आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे बनें: योग्यता, स्किल्स, स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

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आयुर्वेदिक डॉक्टर बनना उनके लिए अच्छा मार्ग है जो प्राकृतिक चिकित्सा और जड़ी-बूटियों के ज्ञान से लोगों का उपचार करना चाहते हैं। इससे प्राकृतिक चिकित्सा और परंपरागत स्वास्थ्य देखभाल में विशेषज्ञता मिलती है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा विभिन्न रोगों के स्थायी समाधान देती है और इसमें क्लीनिकल प्रैक्टिस, रिसर्च, फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री और शिक्षा के क्षेत्र में करियर विकल्प उपलब्ध हैं। इस लेख में आपके लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। 

This Blog Includes:
  1. आयुर्वेदिक डॉक्टर कौन होता है?
  2. आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए योग्यता
  3. आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
    1. स्टेप 1: 12वीं PCB के साथ पास करें
    2. स्टेप 2: NEET-UG परीक्षा दें और क्वालिफाई करें
    3. स्टेप 3: AYUSH काउंसलिंग के माध्यम से BAMS सीट अलॉटमेंट
    4. स्टेप 4: BAMS कोर्स और अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करें
    5. स्टेप 5: स्टेट आयुष या मेडिकल कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराएं
    6. स्टेप 6: प्रैक्टिस, नौकरी या हायर स्टडीज़ शुरू करें
  4. आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद प्रैक्टिस के नियम
  5. आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद करियर विकल्प
  6. आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद सरकारी जॉब के विकल्प
    1. आयुर्वेदिक डॉक्टर के लिए सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया
  7. आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद अपना क्लिनिक कैसे शुरू करें?
  8. आयुर्वेदिक डॉक्टर की सैलरी कितनी होती है?
  9. FAQs

आयुर्वेदिक डॉक्टर कौन होता है?

आयुर्वेदिक डॉक्टर वह चिकित्सक होता है जो आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर रोग की पहचान, उपचार और रोकथाम करता है। वह केवल लक्षण नहीं देखता, बल्कि रोगी की प्रकृति (वात-पित्त-कफ), जीवनशैली, आहार और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर डायग्नोसिस करता है। उपचार में हर्बल औषधियां, पंचकर्म, आहार-विहार में बदलाव और रोग-निवारण पर फोकस किया जाता है।

भारत में मान्यता प्राप्त आयुर्वेदिक डॉक्टर BAMS या समकक्ष डिग्री लेकर आयुष मंत्रालय के तहत पंजीकृत होते हैं। आज के समय में उनकी भूमिका सिर्फ क्लिनिक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सरकारी अस्पतालों, आयुष वेलनेस सेंटर, रिसर्च, हेल्थ प्रिवेंशन और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी कार्य करते हैं।

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए योग्यता

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए छात्रों के पास निम्नलिखित आवश्यक योग्यता होनी चाहिए:

  • शैक्षणिक योग्यता: आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए उम्मीदवार का 12वीं कक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ पास होना अनिवार्य है। बायोलॉजी विषय के बिना BAMS कोर्स में प्रवेश संभव नहीं होता।
  • न्यूनतम अंक: सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 12वीं में कम से कम 50% अंक, जबकि SC/ST/OBC वर्ग के लिए 40% अंक मान्य होते हैं। यह मानक AYUSH और NEET-UG गाइडलाइंस पर आधारित है।
  • NEET-UG परीक्षा: भारत में BAMS कोर्स में एडमिशन के लिए NEET-UG क्वालिफाई करना अनिवार्य है। NEET परीक्षा क्वालीफाई किए बिना किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलता।
  • आयु सीमा: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा NEET नियमों के अनुसार तय होती है।
  • काउंसलिंग और डोमिसाइल नियम: एडमिशन AACCC (ऑल इंडिया कोटा) या स्टेट आयुष कॉउंसलिंग के माध्यम से होता है। कई सरकारी कॉलेजों में राज्य डोमिसाइल आवश्यक होता है।
  • इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन: BAMS पूरा करने के बाद 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप और फिर स्टेट आयुष कॉउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है, तभी कानूनी रूप से प्रैक्टिस की जा सकती है।

