जर्मनी से MBBS कैसे करें: योग्यता, कॉलेज और स्टेप-बाय-स्टेप एडमिशन प्रोसेस

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जर्मनी से MBBS कैसे करें – यह सवाल उन भारतीय छात्रों के बीच आम है, जो कम ट्यूशन फीस में उच्च-स्तरीय और विश्व-स्तर पर मान्य मेडिकल शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। भारत में जिसे आमतौर पर MBBS कहा जाता है, उसी स्तर की पढ़ाई जर्मनी में Humanmedizin (स्टेट एग्जामिनेशन प्रोग्राम) के नाम से होती है। यह पढ़ाई किसी डिग्री-आधारित सिस्टम पर नहीं, बल्कि सरकारी राज्य परीक्षा प्रणाली (Staatsexamen) पर आधारित होती है, जिसमें कोर्स के दौरान और अंत में सरकार द्वारा ली जाने वाली परीक्षाएँ पास करना अनिवार्य होता है।

जर्मनी में मेडिकल एडमिशन मुख्य रूप से भाषा की तैयारी, शैक्षणिक प्रदर्शन और उपलब्ध सीटों के आधार पर होता है। इस प्रक्रिया में कुछ तय चरण होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। इसी उद्देश्य से इस लेख में जर्मनी से MBBS करने की योग्यता, एडमिशन प्रक्रिया, फीस, रहने का खर्च और इससे जुड़ी जरूरी जानकारियों को सरल तरीके से समझाया गया है।

This Blog Includes:
  1. क्या जर्मनी में MBBS होता है?
  2. जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) क्यों करें?
  3. भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी से MBBS (Humanmedizin) करने के लिए एलिजिबिल्टी क्राइटेरिया
    1. एडमिशन के लिए आवश्यक दस्तावेज
  4. जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) के लिए जर्मन भाषा की आवश्यकता
  5. जर्मनी से MBBS (Humanmedizin) का एडमिशन प्रोसेस (स्टेप-बाय-स्टेप)
  6. जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) कोर्स की अवधि और स्ट्रक्चर
  7. जर्मनी में MBBS की फीस और रहने का खर्च
    1. पब्लिक यूनिवर्सिटीज़ की अनुमानित फीस (एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट पर आधारित)
    2. प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ – हाई-लेवल शुल्क
    3. जर्मनी में रहने का खर्च
  8. जर्मनी की लोकप्रिय मेडिकल यूनिवर्सिटीज़
  9. जर्मनी से MBBS डिग्री इंडिया में वैलिड है या नहीं?
  10. जर्मनी से MBBS किसके लिए सही विकल्प है?
  11. जर्मनी से MBBS पूरा करने के बाद करियर स्कोप
    1. जर्मनी में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस
    2. भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस
    3. पीजी / विशेषज्ञता के विकल्प
  12. जर्मनी बनाम रूस से MBBS (Humanmedizin बनाम मेडिकल डिग्री)
  13. FAQs

क्या जर्मनी में MBBS होता है?

भारत में जिस स्तर की पढ़ाई को एमबीबीएस कहा जाता है, उसी स्तर की पढ़ाई जर्मनी में Humanmedizin (ह्यूमन मेडिसिन) के नाम से होती है। नाम अलग होने के कारण कई छात्रों को भ्रम हो जाता है, लेकिन डॉक्टर बनने की प्रक्रिया पूरी तरह मान्य और सरकारी नियमों के अनुसार होती है।

जर्मनी में चिकित्सा शिक्षा डिग्री के बजाय राज्य परीक्षा प्रणाली (स्टेट्सएक्जामेन) पर आधारित होती है। इस प्रणाली में छात्र को तीन चरणों में परीक्षाएँ देनी होती हैं। पहले चरण में शरीर रचना और शारीरिक क्रियाओं जैसे मूल विषय पढ़ाए जाते हैं। दूसरे चरण में रोगों और उनके इलाज से जुड़े विषय होते हैं। तीसरे चरण में व्यावहारिक प्रशिक्षण के बाद अंतिम परीक्षा होती है। इन सभी परीक्षाओं को पास करने के बाद छात्र को चिकित्सा अभ्यास की अनुमति दी जाती है।

यह समझना बहुत जरूरी है कि जर्मनी में डॉक्टर बनने के लिए डिग्री के नाम की नहीं, बल्कि राज्य द्वारा दी गई अनुमति की अहमियत होती है। इसलिए जर्मनी में भले ही एमबीबीएस शब्द का उपयोग न हो, लेकिन वहाँ की चिकित्सा पढ़ाई पूरी तरह भरोसेमंद और उच्च स्तर की मानी जाती है।

जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) क्यों करें?

