जानिए हिन्दी व्याकरण के रस कौनसे हैं?

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Ras Hindi Grammar

रस को साहित्य की आत्मा माना जाता है क्योंकि रस का साहित्य में बहुत बड़ा योगदान रहा है। रस क्या है, रस की परिभाषा, रस के अंग, रस के भेद कितने होते हैं इन सभी प्रश्नों के बारे में संपूर्ण जानकारी इस ब्लॉग में दी गई है। इससे आपको ras Hindi grammar class 10 में आसानी से समझने और अधिक अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

Ras की परिभाषा

रस का शाब्दिक अर्थ है निचोड़। जब भी हम किसी कविता, नाटक, फिल्म के बारे में बोल रहे या सुन रहे हो उससे जो आनंद मिलता है उसे “रस” कहते है। Ras Hindi grammar class 10 का सिद्धांत बहुत पुराना है रस को काव्य की आत्मा माना जाता है, जैसे बिना आत्मा के शरीर का कोई अस्तित्व नहीं है उसकी तरह काव्य भी रस के बिना निर्जीव है।
जैसे-
“उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा।
मानों हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।”
उपरोक्त पंक्तियों के रस है।”

भरतमुनि द्वारा रस की परिभाषा 

सबसे पहले भरतमुनि ने “नाट्यशास्त्र ” में काव्य रस के बारे में उल्लेख किया था।विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः अर्थात् विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। इस प्रकार काव्य पढ़ने, सुनने या अभिनय देखने पर विभाव आदि के संयोग से उत्पन्न होने वाला आनन्द ही ‘रस’ है। उन्होंने अपने ‘नाट्यशास्त्र’ में  रस के आठ प्रकारों का वर्णन किया है।

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रस के अंग

रस के चार अंग होते है जो इस प्रकार हैं:

1. स्थायी भाव

हृदय में मूल्य रूप से उत्पन्न हुए भाव दीर्घकाल तक रहने वाले भाव को स्थायी भाव कहते है। इन भावों को नौ स्थायी भावों में विभाजित किया है  पर वत्सल भाव को शामिल करने पर इनकी संख्या दस मानी जाती है। ये स्थायीभाव रस इस प्रकार हैं –

Ras Hindi Grammar Class 10

2. विभाव 

स्थायी भाव जिसके कारण जागृत होते है उसे विभाव कहते है। विभाव में दो प्रकार होते हैं।

(i) आलम्बन विभाव
आलम्बन का अर्थ होता है “सहारा” जिस चीज़ का सहारा लेकर भाव जगे उसे आलम्बन विभाव कहते है। आलम्बन विभाव  दो प्रकार में विभाजित किया है।

1. आश्रयालंबन:- जिसके मन में किसी विशेष भाव जगे उसे आश्रयालंबन कहते है।
2. विषयालंबन:- जिसके प्रति या जिसके कारण मन में भाव जगे वह विषयालंबन कहलाता है|उदाहरण : यदि राम के मन में सीता के प्रति प्रेम का भाव जगता है तो राम आश्रय होंगे और सीता विषय।

(ii) उद्दीपन विभाव
वो परिस्थिति जिसे देखकर स्थायी भाव जागृत होते है वह उद्दीपन विभाव कहलाता है। अभिनेत्री को देखर अभिनेता के मन में आकर्षण(रति भाव ) का भाव जागृत होता है। अभिनेत्री की शारीरिक चेष्टाएँ और पहाड़ो  का सुन्दर दृश्य अभिनेता के मन में आकर्षण का भाव उत्पन्न करता है और सुहावन मौसम उसे तीव्रता लाता है। इसमें अभिनेत्री की शारीरिक चेष्टाएँ और पहाड़ो का सुहावना मौसम को उद्दीपन विभाव कहा जाएगा।

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3.अनुभव 

मन के भाव व्यक्त करने के लिए शरीर के विकार उत्पन्न होता है उसे अनुभव कहते है। इसकी संख्या 8 होती है। जैसे-चुटकुला सुनकर हँस पड़ना, तालियाँ बजाना आदि चेष्टाएँ अनुभाव हैं।

1) स्तंभ
(2) स्वेद
(3) रोमांच
(4) स्वर-भंग
(5) कम्प
(6) विवर्णता (रंगहीनता)
(7) अश्रु
(8) प्रलय (संज्ञाहीनता/निश्चेष्टता)

4. संचारी भाव

मन में विचरण करने वाले भावों को संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं, ये भाव पानी के बुलबुलों के सामान उठते और विलीन हो जाने वाले भाव होते हैं।

