ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कैसे करें: भारतीय छात्रों की स्टेप-वाइज गाइड

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Australia se MBBS Kaise Kare

ऑस्ट्रेलिया में आज के समय में पारंपरिक MBBS काफ़ी सीमित हो चुका है और ज़्यादातर मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन (MD) प्रोग्राम ऑफर करती हैं। इसी वजह से कई छात्र यह समझना चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कैसे करें और क्या यह पाथवे उनके लिए सही है। चूंकि यह कोर्स आमतौर पर ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है, इसलिए 12वीं के तुरंत बाद मेडिकल एडमिशन मिलना आसान नहीं होता। साथ ही, भारतीय छात्रों के लिए NEET और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियम बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आगे चलकर भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस की अनुमति मिलती है।

इसी कारण ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल पढ़ाई का फैसला केवल विदेश में पढ़ने के आकर्षण पर नहीं, बल्कि सही जानकारी और वास्तविक पाथवे को समझकर लेना ज़रूरी होता है। इस लेख में 12वीं और ग्रेजुएशन के बाद उपलब्ध मेडिकल विकल्पों, ऑस्ट्रेलिया की डिग्री की भारत में वैधता और कुल खर्च से जुड़े अहम पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाया गया है, ताकि छात्र लॉन्ग-टर्म प्लानिंग के साथ सोच-समझकर सही निर्णय ले सकें।

This Blog Includes:
  1. ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कोर्स का ओवरव्यू
  2. ऑस्ट्रेलिया से एमबीबीएस (एमडी) कोर्स क्यों करें?
  3. ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली
  4. ऑस्ट्रेलिया से एमबीबीएस करने के लिए आवश्यक योग्यता
  5. ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
    1. स्टेप 1: पहले यह समझें कि ऑस्ट्रेलिया में MBBS नहीं, MD होता है
    2. स्टेप 2: 12वीं के बाद ग्रेजुएशन की योजना बनाएं
    3. स्टेप 3: प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी समय पर शुरू करें
    4. स्टेप 4: AMC और भविष्य की लाइसेंसिंग स्थिति पहले समझें
    5. स्टेप 5: सही यूनिवर्सिटी का चयन सोच-समझकर करें
    6. स्टेप 6: आवेदन के लिए डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें
    7. स्टेप 7: इंटरव्यू और सेलेक्शन प्रोसेस के लिए तैयार रहें
    8. स्टेप 8: छात्र वीज़ा और फाइनेंशियल प्लानिंग
    9. स्टेप 9: पढ़ाई पूरी होने के बाद आगे का रास्ता पहले से जान लें
  6. ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख मेडिकल यूनिवर्सिटीज
  7. ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) करने की कुल लागत
    1. कुल प्रोग्राम लागत (पूरे कोर्स का अनुमान)
    2. सालाना औसत खर्च (समझने के लिए अनुमान)
  8. ऑस्ट्रेलिया में MD के बाद करियर विकल्प
  9. ऑस्ट्रेलिया बनाम अन्य देश
  10. ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) चुनते समय भारतीय छात्रों से होने वाली कॉमन गलतियाँ
  11. अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए इंटर्नशिप और रेजीडेंसी की वास्तविक स्थिति
  12. ऑस्ट्रेलिया से MD करने के बाद भारत लौटने का रास्ता (FMGE / NEXT की स्पष्ट जानकारी)
  13. FAQs 

ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कोर्स का ओवरव्यू

यहाँ ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कोर्स का ओवरव्यू दिया गया है, जिससे आप इस कोर्स के बारे में आसानी से जान सकते हैं –

बिंदुस्पष्ट और सही जानकारी
कोर्स का प्रकारमेडिकल डिग्री (Doctor of Medicine – MD), जो आमतौर पर ग्रेजुएशन के बाद की जाती है
कुल अवधिMD: लगभग 4 वर्ष, इंटर्नशिप: अलग से आवेदन और चयन प्रक्रिया (स्टेट बेस्ड एलोकेशन) के माध्यम से
प्रवेश योग्यतापहले किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री (जैसे बायोमेडिकल साइंस / साइंस) और मजबूत अकादमिक रिकॉर्ड
प्रवेश परीक्षाएँज़्यादातर यूनिवर्सिटी में GAMSAT, कुछ सीमित मामलों में UCAT
NEET की भूमिकाऑस्ट्रेलिया में एडमिशन के लिए नहीं, लेकिन भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य
मान्यताकोर्स ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल (AMC) से मान्यता प्राप्त होते हैं
ट्यूशन फीसलगभग AUD 70,000–85,000 प्रति वर्ष (यूनिवर्सिटी के अनुसार अलग-अलग)
रहने का खर्च (Living Cost)लगभग AUD 25,000–30,000 प्रति वर्ष (शहर और लाइफस्टाइल पर निर्भर)
पढ़ाई का माध्यमपूरी पढ़ाई अंग्रेज़ी भाषा में होती है
भारत में वैधताNMC के नियम पूरे करने पर भारत में मेडिकल प्रैक्टिस संभव
सीटों की उपलब्धताअंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सीटें सीमित, प्रतियोगिता काफ़ी अधिक

ऑस्ट्रेलिया से एमबीबीएस (एमडी) कोर्स क्यों करें?

ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल पढ़ाई को लेकर बहुत से स्टूडेंट्स के मन में सवाल होते हैं कि यह ऑप्शन इतना महंगा और लंबा होने के बावजूद क्यों चुना जाता है। इसकी वजह हर स्टूडेंट के लिए अलग हो सकती है, लेकिन कुछ प्रैक्टिकल बातें हैं, जिनकी वजह से कई लोग इस रास्ते पर सीरियसली सोचते हैं:

  • मेडिकल पढ़ाई का सिस्टम काफ़ी स्ट्रक्चर्ड होता है: ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल कोर्स एक तय सिस्टम के तहत चलते हैं। यहाँ पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहती। शुरू से ही क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाती है, जहाँ स्टूडेंट्स को मरीजों से जुड़ा रियल एक्सपीरियंस मिलता है। इससे पढ़ाई ज़्यादा प्रैक्टिकल लगती है।
  • क्लास से ज़्यादा फोकस हॉस्पिटल ट्रेनिंग पर रहता है: मेडिकल स्टूडेंट्स को पढ़ाई के दौरान हॉस्पिटल्स में काम करने का मौका मिलता है। बीमारियों को सिर्फ थ्योरी में नहीं, बल्कि असली केस के ज़रिए समझाया जाता है। इससे डिसीज़न मेकिंग और पेशेंट हैंडलिंग जैसी स्किल्स धीरे-धीरे डेवलप होती हैं।
  • रिसर्च और लॉजिकल सोच को भी अहम माना जाता है: यहाँ मेडिकल पढ़ाई का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं होता। स्टूडेंट्स को यह सिखाया जाता है कि किसी मेडिकल प्रॉब्लम को कैसे समझें और उसका सही हल कैसे सोचें। आगे चलकर स्पेशलाइजेशन या एकेडमिक फील्ड में जाने वालों के लिए यह मददगार रहता है।
  • डिग्री इंटरनेशनल लेवल पर रिकॉग्नाइज़्ड होती है: ऑस्ट्रेलिया की मेडिकल डिग्री कई देशों में मानी जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि हर जगह सीधे प्रैक्टिस मिल जाती है, लेकिन दूसरे देशों के मेडिकल एग्ज़ाम्स और करियर ऑप्शन्स के रास्ते खुले रहते हैं।
  • स्टूडेंट फ्रेंडली एनवायरनमेंट मिलता है: ऑस्ट्रेलिया को इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए सेफ देशों में गिना जाता है। यूनिवर्सिटीज़ में स्टडी सपोर्ट, मेंटल हेल्थ हेल्प और स्टूडेंट वेलफेयर से जुड़ी सुविधाएँ होती हैं, जो मेडिकल जैसे टफ कोर्स में काफ़ी काम आती हैं।
  • एडवांस हेल्थकेयर सिस्टम को पास से देखने का मौका मिलता है: यहाँ का हेल्थकेयर सिस्टम पेशेंट सेफ्टी और एथिकल ट्रीटमेंट पर फोकस करता है। मेडिकल स्टूडेंट्स को यह सब किताबों में नहीं, बल्कि असली वर्किंग सिस्टम में देखने और समझने का मौका मिलता है।
  • फैसला लेने से पहले प्लानिंग ज़रूरी होती है: ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल पढ़ाई एक बड़ा फाइनेंशियल और एकेडमिक डिसीजन होता है। इसलिए इस ऑप्शन को चुनने से पहले अपनी पढ़ाई की तैयारी, बजट और आगे की प्लानिंग को साफ़ तौर पर समझ लेना ज़रूरी है।

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल पढ़ाई का सिस्टम भारत से अलग है। यहाँ ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ में पारंपरिक एमबीबीएस नहीं, बल्कि डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) कोर्स कराया जाता है। यह आमतौर पर ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। यानी पहले किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री पूरी करनी होती है, उसके बाद मेडिकल डिग्री के लिए आवेदन किया जाता है। पढ़ाई के शुरुआती चरण में बेसिक साइंस पर फोकस रहता है और बाद में क्लिनिकल ट्रेनिंग शुरू होती है।

कुछ सीमित यूनिवर्सिटीज़ में अंडरग्रेजुएट मेडिकल पाथवे भी मौजूद है, जहाँ 12वीं के बाद मेडिकल पढ़ाई का विकल्प मिलता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए इन कोर्सेज़ में सीटें बहुत कम होती हैं और प्रतिस्पर्धा काफ़ी ज़्यादा रहती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर UCAT जैसी एप्टीट्यूड टेस्ट के आधार पर चयन किया जाता है।

  • प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षाएँ: ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल एडमिशन के लिए अकादमिक रिकॉर्ड के साथ एंट्रेंस टेस्ट और इंटरव्यू की भूमिका अहम होती है। ग्रेजुएट-एंट्री MD कोर्स के लिए ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ GAMSAT स्कोर देखती हैं, जबकि कुछ अंडरग्रेजुएट पाथवे में UCAT लिया जाता है। इंटरव्यू के दौरान कम्युनिकेशन स्किल, सोचने का तरीका और एथिकल समझ परखा जाता है। भारत की परीक्षा ऑस्ट्रेलिया में एडमिशन के लिए सीधे काम नहीं आती।
  • कोर्स की अवधि और क्लिनिकल ट्रेनिंग: ऑस्ट्रेलिया में MD कोर्स आमतौर पर चार साल का होता है। शुरुआती सालों में मेडिकल फाउंडेशन पढ़ाया जाता है और बाद के वर्षों में हॉस्पिटल ट्रेनिंग शुरू हो जाती है। अंतिम चरण में स्टूडेंट्स को मरीजों की देखभाल, बीमारी की पहचान और ट्रीटमेंट प्लानिंग का practical अनुभव दिया जाता है।
  • ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल की भूमिका: ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल कोर्स और यूनिवर्सिटीज़ की मान्यता ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल (AMC) देती है। केवल उन्हीं कोर्सेज़ को मान्य माना जाता है जो AMC से अप्रूव्ड हों।
  • मेडिकल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया (AHPRA): मेडिकल रजिस्ट्रेशन का संचालन Australian Health Practitioner Regulation Agency (AHPRA) करती है। AMC से मान्यता प्राप्त डिग्री पूरी करने के बाद ही छात्र AHPRA के माध्यम से मेडिकल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं।
  • इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन: मेडिकल डिग्री पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया में इंटर्नशिप के लिए अलग से आवेदन और चयन प्रक्रिया होती है, जहाँ चयन होने पर स्टूडेंट्स सीनियर डॉक्टरों की निगरानी में काम करते हैं। इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी शर्तें राज्य और उपलब्ध सीटों पर निर्भर करती हैं। भारत लौटने की स्थिति में, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के अनुसार अलग प्रक्रिया से अनुमति लेनी होती है।