अगर कोई छात्र विदेश जाकर डॉक्टर बनने की योजना बना रहा है और कम ट्यूशन फीस में अच्छी क्वालिटी की मेडिकल पढ़ाई चाहता है, तो जर्मनी एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। यहां Humanmedizin (ह्यूमन मेडिसिन) की पढ़ाई सरकारी नियमों और तय मेडिकल पढ़ाई के नियमों के अनुसार कराई जाती है।

  • सरकारी यूनिवर्सिटी और कम पढ़ाई खर्च: जर्मनी की ज़्यादातर मेडिकल यूनिवर्सिटी सरकार द्वारा चलाई जाती हैं। इसी वजह से यहां Humanmedizin की पढ़ाई का खर्च काफी कम होता है। कई यूनिवर्सिटी में सिर्फ सेमेस्टर फीस ली जाती है, जिसमें प्रशासनिक खर्च और छात्र सुविधाएं शामिल होती हैं। पढ़ाई इस तरह कराई जाती है कि छात्र विषय को समझकर सीखें, न कि केवल रटें।
  • दुनिया भर में मान्य मेडिकल पढ़ाई: जर्मनी से की गई मेडिकल पढ़ाई को कई देशों में मान्यता मिली हुई है। यहां की मेडिकल ट्रेनिंग को अनुशासन और क्वालिटी के लिए जाना जाता है। इसी कारण जर्मनी से पढ़ाई करने वाले छात्रों को आगे चलकर दूसरे देशों में पढ़ाई या डॉक्टर के रूप में काम करने के विकल्प मिल सकते हैं, हालांकि हर देश के अपने नियम होते हैं।
  • रिसर्च (शोध) और अस्पताल में प्रैक्टिकल अनुभव: जर्मनी मेडिकल रिसर्च (चिकित्सा शोध) और आधुनिक अस्पताल व्यवस्था के लिए जाना जाता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में मरीजों के साथ सीधे प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है। अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में छात्र बीमारी की पहचान, इलाज की प्रक्रिया और मरीजों की देखभाल करना सीखते हैं। आधुनिक मशीनों और प्रयोगशालाओं की मदद से मिलने वाला यह अनुभव उनके मेडिकल करियर के लिए बहुत उपयोगी होता है।

भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी से MBBS (Humanmedizin) करने के लिए एलिजिबिल्टी क्राइटेरिया

जर्मनी से MBBS (Humanmedizin) की पढ़ाई के लिए सभी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करना जरूरी है। 2026 में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए ये शर्तें यूनिवर्सिटी और प्रोग्राम के अनुसार अलग हो सकती हैं। भारतीय छात्रों को अपने चुने हुए मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रोग्राम में एडमिशन के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • 12वीं कक्षा की शैक्षणिक योग्यता (PCB अनिवार्य): भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी में मेडिकल पढ़ाई (Humanmedizin) के लिए 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय होना जरूरी है। प्रतियोगिता बहुत अधिक होने के कारण सामान्यतः 80–85% या उससे अधिक अंक सुरक्षित माने जाते हैं। कम अंक होने पर सीधे मेडिकल प्रोग्राम में चयन की संभावना काफी कम हो जाती है।
  • Studienkolleg की आवश्यकता (अधिकतर मामलों में): भारत का 12वीं सिस्टम जर्मनी के स्कूल सिस्टम के समकक्ष नहीं माना जाता। इसलिए अधिकांश भारतीय छात्रों को सीधे मेडिकल कोर्स में प्रवेश नहीं मिलता। ऐसे में उन्हें 1 वर्ष का Studienkolleg (M-Kurs) करना पड़ता है, जिसके बाद फाइनल असेसमेंट पास करना अनिवार्य होता है।
  • जर्मन भाषा योग्यता (सबसे महत्वपूर्ण शर्त): जर्मनी में MBBS पूरी तरह जर्मन भाषा में पढ़ाया जाता है। अधिकतर सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ C1 लेवल की जर्मन भाषा मांगती हैं। केवल B2 लेवल पर मेडिकल पढ़ाई व्यावहारिक रूप से कठिन मानी जाती है, खासकर क्लिनिकल फेज में।
  • NEET परीक्षा (भारत से संबंधित शर्त): जर्मनी में पढ़ाई के लिए NEET जरूरी नहीं है, लेकिन यदि छात्र भविष्य में भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करना चाहता है, तो NEET पास होना अनिवार्य माना जाता है। यह NMC की एग्जिट एलिजिबिलिटी से जुड़ा मामला है। NMC के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।
  • सीट अलॉटमेंट की वास्तविकता: जर्मनी में मेडिकल सीटें सीमित होती हैं और चयन प्रक्रिया सेंट्रलाइज़्ड होती है। योग्य होने के बावजूद सीट न मिलना संभव है, इसलिए एलिजिबिलिटी को “गारंटी” नहीं समझना चाहिए।