संचारी भावों की कुल संख्या 33 मानी गई है

(1) हर्ष
(2) विषाद
(3) त्रास (भय/व्यग्रता)
(4) लज्जा
(5) ग्लानि
(6) चिंता
(7) शंका
(8) असूया (दूसरे के उत्कर्ष के प्रति असहिष्णुता)
(9) अमर्ष (विरोधी का अपकार करने की अक्षमता से उत्पत्र दुःख)
(10) मोह
(11) गर्व
(12) उत्सुकता
(13) उग्रता
(14) चपलता
(15) दीनता
(16) जड़ता
(17) आवेग
(18) निर्वेद (अपने को कोसना या धिक्कारना)
(19) घृति (इच्छाओं की पूर्ति, चित्त की चंचलता का अभाव)
(20) मति
(21) बिबोध (चैतन्य लाभ)
(22) वितर्क
(23) श्रम
(24) आलस्य
(25) निद्रा
(26) स्वप्न
(27) स्मृति
(28) मद
(29) उन्माद
30) अवहित्था (हर्ष आदि भावों को छिपाना)
(31) अपस्मार (मूर्च्छा)
(32) व्याधि (रोग)
(33) मरण

Note (नोट) – रस के प्रवर्तक भरतमुनि नाटक में 8 रस इसमें शांत रस नहीं होता , काव्य में 9 जिन्हे नवरस कहते है इसमें शांत रस शामिल है अधिकतर साहित्यकार 11 मानते है वत्सल और भक्ति रस को हम श्रृंगार में शामिल करते है।

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रस के प्रकार

Ras Hindi Grammar Class 10
Source : Pinterest

Ras Hindi Grammar Class 10 में रस के 10 प्रकार दिए गए हैं:

1) श्रृंगार रस
(2) हास्य रस
(3) करूण रस
(4) रौद्र रस
(5) वीर रस
(6) भयानक रस
(7) बीभत्स रस
(8) अदभुत रस
(9) शान्त रस
(10) वत्सल रस

1. श्रृंगार रस

 जब आपके मन में प्रेम की भावना जगती है इसका वर्णन श्रृंगार रस है। श्रृंगार रस को रसराज या रसपति कहा गया है। श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति हैं। नायक और नायिका का प्रेम होकर श्रृंगार रस रूप मे परिणत होता हैं।
उदाहरण –
एक जंगल है तेरी आँखों में
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ
तू किसी रेल-सी गुज़रती है
मैं किसी पुल-सा थरथराता हूँ।

श्रृंगार के दो भेद होते हैं

संयोग श्रृंगार – जब प्रेमी और प्रेमिका के बीच परस्पर मिलन,  स्पर्श आदि तब संयोग श्रृंगार रस होता है।
उदाहरण –
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौंहनि हँसै, दैन कहै नहि जाय। (बिहारी)

वियोग श्रृंगार- जहां प्रेमी और प्रेमिका के बिछड़ने का वर्णन हो उसे वियोग श्रृंगार कहते है।
उदाहरण –
राम के रूप निहारति जानकी, कंगन के नग की परछाई।
याते सबै सुधि भूलि गई, कर टेकि रही पल टारत नाहीं।।”

2. वीर रस

वीरता का कोई चित्र  या मन में जोश भर देने वाली कोई काव्य रचना जिससे उत्साह भाव व्यक्त हो  और कुछ वीरता पूर्ण कृत्य करने का मन हो।
उदाहरण –
रस बताइए मैं सत्य कहता हूं सखे सुकुमार मत जानो
मुझे यमराज से भी युद्ध को प्रस्तुत सदा मानो मुझे||

3. हास्य रस

जब किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर असाधारण बात, वस्त्र  देखकर मन में हस भाव उत्पन्न  हो उसे हास्य रस कहते है।
उदाहरण –
काहू न लखा सो चरित विशेखा । जो स्वरूप नृप कन्या देखा ।
मरकट बदन भयंकर देही। देखत हृदय क्रोध भा तेही ॥
जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि तेहि न बिलोकी भूली ॥
पुनि-पुनि उकसहिं अरु अकुलाही। देखि दसा हर-गन मुसुकाही ॥

4. करुण रस

 इसमें किसी अपने से दूर चले जाने का जो दुख उत्पन्न होता उसे करुण रस कहते है। वियोग श्रृंगार में भी दुःख का भाव है लेकिन उसमें दूर जाने के बाद दुबारा मिलने की आशा रहती  है।
उदाहरण –
रही खरकती हाय शूल-सी, पीड़ा उर में दशरथ के।
ग्लानि, त्रास, वेदना – विमण्डित, शाप कथा वे कह न सके।

Source : Aasoka

5. रौद्र रस

जब किसी एक पक्ष या व्यक्ति किसी दूसरे पक्ष या दूसरे व्यक्ति का अपमान करने अथवा अपने गुरुजन  कि निन्दा से जो क्रोध उत्पन्न होता है उसे रौद्र रस कहते हैं। इसका स्थायी भाव क्रोध होता है।
उदाहरण –

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुवादी बालक वध जोगू॥
बाल विलोकि बहुत मैं बाँचा। अब येहु मरनहार भा साँचा॥
खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही॥
उत्तर देत छोडौं बिनु मारे। केवल कौशिक सील तुम्हारे ॥
न त येहि काटि कुठार कठोरे। गुरहि उरिन होतेउँ भ्रम थोरे ॥

6. भयानक रस

जब किसी विनाशकारी कृत्य को देख कर आपके रोंगटे खड़े हो जाये और हृदय में बेचैनी से भय का स्थायी  भाव उत्पन्न होता है उसे भयानक रस कहते है।
उदाहरण –
अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल॥ 
कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार ॥ 