ऑस्ट्रेलिया से एमबीबीएस करने के लिए आवश्यक योग्यता

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल पढ़ाई की योग्यता भारत से थोड़ी अलग होती है। यहाँ ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ पारंपरिक एमबीबीएस नहीं, बल्कि डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) कोर्स कराती हैं, जो आमतौर पर ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। इसलिए मेडिकल एडमिशन की योग्यता को दो हिस्सों में समझना ज़रूरी है।

  • 12वीं कक्षा की योग्यता (बेसिक फाउंडेशन): ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल पाथवे के लिए 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) होना ज़रूरी माना जाता है। 12वीं के अंक सीधे मेडिकल एडमिशन के लिए इस्तेमाल नहीं होते, लेकिन यही आगे की पढ़ाई की नींव होते हैं। इसलिए PCB में अच्छा बेस होना आगे ग्रेजुएशन और मेडिकल कोर्स के लिए ज़रूरी होता है।
  • ग्रेजुएशन की योग्यता (मेडिकल एडमिशन की मुख्य शर्त): ऑस्ट्रेलिया में MD कोर्स करने के लिए पहले किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री पूरी करनी होती है, जैसे बायोमेडिकल साइंस या साइंस से जुड़ा कोई कोर्स। यही मेडिकल एडमिशन की असली योग्यता मानी जाती है। यहाँ सिर्फ डिग्री होना काफी नहीं होता, बल्कि लगातार अच्छा अकादमिक रिकॉर्ड भी ज़रूरी होता है।
  • न्यूनतम अंक और GPA की प्रतिस्पर्धा: ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ आमतौर पर कोई तय प्रतिशत नहीं बतातीं, लेकिन एडमिशन प्रक्रिया काफ़ी कॉम्पिटिटिव होती है। ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ GPA के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग करती हैं। इसका मतलब यह है कि एवरेज प्रोफाइल वाले स्टूडेंट्स के लिए सेलेक्शन मुश्किल हो सकता है, जबकि अच्छे और कंसिस्टेंट ग्रेड वाले स्टूडेंट्स की प्रोफाइल ज़्यादा मजबूत मानी जाती है।
  • प्रवेश परीक्षाएँ: मेडिकल एडमिशन के लिए अलग-अलग पाथवे पर अलग एंट्रेंस टेस्ट होते हैं। अंडरग्रेजुएट मेडिकल पाथवे के लिए आमतौर पर UCAT लिया जाता है, जबकि ग्रेजुएट-एंट्री MD कोर्स के लिए GAMSAT ज़रूरी होता है। ये परीक्षाएँ रट्टा आधारित नहीं होतीं, बल्कि रीजनिंग, लॉजिकल सोच और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को परखती हैं।
  • NEET की भूमिका (भारतीय छात्रों के लिए): NEET का ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटीज़ में मेडिकल एडमिशन से सीधा कोई संबंध नहीं होता। यानी ऑस्ट्रेलिया में MD कोर्स में एडमिशन लेने के लिए NEET स्कोर नहीं देखा जाता। लेकिन जो भारतीय छात्र भविष्य में भारत लौटकर डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करना चाहते हैं, उनके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के अनुसार NEET क्वालीफाई करना अनिवार्य होता है। बिना NEET क्वालीफाई किए ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल डिग्री लेने पर भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होता।
  • अंग्रेज़ी भाषा की योग्यता: ऑस्ट्रेलिया की मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई अंग्रेज़ी भाषा में होती है, इसलिए इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से इंग्लिश प्रोफिशिएंसी मांगी जाती है। आमतौर पर IELTS, TOEFL iBT या PTE स्वीकार किए जाते हैं। मेडिकल कोर्स में मरीजों से बातचीत और क्लिनिकल ट्रेनिंग होती है, इसलिए यहाँ इंग्लिश स्कोर की अपेक्षा सामान्य कोर्सेज़ से थोड़ी ज़्यादा रहती है। उदाहरण के तौर पर, अधिकतर यूनिवर्सिटीज़ IELTS 7.0 से 7.5 (प्रत्येक बैंड) के आसपास स्कोर की मांग करती हैं, हालांकि यह यूनिवर्सिटी के अनुसार अलग हो सकता है।
  • इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया: कई ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ फाइनल सेलेक्शन के लिए MMI (Multiple Mini Interviews) लेती हैं। इन इंटरव्यूज़ में स्टूडेंट की कम्युनिकेशन स्किल, सोचने का तरीका और मेडिकल फील्ड की समझ देखी जाती है। सिर्फ अच्छे मार्क्स से सेलेक्शन तय नहीं होता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि स्टूडेंट मेडिकल प्रोफेशन के लिए मेंटली तैयार है या नहीं।

ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल पढ़ाई की योजना बनाते समय स्टेप्स को सही क्रम में समझना बहुत ज़रूरी होता है। नीचे पूरा प्रोसेस आसान भाषा में, स्टेप-बाय-स्टेप समझाया गया है।

स्टेप 1: पहले यह समझें कि ऑस्ट्रेलिया में MBBS नहीं, MD होता है

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल पढ़ाई की बात आते ही सबसे पहले यही बात साफ होना ज़रूरी है कि यहाँ भारत जैसा पारंपरिक MBBS सिस्टम नहीं चलता। आज ज़्यादातर मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन (MD) कोर्स कराती हैं। यह कोर्स 12वीं के बाद सीधे नहीं होता, बल्कि पहले ग्रेजुएशन पूरी करनी पड़ती है।

कई स्टूडेंट्स “ऑस्ट्रेलिया से MBBS” सर्च करते हुए इस पाथवे तक पहुँचते हैं और यहीं से कन्फ्यूजन शुरू होता है। कई छात्र यह मान लेते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में भारत की तरह सीधा एमबीबीएस होता है, जबकि ऐसा नहीं है। इसलिए सबसे पहला कदम यही है कि मेडिकल पाथवे को सही तरीके से समझा जाए। अगर यह फर्क शुरुआत में साफ नहीं होता, तो आगे की तैयारी और उम्मीदें दोनों गलत दिशा में जा सकती हैं।

MBBS बनाम MD (ऑस्ट्रेलिया संदर्भ)

बिंदुMBBS (ऑस्ट्रेलिया संदर्भ)MD –डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन (ऑस्ट्रेलिया)
डिग्री की स्थितिअब लगभग समाप्तवर्तमान में मुख्य और मानक मेडिकल डिग्री
कोर्स का स्तरअंडरग्रेजुएटपोस्टग्रेजुएट (ग्रेजुएट-एंट्री)
प्रवेश योग्यता12वीं PCB (बहुत सीमित यूनिवर्सिटीज़)पहले बैचलर डिग्री अनिवार्य
प्रवेश परीक्षाUCAT (सीमित सीटें)ज़्यादातर मामलों में GAMSAT
वैकल्पिक परीक्षा (कुछ विशेष स्थितियाँ)लागू नहींMCAT – बहुत सीमित और चुनिंदा मामलों में ही स्वीकार किया जाता है
कोर्स अवधि5–6 वर्ष (पुराना मॉडल)4 वर्ष
सीटों की उपलब्धताअंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए लगभग नगण्यसीमित लेकिन उपलब्ध
शिक्षा प्रणालीपुराना, अंडरग्रेजुएट मॉडलआधुनिक, क्लिनिकल और रिसर्च आधारित
रेगुलेटिंग बॉडीऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल (AMC)ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल (AMC)
भारत में वैधताNMC नियमों पर निर्भरNMC के नियम पूरे करने पर वैध
छात्रों में भ्रम क्योंएजेंट इसे “MBBS” कहकर प्रमोट करते हैंयही असली और मान्य मेडिकल पाथवे है

स्टेप 2: 12वीं के बाद ग्रेजुएशन की योजना बनाएं

एमडी कोर्स के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) होना ज़रूरी माना जाता है, लेकिन असली योग्यता ग्रेजुएशन से जुड़ी होती है। इसलिए 12वीं के बाद ऐसा बैचलर कोर्स चुनना चाहिए, जो आगे मेडिकल एडमिशन में मदद करे, जैसे बायोमेडिकल साइंस या साइंस से जुड़े कोर्स। इस दौरान अकादमिक रिकॉर्ड अच्छा रखना बहुत ज़रूरी होता है।

स्टेप 3: प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी समय पर शुरू करें

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल एडमिशन के लिए अलग-अलग पाथवे पर अलग परीक्षाएँ होती हैं। ग्रेजुएट-एंट्री एमडी कोर्स के लिए आमतौर पर GAMSAT लिया जाता है, जबकि कुछ अंडरग्रेजुएट मेडिकल पाथवे में UCAT होता है। ये परीक्षाएँ रट्टा आधारित नहीं होतीं, बल्कि लॉजिकल सोच, रीजनिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स पर फोकस करती हैं। इसलिए इनकी तैयारी पहले से और सही तरीके से करनी पड़ती है।

स्टेप 4: AMC और भविष्य की लाइसेंसिंग स्थिति पहले समझें

यूनिवर्सिटी चुनने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह कोर्स ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल (AMC) से मान्यता प्राप्त है या नहीं। साथ ही, अगर भविष्य में भारत लौटकर प्रैक्टिस करने का प्लान है, तो NMC के नियमों को भी पहले समझना चाहिए। कई छात्र यह बात बाद में सोचते हैं, जिससे आगे चलकर परेशानी हो सकती है।

स्टेप 5: सही यूनिवर्सिटी का चयन सोच-समझकर करें

ऑस्ट्रेलिया की सभी मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए सीटें सीमित होती हैं। केवल नाम देखकर आवेदन करना सही रणनीति नहीं होती। यूनिवर्सिटी चुनते समय उसकी मान्यता, सीटों की उपलब्धता, एंट्रेंस टेस्ट की ज़रूरत और पहले से पढ़ रहे इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के अनुभव को ध्यान में रखना चाहिए।

स्टेप 6: आवेदन के लिए डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें

मेडिकल एडमिशन के लिए आवेदन करते समय कई डॉक्यूमेंट्स देने होते हैं, जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र, इंग्लिश लैंग्वेज स्कोर, स्टेटमेंट ऑफ पर्पस और रेफरेंस लेटर्स। स्टेटमेंट ऑफ पर्पस में यह साफ दिखना चाहिए कि आप मेडिकल फील्ड क्यों चुनना चाहते हैं और इसके लिए आपने क्या तैयारी की है। अधूरे या गलत डॉक्यूमेंट्स की वजह से आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।

