रतन टाटा के असिस्टेंट बनने के पीछे शांतनु नायडू की कहानी

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शांतनु नायडू

आपने रतन टाटा के 85 जन्मदिवस पर उनके साथ एक छोटे कपकेक के साथ सेलिब्रेट करते हुए एक नौजवान का विडियो तो देखा ही होगा। आप में से शायद कुछ ही लोग जानते होगें कि वह युवक श्री रतन टाटा के जूनियर असिस्टेंट, शांतनु नायडू हैं। 28 साल की कम उम्र में शांतनु नायडू ने बिजनेस इंडस्ट्री में एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो कई लोगों के लिए हमेशा एक सपना बना रहता है। शांतनु रतन टाटा को स्टार्टअप्स में निवेश के लिए बिजनेस भी टिप्स देते हैं। आइए इस ब्लॉग में जूनियर असिस्टेंट शांतनु नायडू के जीवन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

नाम शांतनु नायडू
जन्म 1993
आयु 28 वर्ष
जन्म स्थान पुणे, महाराष्ट्र, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
शिक्षा कॉर्नेल विश्वविद्यालय
माता-पिता अज्ञात
पत्नी अनमैरिड
पेशा भारतीय व्यवसायी, इंजीनियर, जुनियर असिस्टेंट, डीजीएम, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, लेखक और इंटरप्रेन्योर
नेट वर्थ 2  से 5 करोड़ रूपए से अधिक

शांतनु नायडू कौन हैं?

शांतनु नायडू, एक प्रसिद्ध भारतीय व्यवसायी, इंजीनियर, जूनियर असिस्टेंट, डीजीएम, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, लेखक और इंटरप्रेन्योर हैं। नायडू टाटा ट्रस्ट के डेप्युटी जनरल मैनेजर के रूप में देश में काफी लोकप्रिय हैं। शांतनु नायडू ने मोटोपॉज, ऑन योर स्पार्क और गुडफैलो जैसे स्टार्टअप को भी शुरू किया है। कुत्तों के प्रति अथाह प्रेम ने ही उन्हें मोटोपॉज की स्थापना के लिए प्रेरित किया।

शांतनु नायडू का प्रारंभिक जीवन

शांतनु नायडू का जन्म साल 1993 में महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। शांतनु नायडू हिन्दू परिवार से संबंध रखते है। शांतनु नायडू के परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि एक रिपोर्ट की अनुसार शांतनु नायडू अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी है, जो टाटा ग्रुप के साथ काम कर रहे हैं। शांतनु नायडू के पिता भी इंजीनियर है और उनकी माता गृहणी है। सोशल मीडिया पर यह खबर भी सामने आई थी कि शांतनु नायडू के पिता रतन टाटा के सुरक्षा गार्ड है, हालांकि बाद में यह अफवाह निकली। शांतनु नायडू ने अभी तक शादी नहीं की है।

शांतनु नायडू की शिक्षा और करियर

शांतनु नायडू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह नगर में ही प्राप्त की। बैचलर्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद शांतनु नायडू ने साल मई 2009 से मई 2010 तक TATA Technologies में इंटर्न के रूप में काम किया। साल 2014 में इंजीनियर बनने के बाद शांतनु नायडू ने टाटा ट्रस्ट के साथ काम करना शुरू किया। उन्होंने Tata Elxsi में बतौर डिजाइन इंजीनियर भी काम किया है। 2014 में शांतनु ने डॉग कॉलर बनाने वाली मोटोपॉस की भी स्थापना की।

साल 2016 में न्यूयॉर्क गए और वहां की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की। साल 2018 में अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद शांतनु नायडू वापस भारत आ गए और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ऑफ़िस में बतौर डिप्टी जनरल मैनेजर काम करने लगे। शांतनु की नेकदिली और क्रिएटिव आइडियाज़ से रतन टाटा भी काफी प्रभावित है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि रतन टाटा शांतनु से बिज़नेस और निवेश को लेकर सलाह लेते हैं। शांतनु नायडू अपने इंस्टाग्राम हैंडल, ‘On Your Sparks’ के ज़रिए एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में आने की सोच रहे छात्रों को मोटीवेट भी करते है। हर छात्र की फीस 500 रूपए है, स्ट्रीट डॉग्स की मदद करने के लिए Motopaws को दे दी जाती है।

