भारत में केमिकल इंजीनियर कैसे बनें?

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केमिकल इंजीनियरिंग सेक्‍टर को करियर की दृष्टि से एक अच्छा फील्ड माना जाता है। यह क्षेत्र इनोवेशन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और औद्योगिक समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभाता है। आप 12वीं के बाद संबंधित कोर्स कर केमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। हालांकि चयनित कोर्स में एडमिशन के लिए आपको संबंधित प्रवेश परीक्षा को पास करना अनिवार्य होगा।

केमिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अक्सर केमिकल मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, रिन्यूएबल्स, फर्टिलाइजर, फार्मास्यूटिकल्स और रिसर्च एवं डेवलपमेंट जैसी फील्ड में प्रोसेस इंजीनियर, बायोप्रोसेस इंजीनियर, नैनोटेक्नोलॉजी इंजीनियर या आर एंड डी स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करते हैं।

UPL लिमिटेड, KCFL, ONGC, इंडियन ऑयल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा केमिकल्स और कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों के अलावा कई विदेशी कंपनियां भी उन्हें एक्टिव रूप से हायर करती हैं। अगर आप केमिकल इंजीनियर बनने की प्रक्रिया के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख पूरा पढ़ें। 

केमिकल इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारियां 

केमिकल इंजीनियर द्वारा मुख्य रूप से केमिकल प्रोडक्ट्स के निर्माण के साथ-साथ केमिकल प्लांट और उपकरणों की डिजाइनिंग भी की जाती है। इनके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  • प्रोडक्ट डेवलपमेंट: केमिकल इंजीनियर नई सामग्री, प्रोडक्ट्स और तकनीकों को बनाने में शामिल होते हैं। इसमें उन्नत पॉलिमर और दवाएं डिजाइन करने से लेकर स्वच्छ ऊर्जा स्रोत और टिकाऊ सामग्री विकसित करने तक सब कुछ शामिल हो सकता है।
  • प्रोसेस डिजाइन: वे खाद्य उत्पादन, पेट्रोकेमिकल्स और पर्यावरण प्रबंधन जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं को डिजाइन करने और उनमें सुधार करने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। वह कोशिश करते हैं कि काम कम खर्च में, सुरक्षित तरीके से और कम प्रदूषण के साथ हो।
  • प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन: वे रियल-टाइम डेटा का विश्लेषण करके तापमान, प्रेशर और फ्लो रेट को ऑप्टिमाइज करते हैं, जिससे उत्पादन लागत घटे और यील्ड बढ़े।
  • रेगुलेटरी और एनवायरनमेंटल कंप्लायंस: प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा करने के लिए सिस्टम डिजाइन और मॉनिटरिंग करना, ताकि कंपनी कानूनी नियमों का पालन करे।
  • मास और एनर्जी बैलेंस कैलकुलेशन: हर यूनिट ऑपरेशन के लिए इनपुट-आउटपुट स्ट्रीम्स का सटीक बैलेंस निकालना ताकि रॉ-मैटेरियल की बर्बादी और एनर्जी लॉस कम हो।
  • क्वॉलिटी कंट्रोल: वे क्वॉलिटी कंट्रोल उपायों को लागू करके और प्रोडक्शन डेटा का विश्लेषण करके प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा उनका कार्य समस्याओं को हल करना, प्रोडक्ट्स की क्वॉलिटी को एक जैसा बनाए रखना व सुधारों की सिफ़ारिश करना है।
  • रिसर्च और इनोवेशन: केमिकल इंजीनियर नई प्रक्रियाओं, सामग्री और तकनीकों की खोज के लिए रिसर्च करते हैं। वे वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अन्य इंजीनियरों के साथ मिलकर इनोवेशन की सीमाओं को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।
  • टीमवर्क: केमिकल इंजीनियर अक्सर विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स जैसे केमिस्ट्स, मैकेनिकल इंजीनियरों और बिजनेस एग्जीक्यूटिव के साथ मिलकर काम करते हैं, ताकि प्रोजेक्ट्स का सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। 

केमिकल इंजीनियर बनने के लिए योग्यता 

केमिकल इंजीनियर बनने के लिए आपको कुछ आवश्यक योग्यताओं को पूरा करना होगा, जैसे:

  • शैक्षणिक योग्यता: आपने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं या समकक्ष परीक्षा साइंस स्ट्रीम से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) विषय के साथ पास की हो। इसके बाद ही आप डिप्लोमा या बीटेक कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। एमटेक के लिए IITs और NITs में सामान्य वर्ग हेतु BTech में न्यूनतम 60% अंक (SC/ST/PwD के लिए 55%) अनिवार्य हैं। कुछ निजी संस्थानों में यह सीमा 55% हो सकती है — एडमिशन से पहले संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य जांचें।
  • न्यूनतम अंक: IIT और NIT में BTech एडमिशन के लिए JEE Mains/Advanced में रैंक के साथ-साथ 12वीं में सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 75% अंक (SC/ST के लिए 65%) या अपने बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में होना अनिवार्य है। निजी संस्थानों में यह सीमा अलग हो सकती है और आरक्षित वर्ग को न्यूनतम अंकों में छूट मिल सकती है।
  • आयु सीमा: सामान्यतः इन चयनित कोर्सेज के लिए कोई न्यूनतम या अधिकतम आयु सीमा नहीं होती।
  • प्रवेश प्रक्रिया: भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में BTech और MTech कोर्स के लिए राष्ट्रीय, राज्य और विश्वविद्यालय स्तरीय प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। BTech के लिए JEE Mains, JEE Advanced, BITSAT, VITEEE, SRMJEEE, MHT CET, WBJEE और KCET प्रमुख परीक्षाएं हैं। MTech के लिए GATE स्कोर अनिवार्य है जिसके आधार पर CCMT काउंसलिंग द्वारा IITs और NITs में सीट आवंटित होती है। हालांकि कुछ संस्थानों में मेरिट बेस्ड एडमिशन भी दिया जाता है। 

नोट: चयनित संस्थान में अप्लाई करने से पहले उसकी ऑफिशियल वेबसाइट से एडमिशन क्राइटेरिया की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। 

केमिकल इंजीनियर कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

भारत में केमिकल इंजीनियर बनने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है, जिसे सफलतापूर्वक पूरा करने पर यह पद प्राप्त किया जा सकता है। केमिकल इंजीनियर बनने के लिए कुछ प्रमुख स्टेप्स इस प्रकार हैं:-

स्टेप 1: 12वीं साइंस स्ट्रीम से पास करें

सबसे पहले आपको भारत के किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं कक्षा साइंस स्ट्रीम से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) विषय के साथ पास करनी होगी। IIT और NIT जैसे सरकारी संस्थानों में BTech एडमिशन के लिए 12वीं में सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 75% अंक (SC/ST के लिए 65%) या अपने बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में होना अनिवार्य है। इसके बाद आप ‘बीटेक इन केमिकल इंजीनियरिंग’, ‘बीटेक इन पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग’ या ‘बीटेक इन बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग’ जैसे कोर्सेज के लिए अप्लाई कर सकते हैं। यदि आप 4 वर्षीय बीटेक कोर्स नहीं करना चाहते तो 3 वर्षीय ‘डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग’ कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

केमिकल इंजीनियरिंग के लिए भारत के कुछ प्रमुख संस्थान नीचे दिए गए हैं:

संस्थानप्रकारप्रवेश परीक्षा
IIT बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, खड़गपुरसरकारी (IIT)JEE Advanced
NIT त्रिची, वारंगल, कालीकटसरकारी (NIT)JEE Mains
BITS पिलानी, गोवा, हैदराबादनिजी (डीम्ड)BITSAT
ICT मुंबई (पूर्व UDCT)सरकारीMHT CET / JEE
VIT वेल्लोरनिजीVITEEE
SRM इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीनिजीSRMJEEE

एडमिशन से पहले संस्थान की AICTE मान्यता अवश्य जांचें।

स्टेप 2: प्रवेश परीक्षा की तैयारी करें

भारत के अधिकांश संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में चयनित बीटेक कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा द्वारा ही एडमिशन मिलता है। आप संबंधित प्रवेश परीक्षा जैसे जेईई मेंस, जेईई एडवांस्ड, BITSAT, VITEEE, SRMJEEE, MHT CET, WBJEE और KCET आदि के माध्यम से किसी एक का चयन कर परीक्षा दे सकते हैं। यह सभी परीक्षाएं प्रतिवर्ष अलग-अलग समय पर आयोजित की जाती है।