स्टेप 7: इंटरव्यू और सेलेक्शन प्रोसेस के लिए तैयार रहें

कई ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ MMI (Multiple Mini Interviews) लेती हैं। इसमें स्टूडेंट की कम्युनिकेशन स्किल, सोचने का तरीका और मेडिकल प्रोफेशन की समझ देखी जाती है। केवल अच्छे मार्क्स काफी नहीं होते, इंटरव्यू में खुद को क्लियर और कॉंफिडेंट तरीके से पेश करना भी ज़रूरी होता है।

स्टेप 8: छात्र वीज़ा और फाइनेंशियल प्लानिंग

एडमिशन मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए स्टूडेंट वीज़ा लेना होता है। इसके लिए यह दिखाना पड़ता है कि आपके पास पढ़ाई और रहने का पूरा खर्च उठाने की क्षमता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने का खर्च काफ़ी ज़्यादा होता है, इसलिए फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स और प्लानिंग मजबूत होनी चाहिए।

इसके साथ ही, छात्र वीज़ा के लिए Overseas Student Health Cover (OSHC) अनिवार्य होता है, जो ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज देता है। मेडिकल कोर्स की अवधि लंबी होने की वजह से OSHC की वैधता पूरे स्टडी पीरियड को कवर करनी चाहिए।

इसके अलावा, वीज़ा आवेदन के समय Genuine Student (GS) आवश्यकता को भी पूरा करना होता है। इसके तहत छात्र को यह साबित करना पड़ता है कि उसका मुख्य उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना है और वह अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, करियर प्लान और फाइनेंशियल स्थिति के साथ इस कोर्स के लिए वास्तविक रूप से उपयुक्त है।

स्टेप 9: पढ़ाई पूरी होने के बाद आगे का रास्ता पहले से जान लें

ऑस्ट्रेलिया से एमडी पूरा करने के बाद भारत में डॉक्टर बनने के लिए NMC के नियमों के अनुसार अलग प्रक्रिया से गुजरना होता है। यह प्रोसेस आसान नहीं होता और समय ले सकता है। इसलिए विदेश में पढ़ाई शुरू करने से पहले ही यह समझ लेना ज़रूरी है कि आगे भारत या किसी और देश में प्रैक्टिस का रास्ता क्या होगा।

ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख मेडिकल यूनिवर्सिटीज

यहाँ दी गई मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ के एमडी कोर्स ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल (AMC) से मान्यता प्राप्त हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल पढ़ाई और आगे की ट्रेनिंग के लिए ज़रूरी मानी जाती है। हालांकि यह समझना ज़रूरी है कि इन यूनिवर्सिटीज़ में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए सीटें सीमित होती हैं, इसलिए एडमिशन प्रक्रिया काफ़ी कॉम्पिटिटिव रहती है और केवल फीस या यूनिवर्सिटी के नाम के आधार पर आवेदन करना सही रणनीति नहीं होती।

नीचे दी गई टेबल में ऑस्ट्रेलिया की कुछ प्रमुख मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ और उनके एमडी कोर्स की अनुमानित फीस दी गई है, ताकि छात्रों को एक सामान्य समझ मिल सके। फीस और सीटों की उपलब्धता यूनिवर्सिटी और साल के अनुसार बदल सकती है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट से अपडेटेड जानकारी ज़रूर जांचनी चाहिए।

यूनिवर्सिटी का नामलोकेशन (शहर / राज्य)प्रवेश का प्रकारमेडिकल कोर्सअनुमानित वार्षिक फीस (AUD)
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्नमेलबर्न, विक्टोरियाग्रेजुएट-एंट्रीडॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD)AUD 90,000 – AUD 98,000
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनीसिडनी, न्यू साउथ वेल्सग्रेजुएट-एंट्रीडॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD)AUD 88,000 – AUD 96,000
मोनाश यूनिवर्सिटीमेलबर्न, विक्टोरियाअंडरग्रेजुएट + ग्रेजुएट (डायरेक्ट पाथवे)बैचलर ऑफ मेडिकल साइंस + MDAUD 75,000 – AUD 88,000
यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंडब्रिस्बेन, क्वींसलैंडग्रेजुएट-एंट्रीडॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD)AUD 84,000 – AUD 92,000
यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW)सिडनी, न्यू साउथ वेल्सअंडरग्रेजुएट / ग्रेजुएटबैचलर ऑफ मेडिकल स्टडीज + MDAUD 78,000 – AUD 90,000
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU)कैनबरा, ACTग्रेजुएट-एंट्रीडॉक्टर ऑफ मेडिसिन एंड सर्जरीAUD 85,000 – AUD 93,000
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया (UWA)पर्थ, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियाग्रेजुएट-एंट्रीडॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD)AUD 75,000 – AUD 86,000
यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेडएडिलेड, साउथ ऑस्ट्रेलियाअंडरग्रेजुएट / डायरेक्टMBBS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड सर्जरी)AUD 70,000 – AUD 80,000
फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटीएडिलेड, साउथ ऑस्ट्रेलियाग्रेजुएट-एंट्रीडॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD)AUD 68,000 – AUD 78,000
जेम्स कुक यूनिवर्सिटी (JCU)टाउन्सविल, क्वींसलैंडअंडरग्रेजुएट / डायरेक्टMBBS / MDAUD 65,000 – AUD 75,000