एडमिशन के लिए आवश्यक दस्तावेज

जर्मनी में एडमिशन के लिए नीचे वे दस्तावेज दिए गए हैं जो सामान्यतः जर्मनी में चिकित्सा की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण होते हैं:

शैक्षणिक प्रमाणपत्र
12वीं की अंकसूची और प्रमाण पत्रस्कूल लीविंग सर्टिफिकेट
यदि पहले कोई कोर्स किया हो तो उसके अंकपत्रट्रांसक्रिप्ट/मार्कशीट्स (यदि applicable हो)
यदि आवश्यक हो तो एक्विवैलेन्सी सर्टिफिकेट
भाषा प्रमाण
जर्मनी में चिकित्सा पढ़ने के लिए जर्मन भाषा का प्रमाण अनिवार्य होता है। अक्सर उच्च स्तर का जर्मन प्रमाणपत्र मांगा जाता है।
पासपोर्ट और आवेदन संबंधी दस्तावेज
मान्य पासपोर्टपासपोर्ट आकार के फोटो
मोटिवेशन लेटर / स्टेटमेंट ऑफ पर्पसरिकमेन्डेशन लेटर्स (यदि यूनिवर्सिटी मांगती हो)
प्रूफ ऑफ़ फंड्स / फाइनेंसियल सपोर्ट (जर्मनी में लिविंग कॉस्ट कवर करने के लिए)स्वास्थ्य बीमा का प्रमाण
APS सर्टिफिकेट

जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) के लिए जर्मन भाषा की आवश्यकता

जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) की पढ़ाई पूरी तरह जर्मन भाषा में होती है। यहां मेडिकल की कक्षाएं, परीक्षाएं, मरीजों से बातचीत और अस्पताल में ट्रेनिंग आदि सब कुछ जर्मन भाषा में ही किया जाता है। इसलिए भारतीय छात्रों के लिए जर्मन भाषा सीखना अनिवार्य शर्त मानी जाती है। भाषा की सही तैयारी न होने पर न तो यूनिवर्सिटी में पढ़ाई संभव होती है और न ही आगे चलकर मेडिकल प्रैक्टिस करना।

  • न्यूनतम भाषा स्तर (B2 / C1): जर्मनी की अधिकांश सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ ह्यूमन मेडिसिन के लिए सी1 लेवल की जर्मन भाषा की मांग करती हैं। कुछ यूनिवर्सिटी आवेदन के समय बी2 लेवल स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन प्रवेश से पहले सी1 सर्टिफिकेट जमा करना जरूरी होता है। सी1 लेवल यह सुनिश्चित करता है कि छात्र मेडिकल विषयों को गहराई से समझ सके, परीक्षाओं में सही उत्तर लिख सके और प्रोफेसरों व मरीजों से स्पष्ट संवाद कर सके।
  • मान्य जर्मन भाषा परीक्षाएं (उच्च स्तर): जर्मनी में एमबीबीएस के लिए वही जर्मन भाषा परीक्षाएं मान्य होती हैं जिन्हें सरकारी यूनिवर्सिटीज़ स्वीकार करती हैं। इनमें टेस्टडाफ, डीएसएच, गोएथे संस्थान का सी1 सर्टिफिकेट और टेल्क सी1 शामिल हैं। इन परीक्षाओं में पढ़ने, लिखने, सुनने और बोलने की क्षमता को अलग-अलग परखा जाता है। मेडिकल पढ़ाई के लिए सभी भागों में निर्धारित न्यूनतम स्तर प्राप्त करना आवश्यक होता है। हर यूनिवर्सिटी अपनी भाषा परीक्षा की शर्तें आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से बताती है।
  • क्लिनिकल ट्रेनिंग में मेडिकल जर्मन अनिवार्य: क्लिनिकल चरण और प्रैक्टिकल ईयर (PJ) के दौरान छात्रों को मरीजों से बात करनी होती है, मेडिकल रिपोर्ट समझनी होती है और डॉक्टरों की टीम के साथ काम करना होता है। इसके लिए मेडिकल जर्मन का मजबूत ज्ञान जरूरी होता है, वरना ट्रेनिंग प्रभावित हो सकती है।
  • भाषा सीखने में समय लगता है: अधिकांश भारतीय छात्रों को C-1 स्तर तक पहुँचने में लगभग 2–3 साल लगते हैं। इसलिए जर्मनी में MBBS की योजना बनाते समय भाषा को सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम मानना चाहिए।

जर्मनी से MBBS (Humanmedizin) का एडमिशन प्रोसेस (स्टेप-बाय-स्टेप)