स्टेप 3: बीटेक कंप्लीट करें

बीटेक केमिकल इंजीनियरिंग एक 4 वर्षीय कोर्स है जिसे 8 सेमेस्टर में पूरा किया जाता है। यदि आप बीटेक के बाद केमिकल इंजीनियरिंग में एडवांस्ड स्टडी करना चाहते हैं तो ‘एमटेक इन केमिकल इंजीनियरिंग’ या ‘एमटेक इन पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग’ कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। एमटेक में एडमिशन के लिए GATE स्कोर अनिवार्य है, जिसके आधार पर CCMT काउंसलिंग द्वारा IITs और NITs में सीट आवंटित होती है। IITs में एमटेक के लिए सामान्य वर्ग हेतु बीटेक में न्यूनतम 60% अंक (SC/ST के लिए 55%) आवश्यक हैं।

स्टेप 4: कार्यानुभव प्राप्त करें

आप संबंधित कोर्स के फाइनल ईयर या कोर्स के बाद इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट बेस्ड जॉब के माध्यम से वर्क एक्सपीरियंस प्राप्त कर सकते हैं। इससे आपकी प्रोफाइल मजबूत होगी और आपको अपने क्षेत्र में नौकरी मिलने में आसानी होगी।

इसके अलावा भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में फाइनल ईयर के कैंडिडेट्स के लिए हर वर्ष विभिन्न सेक्टर्स से कंपनियां प्लेसमेंट सेल द्वारा रिक्रूटमेंट करती हैं। इसमें अकादमिक परफॉर्मेंस, प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, इंटरव्यू या ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से आपका मूल्यांकन किया जाता है। इसमें सफल होने के बाद आपको कंपनी द्वारा सीधे रिक्रूट कर लिया जाता है।

स्टेप 5: जॉब के लिए अप्लाई करें

आप कोर्स कंप्लीट करने के बाद विभिन्न केमिकल इंडस्ट्रीज में अपनी योग्यता और एक्सपीरियंस के अनुसार अप्लाई कर सकते हैं। भारत में बहुत सी कंपनियां जैसे भारत पेट्रोलियम, UPL लिमिटेड, एस्सार ग्रुप, इंडियन ऑयल, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, KCFL, रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, ONGC, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा केमिकल्स और कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड आदि समय-समय पर रिक्रूटमेंट करती हैं।

इनमें बहुत सी कंपनियां विभागीय परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से नियुक्ति करती हैं। इसमें सफल होने के बाद संबंधित कंपनी द्वारा अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाता है। फिर आप केमिकल इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू कर सकते हैं।

PSU में केमिकल इंजीनियर कैसे बनें?

भारत में ONGC, IOCL (Indian Oil), और HPCL जैसे सार्वजनिक उपक्रम (PSU) केमिकल इंजीनियरों के लिए सबसे प्रतिष्ठित और स्थिर करियर विकल्प माने जाते हैं। इनमें भर्ती मुख्यतः दो माध्यमों से होती है:

  • GATE स्कोर के आधार पर: अधिकांश PSU जैसे ONGC, IOCL, HPCL, BPCL और GAIL अपनी भर्ती के लिए GATE (Graduate Aptitude Test in Engineering) स्कोर को प्राथमिकता देते हैं। GATE में केमिकल इंजीनियरिंग (CH) पेपर देकर अच्छा स्कोर लाना PSU नौकरी की पहली शर्त है।
  • कंपनी की अपनी परीक्षा: कुछ PSU जैसे ONGC अपनी अलग भर्ती परीक्षा (ONGC GT) भी आयोजित करते हैं जिसमें तकनीकी और सामान्य ज्ञान दोनों शामिल होते हैं।

केमिकल इंजीनियर क्यों बनें? भारत में भविष्य का स्कोप

केमिकल इंजीनियरिंग को अक्सर सिर्फ फैक्ट्री और केमिकल प्लांट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आज यह फील्ड ऊर्जा, दवाइयां और इलेक्ट्रिक वाहन तीनों उद्योगों में एक साथ काम आ रही है और तीनों में भारत बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।

ग्रीन हाइड्रोजन

केंद्र सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक सालाना 5 MMT ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ₹19,744 करोड़ का बजट तय किया गया है। हाइड्रोजन बनाने के लिए जो इलेक्ट्रोलाइज़र और स्टोरेज सिस्टम चाहिए, उन्हें डिज़ाइन और ऑपरेट करने का काम केमिकल इंजीनियर ही करते हैं। NTPC और Reliance जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में पहले से प्रोजेक्ट शुरू कर चुकी हैं।