नोट – ऊपर दी गई फीस अनुमानित फीस है, जिससे आपको यूनिवर्सिटी में इस प्रोग्राम को करने में होने वाले खर्च का एक आईडिया मिल सकता है। आवेदन करने से पहले आप यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर को देख सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) करने की कुल लागत

ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल (MD) पढ़ाई का खर्च काफ़ी ज़्यादा होता है, इसलिए इसे समझते समय यह जानना ज़रूरी है कि यह सालाना नहीं, बल्कि पूरे कोर्स की कुल लागत होती है। ज़्यादातर मामलों में MD कोर्स की अवधि 4 से 6 साल के बीच होती है और इसी पूरी अवधि को ध्यान में रखकर खर्च का अनुमान लगाया जाता है।

नीचे ऑस्ट्रेलिया से MD करने के दौरान आने वाले कुल अनुमानित खर्च को आसान तरीके से समझाया गया है।

कुल प्रोग्राम लागत (पूरे कोर्स का अनुमान)

खर्च का भागअनुमानित कुल खर्च (AUD)विवरण
अनुमानित ट्यूशन फीस300,000 – 540,000MD कोर्स की पूरी अवधि की फीस, यूनिवर्सिटी के अनुसार अलग-अलग
रहने-खाने का खर्च100,000 – 150,000किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट और अन्य दैनिक खर्च
स्वास्थ्य बीमा (OSHC)3,000 – 5,000पूरे स्टडी पीरियड के लिए अनिवार्य हेल्थ इंश्योरेंस
यात्रा खर्च1,500 – 3,000भारत से ऑस्ट्रेलिया आने-जाने का खर्च
वीज़ा और प्रोसेसिंग2,000 – 3,000स्टूडेंट वीज़ा और संबंधित शुल्क
किताबें और अध्ययन सामग्री2,500 – 6,000कोर्स के दौरान जरूरी स्टडी मटेरियल

इस तरह ऑस्ट्रेलिया से पूरा MD कोर्स करने में कुल खर्च लगभग AUD 400,000 से 700,000 के बीच आ सकता है।

सालाना औसत खर्च (समझने के लिए अनुमान)

कई छात्र फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए सालाना खर्च जानना चाहते हैं। नीचे दिया गया आंकड़ा केवल एक औसत अनुमान है, जिससे खर्च को समझना आसान हो सके।

खर्च का प्रकारअनुमानित सालाना खर्च (AUD)
ट्यूशन फीस70,000 – 85,000
रहने-खाने का खर्च25,000 – 30,000
स्वास्थ्य बीमा (OSHC)700 – 1,200
अन्य खर्च1,500 – 3,000

ध्यान रखें कि वास्तविक खर्च यूनिवर्सिटी, शहर और छात्र की लाइफस्टाइल के अनुसार कम या ज़्यादा हो सकता है।

ऑस्ट्रेलिया में MD के बाद करियर विकल्प

ऑस्ट्रेलिया से डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन (MD) की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों के सामने कई तरह के करियर विकल्प खुले रहते हैं। हालांकि, हर विकल्प के लिए अलग-अलग लाइसेंसिंग, ट्रेनिंग और अनुभव की ज़रूरत होती है। नीचे MD के बाद मिलने वाले प्रमुख करियर ऑप्शन्स की जानकारी दी गई है।

करियर विकल्पभूमिका का विवरणआवश्यक लाइसेंस / ट्रेनिंग
जनरल प्रैक्टिशनर (GP)मरीजों का प्राथमिक इलाज, डायग्नोसिस और रेफरल देनाAHPRA रजिस्ट्रेशन + GP स्पेशलिटी ट्रेनिंग (RACGP / ACRRM)
स्पेशलिस्ट डॉक्टरकार्डियोलॉजी, सर्जरी, न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक्स जैसी स्पेशलिटी में कामस्पेशलिस्ट ट्रेनिंग (5–7 वर्ष) + संबंधित कॉलेज की अप्रूवल
हॉस्पिटल रेजिडेंट / रजिस्ट्रारसीनियर डॉक्टर की निगरानी में क्लिनिकल प्रैक्टिसAHPRA रजिस्ट्रेशन + हॉस्पिटल प्लेसमेंट
मेडिकल रिसर्चरक्लिनिकल रिसर्च, ट्रायल्स और मेडिकल इनोवेशनरिसर्च डिग्री (PhD / MPhil) + संस्थान
पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्टहेल्थ पॉलिसी, महामारी नियंत्रण और जनस्वास्थ्य प्रोग्राममास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (MPH)
मेडिकल एजुकेटरमेडिकल स्टूडेंट्स और ट्रेनी डॉक्टरों को पढ़ानाटीचिंग अनुभव + अकादमिक योग्यता
ऑक्यूपेशनल हेल्थ डॉक्टरवर्कप्लेस हेल्थ और सेफ्टी से जुड़ी मेडिकल सेवाएँअतिरिक्त सर्टिफिकेशन (ऑक्यूपेशनल मेडिसिन)

यह समझना ज़रूरी है कि ऑस्ट्रेलिया में MD करने के बाद स्थायी निवास (PR) स्वतः नहीं मिलता। PR अलग इमिग्रेशन पॉइंट सिस्टम, वर्क एक्सपीरियंस और अन्य पात्रता शर्तों पर निर्भर करता है।

ऑस्ट्रेलिया बनाम अन्य देश

ऑस्ट्रेलिया मेडिकल स्टडी के लिए उन छात्रों के लिए बेहतर माना जाता है जो स्टडी के साथ-साथ माइग्रेशन पाथवे दोनों देखते हैं। यहां MBBS और MD को प्रोफेशनली समान माना जाता है। हालांकि अन्य देशों में भी मेडिकल एजुकेशन की कुछ न कुछ खासियत होती है। यहाँ दी गई टेबल में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए ऑस्ट्रेलिया बनाम UK बनाम USA की मेडिकल एजुकेशन की तुलना की गई है –

