अगर आप राजस्थान में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं, तो REET आपके लिए सबसे अहम कदम है, क्योंकि राज्य में शिक्षक भर्ती के लिए यह एक अनिवार्य पात्रता परीक्षा है। जो राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित की जाती है। REET में बेहतर स्कोर के लिए अभ्यर्थियों को सिलेबस और परीक्षा पैटर्न की पूरी जानकारी के साथ तैयारी शुरू करनी चाहिए। इस लेख में REET का सिलेबस, विषयवार प्रमुख टॉपिक्स, परीक्षा पैटर्न और कुछ किताबों के नाम के बारे में बताया गया है।
This Blog Includes:
REET परीक्षा का ओवरव्यू
| पैरामीटर | डिटेल्स |
| परीक्षा का नाम | राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) |
| आयोजक संस्था | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान (BSER) |
| परीक्षा का स्तर | राज्य स्तरीय (स्टेट लेवल) |
| श्रेणियाँ (लेवल्स) | लेवल-1 (कक्षा 1-5) और लेवल-2 (कक्षा 6-8) |
| परीक्षा मोड | ऑफलाइन (पेन एंड पेपर – OMR आधारित) |
| कुल प्रश्नों की संख्या | 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) |
| कुल समय | 150 मिनट (2.5 घंटे) |
| प्रमाण पत्र की वैधता | आजीवन (लाइफटाइम वैलिडिटी) |
| भाषा विकल्प | हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, सिंधी, पंजाबी और गुजराती |
| आधिकारिक वेबसाइट | rajeduboard.rajasthan.gov.in |
REET परीक्षा के बारे में
REET (राजस्थान एलिजिबिलिटी एग्जामिनेशन फॉर टीचर्स) राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित एक राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा है, जिसका उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक और टीचिंग योग्यता की जांच करना है। यह परीक्षा दो स्तरों में आयोजित की जाती है, इसमें कक्षा 1 से कक्षा 5 में शिक्षक बनने के लिए लेवल-1 और कक्षा 6 से कक्षा 8 के लिए लेवल-2 होती है।
REET पास करना शिक्षक भर्ती की अनिवार्य शर्त है, लेकिन केवल REET पास करने से नौकरी नहीं मिलती। इस परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके बाद अलग भर्ती प्रक्रिया होती है। REET एलिजिबिलिटी पास करने के बाद उम्मीदवारों को REET मेंस परीक्षा देनी होती है।
REET का परीक्षा पैटर्न
यहाँ REET लेवल-1 और लेवल-2 के लिए विस्तृत परीक्षा पैटर्न अलग-अलग टेबल में दिया गया है:
REET लेवल-1 का परीक्षा पैटर्न (कक्षा 1 से 5 तक)
यहाँ REET लेवल-1 का परीक्षा पैटर्न दिया गया है –
| विषय | प्रश्न संख्या | अंक |
| बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र | 30 | 30 |
| भाषा 1 | 30 | 30 |
| भाषा 2 | 30 | 30 |
| गणित | 30 | 30 |
| पर्यावरण अध्ययन | 30 | 30 |
| कुल | 150 | 150 |
REET लेवल-2 का परीक्षा पैटर्न (कक्षा 6 से कक्षा 8 तक)
यहाँ REET लेवल-2 (माध्यमिक शिक्षक) के लिए परीक्षा पैटर्न दिया गया है –
| विषय | प्रश्न संख्या | अंक |
| बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र | 30 | 30 |
| भाषा 1 (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गुजराती, उर्दू, सिंधी, पंजाबी) | 30 | 30 |