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आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

स्टेप 1: 12वीं PCB के साथ पास करें

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए सबसे पहला और अनिवार्य स्टेप है 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ पास होना, यदि आप अन्य स्ट्रीम से 12वीं करते हैं तो आप इस दिशा में आगे नहीं बाद पाएंगें। यह योग्यता भारत में BAMS कोर्स के लिए जरूरी है। बिना PCB के किसी भी मान्यता प्राप्त BAMS कॉलेज में एडमिशन संभव नहीं होता, चाहे कॉलेज सरकारी हो या प्राइवेट।

स्टेप 2: NEET-UG परीक्षा दें और क्वालिफाई करें

BAMS में एडमिशन के लिए NEET-UG परीक्षा पास करना जरूरी है। यह नियम आयुष मंत्रालय और संबंधित काउंसलिंग अथॉरिटी द्वारा तय किया गया है। NEET में क्वालिफाई करना मतलब सिर्फ पास होना नहीं, बल्कि AYUSH काउंसलिंग के लिए पात्र रैंक लाना होता है।

स्टेप 3: AYUSH काउंसलिंग के माध्यम से BAMS सीट अलॉटमेंट

NEET क्वालिफाई करने के बाद उम्मीदवारों को सेंट्रल या स्टेट आयुष कॉउंसलिंग में भाग लेना होता है। इसी प्रक्रिया में सरकारी और प्राइवेट BAMS कॉलेजों की सीट अलॉट होती है। कॉलेज अलॉटमेंट NEET रैंक, कैटेगरी और सीट उपलब्धता पर निर्भर करता है। काउंसलिंग के बिना BAMS में एडमिशन वैध नहीं माना जाता।

स्टेप 4: BAMS कोर्स और अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करें

BAMS कोर्स की अवधि कुल 5.5 साल होती है, जिसमें 4.5 साल अकादमिक पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। इस दौरान छात्रों को आयुर्वेदिक विषयों के साथ-साथ एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बेसिक मॉडर्न मेडिसिन भी पढ़ाई जाती है। ध्यान रखें कि इंटर्नशिप के बिना डिग्री पूरी नहीं मानी जाती।

इंटर्नशिप BAMS का सबसे निर्णायक हिस्सा होती है। इस दौरान छात्रों को आयुर्वेदिक अस्पतालों में OPD, IPD, पंचकर्म यूनिट और औषध निर्माण की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है।

स्टेप 5: स्टेट आयुष या मेडिकल कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराएं

BAMS पूरा करने के बाद प्रैक्टिस या नौकरी शुरू करने से पहले स्टेट आयुष कॉउंसिल या संबंधित मेडिकल कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना कानूनी रूप से मान्य नहीं है। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप खुद को वैध आयुर्वेदिक चिकित्सक कह सकते हैं और सरकारी या निजी क्षेत्र में काम कर सकते हैं।

स्टेप 6: प्रैक्टिस, नौकरी या हायर स्टडीज़ शुरू करें

रजिस्ट्रेशन के बाद आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास कई विकल्प होते हैं, जैसे निजी क्लिनिक खोलना, सरकारी AYUSH अस्पताल में नौकरी करना या MD (आयुर्वेद) जैसी हायर स्टडीज करना।

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आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद प्रैक्टिस के नियम

BAMS करने के बाद आयुर्वेदिक डॉक्टर को रजिस्टर्ड आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर के रूप में ही प्रैक्टिस करने की अनुमति होती है, इसलिए सबसे पहले राज्य आयुर्वेदिक/AYUSH मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है। बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना अवैध माना जाता है। दवाइयों के मामले में आयुर्वेदिक डॉक्टर सामान्यतः आयुर्वेदिक दवाएं और अपनी पद्धति के अनुसार उपचार लिख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार डॉक्टर को अपनी ही चिकित्सा पद्धति के भीतर दवा लिखनी चाहिए, यानी सामान्य स्थिति में एलोपैथिक दवा लिखने की अनुमति नहीं होती।