जर्मनी में MBBS (ह्यूमन मेडिसिन) का एडमिशन प्रोसेस लंबा और चरणों में बंटा होता है। नीचे पूरा प्रोसेस आसान भाषा में स्टेप-बाय-स्टेप बताया गया है, ताकि छात्र इसे आसानी से समझ सकें।

  1. जर्मन भाषा की तैयारी
    1. जर्मनी में MBBS की पढ़ाई पूरी तरह जर्मन भाषा में होती है।
    2. शुरुआत में छात्र को कम से कम B2 लेवल तक जर्मन सीखनी होती है।
    3. ज़्यादातर सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी नामांकन से पहले C1 लेवल की मांग करती हैं।
    4. इस चरण में भाषा कोर्स करना, रोज़ाना अभ्यास और मान्य भाषा परीक्षा (जैसे टेस्टडाफ, डीएसएच, गोएथे) की तैयारी शामिल होती है।
    5. बिना पर्याप्त भाषा ज्ञान के न तो एडमिशन संभव होता है और न ही मेडिकल पढ़ाई आगे बढ़ पाती है।
  2. स्टूडियनकोलेग (Studienkolleg) में प्रवेश
    1. भारत से 12वीं पास छात्र आमतौर पर सीधे MBBS शुरू नहीं कर सकते।
    2. इसके लिए उन्हें Studienkolleg (M-Kurs) नाम का एक साल का तैयारी कोर्स करना पड़ता है।
    3. इसमें प्रवेश के लिए एंट्रेंस टेस्ट और जर्मन भाषा स्तर की जांच होती है।
    4. Studienkolleg पूरा करने के बाद छात्र को फेस्टश्टेलुंग्सप्रूफुंग (Final Exam) पास करनी होती है।
    5. इस परीक्षा के बाद ही मेडिकल यूनिवर्सिटी में आवेदन करने की पात्रता बनती है।
  3. यूनिवर्सिटी में आवेदन (uni-assist / Hochschulstart)
    1. Studienkolleg पास करने के बाद छात्र जर्मनी की सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में आवेदन करते हैं।
    2. ज़्यादातर यूनिवर्सिटी आवेदन के लिए uni-assist प्लेटफॉर्म का उपयोग करती हैं, जहां शैक्षणिक दस्तावेज और भाषा प्रमाणपत्र जमा किए जाते हैं।
    3. कुछ मेडिकल सीटों का आवंटन Hochschulstart सिस्टम के माध्यम से भी किया जाता है, क्योंकि मेडिकल कोर्स में सीटें सीमित होती हैं।
    4. समय पर सही दस्तावेज जमा करना इस चरण में बहुत जरूरी होता है।
  4. एडमिशन ऑफर और नामांकन (Enrollment)
    1. यदि यूनिवर्सिटी छात्र के प्रोफाइल से संतुष्ट होती है, तो एडमिशन ऑफर लेटर जारी किया जाता है।
    2. ऑफर लेटर में कोर्स, सेमेस्टर और नामांकन की शर्तें स्पष्ट लिखी होती हैं।
    3. छात्र को तय समय सीमा में ऑफर स्वीकार करना होता है और एनरोलमेंट प्रोसेस पूरा करना होता है।
    4. इसमें सेमेस्टर फीस जमा करना और यूनिवर्सिटी के नियमों का पालन शामिल होता है।
  5. जर्मनी का छात्र वीज़ा (Student Visa)
    1. एडमिशन कन्फर्म होने के बाद छात्र जर्मन स्टूडेंट वीज़ा के लिए आवेदन करता है।
    2. इसके लिए पासपोर्ट, एडमिशन लेटर, भाषा प्रमाणपत्र और ब्लॉक्ड अकाउंट का प्रमाण देना होता है।
    3. ब्लॉक्ड अकाउंट यह दिखाता है कि छात्र जर्मनी में रहने-खाने का खर्च उठा सकता है।
    4. वीज़ा इंटरव्यू के बाद अनुमति मिलने पर छात्र जर्मनी जाकर पढ़ाई शुरू कर सकता है।

जर्मनी में MBBS (Humanmedizin) कोर्स की अवधि और स्ट्रक्चर

जर्मनी में एमबीबीएस कोर्स को मेडिसिन का स्टेट प्रोग्राम माना जाता है, जिसकी कुल अवधि लगभग 6 वर्ष 3 महीने होती है। यह कोर्स चरणों में बंटा होता है, ताकि छात्र पहले सिद्धांत समझें, फिर रोगियों के साथ काम करें और अंत में पूरी तरह व्यावहारिक अनुभव हासिल करें। हर चरण के बाद राज्य स्तर की परीक्षा होती है, जो मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।