पैरामीटरऑस्ट्रेलियायूनाइटेड किंगडम (UK)यूनाइटेड स्टेट्स (USA)
मेडिकल डिग्री का नामMBBS / MDMBBS / MBChBMD
प्रवेश का प्रकारसीमित डायरेक्ट MBBS, अधिकतर ग्रेजुएट-एंट्री MDज़्यादातर डायरेक्ट MBBSकेवल ग्रेजुएट-एंट्री
12वीं के बाद प्रवेशकुछ यूनिवर्सिटीज़ में संभवआम तौर पर संभवसंभव नहीं
एंट्रेंस टेस्टUCAT / कभी-कभी GAMSATUCAT / BMAT (कुछ जगह)MCAT (अनिवार्य)
कोर्स अवधि5–6 वर्ष (UG), 4 वर्ष (MD)5–6 वर्ष4 वर्ष (MD)
अनुमानित वार्षिक फीस60,000 – 90,000 AUD35,000 – 55,000 GBP55,000 – 70,000 USD
पोस्ट-स्टडी अवसरइंटर्नशिप + PR पाथवे संभवNHS ट्रेनिंग, PR प्रतिस्पर्धीरेज़ीडेंसी कठिन, PR सीमित

ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) चुनते समय भारतीय छात्रों से होने वाली कॉमन गलतियाँ

ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) चुनते समय अक्सर भारतीय छात्रों से निम्नलिखित कॉमन गलतियाँ हो जाती हैं, जिनसे उन्हें बचना चाहिए –

  • MBBS और MD के फर्क को ठीक से न समझना: कई भारतीय छात्र मान लेते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में MBBS और भारत वाला MBBS एक जैसे होते हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया में ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ ग्रेजुएट-एंट्री MD ऑफर करती हैं, जिसके लिए पहले संबंधित बैचलर डिग्री जरूरी होती है। इस फर्क को नजरअंदाज करने से गलत एलिजिबिलिटी अज़म्पशंस बनती हैं।
  • 12वीं के बाद डायरेक्ट एडमिशन की गलत उम्मीद रखना: ऑस्ट्रेलिया में 12वीं के बाद डायरेक्ट मेडिकल एंट्री बहुत सीमित यूनिवर्सिटीज़ में ही संभव है। फिर भी कई छात्र बिना एलिजिबिलिटी चेक किए आवेदन शुरू कर देते हैं, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं।
  • प्रवेश परीक्षाओं को हल्के में लेना: UCAT, GAMSAT या MCAT जैसी परीक्षाएं कई मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ में जरूरी होती हैं। इन्हें ऑप्शनल समझना या आख़िरी समय में तैयारी शुरू करना एक बड़ी गलती साबित होती है।
  • NEET और भारत में प्रैक्टिस नियमों को इग्नोर करना: ऑस्ट्रेलिया से MD करने के बाद भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए NEET क्वॉलिफिकेशन्स और NMC नियमों की भूमिका अहम रहती है। कई छात्र इस पहलु पर पहले रिसर्च नहीं करते।
  • केवल फीस देखकर फैसला लेना: कुछ छात्र कम फीस वाली यूनिवर्सिटी चुन लेते हैं, लेकिन इंटर्नशिप, क्लिनिकल एक्सपोजर और लाइसेंसिंग पाथवे जैसे फैक्टर्स पर ध्यान नहीं देते, जो लॉन्ग-टर्म करियर के लिए ज्यादा जरूरी होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए इंटर्नशिप और रेजीडेंसी की वास्तविक स्थिति

ऑस्ट्रेलिया में MD पूरा करने के बाद बहुत से छात्र यह मान लेते हैं कि इंटर्नशिप और आगे की ट्रेनिंग अपने आप मिल जाती है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे थोड़ी अलग होती है। ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल इंटर्नशिप और रेज़िडेंसी की सीटें सीमित होती हैं और इनके लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है।

सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप की प्राथमिकता आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों और परमानेंट रेज़िडेंट्स को दी जाती है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भी अवसर मिल सकते हैं, लेकिन यह गारंटी नहीं होता और चयन राज्य, उपलब्ध सीटों और प्रतियोगिता पर निर्भर करता है। कई मामलों में अच्छे अकादमिक रिकॉर्ड और मजबूत प्रोफाइल के बावजूद छात्रों को इंटर्नशिप के लिए इंतज़ार करना पड़ सकता है या वैकल्पिक रास्तों पर विचार करना पड़ता है।

इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही आगे रेज़िडेंसी या स्पेशलिटी ट्रेनिंग का रास्ता खुलता है, जो एक लंबी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया होती है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल पढ़ाई शुरू करने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि MD के बाद का करियर रास्ता पूरी तरह सीधा नहीं होता और इसमें समय, धैर्य और सही प्लानिंग की ज़रूरत होती है।

ऑस्ट्रेलिया से MD करने के बाद भारत लौटने का रास्ता (FMGE / NEXT की स्पष्ट जानकारी)

कई भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया से MD करने के बाद भारत लौटकर डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करना चाहते हैं। इसके लिए भारत में लागू नियमों को पहले से समझना बेहद ज़रूरी होता है।

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के अनुसार, विदेश से मेडिकल डिग्री लेने वाले छात्रों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए तय प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसमें सबसे पहले NEET क्वालीफाई होना ज़रूरी है। इसके अलावा, विदेशी मेडिकल डिग्री की मान्यता, कोर्स की अवधि, क्लिनिकल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप जैसी शर्तें भी पूरी करनी होती हैं।

भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए अब NEXT (National Exit Test) को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जो आगे चलकर FMGE की जगह ले सकता है। इसका मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलिया से MD करने के बाद भी भारत में प्रैक्टिस के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा और इंटर्नशिप से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी। यह प्रक्रिया आसान नहीं होती और इसमें समय लग सकता है।

इसलिए जो छात्र भविष्य में भारत लौटने की योजना रखते हैं, उनके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वे एडमिशन लेने से पहले NMC की लेटेस्ट गाइडलाइन्स को ध्यान से पढ़ें और पूरे पाथवे को समझकर ही फैसला लें।

FAQs 

क्या ऑस्ट्रेलिया से चिकित्सा पढ़ने के बाद भारत में डॉक्टर बना जा सकता है?

हाँ, लेकिन इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के सभी नियम पूरे करना ज़रूरी होता है। भारतीय छात्र को NEET क्वालीफाई करना होता है, मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री लेनी होती है और तय अवधि की इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। इसके बाद भारत में लागू स्क्रीनिंग प्रक्रिया/परीक्षा को भी पास करना होता है। इनमें से किसी भी चरण में कमी होने पर भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ सकती है। इसलिए एडमिशन लेने से पहले NMC के नियमों को साफ़ तौर पर समझ लेना ज़रूरी है।

ऑस्ट्रेलिया से चिकित्सा शिक्षा किन छात्रों के लिए सही विकल्प हो सकता है?

ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल पढ़ाई हर छात्र के लिए सही नहीं होती। यह विकल्प उन छात्रों के लिए ज़्यादा उपयुक्त माना जाता है जिनकी अकादमिक तैयारी मजबूत हो, फाइनेंशियल प्लानिंग साफ़ हो और जो भविष्य में इंटरनेशनल लेवल पर करियर के विकल्प देखना चाहते हों। अगर किसी छात्र का मुख्य लक्ष्य भारत में ही डॉक्टर बनना है और बजट सीमित है, तो भारत या अन्य देशों के विकल्प ज़्यादा प्रैक्टिकल हो सकते हैं। सही फैसला वही होता है जो पूरी जानकारी और लॉन्ग टर्म प्लानिंग के साथ लिया जाए।

ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) करने का कुल खर्च कितना आता है?

ऑस्ट्रेलिया में MD कोर्स की सालाना ट्यूशन फीस आमतौर पर AUD 70,000 से 85,000 के बीच होती है। चूँकि यह कोर्स ज़्यादातर मामलों में 4 साल का होता है, इसलिए कुल ट्यूशन फीस काफ़ी अधिक हो जाती है। इसके अलावा, रहने, खाने, ट्रांसपोर्ट और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे खर्च मिलाकर सालाना रहने का खर्च लगभग AUD 25,000 से 30,000 तक हो सकता है, जो शहर और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है।
इस तरह ऑस्ट्रेलिया से पूरा MD कोर्स करने में ट्यूशन फीस और रहने का खर्च मिलाकर एक बड़ा फाइनेंशियल कमिटमेंट बनता है। इसलिए एडमिशन लेने से पहले पूरे कोर्स की लागत को ध्यान में रखकर प्लानिंग करना ज़रूरी होता है।

क्या 12वीं के बाद ऑस्ट्रेलिया से MBBS किया जा सकता है?

अधिकांश मामलों में 12वीं के बाद सीधे ऑस्ट्रेलिया में एमबीबीएस करना संभव नहीं होता। यहाँ ज़्यादातर मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ Doctor of Medicine (MD) कोर्स कराती हैं, जो ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। कुछ बहुत सीमित यूनिवर्सिटीज़ में अंडरग्रेजुएट मेडिकल पाथवे मौजूद है, लेकिन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए सीटें बहुत कम होती हैं और सेलेक्शन काफ़ी कॉम्पिटिटिव रहता है। इसलिए भारतीय छात्रों के लिए 12वीं के बाद पहले ग्रेजुएशन करना ही ज़्यादा प्रैक्टिकल रास्ता माना जाता है।

ऑस्ट्रेलिया और यूके में MBBS/MD में क्या फर्क है?

ऑस्ट्रेलिया और यूके दोनों ही मेडिकल एजुकेशन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन दोनों का सिस्टम अलग है। ऑस्ट्रेलिया में ज़्यादातर मेडिकल कोर्स ग्रेजुएशन के बाद होते हैं, जबकि यूके में कई यूनिवर्सिटीज़ 12वीं के बाद MBBS ऑफर करती हैं। ऑस्ट्रेलिया में ट्यूशन फीस और रहने का ख़र्च आमतौर पर ज़्यादा होती है, वहीं यूके में कोर्स की अवधि थोड़ी लंबी हो सकती है। किस देश का विकल्प बेहतर रहेगा, यह स्टूडेंट की अकादमिक तैयारी, बजट और भविष्य की योजना पर निर्भर करता है।

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हमें उम्मीद है कि इस लेख से आपको ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल पढ़ाई के पाथवे, योग्यता और प्रक्रिया को लेकर एक स्पष्ट समझ मिली होगी। ऑस्ट्रेलिया से MBBS (MD) करने का फैसला लेने से पहले यह ज़रूरी है कि आप जिस यूनिवर्सिटी में आवेदन करने की सोच रहे हैं, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर कोर्स से जुड़ी शर्तें, फीस और मान्यता की जानकारी ज़रूर जांच लें। इसके साथ ही, भारत में आगे की वैधता को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की लेटेस्ट गाइडलाइन्स भी देखना उपयोगी रहेगा।

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