| भाषा 2 (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गुजराती, उर्दू, सिंधी, पंजाबी) | 30 | 30 |
| विज्ञान और गणित या सामाजिक विज्ञान के अलावा अन्य श्रेणियों के शिक्षकों के लिए) | 60 | 60 |
| कुल | 150 | 150 |
REET का सम्पूर्ण सिलेबस
REET का सिलेबस विषयों की गहरी समझ और टीचिंग स्किल (Pedagogy) पर केंद्रित है। यहाँ REET 2026 के तीनों वर्गों के लिए विस्तृत और सम्पूर्ण सिलेबस का विवरण दिया गया है:
| बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र | |
| बाल विकास: वृद्धि और विकास की अवधारणा, विकास के सिद्धांत और आयाम विकास को प्रभावित करने वाले कारक (विशेषकर परिवार और विद्यालय के संदर्भ में) और लर्निंग के साथ इसका संबंध | आनुवंशिकता और पर्यावरण की भूमिका |
| लर्निंग का अर्थ और अवधारणा तथा इसकी प्रक्रियाएँ | लर्निंग को प्रभावित करने वाले कारक |
| लर्निंग के सिद्धांत (व्यवहारवाद, गेस्टाल्ट, संज्ञानवाद, रचनावाद) और इसके निहितार्थ | बच्चे कैसे सीखते हैं, लर्निंग प्रक्रिया, चिंतन, कल्पना और तर्क, रचनावाद, अनुभवात्मक लर्निंग, अवधारणा मानचित्रण, खोजी दृष्टिकोण, समस्या-समाधान |
| सीखने के लिए प्रेरणा और निहितार्थ | व्यक्तिगत भिन्नताएँ:- व्यक्तिगत भिन्नताओं का अर्थ, प्रकार और उन्हें प्रभावित करने वाले कारक और व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझना |
| व्यक्तित्व: व्यक्तित्व की अवधारणा और प्रकार, इसे आकार देने वाले कारक और इसका मापन | बुद्धि: अवधारणा, सिद्धांत और उसका मापन |
| बहुआयामी बुद्धि और इसके निहितार्थ | विविध शिक्षार्थियों को समझना:- पिछड़े, मानसिक रूप से मंद, प्रतिभाशाली, रचनात्मक, वंचित और विमुख, विशेष रूप से सक्षम, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, लर्निंग संबंधी अक्षमता वाले बच्चे |
| सीखने में होने वाली समस्याएं | समायोजन:- समायोजन की अवधारणा और तरीके |
| समायोजन में शिक्षक की भूमिका | राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2005 के संदर्भ में टीचिंग-लर्निंग प्रक्रिया, टीचिंग-लर्निंग रणनीतियाँ और विधियाँ |
| आकलन, मापन और मूल्यांकन का अर्थ और उद्देश्य। व्यापक और सतत मूल्यांकन। उपलब्धि परीक्षण का निर्माण, लर्निंग परिणाम | एक्शन रिसर्च |
| शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (शिक्षकों की भूमिका और जिम्मेदारियां) | |
| English | |
| Unseen Prose Passage | Synonyms, Antonyms, Spellings, Word-formation, One Word Substitution |
| Parts of Speech, Tenses, Determiners, Degrees of comparison | Framing Questions Including Active and Passive Voice, |
| Narration, Knowledge of English Sounds and Phonetic Symbols | Principles of Teaching English, Methods and Approaches to the English Language Teaching |
| Development of Language Skills, Teaching Learning Materials: (Textbooks, Multi Media Materials and other Resources) | Comprehensive & Continuous Evaluation, Evaluation in the English Language. |
