LLM कोर्स का पूरा नाम मास्टर ऑफ लॉज़ है, ये एक पोस्टग्रेजुएट लॉ डिग्री है जिसे भारत और वैश्विक स्तर पर कानून के विशेष क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करने के लिए लिया जाता है। यह केवल वकालत की डिग्री नहीं है, बल्कि कॉर्पोरेट लॉ, टैक्सेशन, इंटरनेशनल लॉ, मानवाधिकार और बौद्धिक संपदा जैसे विस्तृत क्षेत्रों में गहरी समझ विकसित करने का मौका देती है।
बदलती कानूनी दुनिया, बढ़ती कॉर्पोरेट जटिलताओं और अंतरराष्ट्रीय विवादों के चलते इस कोर्स की डिमांड बढ़ती जा रही हैं। यदि आप कानून के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो ये कोर्स आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस ब्लॉग में आपके लिए LLM कोर्स की संरचना, सिलेबस, फीस और करियर स्कोप की जानकारी आसान भाषा में दी गई है।
| मापदंड | कोर्स विवरण |
| कोर्स की फुल फॉर्म | मास्टर ऑफ लॉज़ (LLM) |
| कोर्स लेवल | पोस्टग्रेजुएट (PG) |
| कोर्स ड्यूरेशन | सामान्यतः 1-2 वर्ष |
| एडमिशन प्रोसेस | मेरिट बेस्ड – एंट्रेंस बेस्ड |
| करिकुलम स्ट्रक्चर | कोर विषय, स्पेशलाइजेशन पेपर (जैसे कॉर्पोरेट लॉ, क्रिमिनल लॉ), रिसर्च मेथडोलॉजी और डिसर्टेशन/थीसिस |
| योग्यता | मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से LLB (3 या 5 वर्ष) में सामान्यतः 50–55% अंक (संस्थान अनुसार भिन्न हो सकते हैं) |
| प्रमुख कॉलेज | नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (विभिन्न राज्य), दिल्ली यूनिवर्सिटी, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी |
| प्रमुख जॉब प्रोफाइल | असिस्टेंट प्रोफेसर (NET/PhD आवश्यक), लीगल कंसल्टेंट, कॉर्पोरेट लॉयर, रिसर्च एसोसिएट |
| रोजगार के क्षेत्र | लॉ फर्म, कॉर्पोरेट कंपनियाँ, विश्वविद्यालय/कॉलेज, थिंक टैंक, सरकारी विभाग |
This Blog Includes:
- LLM कोर्स क्यों करें?
- LLM कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
- LLM कोर्स में एडमिशन कैसे होता है?
- भारत में LLM कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान और अनुमानित फीस
- LLM कोर्स के लिए स्पेशलाइज़ेशन
- LLM कोर्स का सिलेबस
- LLM कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
- LLM कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प
- LLM कोर्स बनाम PhD कोर्स में अंतर
- FAQs
LLM कोर्स क्यों करें?
नीचे LLM कोर्स करने के कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं, जिनकी वजह से ग्रेजुएशन के बाद यह एक अच्छा पोस्टग्रेजुएट ऑप्शन माना जाता है –
- किसी विशेष कानून क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए अच्छा विकल्प: LLM, LLB के बाद एक स्पेशलाइजेशन डिग्री है। यदि आप कॉर्पोरेट लॉ, क्रिमिनल लॉ, टैक्सेशन या IPR जैसे क्षेत्र में गहराई से काम करना चाहते हैं, तो यह डिग्री आपको विषय की उन्नत समझ देती है।
- अकादमिक करियर के लिए अनिवार्य: यदि आपका लक्ष्य विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना है, तो LLM आवश्यक है। भारत में हायर एजुकेशन रेगुलेशन यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के अनुसार लॉ विषय में शिक्षण के लिए मास्टर डिग्री जरूरी है।
- रिसर्च और पीएचडी की तैयारी के लिए उपयोगी है: जो छात्र आगे PhD करना चाहते हैं, उनके लिए LLM रिसर्च मेथडोलॉजी और थीसिस लेखन का आधार तैयार करता है, उनके लिए ये एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
- कॉर्पोरेट सेक्टर में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त: कुछ विशेष क्षेत्रों जैसे मर्जर-एक्विजिशन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून या बौद्धिक संपदा में LLM को अतिरिक्त योग्यता के रूप में देखा जाता है।
- कानूनी नीति और थिंक टैंक में अवसर: सरकारी शोध संस्थानों, नीति आयोग जैसे संगठनों या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में रिसर्च आधारित भूमिकाओं के लिए उन्नत कानूनी ज्ञान उपयोगी होता है।
LLM कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