शांतनु नायडू की उपलब्धियां

शांतनु नायडू की कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं –

  • कॉर्नेल विश्वविद्यालय में अपने समय के दौरान, शांतनु विभिन्न पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता थे जैसे कि हेममीटर इंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड तथा वे जॉनसन लीडरशिप केस कॉम्पिटिशन के विजेता भी थे। 
  • वह जॉनसन के सोशल मीडिया एंबेसडर, द कॉर्नेल मोटरसाइकिल एसोसिएशन के संस्थापक और अध्यक्ष, जॉनसन पेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, साउथ एशियन बिजनेस एसोसिएशन के लिए वित्त के वीपी और कंसल्टिंग, टेक क्लब और एसजीई क्लब के सदस्य हैं।
  • वह कॉर्नेल बिजनेस जर्नल के लिए एक लेखक भी थे और उन्होंने कई लेख लिखे जैसे कि–
    • “3 Entrepreneurial Lessons I Learned at Cornell”
    • “Notes for first year MBA”
    • “Businessmen and innovators to survive in the first year”
    • “Occupation and natural disasters”

शांतनु नायडू द्वारा स्टार्टअप

शांतनु एक इंजीनियर और टाटा के डिप्टी जनरल मैनेजर होने के साथ ही काफ़ी क्रिएटिव और बुद्धिजीवी भी हैं। उनके द्वारा कई स्टार्टअप लाए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं –

Motopaws

शांतनु ने रात में कम दृश्यता के कारण आवारा कुत्तों को रोडकिल का शिकार न बनने में मदद करने के विचार के साथ जनवरी 2015 में मोटोपॉज की स्थापना की। इस समस्या को मिटाने के लिए, महीनों की कड़ी मेहनत और शोध के कारण मोटोपॉज़ कॉलर का निर्माण हुआ, जो विशेष रूप से स्ट्रीट डॉग्स के लिए डिज़ाइन किया गया एक कॉलर है, जिस पर रिफ्लेक्टर होते हैं। इस पहल को टाटा समूह के अध्यक्ष श्री रतन टाटा द्वारा वित्त पोषित किया गया था। Motopaws ने भारत में बाघों के लिए सेंसर सर्किट आधारित अवैध शिकार विरोधी उपकरणों को भी डिजाइन किया और 4 अलग-अलग नेशनल स्टोर्स में वन विभाग के माध्यम से कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान की। 

On Your Sparks

ऑन योर स्पार्क्स की स्थापना 2020 में Motopaws की सिस्टर इनिशिएटिव के रूप में की गई थी। यह स्टार्टअप के दायरे में प्रवेश करने से पहले संभावित एंटरप्रेन्योर को सही मूल्यों और नींव के लिए प्रेरित करने के लिए एक परामर्श मंच है। यह ऐसे कोर्सेज प्रदान करता है जो शांतनु द्वारा रतन टाटा के साथ काम करने के उनके अनुभवों के आधार पर डिजाइन और क्यूरेट किए गए हैं और उन्हें स्टार्टअप को सलाह देने में सहायता करते हैं। “ऑन योर स्पार्क्स” का प्राथमिक उद्देश्य देश भर के 15 से अधिक शहरों में आवारा जानवरों की सुरक्षा और उन्हें खिलाने और उन्हें बचाने के लिए बढ़ते मोटोपॉज पशु पहल को जारी रखना है। इसने आवारा जानवरों की मदद करते हुए एक महीने में 300 से अधिक छात्रों को पढ़ाया है।