| हिंदी | |
| एक अपठित गद्यांश | पर्यायवाची शब्द |
| विलोम शब्द | वर्तनी |
| शब्द निर्माण | एक शब्द प्रतिस्थापन |
| संधि | समास |
| संज्ञा | सर्वनाम |
| विशेषण | अव्यय |
| वाक्य रचना | वाक्य के प्रकार |
| वाक्य के अंग | पदबंध |
| विराम चिन्ह | मुहावरे और लोकोक्तियाँ |
| वचन | लिंग |
| कारक | पद |
| तत्सम और तद्भव | शब्दों का रूप परिवर्तन |
| रेखांकित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करना | शब्द भेद, काल, निर्धारक, तुलना की डिग्री |
| प्रश्न निर्माण करना | विदेशी शब्द |
| एकार्थी शब्द | भाषा की शिक्षण विधि |
| भाषा शिक्षण के उपागम | भाषा दक्षता का विकास |
| भाषा शिक्षण में मूल्यांकन | उपलब्धि परीक्षण का निर्माण एवं सतत् मूल्यांकन |
| उपचारात्मक शिक्षण | भाषायी कौशलों का विकास (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) |
| हिंदी भाषा शिक्षण में चुनौतियाँ | शिक्षण अधिगम सामग्री |
| पाठ्य पुस्तक | बहु-माध्यम एवं शिक्षण के अन्य संसाधन |
| सामाजिक अध्ययन | |
| भारतीय सभ्यता, संस्कृति और समाज | सिंधु घाटी सभ्यता |
| वैदिक संस्कृति | जैन धर्म और बौद्ध धर्म |
| महाजनपद | मौर्य और गुप्त साम्राज्य तथा गुप्तोत्तर काल |
| राजनीतिक इतिहास एवं प्रशासन | भारतीय संस्कृति में योगदान |
| भारत (600–1000 ईस्वी), बृहत् भारत | मध्यकालीन एवं आधुनिक काल |
| भक्ति एवं सूफी आंदोलन | मुगल-राजपूत संबंध |
| मुगल प्रशासन | भारतीय राज्यों के प्रति ब्रिटिश नीतियां |
| 1857 का विद्रोह | भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव |
| पुनर्जागरण एवं सामाजिक सुधार | भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (1885–1947) |
| भारतीय संविधान और लोकतंत्र | भारतीय संविधान का निर्माण और इसकी विशेषताएं |
| प्रस्तावना | मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य |
| सामाजिक न्याय | बाल अधिकार और बाल संरक्षण |
| लोकतंत्र में चुनाव और मतदाता जागरूकता | सरकार: संरचना एवं कार्य |
| संसद | राष्ट्रपति |
| प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद | सर्वोच्च न्यायालय |
| राज्य सरकार | पंचायती राज एवं शहरी स्वशासन |
| (राजस्थान के संदर्भ में) जिला प्रशासन एवं न्यायिक प्रणाली | पृथ्वी और हमारा पर्यावरण |
| अक्षांश | देशांतर |
| पृथ्वी की गति | वायु दाब और हवाएँ |
| चक्रवात और प्रतिचक्रात | सूर्य और चंद्र ग्रहण |
| पृथ्वी के प्रमुख जलवायु क्षेत्र | जीवमंडल |
| पर्यावरणीय समस्याएँ और उनके समाधान | भारत का भूगोल और संसाधन |
| भौगोलिक क्षेत्र | जलवायु |
| प्राकृतिक वनस्पति | वन्य जीवन |
| बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं | मिट्टी और कृषि फसलें |
| उद्योग | खनिज |
| परिवहन | जनसंख्या |
| मानव संसाधन | आर्थिक और सामाजिक विकास कार्यक्रम |
| राजस्थान का भूगोल और संसाधन | भौतिक क्षेत्र |
| जलवायु और जल निकासी व्यवस्था | झीलें, जल संरक्षण और संचयन |
| कृषि, मृदा, फसलें, खनिज और ऊर्जा संसाधन | राजस्थान की प्रमुख नहरें और नदी घाटी परियोजनाएं |