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद करियर विकल्प

यहां आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद उपलब्ध करियर विकल्प और उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी तालिका में दी गई है:

करियर श्रेणीपद / करियर विकल्पमुख्य कार्य व भूमिका
चिकित्सा सेवा मेडिकल ऑफिसर (MO)सरकारी या निजी अस्पतालों, आयुष हेल्थ सेंटर्स में डॉक्टर के रूप में मरीजों का इलाज करना।
चिकित्सा सेवा प्राइवेट प्रैक्टिसअपना आयुर्वेदिक क्लीनिक, पंचकर्म सेंटर या वैलनेस क्लिनिक शुरू करना।
सरकारी क्षेत्र UPSC / State PSCआयुष विभाग में अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर या अन्य प्रशासनिक पदों पर कार्य करना।
सरकारी क्षेत्र आर्मी मेडिकल कोर (Corps)भारतीय सेना में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में देश की सेवा करना।
अनुसंधानरिसर्च साइंटिस्टकेंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) आयुष मंत्रालय जैसे सरकारी संस्थानों में आयुर्वेदिक दवाओं और उपचार पद्धतियों पर शोध करना।
शिक्षा क्षेत्र असिस्टेंट प्रोफेसरआयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाना, रिसर्च करना और अकादमिक गाइडेंस देना।
कॉर्पोरेट क्षेत्र आयुर्वेदिक कंसल्टेंटडाबर, हिमालया, पतंजलि जैसी कंपनियों में प्रोडक्ट डेवलपमेंट और क्वालिटी कंट्रोल।
वेलनेस टूरिज्मस्पा एवं वेलनेस मैनेजररिसॉर्ट्स, वेलनेस सेंटर्स और क्रूज शिप्स में वैलनेस प्रोग्राम्स का प्रबंधन।
उच्च शिक्षा (Higher Studies)MD / MS (आयुर्वेद)कायचिकित्सा, शल्य तंत्र, प्रसूति एवं स्त्री रोग जैसे विषयों में विशेषज्ञ डॉक्टर बनना।
उच्च शिक्षा (Higher Studies)MBA / MPHहॉस्पिटल मैनेजमेंट, हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन या पब्लिक हेल्थ सेक्टर में मैनेजरियल रोल निभाना।

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद सरकारी जॉब के विकल्प

यहां आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद सरकारी नौकरियों में करियर विकल्प, प्रमुख भूमिकाएं, भर्ती संस्थान और आवश्यक योग्यताओं के बारे में जानकारी दी गई है:

करियर विकल्पमुख्य कामभर्ती संस्था / तरीकाजरूरी योग्यता
आयुष मेडिकल ऑफिसरसरकारी अस्पताल/डिस्पेंसरी में इलाजराज्य आयुष विभाग, UPSC, PSCBAMS + स्टेट रजिस्ट्रेशन
आयुर्वेदिक चिकित्सक (NHM)प्राइमरी हेल्थ सेंटर में सेवानेशनल हेल्थ मिशन (कॉन्ट्रैक्ट)BAMS
रिसर्च ऑफिसर (आयुर्वेद)आयुर्वेद रिसर्च, क्लीनिकल ट्रायल्सCCRAS, आयुष मंत्रालयBAMS + PG प्रिफर्ड
लेक्चरर / असिस्टेंट प्रोफेसरआयुर्वेद कॉलेज में पढ़ानास्टेट PSC / कॉलेज रिक्रूटमेंटBAMS + MD (आयुर्वेद)
फार्मा / ड्रग इंस्पेक्टर (आयुर्वेद)आयुर्वेदिक दवाओं की जांचस्टेट ड्रग डिपार्टमेंटBAMS / फार्मेसी बैकग्राउंड
पब्लिक हेल्थ / प्रोग्राम ऑफिसरस्वास्थ्य योजनाओं का संचालनNHM / गवर्नमेंट हेल्थ डिपार्टमेंटBAMS + MPH
आयुष कंसल्टेंट / एडमिननीति व योजना कार्यमिनिस्ट्री / गवर्नमेंट प्रोजेक्ट्सBAMS + एक्सपीरियंस