Goodfellow

गुडफेलो इस विचार पर बनाया गया था कि भारत में 15 मिलियन बुजुर्ग अकेले रहते हैं और एकांत, अलग जीवन जीते हैं। यह एक स्टार्टअप है जो बुजुर्गों के लिए अंतरजनपदीय मित्रता प्रदान करता है। यह 30 वर्ष की आयु तक के युवा, शिक्षित ग्रेजुएट्स को रोजगार देता है ताकि उनके और बुजुर्गों के बीच एकांतता को कम करने के लिए इंटरजेनरेशनल फ्रेंडशिप पैदा की जा सके।

रतन टाटा के असिस्टेंट बनने के पीछे शांतनु नायडू की कहानी

जब शांतनु पुणे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तो जब वह घर लौट रहे थे तो एक रात उन्होंने देखा कि सड़क के बीच में एक मरा हुआ कुत्ता पड़ा हुआ था। शांतनु नायडू कुत्तों से बहुत प्यार करते है। उस दिन उन्हें अहसास हुआ कि, अंधेरे में गाड़ियां कुत्तों को नहीं देख पाती, जिस वजह से ये दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में उन्हें आईडिया आया कि क्यों ना कुत्तों के लिए रिफलेक्टर कॉलर बनाया जाए, जिससे अँधेरे में भी लोग दूर से उन्हें देख सके। इसके लिए उन्होंने अपने दोस्तों की मदद ली और एक डॉग कॉलर तैयार किया। उस कॉलर पर रिफ्लेक्टर लगे थे। फिर उन्होंने घुमघुमकर इन कॉलरों को कई आवारा कुत्तों पर इस उम्मीद में डाल दिया कि यह मददगार साबित होगा। अगले दिन उन्हें एक संदेश मिला जिसमें कहा गया था कि कॉलर की वजह से एक कुत्ते को बचा लिया गया है। 

शांतनु की पहल बाद में टाटा समूह की कंपनियों के समाचार पत्र में छपी और डॉग कॉलर की मांग बढ़ी, लेकिन समस्या यह थी कि उनके पास पर्याप्त धन नहीं था, इसलिए शांतनु ने अपने पिता के सुझाव पर श्री रतन टाटा को हस्तलिखित पत्र लिखने का फैसला किया। दो महीने बाद उन्हें खुद रतन टाटा का एक पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि वह उनसे मिलना चाहते हैं। वे मुंबई में मिले और रतन टाटा ने अपने कुत्तों को उनसे मिलवाया और उनके डॉग कॉलर वेंचर को फंड करना स्वीकार किया। जल्द ही शांतनु कॉर्नेल में अध्ययन करने के लिए चले गए, लेकिन उन्होंने वादा किया कि जब वे वापस आएंगे तो वे टाटा ट्रस्ट के लिए काम करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर देंगे।

रतन टाटा के साथ जीवन पर शांतनु नायडू की किताब

हाल ही में, शांतनु नायडू ने ‘आई केम अपॉन ए लाइटहाउस: ए शॉर्ट मेमोयर ऑफ लाइफ विद रतन टाटा’ नामक पुस्तक लिखी। यह किताब रतन टाटा के साथ उनकी दोस्ती के बारे में है, जिसे हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा जनवरी 2021 में प्रकाशित किया गया था। यह एक संस्मरण है जो शांतनु और रतन टाटा के बीच 5 साल की दोस्ती को इंगित करता है। । 

शांतनु नायडू नेट वर्थ

एक रिपोर्ट के अनुसार शांतनु नायडू की सैलरी करीब 27 लाख रूपए सालाना है। वहीं बात करे शांतनु नायडू की नेट वर्थ की तो बता दें कि उनके नेट वर्थ करीब 5 से 6 करोड़ रूपए है।