| परिवहन | उद्योग |
| जनसंख्या | राजस्थान के पर्यटन स्थल |
| वन और वन्यजीव | राजस्थान का इतिहास |
| प्राचीन सभ्यताएँ और जनपद | राजस्थान के प्रमुख राजवंशों का इतिहास |
| 1857 के विद्रोह में राजस्थान का योगदान | प्रजामंडल |
| राजस्थान में आदिवासी और किसान आंदोलन | राजस्थान का एकीकरण |
| राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व | राजस्थान की कला और संस्कृति |
| राजस्थान की विरासत (किले, महल, स्मारक) | मेले और त्यौहार |
| राजस्थान की लोक कलाएँ | राजस्थान की चित्रकला |
| राजस्थान के लोक नृत्य और लोक नाटक | लोक देवता |
| लोक संत | राजस्थान का लोक संगीत और वाद्ययंत्र |
| राजस्थान के हस्तशिल्प और वास्तुकला | राजस्थान के वस्त्र और आभूषण |
| राजस्थान की भाषाएँ और साहित्य | बीमा और बैंकिंग प्रणाली |
| बीमा और बैंक के प्रकार | भारतीय रिज़र्व बैंक और उसके कार्य |
| सहकारी समितियाँ और उपभोक्ता जागरूकता | शिक्षण संबंधी मुद्दे – I |
| सामाजिक विज्ञान/सामाजिक अध्ययन की अवधारणा और प्रकृति | कक्षा प्रक्रियाएं |
| गतिविधियां और संवाद | सामाजिक विज्ञान/सामाजिक अध्ययन पढ़ाने की समस्याएं |
| आलोचनात्मक सोच का विकास | शिक्षण संबंधी मुद्दे – II |
| जांच/अनुभवजन्य साक्ष्य | शिक्षण अधिगम सामग्री और शिक्षण सहायक सामग्री |
| सूचना और संचार प्रौद्योगिकी | परियोजना कार्य, लर्निंग रिजल्ट, मूल्यांकन |
| सामान्य विज्ञान | |
| सजीव और निर्जीव: परिचय, अंतर और विशेषताएं | सूक्ष्मजीव: जीवाणु, विषाणु, कवक (लाभदायक और हानिकारक) |
| जीव: पौधों के विभिन्न प्रकार और भाग | पौधों में पोषण, श्वसन और उत्सर्जन |
| पादप कोशिका और जंतु कोशिका – संरचना और कार्य | कोशिका विभाजन |
| मानव शरीर और स्वास्थ्य | सूक्ष्मजीवों द्वारा फैलने वाले रोग (तपेदिक, खसरा, डिप्थीरिया, हैजा, टाइफाइड) |
| रोगों से बचाव | मानव शरीर की विभिन्न प्रणालियाँ |
| संक्रामक रोग (कारण और रोकथाम) | भोजन के स्रोत |
| भोजन के प्रमुख घटक और उनकी कमी से होने वाले रोग | संतुलित आहार |
| पशुओं का प्रजनन और किशोरावस्था | प्रजनन के तरीके (लैंगिक और अलैंगिक) |
| किशोरावस्था और यौवनारंभ | शरीर में परिवर्तन |
| प्रजनन में हार्मोन की भूमिका | प्रजनन स्वास्थ्य |
| यांत्रिकी – बल और गति | बलों के प्रकार (श्वास बल, घर्षण बल, गुरुत्वाकर्षण बल, चुंबकीय बल, स्थिर विद्युत बल) |
| दाब | गति के प्रकार (रेखीय, टेढ़ी-मेढ़ी, वृत्ताकार, कंपनशील, आवधिक) |
| गति | वायुमंडलीय दाब |
| उत्प्लावन बल | कार्य और ऊर्जा |
| ऊर्जा के पारंपरिक और वैकल्पिक स्रोत | ऊर्जा संरक्षण |
| ऊष्मा और तापमान | थर्मामीटर |
| ऊष्मा संचरण (चालन, संवहन और विकिरण) | प्रकाश और ध्वनि |
| प्रकाश के स्रोत | प्रकाश का परावर्तन |
| गोलाकार दर्पण | समतल और गोलाकार दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण |
| प्रकाश का अपवर्तन | लेंस और लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण |
| ध्वनि | ध्वनि की विशेषताएं |
| ध्वनि का प्रसार | ध्वनि प्रदूषण |
