ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली: भारतीय छात्रों के लिए आवश्यक जानकारी और अवलोकन

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ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली

क्या आपका भी मन है ऑस्ट्रेलिया में जाकर पढ़ाई करने का? यदि हां तो वहां जाने से पहले आपको वहां की शिक्षा प्रणाली को पूरा समझना होगा। आपको बता दें कि वहां की पूरी पढ़ाई एक खास सिस्टम पर आधारित है, जिसे ऑस्ट्रेलियन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (AQF) कहा जाता है। इसे आप एक तरह का ‘रूल बुक’ मान सकते हैं, जो स्कूल से लेकर बड़ी यूनिवर्सिटी तक के हर कोर्स के लिए एक जैसा ही स्टैंडर्ड तय करती है। इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि आप जो पढ़ाई कर रहे हैं उसकी वैल्यू क्या है और आगे चलकर वह आपके करियर में कितनी काम आएगी। इस लेख में हम ऑस्ट्रेलिया की इसी शिक्षा प्रणाली को अधिक विस्तार से जानेंगे।

ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली क्या है? 

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई का सिस्टम कुछ इस तरह बनाया गया है कि यहां हर लेवल, छात्र को उसके करियर के अगले कदम के लिए तैयार करता है। यहां आप अपनी पसंद, बजट और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग फील्ड्स चुन सकते हैं। इस पूरे सिस्टम को ऑस्ट्रेलियन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क यानी AQF कहा जाता है। यह एक नेशनल लेवल का स्ट्रक्चर है जो स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक की हर डिग्री का स्टैंडर्ड तय करता है।

ऑस्ट्रेलिया की उच्च शिक्षा को दो मुख्य भागों में बांटा गया है, जिसमें हायर एजुकेशन और वोकेशनल एजुकेशन शामिल हैं। यूनिवर्सिटी में बैचलर, मास्टर और पीएचडी जैसी डिग्रियां दी जाती हैं, जबकि TAFE जैसे संस्थानों में प्रैक्टिकल स्किल्स और नौकरी के लिए जरूरी ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। यहां ज्यादातर कोर्सेज साल में दो बार, फरवरी और जुलाई में शुरू होते हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सुरक्षा के लिए यहां ESOS एक्ट जैसा सख्त कानून भी है, जो यह पुष्टि करता है कि छात्रों को सही शिक्षा और सुविधाएं मिलें।

ऑस्ट्रलिया की शिक्षा प्रणाली का स्ट्रक्चर

यहां की शिक्षा प्रणाली को आप इन 5 मुख्य बिंदुओं में समझ सकते हैं:

1. स्कूल की शिक्षा 

ऑस्ट्रेलिया में स्कूल की पढ़ाई कुल 13 साल की होती है। बच्चा 5 साल की उम्र से स्कूल जाना शुरू करता है और 18 साल तक अपनी पढ़ाई पूरी करता है। यहाँ ‘इयर 12’ यानी 12वीं सबसे अहम है क्योंकि इसके बाद मिलने वाली ATAR रैंक ही तय करती है कि आपको कौन सी बड़ी यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलेगा। यहां पढ़ाई का साल जनवरी के अंत या फरवरी में शुरू होता है।

2. इंग्लिश भाषा के कोर्स

अगर किसी विदेशी छात्र की इंग्लिश थोड़ी कमजोर है, तो ऑस्ट्रेलिया उनके लिए खास इंग्लिश कोर्स चलाता है जिसे ELICOS कहते हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से 5 हफ्तों से लेकर एक साल तक का कोर्स कर सकते हैं ताकि आप यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के लिए तैयार हो सकें।

3. VET और TAFE कोर्सेज

यह वॉकेशनल कोर्स ऑस्ट्रेलिया के सिस्टम की मुख्य कड़ियों में से एक है। अगर आप लंबी डिग्री के बजाय सीधा कोई प्रोफेशनल काम सीखना चाहते हैं जैसे शेफ बनना, ग्राफिक डिजाइनिंग या मैकेनिक बनना, तो आप VET या TAFE चुन सकते हैं। यहां पढ़ाई प्रैक्टिकल और जॉब ओरिएंटेड होती है। साथ ही साथ इसे ‘पाथवे’ की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी कि यहां से डिप्लोमा करके आप सीधा बैचलर डिग्री के दूसरे साल में प्रवेश ले सकते हैं। 

