अवधि | सामान्यतः 1 वर्ष (संस्थान के अनुसार अवधि में थोड़ा बदलाव संभव) | सामान्यतः 1 वर्ष (कुछ विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर संरचना के अनुसार बदलाव संभव) |
| योग्यता | 12वीं किसी भी स्ट्रीम से पास (कभी-कभी ग्रेजुएशन भी मान्य) | किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन (किसी भी विषय में) |
| कोर्स का उद्देश्य | लाइब्रेरी के दैनिक कार्यों, कैटलॉगिंग और बेसिक इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट की प्रैक्टिकल समझ विकसित करना | लाइब्रेरी मैनेजमेंट, सूचना संगठन, रिसर्च सपोर्ट और डिजिटल लाइब्रेरी सिस्टम का विस्तृत एवं सैद्धांतिक अध्ययन कराना |
| करियर की संभावनाएँ | लाइब्रेरी असिस्टेंट, सहायक पद, इन्फॉर्मेशन कैटलॉगिंग जैसी भूमिका | लाइब्रेरी अधिकारी, सूचना विशेषज्ञ, संदर्भ सेवाएँ और सरकारी/शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में नौकरी |
| आगे की पढ़ाई के अवसर | BLIS या अन्य उच्च स्तर के लाइब्रेरी साइंस कोर्स करने में मदद मिलती है, लेकिन अधिकांश संस्थानों में सीधे MLIS में प्रवेश नहीं मिलता | MLIS और अन्य पोस्टग्रेजुएट कोर्स में सीधे प्रवेश के लिए उपयुक्त डिग्री |
FAQs
DLIS एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है जिसमें पुस्तकालय संचालन, किताबों का वर्गीकरण, सूची बनाना, रिकॉर्ड मैनेजमेंट और डिजिटल लाइब्रेरी की मूल जानकारी सिखाई जाती है। यह कोर्स लाइब्रेरी असिस्टेंट या लाइब्रेरी स्टाफ बनने की शुरुआती योग्यता देता है।
DLIS कोर्स में पुस्तकालय प्रबंधन, वर्गीकरण और कैटलॉगिंग, सूची निर्माण, संदर्भ सेवाएँ, सूचना स्रोतों का उपयोग, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा डिजिटल लाइब्रेरी की बुनियादी जानकारी पढ़ाई जाती है।
DLIS के बाद लाइब्रेरी असिस्टेंट, लाइब्रेरी क्लर्क, डॉक्यूमेंट असिस्टेंट या स्कूल लाइब्रेरी स्टाफ के पद मिल सकते हैं। इस कोर्स के बाद आपको विद्यालय, कॉलेज, विश्वविद्यालय और सरकारी विभागों में नौकरी के अवसर मिलते हैं।
DLIS के बाद विद्यार्थी BLIS या सीधे MLIS (मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस) जैसे हायर लेवल कोर्स कर सकते हैं, इससे आपके लिए पद और वेतन में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
हाँ, एंट्री-लेवल पदों पर बन सकते हैं। यदि आपके पास मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से लाइब्रेरी साइंस में डिग्री या डिप्लोमा है तो कई स्कूलों और निजी संस्थानों में अनुभव अनिवार्य नहीं होता।
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हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको DLIS कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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