LLM कोर्स में एडमिशन के लिए पात्रता मानदंड कॉलेज और संस्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकते हैं। इसलिए अप्लाई करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक प्रवेश शर्तें जरूर देखनी चाहिए। सामान्य तौर पर पात्रता इस प्रकार होती है:
- ग्रेजुएशन डिग्री अनिवार्य: इस कोर्स में प्रवेश के लिए आपके पास 3 वर्ष की LLB या 5 वर्ष की इंटीग्रेटेड BA LLB / BBA LLB डिग्री होनी चाहिए। ये डिग्री ऐसी संस्था से होनी चाहिए जो बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त हो, क्योंकि बिना मान्यता वाली डिग्री पर कई विश्वविद्यालय प्रवेश नहीं देते हैं।
- न्यूनतम अंक: सामान्य वर्ग के लिए अधिकतर यूनिवर्सिटी 50% से 55% न्यूनतम अंक की डिमांड करती हैं। आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट मिल सकती है। इसके अलावा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में कट-ऑफ प्रतिशत प्रवेश परीक्षा स्कोर पर निर्भर करता है।
- प्रवेश प्रक्रिया: इस कोर्स में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा (CLAT PG, AILET, CUET PG) पास करना अनिवार्य योग्यता का अहम हिस्सा होता है।
LLM कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षाएँ
LLM कोर्स में एडमिशन के लिए अधिकतर यूनिवर्सिटी मेरिट या एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर चयन करती हैं। कुछ राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ होती हैं, जबकि कुछ यूनिवर्सिटी या राज्य स्तर पर अपनी प्रवेश प्रक्रिया आयोजित करती हैं। नीचे प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की जानकारी दी गई है –
| परीक्षा का नाम | परीक्षा का स्तर | परीक्षा का प्रकार (मोड) | वर्ष 2026 में परीक्षा की अनुमानित तिथि |
| CLAT PG 2026 | राष्ट्रीय | ऑफलाइन (OMR) | दिसंबर 2025 / जनवरी 2026 |
| AILET 2026 | राष्ट्रीय | ऑफलाइन (OMR) | दिसंबर 2025 / जनवरी 2026 |
| CUET PG (LLM) | राष्ट्रीय | ऑनलाइन (CBT) | मार्च – अप्रैल 2026 |
| MAH LLM CET | राज्य (महाराष्ट्र) | ऑनलाइन (CBT) | मई 2026 |
| TS PGLCET | राज्य (तेलंगाना) | ऑनलाइन (CBT) | जून 2026 |
| AP PGLCET | राज्य (आंध्र प्रदेश) | ऑनलाइन (CBT) | जून 2026 |
| ILSAT (ICFAI) | राष्ट्रीय (निजी) | ऑनलाइन (CBT) | जून 2026 |
नोट: परीक्षा तिथियाँ हर वर्ष बदल सकती हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित परीक्षा या यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट जानकारी जरूर जांच लें।
LLM कोर्स में एडमिशन कैसे होता है?
LLM कोर्स में एडमिशन की आवेदन प्रक्रिया कॉलेज या विश्वविद्यालय के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से पूरी की जाती है। दोनों तरीकों की सामान्य प्रक्रिया नीचे आसान भाषा में समझाई गई है –
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- फॉर्म में मांगी गई शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी सही तरीके से भरें।
- आवश्यक दस्तावेजों की कॉपी फॉर्म के साथ जमा करें।
- इसके बाद मेरिट लिस्ट या प्रवेश परीक्षा के परिणाम का इंतजार करें।
- चयन होने पर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करवाएं और निर्धारित फीस जमा करके एडमिशन कन्फर्म करें।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
- जिस कॉलेज या विश्वविद्यालय में आवेदन करना है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
- एडमिशन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके लॉगिन आईडी बनाएं।
- ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- संबंधित कॉलेज में कोर्स के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा में शामिल हों।
- मेरिट/रिजल्ट जारी होने के बाद काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा करें।
- अंत में फीस जमा करने के बाद एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
भारत में LLM कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान और अनुमानित फीस