4. हायर एजुकेशन 

यहां की यूनिवर्सिटीज़ में ग्रेजुएशन 3 साल की होती है। हालांकि कुछ कोर्स जैसे इंजीनियरिंग और MBBS थोड़े लंबे हो सकते हैं। इसके साथ ही मास्टर्स डिग्री की बात करें तो यह 1 से 2 साल की होती है। इसमें आप क्लास में बैठकर पढ़ भी सकते हैं या फिर सिर्फ रिसर्च कर सकते हैं। इतना ही नहीं आपको यहां साल में दो बार (मार्च और जुलाई) में एडमिशन के मौके मिलते हैं।

5. पीएचडी और रिसर्च 

यह पढ़ाई का सबसे बड़ा और आखिरी लेवल होता है। यहां आपको रोज़ कॉलेज जाकर क्लास अटेंड नहीं करनी पड़ती और न ही कोई एग्ज़ाम देना होता है। इसके बजाय, आपको एक एक्सपर्ट  मिलता है, जिसकी देखरेख में आप यहां 3 से 4 साल तक किसी एक विषय पर अपनी खोज या रिसर्च कर पाते हैं। ऑस्ट्रेलिया से पीएचडी करने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसे पूरा करने के बाद आपको वहां 4 साल का वर्क वीज़ा मिल जाता है, जिससे आप वहां रहकर नौकरी कर सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के बेनिफिट्स

ऑस्ट्रेलिया केवल खूबसूरत देश ही नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के सेक्टर में भी सिस्टेमैटिक और प्रैक्टिकल दृष्टिकोण रखता है। यहां पढ़ाई करने से छात्रों को कई ऐसे अवसर मिलते हैं जो उनके करियर और व्यक्तिगत विकास में मदद कर सकते हैं।

वैश्विक मान्यता प्राप्त डिग्री

ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त डिग्री विश्वभर में मान्यता प्राप्त है। AQF यह सुनिश्चित करता है कि आपके कोर्स और डिग्री की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझी जाए। इससे चाहे आप भारत लौटें या किसी अन्य देश में काम करें, आपकी हर डिग्री को मान्यता मिलेगी।  

इंटर्नशिप और वर्क एक्सपीरियंस 

ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज के इंडस्ट्री से बेहतर लिंक होते हैं, जिससे छात्रों को कोर्स के दौरान इंटर्नशिप और वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलता है। इन लिंक के कारण छात्रों को आसानी से अनुभव और व्यावहारिक समझ हासिल होती है।

बहुसांस्कृतिक अनुभव और नेटवर्किंग

ऑस्ट्रेलिया में छात्रों की पृष्ठभूमि और देश अलग-अलग होते हैं। यहां पढ़ाई करते समय आप विभिन्न देशों के लोगों के साथ नेटवर्क बना पाते हैं और अलग-अलग नज़रिये को सीखते हैं। यह अनुभव आपकी सोच को और अधिक व्यापक बनाता है और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संपर्क बनाने में मदद करता है।

स्टूडेंट वीज़ा और पार्ट‑टाइम वर्क

ऑस्ट्रेलिया का एजुकेशन सिस्टम अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के साथ सप्ताह में कुछ निर्धारित घंटे काम करने की अनुमति भी देता है। इससे छात्रों को फाइनेंशियल मदद मिलती है और वहां के वर्क कल्चर को समझने का अवसर भी मिलता है।

ऑस्ट्रलिया की शिक्षा प्रणाली किन छात्रों के लिए उपयुक्त है?

ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली अपने नवाचार दृष्टिकोण के लिए जानी जाती है। यहां का ‘ऑस्ट्रेलियाई योग्यता फ्रेमवर्क’ (AQF) सिस्टम छात्रों को किताबी ज्ञान से ज्यादा करियर और स्किल्स पर फोकस करने पर जोर देता है। नीचे आप विस्तार से यह समझ सकेंगे कि यह शिक्षा प्रणाली किन छात्रों के लिए सही है और किनके लिए मुश्किल है:-

यह प्रणाली उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो:

  • जो सिर्फ थ्योरी रटने के बजाय ‘करके सीखने’ और इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स पर काम करना पसंद करते हैं।
  • जो पढ़ाई के साथ-साथ काम करके अपना खर्च निकालना चाहते हैं और कार्य-अनुभव लेना चाहते हैं।
  • जो मास्टर्स के लिए 1.5 से 2 साल का समय लेना चाहते हैं ताकि विषय को बेहतर ढंग से समझ सकें।
  • जो पढ़ाई के बाद ऑस्ट्रेलिया में रहकर काम करना चाहते हैं।
  • जो खुद से रिसर्च करने, लाइब्रेरी में समय बिताने और नए विचारों पर चर्चा करने में सक्षम हैं।