शांतनु नायडू के बारे में कुछ अनसुने तथ्य

शांतनु नायडू के बारे में कुछ अनसुने तथ्य नीचे दिए गए हैं –

  • शांतनु नायडू भारत के सबसे कम उम्र के एंटरप्रेन्योर में से एक हैं।
  • शांतनु ने मोटोपॉज नामक कुत्ते के कॉलर बनाए, जो कुत्तों के जीवन को रात में और अंधेरे क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं से बचाते हैं।
  • नायडू मोटोपॉज के संस्थापक हैं जिन्होंने बिजनेस टाइकून रतन टाटा को प्रभावित किया।
  • शांतनु ने अपने करियर की शुरुआत जूनियर असिस्टेंट और एंटरप्रेन्योर के तौर पर की थी।
  • इंस्टाग्राम के ऑफिशियल अकाउंट पर उनके 25K से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
  • उन्होंने एक किताब “आई केम अपॉन ए लाइटहाउस” लिखी है।
  • एक रिपोर्ट के अनुसार शांतनु नायडू की सैलरी करीब 27 लाख रूपए सालाना है। वहीं बात करे शांतनु नायडू की नेट वर्थ की तो बता दें कि उनके नेट वर्थ करीब 5 से 6 करोड़ रूपए है।
  • बैचलर्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद शांतनु नायडू ने साल मई 2009 से मई 2010 तक TATA Technologies में इंटर्न के रूप में काम किया। साल 2014 में इंजीनियर बनने के बाद शांतनु नायडू ने टाटा ट्रस्ट के साथ काम करना शुरू किया।
  • शांतनु नायडू अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी है, जो टाटा ग्रुप के साथ काम कर रहे हैं।
  • शांतनु एक गजब के डॉग लवर हैं।

FAQs

शांतनु नायडू कौन हैं?

शांतनु नायडू, एक प्रसिद्ध भारतीय व्यवसायी, इंजीनियर, जूनियर असिस्टेंट, डीजीएम, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, लेखक और इंटरप्रेन्योर हैं। नायडू टाटा ट्रस्ट के डेप्युटी जनरल मैनेजर के रूप में देश में काफी लोकप्रिय हैं। शांतनु नायडू ने मोटोपॉज, ऑन योर स्पार्क और गुडफैलो जैसे स्टार्टअप को भी शुरू किया है। कुत्तों के प्रति अथाह प्रेम ने ही उन्हें मोटोपॉज की स्थापना के लिए प्रेरित किया।

शांतनु का जन्म कब हुआ?

शांतनु नायडू का जन्म साल 1993 में महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। शांतनु नायडू हिन्दू परिवार से संबंध रखते है। शांतनु नायडू के परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

मोटोपॉज के फाउंडर कौन हैं?

मोटोपॉज के फाउंडर शांतनु नायडू हैं, जो रतन टाटा के जूनियर असिस्टेंट भी हैं।

मोटोपॉज की स्थापना कैसे हुई?

जब वह घर लौट रहे थे तो एक रात उन्होंने देखा कि सड़क के बीच में एक मरा हुआ कुत्ता पड़ा हुआ था। शांतनु नायडू कुत्तों से बहुत प्यार करते है। उस दिन उन्हें अहसास हुआ कि, अंधेरे में गाड़ियां कुत्तों को नहीं देख पाती, जिस वजह से ये दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में उन्हें आईडिया आया कि क्यों ना कुत्तों के लिए रिफलेक्टर कॉलर बनाया जाए, जिससे अँधेरे में भी लोग दूर से उन्हें देख सके। इसके लिए उन्होंने अपने दोस्तों की मदद ली और एक डॉग कॉलर तैयार किया और में मोटोपॉज की स्थापना हुई।

शांतनु नायडू की उम्र कितनी है?

शांतनु नायडू की उम्र 28 वर्ष है।

इतनी कम उम्र में, शांतनु के पास ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो दुनिया में कुछ अच्छा कार्य करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जिसमें जानवरों तथा बुजुर्गों के साथ-साथ युवा उद्यमियों की मदद पर विशेष ज़ोर दिया जाता है। एक इंजीनियर और एक बिजनेस ग्रेजुएट शांतनु ने दिखाया है कि कैसे शिक्षा हमारी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। ऐसी ही मोटिवेशनल और सक्सेस स्टोरी पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बनें रहें।

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