चरण (फेज)अवधिइस चरण में क्या पढ़ाया जाता है
प्री-क्लिनिकल चरण (Vorklinik)लगभग 2 वर्षमानव शरीर की मूल संरचना और कार्यप्रणाली पर फोकस किया जाता है। इसमें शरीर रचना विज्ञान (एनाटोमी), शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) और जैव रसायन (बायोकेमिस्ट्री) जैसे विषय शामिल होते हैं।
क्लिनिकल चरण (Klinik)लगभग 3 वर्षइस चरण में रोगों की पहचान और इलाज से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं, जैसे आंतरिक चिकित्सा, सर्जरी, बाल रोग, स्त्री रोग, मनोरोग आदि। साथ ही छात्रों को अस्पतालों में सीमित क्लिनिकल एक्सपोज़र भी मिलता है।
प्रैक्टिकल ईयर – PJ (Praktisches Jahr)1 वर्षयह पूर्णकालिक अस्पताल प्रशिक्षण का वर्ष होता है। इसे तीन भागों में बाँटा जाता है – आंतरिक चिकित्सा, सर्जरी और एक वैकल्पिक विषय। छात्र डॉक्टरों के साथ सीधे काम करते हैं।
स्टेट परीक्षा (State Examination)कोर्स के दौरान 3 बारपहली परीक्षा प्री-क्लिनिकल के बाद, दूसरी क्लिनिकल के दौरान और तीसरी प्रैक्टिकल ईयर के अंत में होती है। परीक्षाएँ लिखित, मौखिक और व्यावहारिक होती हैं।
कुल अवधिलगभग 6 वर्ष 3 महीनेयह अवधि केवल Humanmedizin कोर्स की है। इसमें भाषा सीखने या Studienkolleg का समय शामिल नहीं होता।

जर्मनी में MBBS की फीस और रहने का खर्च

यहाँ जर्मनी में MBBS की फीस और रहने-खाने का खर्च को स्पष्ट, आसान और फैक्ट-बेस्ड तरीके से अलग-अलग टेबल में दिया है। सभी आंकड़ें जर्मनी में मेडिकल स्टडी प्लान करने वाले छात्रों के लिए वास्तविक औसत अनुमान पर आधारित हैं।

पब्लिक यूनिवर्सिटीज़ की अनुमानित फीस (एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट पर आधारित)

खर्च का प्रकारफीस का विवरणअनुमानित खर्च
ट्यूशन फीसअधिकांश सरकारी यूनिवर्सिटीज़ में MBBS के लिए ट्यूशन फीस नहीं होती€0 प्रति सेमेस्टर (मूल)
सेमेस्टर कन्ट्रिब्यूशनएडमिनिस्ट्रेटिव फीस, स्टूडेंट सर्विसेज, पब्लिक ट्रांसपोर्ट पास आदिलगभग €150–€500 प्रति सेमेस्टर
कुछ राज्य शुल्क (Baden-Württemberg)यदि यूनिवर्सिटी उस राज्य में है तोलगभग €1,500 प्रति सेमेस्टर (नॉन-EU छात्रों के लिए)
कुल शैक्षणिक लागत/सालट्यूशन के अलावा सेमेस्टर फी€300 – €3,600/साल (लगभग)

नोट: सरकारी यूनिवर्सिटीज़ में MBBS की पढ़ाई को बहुत किफ़ायती माना जाता है क्योंकि यहाँ केवल एडमिन-कास्ट्स और सेमेस्टर फीस ही लगती हैं, न कि भारी ट्यूशन फीस।

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ – हाई-लेवल शुल्क

प्राइवेट मेडिकल यूनिवर्सिटीअनुमानित सालाना ट्यूशन फीस (लगभग)संक्षिप्त विवरण
प्राइवेट मेडिकल स्कूल्ज (जर्मनी)€10,000 – €30,000 या उससे अधिकफीस हर यूनिवर्सिटी और प्रोग्राम के हिसाब से बदल सकती है।
कुछ विशेष प्राइवेट संस्थान€20,000 – €40,000 या उससे अधिकमेडिकल के लिए प्राइवेट विकल्प महंगे होते हैं।

नोट- प्राइवेट मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में फीस पब्लिक यूनिवर्सिटी की तुलना में काफी अधिक होती है, और इसमें एडमिशन की प्रक्रिया और भाषा की शर्तें भी अलग-हो सकती हैं।

जर्मनी में रहने का खर्च

एक्सपेंस कैटेगरीये चीजें कवर होती हैं?अनुमानित आम खर्च (महीने अनुसार)
आवास (रेंट)छात्र हॉस्टल/शेयर्ड अपार्टमेंट/प्राइवेट फ्लैट€300 – €600
खाना और ग्रोसरीज़घर पर खाना, बाजार खर्च€150 – €300
हेल्थ इंश्योरेंसचिकित्सा बीमा (ऑल स्टूडेंट्स के लिए जरूरी)€110 – €150
ट्रांसपोर्ट और पर्सनल खर्चबस/ट्रेन (कभी-कभी सेमेस्टर पास शामिल), फ़ोन, इंटरनेट€50 – €150
कुल अनुमानित लिविंग खर्चमहीने मेंलगभग €700 – €1,200