7.शान्त रस

जब इंसान को परम ज्ञान हासिल हो जाता है। जहाँ न दुख होता है, न द्वेष होता है। मन सांसारिक कार्यों से मुक्त हो जाता है मनुष्य वैराग्य प्राप्त कर लेता है शान्त रस कहा जाता है। इसका स्थायी भाव निर्वेद (उदासीनता) होता है।

शान्त रस साहित्य में प्रसिद्ध नौ रसों में अन्तिम रस माना जाता है – “शान्तोऽपि नवमो रस:।” इसका कारण यह है कि भरतमुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ में, जो रस विवेचन का आदि स्रोत है, नाट्य रसों के रूप में केवल आठ रसों का ही वर्णन मिलता है।
उदाहरण –
जब मै था तब हरि नाहिं अब हरि है मै नाहिं
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं।

8.वीभत्स रस

जब  घृणित चीजों या घृणित व्यक्ति को देखकर या उनके बारे में विचार या उनके बारे  में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा वीभत्स रस की पुष्टि करती है। तुलसीदास ने रामचरित मानस के लंकाकांड में युद्ध  में कई जगह इस रस का प्रयोग किया है। 
उदाहरण- मेघनाथ माया के प्रयोग से वानर सेना को डराने के लिए कई वीभत्स कृत्य करने लगता है, जिसका वर्णन करते हुए तुलसीदास जी लिखते है।
‘विष्टा पूय रुधिर कच हाडा
बरषइ कबहुं उपल बहु छाडा’

9. वत्सल रस

माता पिता  का बच्चे के प्रति प्रेम , बच्चे का माता पिता के प्रति प्रेम , बड़े भाइयों का छोटे भाइयों के प्रति प्रेम,  अध्यापक का शिष्य के प्रति प्रेम , शिष्य अध्यापक के प्रति प्रेम। यही स्नेह का भाव वात्सल्य रस कहलाता है।
उदाहरण –
बाल दसा सुख निरखि जसोदा, पुनि पुनि नन्द बुलवाति
अंचरा-तर लै ढ़ाकी सूर, प्रभु कौ दूध पियावति।

10. भक्ति रस

जिसमें ईश्वर के प्रति अनुराग का भाव उत्पन्न हो उसे भक्ति रस कहते है।
उदाहरण –
अँसुवन जल सिंची-सिंची प्रेम-बेलि बोई
मीरा की लगन लागी, होनी हो सो होई

उम्मीद है आपको  रस Hindi Grammar Class 10 अच्छे समझ आ गए होंगे और अच्छे marks लाने में आपकी help करेंगे | तो आएं अब करते है एक Quick Revision.

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महत्वपूर्ण MCQ

1. ”उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा।
मानों हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।”
उपरोक्त पंक्तियों के रस है-
(A) वीर
(B) रौद्र
(C) अद्भुत
(D) करुण

उत्तर- (B)

2. ‘एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय।
बिकल बटोही बीच ही, परयों मूरछा खाय।।’
उपरोक्त पंक्तियों में रस है
(A) शान्त
(B) रौद्र
(C) भयानक
(D) अद्भुत

उत्तर- (C)

3. ”सोक विकल एब रोबहिं रानी।
रूप सीलू बल तेज बखानी।।
करहिं बिलाप अनेक प्रकारा।
परहिं भूमितल बारहिं बारा।|
उपरोक्त पंक्तियों में रस है
(A) शान्त
(B) वियोग श्रृंगार
(C) करुण
(D) वात्सल्य

उत्तर- (B)

4. वीर रस का स्थायी भाव क्या होता हैं?
(A) रति
(B) उत्साह
(C) हास्य
(D) क्रोध

उत्तर- (B)

5. किस रस को रसराज कहा जाता हैं?
(A) हास्य
(B) श्रृंगार
(C) वीर
(D) शान्त

उत्तर- (B)

6.वीभत्स रस का स्थायी भाव क्या है ?
(A)  क्रोध 
(B)  भय  
(C) विस्मय 
(D)जुगुप्सा

उत्तर- (D) 

7. तुलसी और सूर की रचनाओं के आधार पर रस कितने प्रकार होते हैं   ?
 (A)  11
(B) 19  
(C) 10 
(D)  12

उत्तर-  (A) 

8. संचारी भावो की संख्या कितनी हैं  ?
 (A)  9
(B) 33  
(C)100  
(D) 10

उत्तर- (B)    

9.वितर्क निम्न में से क्या है  ?
 (A) अनुभाव
(B) संचारी भाव   
(C) उद्दीपन विभाव  
(D) आंलबन विभाव 

उत्तर- (B) 

10. स्वेद निम्न में से क्या है   ?
 (A) अनुभाव 
(B) संचारी भाव   
(C) उद्दीपन विभाव  
(D)  आंलबन विभाव

उत्तर- (A) अनुभाव                                 

11.  मरण निम्न में से क्या है  ?
 (A) आलंबन विभाव
(B) उद्दीपन विभाव 
(C)  अनुभाव 
(D) संचारी भाव 

उत्तर-(D) संचारी भाव 

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Source – SuccessCDs Education

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