EV बैटरी

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लगने वाली लिथियम-आयन बैटरी के इलेक्ट्रोलाइट और कैथोड मैटेरियल की मैन्युफैक्चरिंग केमिकल इंजीनियरिंग का ही काम है। जैसे-जैसे देश में EV की मांग बढ़ रही है, Tata Chemicals और Amara Raja जैसी कंपनियों में इस प्रोफाइल पर भर्तियां भी बढ़ रही हैं।

फार्मा सेक्टर

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उत्पादक देश है और जेनेरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में करीब 20% हिस्सेदारी रखता है। दवाओं में जो API यानी Active Pharmaceutical Ingredients जाती हैं, उनका उत्पादन पूरी तरह केमिकल प्रोसेसिंग पर निर्भर है। Sun Pharma, Dr. Reddy’s और Cipla जैसी बड़ी कंपनियां हर साल केमिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को बड़ी संख्या में हायर करती हैं।

जॉब प्रोफाइल और सैलरी

चयनित केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स कंप्लीट करने के बाद सैलरी आपके पद, एक्सपीरियंस, सरकारी तथा प्राइवेट सेक्टर और शहर के अनुसार भिन्न हो सकती है। यहां कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल के साथ सैलरी रेंज AmbitionBox पर उपलब्ध डेटा के अनुसार नीचे दी गई है:

जॉब प्रोफाइलअनुमानित औसत वार्षिक सैलरी (INR)
प्रोसेस इंजीनियर6.2 लाख – 6.9 लाख
एनवायरनमेंट  इंजीनियर4.9 लाख – 5.4 लाख
बायोप्रोसेस इंजीनियर4.1 लाख – 5.1 लाख
मटेरियल इंजीनियर6.1 लाख – 6.7 लाख
एनर्जी इंजीनियर4.9 लाख – 5.8 लाख
पेट्रोलियम इंजीनियर8.9 लाख – 11 लाख
फार्मास्युटिकल इंजीनियर4.3 लाख – 4.7 लाख
प्रोसेस सेफ्टी इंजीनियर 7.1 लाख – 7.9 लाख
प्रोसेस कंट्रोल इंजीनियर8.8 लाख – 9.7 लाख
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट इंजीनियर4.3 लाख – 4.8 लाख 

FAQs 

केमिकल इंजीनियर बनने के लिए क्या करना चाहिए?

केमिकल इंजीनियर बनने के लिए आपको मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बीटेक या बीई इन केमिकल इंजीनियरिंग पूरी करना आवश्यक है। 

12वीं के बाद केमिकल इंजीनियर कैसे बनें?

12वीं के बाद केमिकल इंजीनियर बनने के लिए आप PCM विषय के साथ साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करके JEE मेंस, JEE एडवांस्ड या राज्य स्तर की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफल होकर AICTE मान्यता प्राप्त बीटेक या बीई इन केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। 

केमिकल इंजीनियरिंग कितने साल का कोर्स है?

केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक या बीई कोर्स आमतौर पर 4 वर्ष का होता है, जिसे 8 सेमेस्टर में विभाजित किया जाता है। 

केमिकल इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए शीर्ष रिक्रूटर्स और जॉब प्रोफाइल क्या हैं?

केमिकल इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए शीर्ष रिक्रूटर्स रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल, टाटा केमिकल्स, BASF, KCFL, ONGC व Shell आदि हैं। वहीं प्रमुख जॉब प्रोफाइल्स में प्रोसेस इंजीनियर, R&D इंजीनियर, प्रोडक्शन व ऑपरेशंस इंजीनियर और प्रोसेस सेफ्टी इंजीनियर हैं। 

केमिकल इंजीनियरिंग में बेहतर नौकरी के लिए अतिरिक्त सर्टिफ़िकेशन जरूरी हैं?

केमिकल इंजीनियरिंग में बेहतर नौकरी के लिए सर्टिफ़िकेशन अनिवार्य नहीं है, लेकिन इंडस्ट्री मान्यता प्राप्त सर्टिफ़िकेशन आपके स्किल्स और करियर ऑपर्च्युनिटीज को बढ़ा सकते हैं।

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