नोट – बड़े शहर (जैसे Munich, Berlin) में खर्च थोड़ा ज्यादा होता है, जबकि छोटी यूनिवर्सिटी-शहरों में रहना सस्ता पड़ सकता है।

जर्मनी की लोकप्रिय मेडिकल यूनिवर्सिटीज़

जर्मनी में एमबीबीएस की पढ़ाई मुख्य रूप से सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में होती है। यहां शिक्षा की गुणवत्ता पूरे यूरोप में मानी जाती है और मेडिकल डिग्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होती है। यहाँ जर्मनी की कुछ प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ की जानकारी दी गई है, हालाँकि आप आवेदन करने से पहले यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट को जरूर विजिट करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –

यूनिवर्सिटी का नामशहरमुख्य विशेषता (Strength)अनुमानित फीस (प्रति सेमेस्टर)
Charité – Universitätsmedizin Berlinबर्लिनयूरोप का सबसे बड़ा यूनिवर्सिटी अस्पताल, क्लिनिकल एक्सपीरियंसलगभग €350 – €500
टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्युनिक (TUM)म्यूनिखमेडिकल टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग इंटीग्रेशनलगभग €300 – €500
लुडविग मक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी ऑफ म्युनिक (LMU)म्यूनिखरिसर्च-इंटेंसिव क्लिनिकल ट्रेनिंगलगभग €300 – €500
यूनिवर्सिटी ऑफ हैम्बर्गहैम्बर्गआधुनिक सुविधाएँ, अस्पताल संबंधलगभग €300 – €400
गोएथे यूनिवर्सिटी फ्रैंकफुर्टफ्रैंकफर्टमजबूत शोध और मेडिकल ट्रेनिंगलगभग €350 – €500
यूनिवर्सिटी ऑफ ट्युबिंगनट्यूबिंगनन्यूरोसाइंस और कैंसर रिसर्च में प्रसिद्धलगभग €300 – €450
RWTH आकिन यूनिवर्सिटीआचेनमेडिकल-इंजीनियरिंग को जोड़ने वाली शिक्षालगभग €350 – €500
यूनिवर्सिटी ऑफ बॉनबॉनमजबूत अकादमिक ढांचा और क्लिनिकल एक्सपोज़रलगभग €300 – €400
यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्ट्ज़बर्गवुर्ट्ज़बर्गआधुनिक क्लिनिकल ट्रेनिंग और शोधलगभग €300 – €450
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्राइबर्गफ्राइबर्गसेंटर ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और प्रशिक्षणलगभग €300 – €500

जर्मनी से MBBS डिग्री इंडिया में वैलिड है या नहीं?

जर्मनी से की गई MBBS डिग्री भारत में तभी वैध मानी जाती है, जब वह भारत के नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के अनुसार पूरी की गई हो। NMC यह देखता है कि छात्र ने मान्यता प्राप्त जर्मन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है, कोर्स की अवधि पूरी है और प्रशिक्षण सरकारी मानकों के बराबर है। जर्मनी की ज्यादातर सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य होती हैं, लेकिन एनएमसी प्रत्येक केस में शर्तों की जांच करता है।

भारत में प्रैक्टिस करने के लिए छात्र को अपनी विदेशी मेडिकल डिग्री की NMC से मान्यता करानी होती है। इसके बाद इंटर्नशिप और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। सीधे प्रैक्टिस की अनुमति नहीं मिलती।

NMC के नए नियमों के अनुसार, जर्मनी से एमबीबीएस करने के बाद छात्रों को भारत में NEXT परीक्षा पास करनी होती है। यह परीक्षा लाइसेंस और आगे की मेडिकल प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य है। बिना इसे पास किए भारत में डॉक्टर के रूप में काम करना संभव नहीं होता।

जर्मनी से MBBS किसके लिए सही विकल्प है?