| विद्युत और चुंबकत्व | विद्युत धारा |
| विद्युत परिपथ | चुंबक और चुंबकत्व |
| विद्युत के तापन, चुंबकीय एवं रासायनिक प्रभाव | विज्ञान और प्रौद्योगिकी: दैनिक जीवन में विज्ञान का महत्व |
| सिंथेटिक फाइबर और प्लास्टिक | सिंथेटिक फाइबर के प्रकार और विशेषताएं |
| प्लास्टिक और उसके गुण | प्लास्टिक और पर्यावरण |
| डिटर्जेंट | सीमेंट |
| चिकित्सा क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एक्स-रे, सीटी स्कैन, सर्जरी, अल्ट्रासाउंड, लेजर) | दूरसंचार क्षेत्र (फैक्स, कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल, वेबसाइट) |
| सौर मंडल | चंद्रमा और तारे |
| सौर परिवार – सूर्य और ग्रह | धूमकेतु और तारामंडल |
| पदार्थ की संरचना: परमाणु और अणु | परमाणु की संरचना |
| तत्व, यौगिक और मिश्रण | पदार्थों की अशुद्धियों का पृथक्करण |
| तत्वों के प्रतीक | यौगिकों के रासायनिक सूत्र और रासायनिक समीकरण |
| भौतिक और रासायनिक परिवर्तन | रासायनिक पदार्थ |
| ऑक्साइड | ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग |
| हाइड्रोकार्बन (प्रारंभिक ज्ञान) | अम्ल, क्षार और लवण |
| ऑक्सीजन गैस | नाइट्रोजन गैस और नाइट्रोजन चक्र |
| कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस | विज्ञान की प्रकृति और संरचना |
| प्राकृतिक विज्ञान: उद्देश्य एवं लक्ष्य | प्राकृतिक संसाधन |
| पर्यावरण, प्रदूषण एवं नियंत्रण | जैव विविधता |
| अनुकूलन | अपशिष्ट प्रबंधन |
| कृषि प्रबंधन | राजस्थान में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें |
| जैविक विकास | विज्ञान को समझना |
| विज्ञान शिक्षण की विधियाँ | नवाचार |
| पाठ्य सामग्री/सहायक सामग्री | मूल्यांकन |
| समस्याएं | उपचारात्मक शिक्षण |
| गणित | |
| घातांक: समान आधारों पर संख्याओं का गुणन और भाग | घातांक के नियम |
| बीजीय व्यंजक: जोड़, घटाव, गुणा और भाग | सर्वसमिकाएँ |
| गुणनखंड: सरल बीजगणितीय व्यंजकों के गुणनखंड | समीकरण: सरल रैखिक समीकरण |
| वर्ग और वर्गमूल | घन और घनमूल |
| ब्याज: साधारण ब्याज | चक्रवृद्धि ब्याज, लाभ-हानि |
| अनुपात और समानुपात | समानुपातिक भागों में विभाजन, भिन्न |
| प्रतिशत | जन्म और मृत्यु दर, जनसंख्या वृद्धि, मूल्यह्रास |
| रेखाएँ और कोण | रेखाखंड, सीधी और वक्र रेखाएँ, कोणों के प्रकार |
| समतल आकृतियाँ: त्रिभुज | त्रिभुजों की सर्वांगसमता, चतुर्भुज और वृत्त |
| समतल आकृतियों का क्षेत्रफल और परिमाप (त्रिभुज, आयत, समांतर चतुर्भुज, समलंब चतुर्भुज) | पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन (घन, घनाभ, समकोण वृत्ताकार बेलन) |
| सांख्यिकी: आंकड़ों का संग्रह और वर्गीकरण | आवृत्ति वितरण सारणी, टैली मार्क्स |
| बार ग्राफ और हिस्टोग्राम | वृत्ताकार ग्राफ (पाई आरेख) |
| ग्राफ: विभिन्न प्रकार के ग्राफ | प्रायिकता |
| गणित की प्रकृति / तार्किक चिंतन | पाठ्यक्रम में गणित का स्थान |
| गणित की भाषा | सामुदायिक गणित |
| मूल्यांकन | रिमेडियल टीचिंग |
| शिक्षण की समस्याएं | — |
| पर्यावरण अध्ययन | |