भारत के कई सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में LLM कोर्स उपलब्ध है। इस कोर्स की फीस कॉलेज के प्रकार, राज्य, सीट श्रेणी और एडमिशन प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर सरकारी विश्वविद्यालयों में फीस कम होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में यह अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। नीचे दी गई तालिका में कुछ प्रमुख संस्थानों के आधार पर LLM कोर्स की अनुमानित फीस सामान्य जानकारी के लिए दी गई है:
सरकारी संस्थान
| संस्थान का नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी | बेंगलुरु (कर्नाटक) | INR 2,60,000 – INR 4,50,000 |
| नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली | दिल्ली | INR 3,00,000 – INR 6,00,000 |
| नेशनल अकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च | हैदराबाद (तेलंगाना) | INR 2,50,000 – INR 3,00,000 |
| वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जुडिशियल साइंसेज | कोलकाता (पश्चिम बंगाल) | INR 2,50,000 – INR 3,00,000 |
| गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी | गांधीनगर (गुजरात) | INR 2,50,000 – INR 3,00,000 |
| जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (फैकल्टी ऑफ लॉ) | दिल्ली | INR 30,000 – INR 70,000 |
| दिल्ली यूनिवर्सिटी (फैकल्टी ऑफ लॉ) | दिल्ली | INR 10,000 – INR 40,000 |
| अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (फैकल्टी ऑफ लॉ) | अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) | INR 10,000 – INR 20,000 |
| बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) | वाराणसी (उत्तरप्रदेश) | INR 10,000 – INR 25,000 |
प्राइवेट संस्थान
| संस्थान का नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| सिम्बायोसिस लॉ स्कूल | पुणे (महाराष्ट्र) | INR 4,00,000 – INR 5,00,000 |
| इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट | दिल्ली | INR 80,000 – INR 1,20,000 |
| जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (लॉ फैकल्टी) | दिल्ली | INR 30,000 – INR 6,75,000 |
| जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी (लॉ स्कूल) | भोपाल (मध्य प्रदेश) | INR 1,50,000 – INR 3,00,000 |
| आई.एल.एस. लॉ कॉलेज | पुणे (महाराष्ट्र) | INR 1,70,000 – INR 2,00,000 |
| जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल | सोनीपत | INR 4,50,000 – INR 5,50,000 |
| एमिटी लॉ स्कूल | नोएडा/गुरुग्राम | INR 1,50,000 – INR 2,25,000 |
| ICFAI लॉ स्कूल | हैदराबाद | INR 1,20,000 – INR 1,80,000 |
| लॉयड लॉ कॉलेज | ग्रेटर नोएडा | INR 1,00,000 – INR 1,40,000 |
नोट: तालिका में दी गई फीस केवल अनुमानित है और समय-समय पर बदल सकती है। सटीक और नवीनतम फीस की जानकारी के लिए संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें।
LLM कोर्स के लिए स्पेशलाइज़ेशन
LLM कोर्स में कई स्पेशलाइज़ेशन होते हैं यहां प्रमुख स्पेशलाइज़ेशन के बारे में बताया गया है, जिन्हें आप अपनी रूचि के अनुसार चुन सकते हैं –
- कॉर्पोरेट और कमर्शियल लॉ (Corporate & Commercial Law)
- संवैधानिक कानून और गवर्नेंस (Constitutional Law & Governance)
- पर्यावरण और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून (Environmental & International Law)
- अपराध और मानवाधिकार कानूनी अभ्यास (Criminal & Human Rights Law)
- व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून (Business & Trade Law)
- टेक्नोलॉजी, साइबर और डेटा कानून (Tech, Cyber & Data Law)
- शोध / विधि पद्धति और विधि दर्शन (Research / Jurisprudence & Methodology)
LLM कोर्स का सिलेबस
भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में LLM कोर्स का सिलेबस कुछ हद तक भिन्न हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक संस्थान अपना करिकुलम और पेपर स्ट्रक्चर स्वयं निर्धारित करता है। इसलिए आप एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम सिलेबस अवश्य जांच लें।