यहाँ दिए गए निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से आप जान सकते हैं कि जर्मनी से MBBS किन छात्रों के लिए सही विकल्प हो सकता है –

  • शैक्षणिक रूप से मजबूत छात्र: जर्मनी में एमबीबीएस उन्हीं छात्रों के लिए सही माना जाता है, जिनकी 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान में मजबूत पकड़ होती है। यहां मेडिकल पढ़ाई का स्तर काफी ऊँचा होता है और पाठ्यक्रम गहराई से पढ़ाया जाता है। इसलिए रटकर पढ़ने के बजाय समझ के साथ पढ़ने वाले छात्र यहां बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
  • जर्मन भाषा सीखने की गंभीरता: जर्मनी में मेडिकल शिक्षा पूरी तरह जर्मन भाषा में होती है। यह विकल्प उन्हीं छात्रों के लिए सही है, जो दो से तीन साल तक जर्मन भाषा सीखने के लिए समय और मेहनत देने को तैयार हों। बिना भाषा के समर्पण के यहां एमबीबीएस करना व्यावहारिक नहीं होता।
  • लंबे समय की मेडिकल करियर योजना: जर्मनी से एमबीबीएस उन छात्रों के लिए बेहतर है, जो भविष्य में जर्मनी या यूरोप में ही डॉक्टर के रूप में काम करना चाहते हैं। यहां की डिग्री यूरोपीय देशों में मान्य होती है, लेकिन भारत में प्रैक्टिस के लिए अलग परीक्षा पास करनी होती है।
  • रीयलिस्टिक एक्सपेक्टेशंस: जर्मनी में एमबीबीएस सस्ता जरूर है, लेकिन आसान नहीं। यहाँ प्रवेश प्रक्रिया लंबी है, पढ़ाई कठिन है और समय भी अधिक लग सकता है। जो छात्र धैर्य, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आते हैं, उनके लिए यह विकल्प सही साबित होता है।

जर्मनी से MBBS पूरा करने के बाद करियर स्कोप

जर्मनी से MBBS (Humanmedizin) पूरा करने के बाद भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी और भारत दोनों में करियर के विकल्प मौजूद होते हैं। हालांकि हर देश में डॉक्टर के रूप में काम करने की प्रक्रिया अलग होती है, जिसे समझना जरूरी है।

जर्मनी में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस

MBBS पूरा करने के बाद छात्र जर्मनी में डॉक्टर के रूप में काम कर सकते हैं, बशर्ते वे आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी करें। इसके लिए एप्रोबेशन (स्थायी मेडिकल लाइसेंस) के लिए आवेदन करना होता है। आमतौर पर C1 लेवल की जर्मन भाषा और कुछ राज्यों में मेडिकल जर्मन की अलग परीक्षा पास करना जरूरी होता है। 

लाइसेंस मिलने के बाद छात्र असिस्टेंट डॉक्टर के रूप में काम शुरू कर सकते हैं। जर्मनी में डॉक्टरों की मांग बनी रहती है, इसलिए योग्य अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों के लिए नौकरी के अवसर उपलब्ध होते हैं। काम करते हुए आगे विशेषज्ञता (स्पेशलाइजेशन) की पढ़ाई भी की जा सकती है।

भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस

जर्मनी से MBBS करने के बाद भारत में प्रैक्टिस करना संभव है, लेकिन इसके लिए तय प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। भारत में प्रैक्टिस के लिए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (NEXT) पास करना अनिवार्य है। परीक्षा पास करने के बाद संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराया जाता है, जिसके बाद छात्र सरकारी या निजी अस्पतालों में काम कर सकते हैं। जर्मनी की मजबूत मेडिकल ट्रेनिंग के कारण कई छात्रों को क्लिनिकल समझ में फायदा मिलता है।

पीजी / विशेषज्ञता के विकल्प

MBBS के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कई विकल्प खुले रहते हैं। छात्र जर्मनी में ही विभिन्न मेडिकल विषयों में विशेषज्ञता की पढ़ाई कर सकते हैं, जहां काम के साथ वेतन भी मिलता है। इसके अलावा यूरोप के अन्य देशों में भी विशेषज्ञता के अवसर तलाशे जा सकते हैं। चाहें तो भारत लौटकर भी पीजी प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से विशेषज्ञता की पढ़ाई की जा सकती है।

जर्मनी बनाम रूस से MBBS (Humanmedizin बनाम मेडिकल डिग्री)

यहाँ जर्मनी बनाम रूस से MBBS (Humanmedizin vs Medical Degree) के अंतर को नीचे टेबल में दिया गया है –