| परिवार | व्यक्तिगत संबंध |
| एकल और संयुक्त परिवार | सामाजिक बुराइयाँ (बाल विवाह, दहेज प्रथा, बाल श्रम, चोरी) |
| व्यसन (नशा, धूम्रपान) और इसके दुष्प्रभाव | वस्त्र और आवास |
| विभिन्न ऋतुओं के लिए वस्त्र | घर पर वस्त्रों का रखरखाव |
| हथकरघा और बिजली से चलने वाला करघा | जीवित प्राणियों के आवास |
| विभिन्न प्रकार के घर | घरों और आस-पास के क्षेत्रों की स्वच्छता |
| घर बनाने की विभिन्न सामग्रियां | पेशा (प्रोफेशन) |
| परिवेश के पेशे (सिलाई, बागवानी, खेती, पशुपालन आदि) | लघु एवं कुटीर उद्योग |
| राजस्थान राज्य के प्रमुख उद्योग | उपभोक्ता संरक्षण की आवश्यकता |
| सहकारी समितियाँ | सार्वजनिक स्थान और संस्थान |
| विद्यालय | अस्पताल |
| डाकघर | बस स्टैंड |
| रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान | सार्वजनिक संपत्ति (स्ट्रीट लाइट, सड़क, बस, ट्रेन आदि) |
| बिजली और पानी की बर्बादी | रोजगार नीतियां |
| पंचायत, विधानसभा और संसद की सामान्य जानकारी | हमारी संस्कृति, सभ्यता और गौरव |
| राजस्थान के मेले और त्यौहार | राष्ट्रीय त्यौहार |
| राजस्थान के वस्त्र और आभूषण | खान-पान की आदतें |
| वास्तुकला | किले |
| स्थान | चित्रकला, कला एवं शिल्प |
| राजस्थान के पर्यटन स्थल | राजस्थान के महान व्यक्तित्व |
| महाराणा प्रताप और महात्मा गांधी के कथन | राजस्थान में पंचायत राज और शहरी स्वशासन |
| परिवहन और संचार | परिवहन और संचार के साधन |
| पैदल यात्रियों और परिवहन के नियम | यातायात चिह्न |
| जीवनशैली पर संचार साधनों का प्रभाव | व्यक्तिगत स्वच्छता |
| शरीर के बाहरी अंग और उनकी सफाई | शरीर के आंतरिक अंगों की सामान्य जानकारी |
| संतुलित आहार और उसका महत्व | सामान्य रोग एवं रोकथाम (गैस्ट्रोएंटेराइटिस, एनीमिया, मलेरिया आदि) |
| पल्स पोलियो अभियान | जीव-जंतु |
| पौधों और जानवरों के संगठन के स्तर | जीवित जीवों की विविधता |
| राज्य का फूल | राज्य का पेड़ |
| राज्य का पक्षी | राज्य का पशु |
| आरक्षित वन और वन्यजीवों का ज्ञान | प्रजातियों का संरक्षण |
| कृषि प्रजातियां | जल |
| वन | आर्द्रभूमि और मरुस्थल का ज्ञान |
| विभिन्न प्रकार के प्रदूषण और नियंत्रण | जल के गुणधर्म, स्रोत और प्रबंधन |
| पर्वतारोहण | उपकरण |
| समस्याएँ | भारत की प्रमुख महिला पर्वतारोही |
| पृथ्वी और अंतरिक्ष | हमारा सौर मंडल |
| भारतीय अंतरिक्ष यात्री | पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा और दायरा |
| पर्यावरण अध्ययन का महत्व | एकीकृत पर्यावरण अध्ययन |
| पर्यावरण अध्ययन के अधिगम सिद्धांत | विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से संबंध |
| अवधारणाओं को प्रस्तुत करने के तरीके | गतिविधियाँ |
| प्रयोग / व्यावहारिक कार्य | बहस |
| व्यापक और सतत मूल्यांकन | शिक्षण सामग्री / सहायक उपकरण |
| शिक्षण की समस्याएं | — |
नोट – यहाँ दिया गया सिलेबस पिछले कई वर्षों के पेपर के पैटर्न को देखते हुए तैयार किया गया है, इससे आपको परीक्षा के लिए रणनीति बनाने में काफी मदद मिल सकती है।
REET परीक्षा की तैयारी के लिए प्रमुख किताबें