नीचे दिया गया सिलेबस जिसे दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की आधिकारिक वेबसाइट के आधार पर एक सामान्य रेफरेंस के रूप में दिया गया है, ताकि आपको पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषयों का स्पष्ट अंदाजा हो सके:
| सेमेस्टर – 1 | |
| पेपर प्रकार | सिलेबस / महत्वपूर्ण विषय |
| अनिवार्य (Core) | तुलनात्मक संवैधानिक कानून एवं शासन |
| अनिवार्य (Core) | विधिक एवं सामाजिक विज्ञान अनुसंधान पद्धति |
| वैकल्पिक (Elective) | अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं मानवाधिकार का कानून |
| वैकल्पिक | कॉरपोरेट प्रबंधन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व |
| वैकल्पिक | बौद्धिक एवं औद्योगिक संपत्ति कानून – भाग I |
| वैकल्पिक | तुलनात्मक श्रम एवं वेतन कानून |
| वैकल्पिक | आपराधिक न्याय एवं मानवाधिकार |
| वैकल्पिक | विवाह, तलाक एवं समान नागरिक संहिता का तुलनात्मक अध्ययन |
| वैकल्पिक | महिला एवं बाल अधिकारों का कानून |
| वैकल्पिक | प्रशासनिक कानून एवं नियामक तंत्र |
| सेमेस्टर – 2 | |
| पेपर प्रकार | सिलेबस / महत्वपूर्ण विषय |
| अनिवार्य (Core) | वैश्विक विश्व में कानून एवं न्याय |
| वैकल्पिक | प्रशासनिक कार्रवाई एवं न्यायिक समीक्षा |
| वैकल्पिक | कॉरपोरेट वित्त एवं प्रतिभूति विनियमन कानून |
| वैकल्पिक | बौद्धिक एवं औद्योगिक संपत्ति कानून – भाग II |
| वैकल्पिक | बीमा एवं बैंकिंग कानून |
| वैकल्पिक | साइबर एवं सूचना प्रौद्योगिकी कानून |
| वैकल्पिक | कॉरपोरेट एवं श्वेतपोश अपराध |
| वैकल्पिक | अपकृत्य (टॉर्ट) कानून एवं आपदा प्रबंधन |
| वैकल्पिक | कानून, मीडिया एवं सेंसरशिप |
| वैकल्पिक | वायु एवं अंतरिक्ष कानून |
| वैकल्पिक | प्रतिस्पर्धा एवं उपभोक्ता संरक्षण कानून |
| सेमेस्टर – 3 | |
| पेपर प्रकार | सिलेबस / महत्वपूर्ण विषय |
| वैकल्पिक | संधियों एवं विधानों की व्याख्या एवं प्रारूपण |
| वैकल्पिक | अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून, व्यापार एवं कूटनीति |
| वैकल्पिक | पर्यावरण कानून |
| वैकल्पिक | समुद्री कानून |
| वैकल्पिक | कर नीतियाँ एवं कर सुधार |
| वैकल्पिक | अपराध विज्ञान एवं आपराधिक न्याय प्रशासन |
| वैकल्पिक | उत्तराधिकार एवं संपत्ति उत्तराधिकार कानून |
| सेमेस्टर – 4 | |
| पेपर प्रकार | सिलेबस / महत्वपूर्ण विषय |
| शोध प्रबंध (Dissertation) | शोध कार्य एवं मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोचे सहित) |
LLM कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
LLM कोर्स करके आप कुछ प्रमुख रोजगार क्षेत्रों जैसे – कॉर्पोरेट, यूनिवर्सिटी/शोध या पब्लिक सेक्टर्स और स्पेशलाइज्ड लीगल फर्म्स आदि क्षेत्रों में निम्नलिखित जॉब प्रोफाइल पर काम कर सकते हैं:
| जॉब प्रोफाइल | अनुमानित सालाना सैलरी (INR) |
| कॉर्पोरेट वकील | INR 9.8 लाख – INR 11.1 लाख |
| लीगल एडवाइजर | INR 6.2 लाख – INR 6.9 लाख |
| लीगल कंसल्टेंट | INR 7 लाख – INR 7.7 लाख |
| जुडिशियल ऑफिसर | INR 11.9 लाख – INR 13.1 लाख |
| चीफ कंप्लायंस ऑफिसर | INR 33.2 लाख – INR 39.7 लाख |
नोट – यहां अनुमानित सैलरी की जानकारी Ambitionbox.com के आधार पर दी गई है जिसमें बदलाव संभव है।
LLM कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प
LLM कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों के सामने कई शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध होते हैं, लेकिन सही चुनाव लक्ष्य पर निर्भर करता है। यहाँ आपके लिए LLM कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प को संक्षिप्त में नीचे दी गई टेबल में बताया गया है, इन विकल्पों से आपकी करियर ग्रोथ बढ़ जाती है जो आपके सैलरी पैकेज को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है –
| कोर्स / विकल्प | न्यूनतम पात्रता | अवधि | चुनने का प्रमुख कारण |