आयुर्वेदिक डॉक्टर के लिए सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद सरकारी जॉब पाने के लिए चयन प्रक्रिया राज्य और विभाग के अनुसार अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर कुछ सामान्य चरण होते हैं। सबसे पहले लिखित परीक्षा या स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाता है, जिसमें आयुर्वेद, बेसिक मेडिकल नॉलेज और जनरल अवेयरनेस से जुड़े प्रश्न होते हैं।

इसके बाद शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों का इंटरव्यू या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होता है, जहां डिग्री, रजिस्ट्रेशन और एक्सपीरियंस की जांच की जाती  है। कई पदों पर शुरुआत में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर नियुक्ति मिलती है, जिसे बाद में परफॉर्मेंस और वैकेंसी के आधार पर स्थायी किया जा सकता है। सैलरी संरचना में बेसिक पे, DA, HRA और अन्य भत्ते शामिल होते हैं, जो पद और राज्य सरकारी नियमों के अनुसार तय किए जाते हैं।

यह भी पढ़ें – BEMS कोर्स क्या है? योग्यता, अवधि, फीस और करियर ऑप्शंस की जानकारी

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद अपना क्लिनिक कैसे शुरू करें?

आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद क्लिनिक खोलने की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • स्टेट मेडिकल रजिस्ट्रेशन: आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के बाद स्टेट आयुर्वेद/मेडिकल कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराएं। बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस लीगल नहीं है।
  • क्लिनिक रजिस्ट्रेशन / ट्रेड लाइसेंस: लोकल म्युनिसिपल बॉडी या ग्राम पंचायत में क्लिनिक का बेसिक रजिस्ट्रेशन कराएं। क्लिनिक लोकेशन कमर्शियल यूज के अनुसार होनी चाहिए।
  • ड्रग लाइसेंस (अगर दवाइयाँ रखनी हैं): स्टेट ड्रग कंट्रोल ऑफिस से रिटेल ड्रग लाइसेंस लें। स्टोरेज स्पेस, रैक, रेफ्रीजिरेटर और क्वालिफाइड पर्सन जरूरी हो सकता है।
  • बायो-मेडिकल वेस्ट एग्रीमेंट: ऑथोराइज़्ड बायोमेडिकल वेस्ट एजेंसी से टाई-अप करें, नीडल्स, कॉटन, वेस्ट का सेफ डिस्पोजल जरूरी है।
  • बेसिक पंचकर्मा सेटअप: सेपरेट क्लीन रूम, मसाज टेबल, स्टीम यूनिट, ऑइल स्टोरेज, हॉट वाटर फैसिलिटी रखें। ट्रेंड थेरेपिस्ट और हाइजीन रूल्स फॉलो करें।
  • रिकॉर्ड एंड कंसेंट: पेशेंट रजिस्टर, प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड और थेरेपी कंसेंट मेंटेन करें। मेडिको-लीगल सेफ्टी के लिए ये जरूरी होता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर की सैलरी कितनी होती है?