नीचे हमने कुछ किताबों के बारे में बताया है जिनसे आप अपनी परीक्षा की तैयारी को और भी आसान बना सकते हैं इसमें आपको पुराने पेपर्स, मॉक टेस्ट और अन्य गतिविधियाँ मिल जाएंगी –
| किताब का नाम | लेखक/पब्लिकेशन का नाम | यहाँ से देखें |
| REET लेवल 1 पिछले वर्ष के प्रश्न पत्रों के सोल्युशन बुक | उत्कर्ष | यहाँ से देखें |
| आरईईटी स्तर 1 और 2 (शिक्षकों के लिए राजस्थान पात्रता परीक्षा) आरटीईटी प्री और मेन्स परीक्षा 2025 | पवन तिवारी | यहाँ से देखें |
| REET हिंदी लेवल-1, 1500+ वस्तुनिष्ठ प्रश्न और 10 मॉडल टेस्ट पेपर (विस्तृत व्याख्या सहित), नवीनतम REET लेवल 1 हिंदी पाठ्यक्रम | डॉ. मुकेश शर्मा , हिमांशु लवानिया | यहाँ से देखें |
| आरईईटी पेपर 1 (कक्षा 1-5) गाइड बुक | एग्जामकार्ट एक्सपर्ट्स | यहाँ से देखें |
| आरईईटी लेवल-1 मुख्य परीक्षा प्रैक्टिस बुक | डॉ. मुकेश पंचोली | यहाँ से देखें |
FAQs
REET लेवल 1 सिलेबस में मुख्य रूप से पाँच विषय जैसे – बाल विकास और शिक्षाशास्त्र, भाषा‑I, भाषा‑II, गणित/पर्यावरण अध्ययन और राजस्थान का सामान्य ज्ञान आते हैं। इन विषयों से कुल 150 प्रश्न पूछे जाते हैं और परीक्षा का समय 2.5 घंटे होता है। सभी प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) होते हैं।
REET सिलेबस की सबसे भरोसेमंद सूची राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RBSE) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होती है। यहाँ पर PDF के रूप में लेवल 1 और लेवल 2 के विस्तृत अध्यायों का विवरण रहता है। उम्मीदवारों को इसी आधिकारिक सिलेबस का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि अन्य किसी स्रोत में बदलाव और त्रुटियाँ होती हैं।
हाँ, खासकर लेवल 1 में राजस्थान का सामान्य अध्ययन और स्थानीय सांस्कृतिक ज्ञान शामिल रहता है। इसमें राज्य की भूगोल, इतिहास, लोक संस्कृति और समाजिक परियोजनाओं से जुड़े सवाल आएँगे। यह भाग शिक्षक पात्रता परीक्षा को राज्य‑विशेष संदर्भ में तैयार करने के लिए ज़रूरी होता है।
हाँ, सिलेबस समय‑समय पर संशोधित किया जाता है और नया सिलेबस आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट होता है। यह इसलिए होता है ताकि शिक्षा के नए तरीकों, पाठ्यक्रमों और सरकारी आवश्यकताओं के अनुरूप परीक्षा तटस्थ रहे। इसलिए अभ्यर्थियों को हर साल नई प्रकाशित सूची को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
REET लेवल 2 में भी कुल 150 प्रश्न होते हैं। इसमें बाल विकास और शिक्षाशास्त्र अनिवार्य है, इसके अलावा उम्मीदवार को अपनी मुख्य विषय श्रेणी जैसे- गणित‑विज्ञान या सामाजिक अध्ययन चुननी होती है। लेवल 2 का सिलेबस कक्षा 6 से 8 तक के टीचिंग स्किल और विषय‑विशेष ज्ञान पर आधारित रहता है।
यह भी पढ़ें :
हमें उम्मीद है कि आपको REET परीक्षा का सिलेबस, परीक्षा पैटर्न और टिप्स से जुड़ी जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही इंडियन एग्जाम से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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