| PhD (in law) | LLM और NET (अधिकतर विश्वविद्यालयों में) | 3 – 5 वर्ष | यदि अकादमिक या रिसर्च करियर लक्ष्य हो |
| UGC NET / JRF | LLM | वर्ष में 2 बार परीक्षा | लेक्चररशिप या रिसर्च फेलोशिप हेतु |
| पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च | PhD | 1 – 2 वर्ष | उच्च स्तरीय शोध रुचि |
| डिप्लोमा इन IPR / साइबर लॉ / टैक्सेशन | LLM या LLB | 6 माह – 1 वर्ष | स्पेशलाइजेशन बढ़ाने हेतु |
| MBA (कॉर्पोरेट गवर्नेंस / बिज़नेस लॉ) | LLM | 2 वर्ष | कॉर्पोरेट मैनेजमेंट रोल्स हेतु |
| LLD (डॉक्टर ऑफ़ लॉज़) | PhD | 3 – 6 वर्ष | अकादमिक उत्कृष्टता के लिए |
| इंटरनेशनल LLM / SJD | LLM | 1 – 3 वर्ष | विदेश में अकादमिक/प्रैक्टिस |
| पब्लिक पॉलिसी / गवर्नमेंट स्टडीज | LLM | 1 – 2 वर्ष | नीति निर्माण क्षेत्र |
LLM कोर्स बनाम PhD कोर्स में अंतर
LLM कोर्स बनाम PhD कोर्स में अंतर LLM एक विशेषज्ञता डिग्री है, जबकि PhD एक रिसर्च डिग्री है। जबकि PhD में आपको मौलिक शोध (ऑरिजिनल कंट्रीब्यूशन) अनिवार्य होता है। नीचे दी गई टेबल में दोनों कोर्स के बीच के मुख्य अंतर आसान तरीके से बताए गए हैं:
| तुलना का आधार | LLM (मास्टर ऑफ लॉज़) | PhD (डॉक्टर ऑफ फिलॉसोफी इन लॉ) |
| डिग्री स्तर | पोस्टग्रेजुएट (PG) डिग्री | डॉक्टरेट (उच्चतम अकादमिक डिग्री) |
| नियामक ढांचा | बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के दिशानिर्देश | यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के PhD रेगुलेशन के तहत |
| पात्रता | मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से LLB (3 या 5 वर्ष) | LLM में न्यूनतम 55% अंक (आरक्षण श्रेणी में छूट संभव) |
| प्रवेश प्रक्रिया | राष्ट्रीय स्तर पर कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT PG), कुछ विश्वविद्यालयों की अपनी परीक्षा | विश्वविद्यालय स्तरीय PhD एंट्रेंस टेस्ट और इंटरव्यू |
| अवधि | 1 वर्ष (कुछ विश्वविद्यालय) या 2 वर्ष | न्यूनतम 3 वर्ष (सामान्यतः 3-5 वर्ष) |
| अध्ययन का स्वरूप | कोर्सवर्क, स्पेशलाइजेशन और डिसर्टेशन | गहन शोध (ओरिजिनल रिसर्च), थीसिस और वायवा |
| उद्देश्य | किसी विशेष कानूनी क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करना | नया शोध कार्य करना और ज्ञान में योगदान देना |
| रिसर्च की गहराई | सीमित स्तर की रिसर्च (डिसर्टेशन) | विस्तृत और मौलिक शोध अनिवार्य |
| करियर दिशा | लीगल कंसल्टिंग, कॉर्पोरेट सेक्टर, अकादमिक की शुरुआत | विश्वविद्यालय में स्थायी प्रोफेसर, रिसर्च सुपरवाइजर, पॉलिसी रिसर्च |
| चुनने का प्रमुख कारण | जो स्पेशलाइजेशन या अकादमिक एंट्री चाहते हैं। | जो लॉन्ग टर्म रिसर्च व प्रोफेसरशिप लक्ष्य रखते हैं। |
FAQs
LLM कानून की उच्च पढ़ाई है, जिसे स्नातक कानून डिग्री (जैसे एलएलबी) के बाद किया जाता है। यह आमतौर पर 1 या 2 वर्ष का होता है। इसमें किसी एक कानूनी विषय में गहराई से अध्ययन कराया जाता है।
भारत में LLM कोर्स सामान्यतः 1 वर्ष या 2 वर्ष का होता है। कई केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय 1 वर्ष का पाठ्यक्रम चलाते हैं, जबकि कुछ राज्य विश्वविद्यालय 2 वर्ष का विकल्प देते हैं।
कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश देते हैं। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए साझा परीक्षा होती है। कुछ निजी और राज्य विश्वविद्यालय मेरिट या अपनी अलग परीक्षा से प्रवेश देते हैं।
LLM में छात्र संवैधानिक कानून, आपराधिक कानून, अंतरराष्ट्रीय कानून, व्यापार कानून, मानवाधिकार कानून जैसे विषय चुन सकते हैं। विषय चयन भविष्य की नौकरी और रुचि के अनुसार करना चाहिए।
LLM के बाद कॉलेज में अध्यापन, शोध कार्य, विधिक सलाहकार, न्यायिक सेवा की तैयारी, या बड़े संस्थानों में कानूनी पदों पर कार्य किया जा सकता है। उच्च अध्ययन के बाद अवसर अधिक बढ़ते हैं।
हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको LLM कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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