भारत में आयुर्वेदिक डॉक्टर की सैलरी किसी एक तय पैमाने पर निर्भर नहीं करती। यह उम्मीदवार की तकनीकी स्किल्स, अनुभव और जॉब लोकेशन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर शुरुआती स्तर पर सैलरी सीमित रहती है, लेकिन जैसे-जैसे प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स बढ़ती हैं, वैसे-वैसे आय में भी अच्छा ग्रोथ देखने को मिलता है।

नीचे भारत में आयुर्वेदिक डॉक्टर की अनुभव आधारित अनुमानित वार्षिक सैलरी रेंज ambitionbox.com पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार दी गई है:

अनुभवऔसतन अनुमानित वार्षिक वेतन (INR)
0 – 1 सालINR 1.8 लाख – INR 3 लाख
1 साल – 3 सालINR 3.8 लाख – INR 4.2 लाख
3 साल – 6 सालINR 4.2 लाख – INR 6 लाख
6 साल – 9 सालINR 4.6 लाख – INR 5.3 लाख
9 साल – 12 सालINR 5.2 लाख – INR 7 लाख

नोट: यह ध्यान रखना जरूरी है कि सैलरी केवल डिग्री पर आधारित नहीं होती, बल्कि आपकी समस्या समाधान क्षमता और रोग निदान का ज्ञान आदि इसमें अहम भूमिका निभाती है। सही स्किल्स और निरंतर सीखने के साथ आयुर्वेदिक डॉक्टर की सैलरी ग्रोथ की संभावनाएँ काफ़ी अच्छी मानी जाती हैं।

FAQs

क्या NEET के बिना BAMS संभव है?

वर्तमान नियमों के अनुसार भारत में BAMS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET-UG क्वालीफाई करना अनिवार्य है। आयुष मंत्रालय और NCISM के गाइडलाइन्स के तहत बिना NEET किसी भी मान्यता प्राप्त BAMS कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलता। कुछ प्राइवेट कॉलेज डायरेक्ट एडमिशन का दावा करते हैं, लेकिन ऐसे एडमिशन कानूनी रूप से मान्य नहीं होते और भविष्य में रजिस्ट्रेशन में समस्या आती है।

BAMS और MBBS में क्या अंतर है?

BAMS और MBBS दोनों डॉक्टर बनने के रास्ते हैं, लेकिन मेडिकल सिस्टम अलग है। MBBS मॉडर्न एलोपैथिक मेडिसिन पर आधारित है, जबकि BAMS आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पर। MBBS की वैश्विक स्वीकार्यता ज़्यादा है, वहीं BAMS का प्रैक्टिस स्कोप मुख्यतः भारत और आयुष फ्रेमवर्क तक सीमित रहता है। ट्रेनिंग डेप्थ, इमरजेंसी एक्सपोज़र और करियर फ्लेक्सिबिलिटी में भी बड़ा अंतर होता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर सरकारी जॉब कैसे मिलती है?

आयुर्वेदिक डॉक्टर को सरकारी नौकरी पाने के लिए पहले स्टेट आयुष कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। इसके बाद राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा निकाली गई आयुष मेडिकल ऑफिसर की वैकेंसीज के लिए अप्लाई करना होता है। सिलेक्शन प्रक्रिया में रिटन एग्जाम, इंटरव्यू या दोनों शामिल हो सकते हैं।

BAMS के बाद आगे कौन-सी पढ़ाई की जा सकती है?

BAMS के बाद MD (आयुर्वेद) या MS (आयुर्वेद) किया जा सकता है, जिससे स्पेशलिस्ट बनने का मौका मिलता है। इसके अलावा MPH, MBA (हॉस्पिटल मैनेजमेंट), PhD या क्लीनिकल रिसर्च जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। उच्च शिक्षा से सैलरी और करियर अवसर बेहतर हो जाते हैं।

आयुर्वेदिक डॉक्टर का भविष्य और स्कोप कैसा है?

भारत और विदेशों में आयुर्वेद की मांग बढ़ रही है, खासकर प्राकृतिक उपचार और पंचकर्म के कारण। आयुष सेक्टर में सरकारी निवेश और वेलनेस इंडस्ट्री के विस्तार से करियर अवसर बढ़े हैं। हालांकि सफलता के लिए सही कॉलेज, प्रैक्टिकल स्किल और अनुभव बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हमें उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी सरल तरीके से समझ में आ गई होगी। ऐसे ही अन्य करियर से जुड़े लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ जुड़े रहें।

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