यह प्रणाली उन छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो:

  • जो छात्र 1 साल के भीतर अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी करके वापस देश लौटना चाहते हैं।
  • जो छात्र केवल परीक्षा के समय पढ़कर पास होने की आदत रखते हैं और प्रोजेक्ट वर्क नहीं करना चाहते। 
  • ऑस्ट्रेलिया में रहने और पढ़ाई का खर्च काफी अधिक है, जो बिना वित्तीय योजना के भारी पड़ सकता है।
  • जो छात्र हर छोटे काम के लिए किसी पर निर्भर रहते हैं और खुद से पहल नहीं कर पाते।
  • यहां क्लास में बोलना और चर्चा करना जरूरी होता है, इसलिए शांत स्वभाव के छात्रों को शुरुआत में दिक्कत आती है।

ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली में स्कॉलरशिप और फंडिंग विकल्प

यहां ऑस्ट्रेलिया में मिलने वाली प्रमुख स्कॉलरशिप और फंडिंग के विकल्पों के बारे में बताया गया है:-

स्कॉलरशिप और फंडिंग विकल्पविवरणपात्रता और आवेदन प्रक्रिया
ऑस्ट्रेलिया अवार्ड्स यह यहां की सबसे बड़ी सरकारी स्कॉलरशिप है। इसमें आपकी पूरी फीस, रहने का खर्चा और यहां तक कि हवाई टिकट का पैसा भी सरकार ही देती है।इसके लिए पढ़ाई में अच्छे रिकॉर्ड के साथ लीडरशिप गुण होने चाहिए। इसकी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
डेस्टिनेशन ऑस्ट्रेलिया यह उन छात्रों के लिए है जो बड़े शहरों की भीड़भाड़ से दूर छोटे इलाकों या क्षेत्रीय कैंपस में पढ़ना चाहते हैं। इसमें सालाना करीब 15,000 डॉलर तक की मदद मिलती है।क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी में फुल-टाइम एडमिशन लेना जरूरी है। इसके लिए आपको सीधे उस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर अप्लाई करना होगा।
यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप सिडनी और मेलबर्न जैसी लगभग हर बड़ी यूनिवर्सिटी अपने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को फीस में 10% से लेकर 50% तक की छूट देती है।यह मुख्य रूप से मेरिट पर निर्भर करती है। अपनी पसंद की यूनिवर्सिटी चुनकर उसके ‘स्कॉलरशिप’ पेज पर जाकर आवेदन करें।
रिसर्च ट्रेनिंग प्रोग्राम (RTP)यह खास तौर पर उन छात्रों के लिए है जो रिसर्च या पीएचडी (PhD) करना चाहते हैं। इसमें ट्यूशन फीस के साथ-साथ रहने के लिए भी स्टाइपेंड मिलता है।इसके लिए आपका पिछला रिसर्च रिकॉर्ड बहुत मजबूत होना चाहिए। इसके लिए आपको सीधे उस यूनिवर्सिटी में आवेदन करना होता है जहाँ से आप रिसर्च करना चाहते हैं।

FAQs 

क्या छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान काम कर सकते हैं?

हां, अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के दौरान हर दो हफ्ते में सीमित घंटे काम करने की अनुमति होती है। छुट्टियों के दौरान छात्र पूर्णकालिक काम भी कर सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की फीस आम तौर पर कितनी होती है?

पढ़ाई की लागत कोर्स और शहर पर निर्भर करती है। आम तौर पर अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज मध्यम से उच्च शुल्क वाले होते हैं, जबकि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे पेशेवर कोर्सेज अपेक्षाकृत महंगे हो सकते हैं।

ग्रेजुएशन के बाद वीज़ा विकल्प क्या हैं?

पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र अस्थायी स्नातक वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसकी अवधि कोर्स के स्तर और प्रकार पर निर्भर करती है। यह वीज़ा छात्रों को सीमित समय के लिए ऑस्ट्रेलिया में रहने और काम करने का अवसर देता है।

आशा है कि आप इस लेख के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली के बारे में जान पाए होंगे। ऐसे ही स्टडी अब्रॉड से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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