तुलना का आधारजर्मनी से MBBS (Humanmedizin)रूस से MBBS
कोर्स का आधिकारिक नामHumanmedizin (State Examination)MD / MBBS एक्विवैलेन्ट
पढ़ाई की भाषापूरी तरह जर्मन भाषाज़्यादातर अंग्रेज़ी (कुछ क्लिनिकल रूसी)
कुल अवधिलगभग 6.25 वर्ष (Studienkolleg व भाषा तैयारी अलग)6 वर्ष
कुल तैयारी समय (भारत से)7–9 वर्ष (भाषा + तैयारी + पढ़ाई)6-7 वर्ष
एडमिशन सिस्टमसेंट्रलाइज्ड सीट एलोकेशन, बहुत सीमित सीटेंयूनिवर्सिटी-लेवल एडमिशन, सीटें अधिक
प्रतियोगिता स्तरबहुत अधिक (हाई अकादमिक + लैंग्वेज फ़िल्टर)मध्यम (तुलनात्मक रूप से आसान एंट्री)
ट्यूशन फीससरकारी यूनिवर्सिटी में लगभग शून्यसालाना INR 3 – 6 लाख (औसत)
रहने का खर्च€700-€1,200 / माह (ब्लॉक्ड अकाउंट आवश्यक)INR 15,000 – INR 25,000 / माह (शहर पर निर्भर)
भाषा सीखने की चुनौतीबहुत कठिन, मेडिकल जर्मन अनिवार्यकम, शुरुआत में अंग्रेज़ी पर्याप्त
ड्रॉपआउट / फेल होने का जोखिमउच्च (भाषा + स्टेट एग्जाम)कम से मध्यम
पार्ट-टाइम कामसीमित, मेडिकल इनकम संभव नहींसीमित, सर्वाइवल सपोर्ट तक
भारत में NMC वैधतावैध, लेकिन NEXT + इंटर्नशिप एलाइनमेंट जरूरीवैध, NEXT अनिवार्य
भारत वापसी पर FMGE/NEXTNEXT अनिवार्यNEXT अनिवार्य
किसके लिए बेहतरअकादमिक रूप से बहुत मजबूत, जर्मनी में करियर चाहने वालेभारत वापसी प्लान वाले, लिमिटेड बजट छात्र

FAQs

क्या जर्मनी में MBBS अंग्रेज़ी भाषा में होता है?

नहीं, जर्मनी में MBBS (ह्यूमन मेडिसिन) की पढ़ाई अंग्रेज़ी में नहीं होती। सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में पूरा कोर्स जर्मन भाषा में पढ़ाया जाता है। पढ़ाई, लिखित-मौखिक परीक्षा, अस्पताल में ट्रेनिंग और मरीजों से बातचीत सब कुछ जर्मन भाषा में ही होता है। इसलिए जर्मनी में MBBS करने के लिए जर्मन भाषा का उच्च स्तर (आमतौर पर सी-वन लेवल) जरूरी होता है।

क्या 12वीं के बाद सीधे जर्मनी में MBBS संभव है?

आमतौर पर नहीं,  भारत से 12वीं पास करने के बाद छात्रों को सीधे जर्मनी में MBBS (ह्यूमन मेडिसिन) में प्रवेश नहीं मिलता। अधिकतर भारतीय छात्रों को पहले स्टूडियनकोलेग (एक साल का तैयारी कोर्स) करना पड़ता है। स्टूडियनकोलेग और उसकी अंतिम परीक्षा पास करने के बाद ही मेडिकल यूनिवर्सिटी में आवेदन की पात्रता बनती है।

क्या जर्मनी में MBBS के लिए नीट आवश्यक है?

जर्मनी में एडमिशन के लिए नहीं, जर्मनी की मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ MBBS (ह्यूमन मेडिसिन) में प्रवेश के लिए नीट नहीं मांगतीं। हालांकि, अगर कोई छात्र भविष्य में भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करना चाहता है, तो उसके लिए नीट पास होना जरूरी माना जाता है। बिना नीट पास किए की गई मेडिकल पढ़ाई भारत में मान्यता और आगे की प्रक्रिया के लिए समस्या पैदा कर सकती है।

क्या जर्मनी MBBS भारतीय छात्रों के लिए वास्तविक विकल्प है?

हाँ, जर्मनी MBBS (ह्यूमन मेडिसिन) के लिए भारतीय छात्रों के लिए एक वास्तविक विकल्प है, क्योंकि यहां सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई का खर्च बहुत कम होता है। हालांकि, जर्मन भाषा का उच्च स्तर, सीमित सीटें और लंबी तैयारी प्रक्रिया इस विकल्प को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। जो छात्र भाषा सीखने और लंबे समय की योजना के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं, उनके लिए जर्मनी एक गुणवत्तापूर्ण विकल्प हो सकता है।

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हमें उम्मीद है कि इस लेख से आपको जर्मनी में मेडिकल पढ़ाई के पाथवे, योग्यता और प्रक्रिया को लेकर एक स्पष्ट समझ मिली होगी। जर्मनी से MBBS करने का फैसला लेने से पहले यह ज़रूरी है कि आप जिस यूनिवर्सिटी में आवेदन करने की सोच रहे हैं, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर कोर्स से जुड़ी शर्तें, फीस और मान्यता की जानकारी ज़रूर जांच लें। इसके साथ ही, भारत में आगे की वैधता को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की लेटेस्ट गाइडलाइन्स भी देखना उपयोगी रहेगा।

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